भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर किसी अभिनेता को 'ही-मैन' की उपाधि मिली, तो वह सिर्फ धर्मेंद्र सिंह देओल ही थे। उनका आकर्षक व्यक्तित्व, बेजोड़ सुंदरता और एक खास तरह का देसी, सहज अंदाज़ उन्हें भीड़ से अलग करता था। लेकिन जो चीज़ उन्हें एक लीजेंड बनाती थी, वह थी उनकी संवाद अदायगी (Dialogue Delivery)। धर्मेंद्र के डायलॉग में जोश, रोमांस, मासूमियत और देसी तेवर कूट-कूटकर भरे होते थे। उनकी आवाज़ में एक ऐसी गरज थी, जो रोमांस के दृश्यों में शहद घोल देती थी और एक्शन दृश्यों में आग लगा देती थी।
धर्मेंद्र के डायलॉग्स केवल संवाद नहीं थे; वे पीढ़ियों की जुबान बन गए, पोस्टर पर छपे और दशकों तक याद किए गए। 70 और 80 के दशक में, उनके डायलॉग्स नौजवानों की जुबां पर ऐसे रच-बस गए थे, जैसे वे उनके अपने जीवन का हिस्सा हों।
चलिए, आज हम भारतीय सिनेमा के इस महान कलाकार को उनके 10 सबसे मशहूर डायलॉग्स और उनकी संवाद अदायगी की शैली के विश्लेषण के साथ याद करते हैं।
धर्मेंद्र का डायलॉग बोलने का अंदाज़ बाकी अभिनेताओं से अलग था। वह एक ऐसे अभिनेता थे जो अपने संवादों में 'पंजाबियत' का एक खास पुट लाते थे। उनकी आवाज़ गहरी, कर्कश (Gravelly) और बेहद मर्दाना थी।
देसीपन और सहजता: उनके संवादों में कोई बनावटीपन नहीं होता था। वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए थे, और उनकी भाषा में वही सहजता और ज़मीन से जुड़ाव दिखाई देता था, जिसने आम दर्शकों को उनसे जोड़ा।
भावनात्मक गहराई: चाहे वह गुस्से में हों, प्यार में हों या दुःख में, उनकी आवाज़ में किरदार की भावनाओं की सच्ची गहराई झलकती थी। 'सत्यकाम' (1969) में जब वे आदर्शों की बात करते थे, तो उनकी आवाज़ में ईमानदारी की गूँज होती थी।
रोमांस में मिठास: उनकी संवाद अदायगी का सबसे बड़ा कमाल यह था कि उनकी गहरी आवाज़ भी रोमांटिक दृश्यों में बेहद मिठास घोल देती थी।
धर्मेंद्र के करियर में ऐसे कई डायलॉग्स हैं जिन्होंने इतिहास रचा, लेकिन ये 10 डायलॉग्स उनकी 'ही-मैन' छवि को सबसे बेहतरीन तरीके से परिभाषित करते हैं:
(फिल्म: शोले, 1975)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग भारतीय सिनेमा के इतिहास में संभवतः सबसे प्रसिद्ध और उद्धृत डायलॉग्स में से एक है। 'शोले' के चरमोत्कर्ष (Climax) में, जब गब्बर सिंह (अमजद खान) बसंती (हेमा मालिनी) को ज़बरदस्ती नचाता है और वीरू (धर्मेंद्र) को बेबस बांधकर रखा गया है, तब वीरू गुस्से, असहायता और अपमान के चरम पर यह डायलॉग बोलता है।
विश्लेषण: यह डायलॉग केवल एक संवाद नहीं है; यह एक बहादुर व्यक्ति की असहायता का प्रतीक है। 'कुत्तों' (गब्बर के आदमियों) का इस्तेमाल करके वह गब्बर के गुंडों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करता है। उनकी गरजती आवाज़ और आँखों में भरा गुस्सा पर्दे पर आग लगा देता है। यह डायलॉग धर्मेंद्र के किरदार की बहादुरी और सम्मान की रक्षा के लिए उसके जुनून को दर्शाता है।
(फिल्म: शोले, 1975)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: 'शोले' का एक और अमर डायलॉग, जो भारतीय सिनेमा की 'एंग्री यंग मैन' वाली थीम को बल देता है। हालाँकि यह डायलॉग शायद 'बसंती' वाले डायलॉग से कम चर्चित हो, लेकिन जब भी पर्दे पर बदला या प्रतिशोध की भावना दिखानी होती थी, यह डायलॉग तुरंत याद आ जाता था।
विश्लेषण: 'कुत्ते' और 'कमीने' जैसे शब्दों का इस्तेमाल धर्मेंद्र के किरदार के देसी गुस्से को दर्शाता था, जो सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाता था। इस डायलॉग में प्रतिशोध की तीव्र भावना थी, जो 70 के दशक के नौजवानों के बीच ज़बरदस्त हिट हुई।
