यूपी: राखी के बदले कहीं जायदाद ना मांग लें बहन, इसलिए यहां 300 सालों से नही मनाते रक्षाबंधन

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यूपी: राखी के बदले कहीं जायदाद ना मांग लें बहन, इसलिए यहां 300 सालों से नही मनाते रक्षाबंधन

Manoj kumar

यूपी: राखी के बदले कहीं जायदाद ना मांग लें बहन, इसलिए यहां 300 सालों से नही मनाते रक्षाबंधन
रक्षा बंधन: डेमो चित्र

कल 22 अगस्त को रक्षा बंधन का पर्व है।देश भर में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं लेकिन उत्तरप्रदेश के संभल जिले के बैनीपुर चक गांव में पिछले 300 सालों से कोई भी भाई अपनी कलाई पर राखी नहीं बंधवाते। जिसका कारण भी बड़ा अजीब है दरअसल,भाइयों को डर रहता है कि कहीं राखी के एवज में मिलने वाले उपहार में बहनें उनसे उनकी जायदाद न मांग लें। ये बात थोड़ी अजीब है लेकिन गांव वाले इसे बड़ी संख्ती से मानते हैं। जिस कारण पिछले 300 सालों से किसी ने भी अपनी कलाई पर राखी नही बंधवाई।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आदमपुर मार्ग पर बैनीपुर चक गांव श्रीवंशगोपाल तीर्थ के कारण प्रसिद्ध है। लेकिन इस गांव में पिछले 300 वर्षों से राखी का त्यौहार नहीं मनाया जाता। इसके पीछे की मान्यता के बारे में गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज अलीगढ़ जिले में अतरौली के सेमरई गांव के जमींदार थे। इस जमींदार परिवार में कोई बेटी नहीं थी। जिस कारण परिवार के बेटे गांव की ही दूसरी जाति के परिवार की बेटियों से राखी बंधवाने लगे।

उन्होंने बताया कि एक वर्ष रखी बांधने के बाद एक बेटी ने राखी बांधकर उपहार में उनके परिवार की जमींदारी मांग ली। परिवार ने भी राखी का मान रखा और गांव की जमींदारी दूसरी जाति की बेटी को सौंपकर गांव छोड़कर संभल के बैनीपुर चक में आकर बस गए। तभी से यादवों के मेहर व बकिया गोत्र के लोग राखी नहीं मनाते। हालांकि अब बहनें चाहती हैं कि वह भाइयों की कलाई पर राखी बांधें लेकिन दशकों की परंपरा का निर्वहन करते हुए वे भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधतीं।