जानिए क्या होता है कोर्ट कमिश्नर‚ और कितनी होती उसकी पॉवर

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Gyanvapi Mosque

What is court commissioner: उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कोर्ट कमिश्नर नाम का एक नया शब्द आपने जरूर सुना होगा। लेकिन शायद ही आप यह जानते होंगे कि कोर्ट कमिश्नर क्या होता है और उसकी कितनी पावर होती है। इस वीडियो में आज हम आपको इसी बारे में पूरी जानकारी देंगे। लेकिन इससे पहले अगर अभी तक आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नही किया है तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें ताकि आगे भी आपको इस तरह की रोचक जानकारियां मिलती रहे। 

पहले यह जान लेते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद मामला क्या है।  दरअसल ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर दो विवाद जुड़े हुए हैं। पहला विवाद 1991 में सामने आया था। क्योंकि साल 1991 में कोर्ट में एक केस दर्ज किया गया था‚  जिसमें यह दावा किया गया था कि बनारस में जिस जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनी हुई है‚ वह काशी विश्वनाथ मंदिर की जमीन है।  इस जगह पर छोटे- छोटे मंदिरों को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था। यह मामला तब से ही कोर्ट में विचाराधीन है। 

इस मामले में ताजा विवाद 18  अगस्त 2021 में तब सामने आया जब मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी देवी की मूर्ति पूजा को लेकर दिल्ली की रहने वाली 5 महिलाओं ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की। इन महिलाओं ने श्रृंगार गौरी देवी की रोजाना पूजा और दर्शन की मांग की थी।  विवाद की जड़ यह है कि यह मूर्तियां ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित है।  इस मामले में वाराणसी कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए मस्जिद परिसर का सरवे करने का आदेश दिया था। 

What is the history of Gyanvapi Mosque Case

तो आइये अब जानते है कि आखिर कोर्ट कमिश्नर क्या होता है। आपको बता दें कि सिविल कोर्ट में दायर मामलों के निस्तारण के लिए अदालत को अलग-अलग पहलुओं को ध्यान में रखना होता है। मगर कुछ ऐसे विषय होते है जिन्हें दस्तावेजों से समझ पाना  मुश्किल होता है। मतलब यह है कि प्रोपर्टी विवाद में कोर्ट के सामने जो सबूत पेश किए जाते हैं वह केस को समझने के लिए प्रर्याप्त नही होते। 

ऐसे मामलों में कोर्ट विवाद की भौतिक स्थिति को समझने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करता है‚ जो अपनी टीम के साथ मौके पर जाकर विवाद की स्थिति को समझने की कोशिश करता है।  और फिर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करता है। इस अधिकारी को ही कोर्ट-कमिश्नर कहा जाता है। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा- 75 के अनुसार अदालत को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने का अधिकार है। 

पावर की बात करे तो कोर्ट-कमिश्नर की रिपोर्ट बहुत अहम मानी जाती है। जो विवादित केस के निस्तारण में अहम भूमिका निभाती है। कोर्ट-कमिश्नर के कार्य में कोई भी पक्ष रूकावट पैदा नही कर सकता है। अगर कोई पक्ष ऐसा करता है तो उसे कोर्ट के आदेश की आवेहलना माना जाता है। जिसके चलते उसके खिलाफ कठौर कार्यवाही की जा सकती है।  

 आशा करते हैं कि वीडियो में दी गई जानकारी से आप यह समझ गए होंगे कि कोर्ट कमिश्नर क्या होता है। वीडियो पसंद आयी हो तो चैनल को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर करें।