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धर्मेंद्र के 10 सबसे बड़े डायलॉग्स: 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' से 'खून पी जाऊंगा' तक की पूरी कहानी

रवि चौहान नवम्बर 24, 2025 0
'ही-मैन' धर्मेंद्र की दहाड़
'ही-मैन' धर्मेंद्र की दहाड़

ही-मैन' धर्मेंद्र की दहाड़: 10 आइकॉनिक डायलॉग्स जिन्होंने भारतीय सिनेमा पर राज किया 

 

भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर किसी अभिनेता को 'ही-मैन' की उपाधि मिली, तो वह सिर्फ धर्मेंद्र सिंह देओल ही थे। उनका आकर्षक व्यक्तित्व, बेजोड़ सुंदरता और एक खास तरह का देसी, सहज अंदाज़ उन्हें भीड़ से अलग करता था। लेकिन जो चीज़ उन्हें एक लीजेंड बनाती थी, वह थी उनकी संवाद अदायगी (Dialogue Delivery)। धर्मेंद्र के डायलॉग में जोश, रोमांस, मासूमियत और देसी तेवर कूट-कूटकर भरे होते थे। उनकी आवाज़ में एक ऐसी गरज थी, जो रोमांस के दृश्यों में शहद घोल देती थी और एक्शन दृश्यों में आग लगा देती थी।

धर्मेंद्र के डायलॉग्स केवल संवाद नहीं थे; वे पीढ़ियों की जुबान बन गए, पोस्टर पर छपे और दशकों तक याद किए गए। 70 और 80 के दशक में, उनके डायलॉग्स नौजवानों की जुबां पर ऐसे रच-बस गए थे, जैसे वे उनके अपने जीवन का हिस्सा हों।

चलिए, आज हम भारतीय सिनेमा के इस महान कलाकार को उनके 10 सबसे मशहूर डायलॉग्स और उनकी संवाद अदायगी की शैली के विश्लेषण के साथ याद करते हैं।

 

1. धर्मेंद्र की संवाद अदायगी की अनूठी शैली

 

धर्मेंद्र का डायलॉग बोलने का अंदाज़ बाकी अभिनेताओं से अलग था। वह एक ऐसे अभिनेता थे जो अपने संवादों में 'पंजाबियत' का एक खास पुट लाते थे। उनकी आवाज़ गहरी, कर्कश (Gravelly) और बेहद मर्दाना थी।

  • देसीपन और सहजता: उनके संवादों में कोई बनावटीपन नहीं होता था। वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए थे, और उनकी भाषा में वही सहजता और ज़मीन से जुड़ाव दिखाई देता था, जिसने आम दर्शकों को उनसे जोड़ा।

  • भावनात्मक गहराई: चाहे वह गुस्से में हों, प्यार में हों या दुःख में, उनकी आवाज़ में किरदार की भावनाओं की सच्ची गहराई झलकती थी। 'सत्यकाम' (1969) में जब वे आदर्शों की बात करते थे, तो उनकी आवाज़ में ईमानदारी की गूँज होती थी।

  • रोमांस में मिठास: उनकी संवाद अदायगी का सबसे बड़ा कमाल यह था कि उनकी गहरी आवाज़ भी रोमांटिक दृश्यों में बेहद मिठास घोल देती थी।


 

2. 💣 10 सबसे मशहूर डायलॉग्स: जिन्होंने सिनेमा हॉल में तालियाँ गूंजा दीं

 

धर्मेंद्र के करियर में ऐसे कई डायलॉग्स हैं जिन्होंने इतिहास रचा, लेकिन ये 10 डायलॉग्स उनकी 'ही-मैन' छवि को सबसे बेहतरीन तरीके से परिभाषित करते हैं:

 

2.1. डायलॉग 1: "बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना।"

 

(फिल्म: शोले, 1975)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग भारतीय सिनेमा के इतिहास में संभवतः सबसे प्रसिद्ध और उद्धृत डायलॉग्स में से एक है। 'शोले' के चरमोत्कर्ष (Climax) में, जब गब्बर सिंह (अमजद खान) बसंती (हेमा मालिनी) को ज़बरदस्ती नचाता है और वीरू (धर्मेंद्र) को बेबस बांधकर रखा गया है, तब वीरू गुस्से, असहायता और अपमान के चरम पर यह डायलॉग बोलता है।

