मेरठ में पढ़ रहे अफगानी छात्रों का छलका दर्द, मां ने कहा मत छोड़ना हिंदुस्तान

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मेरठ में पढ़ रहे अफगानी छात्रों का छलका दर्द, मां ने कहा मत छोड़ना हिंदुस्तान

Manoj kumar

मेरठ में पढ़ रहे अफगानी छात्रों का छलका दर्द, मां ने कहा मत छोड़ना हिंदुस्तान
अफगानी छात्र

अफगानिस्तान में तालिबानियों के कब्जे के बाद वहां के लोग काफी डरे हुए हैं। वहां के भयभीत लोग अपना देश छोड़ना चाहते हैं।दूसरे देशों में हैं वे अपने वतन लौटना नहीं चाहते लेकिन अपने परिजनों के लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं। सभी अपने-अपने परिजनों से फोन पर बात कर रहे हैं

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मेरठ में अफगान के चार छात्र स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर से एमएससी कर रहे है। ये चारों छात्र अफगानिस्तान में अपने परिजनों को लेकर चिंतित हैं। इन छात्रों की आंखों में अपने परिवारों को लेकर चिंता साफ देखी जा सकती है। ये लगातार फोन द्वारा अपने परिजनों के संपर्क में हैं। चारों छात्रों ने टूटी फूटी हिंदी में अपना दर्द बयां किया।

(1) तालिबान के कब्जे वाले कुंदुज शहर निवासी टीवी बाजोरी का कहना है कि परिवार ने उसको हिंदुस्तान में ही रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि तालिबानियों ने उनके शहर के बाजार जला दिए हैं। तालिबानियों का अत्याचार बढ़ रहा है। वह घरों में अंदर घुस रहे हैं और प्रत्येक घर से आठ-दस लोगों को तीनों समय का खाना बनाकर देने का दबाव बना रहे हैं। रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। खुद परिवार के लोग भूखे रह रहे हैं। उसका जुलेखा से निकाह होना था। उसने भी कहा है कि हम घर में कैद हैं, अभी यहाँ मत आना। बस यह राहत है कि अभी तक परिवार के सदस्य सुरक्षित हैं।

(2) बल्ख शहर के नजीब उल्ला खां का कहना है कि घर पर सब बेबस हैं। अमेरिका के हटते ही बल्ख प्रांत पर तालिबानियों ने कब्जा कर बर्बरता शुरू कर दी। हर व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। फोन करते हैं तो तालिबानियों की बर्बरता के किस्से परिवार के लोग बताते हैं। इंसानियत शर्मसार हो रही है। मन करता है कि परिवार के बीच पहुंच जाएं, लेकिन बेहद लाचार हैं। परिजन कह रहे हैं कि यहां का माहौल बहुत खराब है। हम बचेंगे या नहीं बचेंगे पता नहीं। बाजार बंद है, चारों तरफ तालिबानियों का कब्जा हो गया है।

समनगान शहर के खेयरुद्दीन कहते हैं कि वह हिंदुस्तान में ही सुरक्षित हैं। मीडिया और परिवारजनों से और मीडिया के जरिए तालिबानियों की क्रूरता के बातें सुन रहे हैं। पूरा अफगान देश बेहद मजबूर हो गया है। हमारे भविष्य का भी कुछ पता नहीं है। पूरा देश सहमा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अफगानिस्तान को मदद नही मिल रही है। वह परिवार से मोबाइल पर बात कर रहे हैं, जिस पर परिवार ने घर नहीं लौटने की बात कही है। पूरा अफगानिस्तान डरा और सहमा हुआ है।

कुंदुज के ही छात्र एत्तेहाद का कहना है कि पूरे अफगानिस्तान के लिए वजूद का संकट खड़ा हो गया है। किसी की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर तरफ आंसू, बेबसी और लाचारी है। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी की सबसे मुश्किल घड़ी में वह परिवार के साथ नहीं होंगे। परिवार सहमा हुआ है। महिलाएं और बच्चे भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। वह सोचकर ही डरे हुए हैं।

छात्रों को नहीं होने देंगे परेशानी

अफगानिस्तान के चार छात्र यहां पर पढ़ाई कर रहे हैं। आईसीएआर के द्वारा उनका एडमिशन किया गया था। यहां पर छात्रों को कोई परेशानी नहीं है, उनकी अपने परिजनों से भी बात हो रही है। विवि स्तर से उनको पूरी सुविधा दी जाएगी। डिग्री पूरी होने के बाद चारो छात्र जो भी वह निर्णय लेंगे विवि उनके साथ है।

डॉ. आरके मित्तल, कुलपति कृषि विवि