(फिल्म: धर्मवीर, 1977)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग 'शोले' के बाद आया और तुरंत ही ज़बरदस्त हिट हो गया। 'धर्मवीर' में धर्मेंद्र ने एक ऐसे वीर योद्धा का किरदार निभाया, जिसके लिए न्याय सबसे ऊपर था।
विश्लेषण: यहाँ यह डायलॉग प्रतिशोध की भावना को और भी ऊँचाई पर ले जाता है। यह डायलॉग धर्मेंद्र की एक्शन हीरो वाली छवि को सीमेंट करता है। इस डायलॉग को बोलने का उनका जोशीला अंदाज़—ऊँची आवाज़, मुट्ठी भींची हुई—सिनेमा हॉलों में तालियां और सीटियां बजवा देता था। यह उनकी ज़बरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस का प्रमाण है।
(फिल्म: कातिलों के कातिल, 1981)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग धर्मेंद्र की आत्म-शक्ति, आत्मविश्वास और अजेयता को दर्शाता है। यह डायलॉग उनके 'ही-मैन' टाइटल को चरितार्थ करता है।
विश्लेषण: यह एक ऐसा संवाद है जिसमें हीरो अपनी शक्ति का वर्णन किसी अतिरंजित तरीके से नहीं, बल्कि एक कवि की तरह करता है। 'शीशे से पत्थर को तोड़ना' एक मेटाफर है जो असाध्य को साधने की शक्ति को दर्शाता है। जब धर्मेंद्र इसे पूरी दहाड़ के साथ बोलते थे, तो दर्शकों में एक इलेक्ट्रिक ऊर्जा भर जाती थी।
(फिल्म: राजकुमार, 1996)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी रोमांटिक छवि से थोड़ा हटकर, उनकी दार्शनिक और गंभीर साइड को दर्शाता है। हालांकि यह फिल्म बाद के करियर की है, लेकिन डायलॉग में उनकी पुरानी वाली गंभीरता झलकती है।
विश्लेषण: यह डायलॉग एक गहरी नैतिक समझ को दर्शाता है। यह दिखाता है कि धर्मेंद्र केवल एक्शन स्टार नहीं थे, बल्कि वे गंभीर संवादों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकते थे। इस डायलॉग को बोलते समय उनके चेहरे पर गंभीरता और आवाज़ में सलाह का भाव होता था।
(फिल्म: लोफर, 1973)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग जीवन के प्रति उनके किरदार के निडर दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। 70 के दशक में, उनके किरदार अक्सर ऐसे होते थे जो सामाजिक बुराइयों या व्यक्तिगत खतरों से लड़ते थे।
विश्लेषण: यह डायलॉग दर्शकों को एक सीधा और शक्तिशाली संदेश देता है: जीवन में संघर्ष अपरिहार्य है। धर्मेंद्र की गहरी आवाज़ इसे एक प्रेरणादायक नारा बना देती थी, जो युवाओं में जोश भरता था।
(फिल्म: आग ही आग, 1987)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग पारिवारिक भावनाओं और प्रतिशोध के जटिल मिश्रण को दर्शाता है। फिल्म में बेटे (शायद) के गलत रास्ते पर जाने के बाद, पिता का यह डायलॉग बेहद भावुक और दुखभरा होता है।
विश्लेषण: इस डायलॉग को बोलते समय धर्मेंद्र के चेहरे पर गुस्सा और दर्द का मिश्रण होता था। 'गुस्सा' उनका ट्रेडमार्क था, लेकिन यहाँ गुस्से के साथ 'पालने' का दर्द जुड़ जाता है। यह डायलॉग उनकी भावनात्मक अभिनय क्षमता को दर्शाता है।
(फिल्म: जुगनू, 1973)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी एक्शन और धमकी वाली छवि का क्लासिक उदाहरण है। यह सीधा और शक्तिशाली डायलॉग है, जिसमें कोई लाग-लपेट नहीं है।
विश्लेषण: इस डायलॉग में उनकी आवाज़ की गरज और मर्दानगी चरम पर होती थी। यह डायलॉग शत्रु को उसके अंजाम की सीधी चेतावनी देता था। उस ज़माने में उनके ऐसे डायलॉग्स ही उनकी एक्शन फिल्मों की सफलता की कुंजी थे।
(फिल्म: चुपके चुपके, 1975)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी कॉमेडी और रोमांटिक छवि का बेहतरीन उदाहरण है। 'चुपके चुपके' एक हल्की-फुल्की कॉमेडी थी, और इस डायलॉग में उनकी मासूमियत और कॉमेडी टाइमिंग दिखाई देती है।
विश्लेषण: यह डायलॉग 'ही-मैन' की छवि से हटकर, उनकी भोली-भाली और प्यारे अंदाज़ को दर्शाता है। उनकी सहज संवाद अदायगी ने इस कॉमेडी सीन को अविस्मरणीय बना दिया। यह साबित करता है कि वे एक्शन के साथ कॉमेडी में भी सहज थे।
(फिल्म: यादों की बारात, 1973)
पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग धर्मेंद्र के किरदार की निडरता और चुनौती स्वीकार करने की इच्छा को दर्शाता है। यह डायलॉग चुनौती देने वाले को सीधे ललकारने जैसा था।
विश्लेषण: यह डायलॉग उनके स्वैग (Swagger) और एटीट्यूड को दर्शाता था। उनकी संवाद अदायगी में ऐसा आत्मविश्वास होता था कि दर्शक तुरंत हीरो के साथ जुड़ जाते थे। यह डायलॉग उनकी 'गरम धरम' वाली छवि को मज़बूत करता है।
धर्मेंद्र की डायलॉग अदायगी ने उन्हें सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया। उनके संवादों में एक खास तरह की देसी माटी की खुशबू थी, जो उन्हें आम आदमी का हीरो बनाती थी। 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' में उनका दर्द हो, या 'हम वो बला हैं...' में उनकी आत्मशक्ति, उन्होंने हर संवाद को सिर्फ बोला नहीं, बल्कि जीया।
आज जब बॉलीवुड के इस 'ही-मैन' को हम याद करते हैं, तो उनकी फिल्में, उनका अभिनय और उनकी मुस्कान के साथ-साथ उनके ये दमदार डायलॉग्स भी हमारी यादों में हमेशा ताज़ा रहेंगे। उनके डायलॉग्स भारतीय सिनेमा के इतिहास के वो सुनहरे पन्ने हैं, जो हमेशा चमकते रहेंगे।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
'घूसखोर पंडत' पर बवाल: नेटफ्लिक्स ने हटाया टीजर, प्रोड्यूसर नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी ने दी सफाई; कई राज्यों में FIR दर्ज मुंबई | 6 फरवरी 2026 दिग्गज फिल्ममेकर नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही बड़े विवादों में घिर गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके बाद मेकर्स को बैकफुट पर आना पड़ा है। शुक्रवार को नेटफ्लिक्स और मेकर्स ने फिल्म का सारा प्रमोशनल कंटेंट सोशल मीडिया से हटा लिया। यहाँ इस विवाद और अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की पूरी जानकारी दी गई है: 1. मेकर्स की सफाई: "फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है" विरोध बढ़ता देख फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने इंस्टाग्राम पर आधिकारिक बयान जारी किया: किरदार का नाम: नीरज पांडे ने स्पष्ट किया कि ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक पुलिस अधिकारी के उपनाम (निकनेम) के तौर पर किया गया है। इसका किसी जाति या धर्म को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं है। सम्मान का वादा: उन्होंने कहा कि वे भावनाओं का सम्मान करते हुए फिलहाल फिल्म का टीजर और प्रमोशनल मटीरियल हटा रहे हैं। उनका मानना है कि फिल्म को पूरी कहानी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मनोज बाजपेयी का रुख: फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा कि यह फिल्म एक खामियों से भरे व्यक्ति की यात्रा है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी। 2. विवाद की जड़: क्यों हो रहा है विरोध? फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे फिल्म में ‘पंडत’ कहा गया है। आपत्ति: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि 'पंडत' शब्द विद्वानों और ब्राह्मण समाज की पहचान है। इसके साथ 'घूसखोर' शब्द जोड़ना पूरे समुदाय की छवि धूमिल करने की कोशिश है। विरोध प्रदर्शन: भोपाल, लखनऊ और मुंबई समेत कई शहरों में ब्राह्मण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ⚖️ कानूनी कार्रवाई और कानूनी शिकंजा मामला अब थानों और अदालतों तक पहुँच चुका है: प्राधिकरण / स्थान की गई कार्रवाई लखनऊ (हजरतगंज थाना) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर FIR दर्ज। मुंबई (समता नगर थाना) शिवसेना (UBT) प्रवक्ता आनंद दुबे की शिकायत पर केस दर्ज। दिल्ली हाई कोर्ट फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर। NHRC (मानवाधिकार आयोग) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। फिल्म मेकर्स कंबाइन नीरज पांडे को बिना अनुमति टाइटल इस्तेमाल करने पर नोटिस दिया। 3. नीरज पांडे का ट्रैक रिकॉर्ड नीरज पांडे इंडस्ट्री के उन निर्देशकों में गिने जाते हैं जो यथार्थवादी और गंभीर विषयों पर फिल्में बनाते हैं। उन्होंने इससे पहले 'ए वेडनेसडे!', 'स्पेशल 26', 'बेबी' और 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' जैसी सफल फिल्में दी हैं। यही वजह है कि इस फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन टाइटल विवाद ने इसकी रिलीज पर सवालिया निशान लगा दिया है।
लोंगेवाला की धरती से 'बॉर्डर 2' का शंखनाद: सनी देओल और वरुण धवन ने जवानों के बीच लॉन्च किया 'घर कब आओगे' 1. लोंगेवाला-तनोट: लॉन्च के लिए ऐतिहासिक स्थान का चयन फिल्म की टीम ने गाने को लॉन्च करने के लिए किसी लग्जरी होटल के बजाय राजस्थान के जैसलमेर में तनोट माता मंदिर और लोंगेवाला पोस्ट को चुना। यह वही स्थान है जहाँ मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी और उनके जवानों ने पाकिस्तान के टैंकों को धूल चटाई थी। BSF की मौजूदगी: कार्यक्रम BSF जवानों और उनके परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। एम्फीथिएटर में लाइव परफॉर्मेंस: तनोट माता मंदिर के पास बने एम्फीथिएटर में सोनू निगम ने जब लाइव गाना शुरू किया, तो पूरा रेगिस्तान देशभक्ति के तरानों से गूँज उठा। 2. मंच पर दिखी पीढ़ियों की विरासत: सनी और अहान इवेंट का सबसे भावुक पल तब आया जब अहान शेट्टी ने मंच पर चढ़ते ही सनी देओल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। विरासत का मेल: अहान के पिता सुनील शेट्टी ने 1997 की 'बॉर्डर' में 'भैरों सिंह' का अमर किरदार निभाया था। अब अहान उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। सनी देओल की यादें: सनी देओल ने अपने पिता धर्मेंद्र की फिल्म 'हकीकत' को याद करते हुए बताया कि कैसे देशभक्ति फिल्मों के प्रति उनका जुनून जे.पी. दत्ता के साथ 'बॉर्डर' बनाने की वजह बना। 3. वरुण धवन का कड़ा संदेश: "इस बार हम बॉर्डर ही बदल देंगे" फिल्म में मेजर होशियार सिंह दहिया की भूमिका निभा रहे वरुण धवन ने अपने डायलॉग से जवानों में जोश भर दिया। बॉर्डर बदलने का संकल्प: वरुण ने कहा, "इस बार हम बॉर्डर में घुसेंगे ही नहीं, हम बॉर्डर ही बदल देंगे।" * युवाओं को संदेश: उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन अगर कोई आँख उठाकर देखेगा, तो आज का नया भारत जवाब देना जानता है। 4. 'घर कब आओगे' का नया वर्जन: स्वर और संगीत का संगम 1997 का कालजयी गीत 'संदेशे आते हैं/घर कब आओगे' अब एक नए और भव्य स्वरूप में लौटा है। मल्टी-स्टारर सिंगर्स: सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ की मूल आवाजों के साथ अब इसमें अरिजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और विशाल मिश्रा का जादू भी शामिल है। संगीत और बोल: मिथुन ने संगीत को आधुनिक टच दिया है, जबकि जावेद अख्तर के मूल शब्दों में मनोज मुंतशिर ने नई पंक्तियाँ जोड़ी हैं। अवधि: नया वर्जन 10 मिनट 34 सेकेंड लंबा है, जो आज के दौर के हिसाब से काफी साहसपूर्ण प्रयोग है। 📊 'बॉर्डर 2' फिल्म: एक नज़र में विशेषता विवरण रिलीज डेट 23 जनवरी 2026 निर्देशक अनुराग सिंह मुख्य कलाकार सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह गीत की लंबाई 10 मिनट 34 सेकेंड लोकेशन तनोट-लोंगेवाला (जैसलमेर)
⚔️ गलवान पर 'महायुद्ध': सलमान खान की फिल्म से बौखलाया चीन; ग्लोबल टाइम्स बोला- "फिल्म इतिहास नहीं बदल सकती" 1. 🇨🇳 चीन की नाराजगी: "ग्लोबल टाइम्स" का हमला चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक विशेष लेख छापकर फिल्म की आलोचना की है। तथ्यों पर सवाल: अखबार का कहना है कि फिल्म कितनी भी नाटकीय क्यों न हो, वह सीमा की वास्तविकता को नहीं बदल सकती। चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फिल्म केवल भारतीय दृष्टिकोण पेश करती है और चीनी विरोधी भावनाओं को भड़काती है। समय पर आपत्ति: मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के अनुसार, जब दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश हो रही है, तब ऐसी फिल्म रिलीज करना गलत है। पर्सनल अटैक: चीनी सोशल मीडिया पर सलमान खान के हेयरस्टाइल, वर्दी और ट्रेलर के कुछ सीन्स की तुलना 'गेम ऑफ थ्रोन्स' से करते हुए मजाक उड़ाया जा रहा है। 2. 🛡️ दावों का टकराव: किसने तोड़ा LAC का नियम? ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर जून 2020 की घटना का दोष भारतीय सेना पर मढ़ा है: चीन का तर्क: चीन का दावा है कि भारतीय सैनिकों ने अवैध रूप से LAC पार की और चीनी पेट्रोलिंग में बाधा डाली। उनके अनुसार, चीनी सैनिकों ने केवल 'जवाबी कार्रवाई' की थी। भारत का रुख: भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि चीनी सैनिकों ने यथास्थिति (Status Quo) बदलने की कोशिश की और भारतीय कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व वाली टीम पर विश्वासघात करते हुए हमला किया। 3. 📉 मारे गए सैनिकों की संख्या पर 'महाझूठ' गलवान झड़प में हुए नुकसान को लेकर चीन हमेशा से दुनिया की नजरों में संदिग्ध रहा है: चीन का आधिकारिक दावा: चीन ने केवल 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की है। दुनिया का सच: ऑस्ट्रेलिया की 'द क्लैक्सन' और अमेरिकी 'न्यूज वीक' की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन को भारी नुकसान हुआ था। अनुमान है कि नदी में डूबने और चोटों के कारण 38 से 60 चीनी सैनिक मारे गए थे। चीन ने अपनी जनता के गुस्से से बचने के लिए इन आंकड़ों को कभी सार्वजनिक नहीं किया। 4. 📜 'बैटल ऑफ गलवान' से जुड़े 7 ऐतिहासिक तथ्य तारीख: 15–16 जून 2020 की रात, पूर्वी लद्दाख। 53 साल बाद खूनी संघर्ष: 1967 के बाद पहली बार सीमा पर सैनिकों की जान गई। भारतीय बलिदान: कर्नल बी. संतोष बाबू सहित भारत के 20 जवान शहीद हुए। हथियारों का इस्तेमाल: कोई गोली नहीं चली; केवल लाठी, कंटीले तार और पत्थरों से युद्ध हुआ। नदी का कहर: कई चीनी सैनिक गलवान नदी के बर्फीले पानी में बह गए थे। संबंधों में दरार: इस घटना के बाद भारत ने टिक-टॉक सहित सैकड़ों चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया। सैन्य तैनाती: आज भी दोनों देशों ने LAC पर 50,000 से अधिक सैनिक तैनात कर रखे हैं।