  • विश्लेषण: यह डायलॉग केवल एक संवाद नहीं है; यह एक बहादुर व्यक्ति की असहायता का प्रतीक है। 'कुत्तों' (गब्बर के आदमियों) का इस्तेमाल करके वह गब्बर के गुंडों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करता है। उनकी गरजती आवाज़ और आँखों में भरा गुस्सा पर्दे पर आग लगा देता है। यह डायलॉग धर्मेंद्र के किरदार की बहादुरी और सम्मान की रक्षा के लिए उसके जुनून को दर्शाता है।

 

2.2. डायलॉग 2: "कुत्ते...कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा।"

 

(फिल्म: शोले, 1975)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: 'शोले' का एक और अमर डायलॉग, जो भारतीय सिनेमा की 'एंग्री यंग मैन' वाली थीम को बल देता है। हालाँकि यह डायलॉग शायद 'बसंती' वाले डायलॉग से कम चर्चित हो, लेकिन जब भी पर्दे पर बदला या प्रतिशोध की भावना दिखानी होती थी, यह डायलॉग तुरंत याद आ जाता था।

  • विश्लेषण: 'कुत्ते' और 'कमीने' जैसे शब्दों का इस्तेमाल धर्मेंद्र के किरदार के देसी गुस्से को दर्शाता था, जो सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाता था। इस डायलॉग में प्रतिशोध की तीव्र भावना थी, जो 70 के दशक के नौजवानों के बीच ज़बरदस्त हिट हुई।

 

2.3. डायलॉग 3: "कुत्ते, मैं तेरा खून पी जाऊंगा।"

 

(फिल्म: धर्मवीर, 1977)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग 'शोले' के बाद आया और तुरंत ही ज़बरदस्त हिट हो गया। 'धर्मवीर' में धर्मेंद्र ने एक ऐसे वीर योद्धा का किरदार निभाया, जिसके लिए न्याय सबसे ऊपर था।

  • विश्लेषण: यहाँ यह डायलॉग प्रतिशोध की भावना को और भी ऊँचाई पर ले जाता है। यह डायलॉग धर्मेंद्र की एक्शन हीरो वाली छवि को सीमेंट करता है। इस डायलॉग को बोलने का उनका जोशीला अंदाज़—ऊँची आवाज़, मुट्ठी भींची हुई—सिनेमा हॉलों में तालियां और सीटियां बजवा देता था। यह उनकी ज़बरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस का प्रमाण है।

 

2.4. डायलॉग 4: "हम वो बला हैं, जो शीशे से पत्थर को तोड़ दें।"

 

(फिल्म: कातिलों के कातिल, 1981)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग धर्मेंद्र की आत्म-शक्ति, आत्मविश्वास और अजेयता को दर्शाता है। यह डायलॉग उनके 'ही-मैन' टाइटल को चरितार्थ करता है।

  • विश्लेषण: यह एक ऐसा संवाद है जिसमें हीरो अपनी शक्ति का वर्णन किसी अतिरंजित तरीके से नहीं, बल्कि एक कवि की तरह करता है। 'शीशे से पत्थर को तोड़ना' एक मेटाफर है जो असाध्य को साधने की शक्ति को दर्शाता है। जब धर्मेंद्र इसे पूरी दहाड़ के साथ बोलते थे, तो दर्शकों में एक इलेक्ट्रिक ऊर्जा भर जाती थी।

 

2.5. डायलॉग 5: "जिनके घरों के शीशे के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते।"

 

(फिल्म: राजकुमार, 1996)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी रोमांटिक छवि से थोड़ा हटकर, उनकी दार्शनिक और गंभीर साइड को दर्शाता है। हालांकि यह फिल्म बाद के करियर की है, लेकिन डायलॉग में उनकी पुरानी वाली गंभीरता झलकती है।

  • विश्लेषण: यह डायलॉग एक गहरी नैतिक समझ को दर्शाता है। यह दिखाता है कि धर्मेंद्र केवल एक्शन स्टार नहीं थे, बल्कि वे गंभीर संवादों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकते थे। इस डायलॉग को बोलते समय उनके चेहरे पर गंभीरता और आवाज़ में सलाह का भाव होता था।

 

2.6. डायलॉग 6: "अगर तुम्हें मौत से लड़ना नहीं आता, तो जीना भी नहीं आता।"

 

(फिल्म: लोफर, 1973)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग जीवन के प्रति उनके किरदार के निडर दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। 70 के दशक में, उनके किरदार अक्सर ऐसे होते थे जो सामाजिक बुराइयों या व्यक्तिगत खतरों से लड़ते थे।

  • विश्लेषण: यह डायलॉग दर्शकों को एक सीधा और शक्तिशाली संदेश देता है: जीवन में संघर्ष अपरिहार्य है। धर्मेंद्र की गहरी आवाज़ इसे एक प्रेरणादायक नारा बना देती थी, जो युवाओं में जोश भरता था।

 

2.7. डायलॉग 7: "बचपन से पाला है मैंने इस गुंडे को, अब इसे गोली मारने का हक भी मेरा है।"

 

(फिल्म: आग ही आग, 1987)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग पारिवारिक भावनाओं और प्रतिशोध के जटिल मिश्रण को दर्शाता है। फिल्म में बेटे (शायद) के गलत रास्ते पर जाने के बाद, पिता का यह डायलॉग बेहद भावुक और दुखभरा होता है।

  • विश्लेषण: इस डायलॉग को बोलते समय धर्मेंद्र के चेहरे पर गुस्सा और दर्द का मिश्रण होता था। 'गुस्सा' उनका ट्रेडमार्क था, लेकिन यहाँ गुस्से के साथ 'पालने' का दर्द जुड़ जाता है। यह डायलॉग उनकी भावनात्मक अभिनय क्षमता को दर्शाता है।

 

2.8. डायलॉग 8: "मैं तुम्हारा वो हाल करूंगा कि तुम अपनी सांसों के लिए भीख मांगोगे।"

 

(फिल्म: जुगनू, 1973)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी एक्शन और धमकी वाली छवि का क्लासिक उदाहरण है। यह सीधा और शक्तिशाली डायलॉग है, जिसमें कोई लाग-लपेट नहीं है।

  • विश्लेषण: इस डायलॉग में उनकी आवाज़ की गरज और मर्दानगी चरम पर होती थी। यह डायलॉग शत्रु को उसके अंजाम की सीधी चेतावनी देता था। उस ज़माने में उनके ऐसे डायलॉग्स ही उनकी एक्शन फिल्मों की सफलता की कुंजी थे।

 

2.9. डायलॉग 9: "पीते तो हम रोज़ हैं, लेकिन आज ज़रा ज़्यादा पी ली।"

 

(फिल्म: चुपके चुपके, 1975)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग उनकी कॉमेडी और रोमांटिक छवि का बेहतरीन उदाहरण है। 'चुपके चुपके' एक हल्की-फुल्की कॉमेडी थी, और इस डायलॉग में उनकी मासूमियत और कॉमेडी टाइमिंग दिखाई देती है।

  • विश्लेषण: यह डायलॉग 'ही-मैन' की छवि से हटकर, उनकी भोली-भाली और प्यारे अंदाज़ को दर्शाता है। उनकी सहज संवाद अदायगी ने इस कॉमेडी सीन को अविस्मरणीय बना दिया। यह साबित करता है कि वे एक्शन के साथ कॉमेडी में भी सहज थे।

 

2.10. डायलॉग 10: "तुम अपना ठिकाना बताओ, हम खुद वहाँ आ जाएंगे।"

 

(फिल्म: यादों की बारात, 1973)

  • पृष्ठभूमि और प्रभाव: यह डायलॉग धर्मेंद्र के किरदार की निडरता और चुनौती स्वीकार करने की इच्छा को दर्शाता है। यह डायलॉग चुनौती देने वाले को सीधे ललकारने जैसा था।

  • विश्लेषण: यह डायलॉग उनके स्वैग (Swagger) और एटीट्यूड को दर्शाता था। उनकी संवाद अदायगी में ऐसा आत्मविश्वास होता था कि दर्शक तुरंत हीरो के साथ जुड़ जाते थे। यह डायलॉग उनकी 'गरम धरम' वाली छवि को मज़बूत करता है।


 

3. धर्मेंद्र: डायलॉग और सिनेमाई विरासत का संगम

 

धर्मेंद्र की डायलॉग अदायगी ने उन्हें सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया। उनके संवादों में एक खास तरह की देसी माटी की खुशबू थी, जो उन्हें आम आदमी का हीरो बनाती थी। 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' में उनका दर्द हो, या 'हम वो बला हैं...' में उनकी आत्मशक्ति, उन्होंने हर संवाद को सिर्फ बोला नहीं, बल्कि जीया

आज जब बॉलीवुड के इस 'ही-मैन' को हम याद करते हैं, तो उनकी फिल्में, उनका अभिनय और उनकी मुस्कान के साथ-साथ उनके ये दमदार डायलॉग्स भी हमारी यादों में हमेशा ताज़ा रहेंगे। उनके डायलॉग्स भारतीय सिनेमा के इतिहास के वो सुनहरे पन्ने हैं, जो हमेशा चमकते रहेंगे।

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मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

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फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर हटाया गया
नीरज पांडे की फिल्म 'घूसखोर पंडत' पर रोक की मांग; मनोज बाजपेयी ने तोड़ी चुप्पी; नेटफ्लिक्स ने हटाया टीजर।

'घूसखोर पंडत' पर बवाल: नेटफ्लिक्स ने हटाया टीजर, प्रोड्यूसर नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी ने दी सफाई; कई राज्यों में FIR दर्ज मुंबई | 6 फरवरी 2026 दिग्गज फिल्ममेकर नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही बड़े विवादों में घिर गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके बाद मेकर्स को बैकफुट पर आना पड़ा है। शुक्रवार को नेटफ्लिक्स और मेकर्स ने फिल्म का सारा प्रमोशनल कंटेंट सोशल मीडिया से हटा लिया। यहाँ इस विवाद और अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की पूरी जानकारी दी गई है: 1. मेकर्स की सफाई: "फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है" विरोध बढ़ता देख फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने इंस्टाग्राम पर आधिकारिक बयान जारी किया: किरदार का नाम: नीरज पांडे ने स्पष्ट किया कि ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक पुलिस अधिकारी के उपनाम (निकनेम) के तौर पर किया गया है। इसका किसी जाति या धर्म को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं है। सम्मान का वादा: उन्होंने कहा कि वे भावनाओं का सम्मान करते हुए फिलहाल फिल्म का टीजर और प्रमोशनल मटीरियल हटा रहे हैं। उनका मानना है कि फिल्म को पूरी कहानी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मनोज बाजपेयी का रुख: फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा कि यह फिल्म एक खामियों से भरे व्यक्ति की यात्रा है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी। 2. विवाद की जड़: क्यों हो रहा है विरोध? फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे फिल्म में ‘पंडत’ कहा गया है। आपत्ति: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि 'पंडत' शब्द विद्वानों और ब्राह्मण समाज की पहचान है। इसके साथ 'घूसखोर' शब्द जोड़ना पूरे समुदाय की छवि धूमिल करने की कोशिश है। विरोध प्रदर्शन: भोपाल, लखनऊ और मुंबई समेत कई शहरों में ब्राह्मण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ⚖️ कानूनी कार्रवाई और कानूनी शिकंजा मामला अब थानों और अदालतों तक पहुँच चुका है: प्राधिकरण / स्थान की गई कार्रवाई लखनऊ (हजरतगंज थाना) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर FIR दर्ज। मुंबई (समता नगर थाना) शिवसेना (UBT) प्रवक्ता आनंद दुबे की शिकायत पर केस दर्ज। दिल्ली हाई कोर्ट फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर। NHRC (मानवाधिकार आयोग) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। फिल्म मेकर्स कंबाइन नीरज पांडे को बिना अनुमति टाइटल इस्तेमाल करने पर नोटिस दिया। 3. नीरज पांडे का ट्रैक रिकॉर्ड नीरज पांडे इंडस्ट्री के उन निर्देशकों में गिने जाते हैं जो यथार्थवादी और गंभीर विषयों पर फिल्में बनाते हैं। उन्होंने इससे पहले 'ए वेडनेसडे!', 'स्पेशल 26', 'बेबी' और 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' जैसी सफल फिल्में दी हैं। यही वजह है कि इस फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन टाइटल विवाद ने इसकी रिलीज पर सवालिया निशान लगा दिया है।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
₹230 करोड़ से ज्यादा हुई बॉर्डर 2 की कमाई

Border 2 Box Office Collection Day 8: सनी देओल की 'बॉर्डर 2' ने 8 दिनों में कमाए 300 करोड़; मनाली में मना सफलता का जश्न।

फिल्म 'हैप्पी पटेल' की स्क्रीनिंग; गर्लफ्रेंड गौरी संग पहुंचे आमिर

आमिर खान-गौरी स्प्रैट और इमरान खान-लेखा वॉशिंगटन ने बटोरी सुर्खियां; सुनील ग्रोवर का 'आमिर अवतार' वायरल।

5 करोड़ की एलिमनी पर माही विज ने तोड़ी चुप्पी

Jay Bhanushali and Mahhi Vij Divorce: 5 करोड़ की एलिमनी और बच्चों की कस्टडी पर माही विज का बड़ा बयान; "हमारा तलाक हो गया है।"

बॉर्डर 2 के गीत घर कब आओगे का लॉन्च कार्यक्रम
Border 2 Song Launch: लोंगेवाला में सनी देओल और वरुण धवन ने लॉन्च किया 'घर कब आओगे'; 23 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म।

लोंगेवाला की धरती से 'बॉर्डर 2' का शंखनाद: सनी देओल और वरुण धवन ने जवानों के बीच लॉन्च किया 'घर कब आओगे' 1. लोंगेवाला-तनोट: लॉन्च के लिए ऐतिहासिक स्थान का चयन फिल्म की टीम ने गाने को लॉन्च करने के लिए किसी लग्जरी होटल के बजाय राजस्थान के जैसलमेर में तनोट माता मंदिर और लोंगेवाला पोस्ट को चुना। यह वही स्थान है जहाँ मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी और उनके जवानों ने पाकिस्तान के टैंकों को धूल चटाई थी। BSF की मौजूदगी: कार्यक्रम BSF जवानों और उनके परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। एम्फीथिएटर में लाइव परफॉर्मेंस: तनोट माता मंदिर के पास बने एम्फीथिएटर में सोनू निगम ने जब लाइव गाना शुरू किया, तो पूरा रेगिस्तान देशभक्ति के तरानों से गूँज उठा। 2. मंच पर दिखी पीढ़ियों की विरासत: सनी और अहान इवेंट का सबसे भावुक पल तब आया जब अहान शेट्टी ने मंच पर चढ़ते ही सनी देओल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। विरासत का मेल: अहान के पिता सुनील शेट्टी ने 1997 की 'बॉर्डर' में 'भैरों सिंह' का अमर किरदार निभाया था। अब अहान उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। सनी देओल की यादें: सनी देओल ने अपने पिता धर्मेंद्र की फिल्म 'हकीकत' को याद करते हुए बताया कि कैसे देशभक्ति फिल्मों के प्रति उनका जुनून जे.पी. दत्ता के साथ 'बॉर्डर' बनाने की वजह बना। 3. वरुण धवन का कड़ा संदेश: "इस बार हम बॉर्डर ही बदल देंगे" फिल्म में मेजर होशियार सिंह दहिया की भूमिका निभा रहे वरुण धवन ने अपने डायलॉग से जवानों में जोश भर दिया। बॉर्डर बदलने का संकल्प: वरुण ने कहा, "इस बार हम बॉर्डर में घुसेंगे ही नहीं, हम बॉर्डर ही बदल देंगे।" * युवाओं को संदेश: उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन अगर कोई आँख उठाकर देखेगा, तो आज का नया भारत जवाब देना जानता है। 4. 'घर कब आओगे' का नया वर्जन: स्वर और संगीत का संगम 1997 का कालजयी गीत 'संदेशे आते हैं/घर कब आओगे' अब एक नए और भव्य स्वरूप में लौटा है। मल्टी-स्टारर सिंगर्स: सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ की मूल आवाजों के साथ अब इसमें अरिजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और विशाल मिश्रा का जादू भी शामिल है। संगीत और बोल: मिथुन ने संगीत को आधुनिक टच दिया है, जबकि जावेद अख्तर के मूल शब्दों में मनोज मुंतशिर ने नई पंक्तियाँ जोड़ी हैं। अवधि: नया वर्जन 10 मिनट 34 सेकेंड लंबा है, जो आज के दौर के हिसाब से काफी साहसपूर्ण प्रयोग है। 📊 'बॉर्डर 2' फिल्म: एक नज़र में विशेषता विवरण रिलीज डेट 23 जनवरी 2026 निर्देशक अनुराग सिंह मुख्य कलाकार सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह गीत की लंबाई 10 मिनट 34 सेकेंड लोकेशन तनोट-लोंगेवाला (जैसलमेर)

रवि चौहान जनवरी 3, 2026 0
फिर मुश्किलों में फंसी फरहान अख्तर के निर्देशन की डॉन-3

Don 3 Casting Controversy: क्यों रणवीर सिंह और ऋतिक रोशन ने छोड़ी फरहान अख्तर की डॉन 3? पूरी जानकारी।

मुझे तलाक लेने का कोई पछतावा नहीं-मलाइका अरोड़ा

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पिता की शर्ट पहन इक्कीस की स्क्रीनिंग में पहुंचे बॉबी

Ekkis Special Screening: धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म के लिए इमोशनल हुआ देओल परिवार; पिता की शर्ट पहनकर पहुंचे बॉबी देओल।

सलमान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान पर चीन में नाराजगी
Battle of Galwan Movie: सलमान खान की फिल्म पर चीन ने जताई आपत्ति; ग्लोबल टाइम्स बोला- फिल्म से नहीं बदलता इतिहास।

⚔️ गलवान पर 'महायुद्ध': सलमान खान की फिल्म से बौखलाया चीन; ग्लोबल टाइम्स बोला- "फिल्म इतिहास नहीं बदल सकती" 1. 🇨🇳 चीन की नाराजगी: "ग्लोबल टाइम्स" का हमला चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक विशेष लेख छापकर फिल्म की आलोचना की है। तथ्यों पर सवाल: अखबार का कहना है कि फिल्म कितनी भी नाटकीय क्यों न हो, वह सीमा की वास्तविकता को नहीं बदल सकती। चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फिल्म केवल भारतीय दृष्टिकोण पेश करती है और चीनी विरोधी भावनाओं को भड़काती है। समय पर आपत्ति: मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के अनुसार, जब दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश हो रही है, तब ऐसी फिल्म रिलीज करना गलत है। पर्सनल अटैक: चीनी सोशल मीडिया पर सलमान खान के हेयरस्टाइल, वर्दी और ट्रेलर के कुछ सीन्स की तुलना 'गेम ऑफ थ्रोन्स' से करते हुए मजाक उड़ाया जा रहा है। 2. 🛡️ दावों का टकराव: किसने तोड़ा LAC का नियम? ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर जून 2020 की घटना का दोष भारतीय सेना पर मढ़ा है: चीन का तर्क: चीन का दावा है कि भारतीय सैनिकों ने अवैध रूप से LAC पार की और चीनी पेट्रोलिंग में बाधा डाली। उनके अनुसार, चीनी सैनिकों ने केवल 'जवाबी कार्रवाई' की थी। भारत का रुख: भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि चीनी सैनिकों ने यथास्थिति (Status Quo) बदलने की कोशिश की और भारतीय कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व वाली टीम पर विश्वासघात करते हुए हमला किया। 3. 📉 मारे गए सैनिकों की संख्या पर 'महाझूठ' गलवान झड़प में हुए नुकसान को लेकर चीन हमेशा से दुनिया की नजरों में संदिग्ध रहा है: चीन का आधिकारिक दावा: चीन ने केवल 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की है। दुनिया का सच: ऑस्ट्रेलिया की 'द क्लैक्सन' और अमेरिकी 'न्यूज वीक' की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन को भारी नुकसान हुआ था। अनुमान है कि नदी में डूबने और चोटों के कारण 38 से 60 चीनी सैनिक मारे गए थे। चीन ने अपनी जनता के गुस्से से बचने के लिए इन आंकड़ों को कभी सार्वजनिक नहीं किया। 4. 📜 'बैटल ऑफ गलवान' से जुड़े 7 ऐतिहासिक तथ्य तारीख: 15–16 जून 2020 की रात, पूर्वी लद्दाख। 53 साल बाद खूनी संघर्ष: 1967 के बाद पहली बार सीमा पर सैनिकों की जान गई। भारतीय बलिदान: कर्नल बी. संतोष बाबू सहित भारत के 20 जवान शहीद हुए। हथियारों का इस्तेमाल: कोई गोली नहीं चली; केवल लाठी, कंटीले तार और पत्थरों से युद्ध हुआ। नदी का कहर: कई चीनी सैनिक गलवान नदी के बर्फीले पानी में बह गए थे। संबंधों में दरार: इस घटना के बाद भारत ने टिक-टॉक सहित सैकड़ों चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया। सैन्य तैनाती: आज भी दोनों देशों ने LAC पर 50,000 से अधिक सैनिक तैनात कर रखे हैं।

रवि चौहान दिसम्बर 30, 2025 0
सलमान का बर्थडे मनाने धोनी समेत कई सेलिब्रिटी पहुंचे

Salman Khan 60th Birthday: पनवेल में धोनी-संजू बाबा के साथ ग्रैंड पार्टी; बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर 'भाईजान' का जलवा

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रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0