ईद 2026: युद्ध की आग और मिसाइलों के साये में दुनिया; 60 साल बाद अल-अक्सा मस्जिद बंद, रूस में उमड़ा जनसैलाब विशेष वैश्विक रिपोर्ट | 21 मार्च 2026 आज पूरी दुनिया में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार की ईद खुशियों से ज्यादा खौफ और सन्नाटे की गवाह बनी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध के 22वें दिन, मजहबी जज्बात और सैन्य तनाव का टकराव साफ देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर यरुशलम में इतिहास दोहराया गया है, वहीं दूसरी ओर रूस और ब्रिटेन जैसे देशों में लाखों की संख्या में नमाज अदा की गई। यहाँ ईद 2026 की विस्तृत वैश्विक कवरेज दी गई है: 1. यरुशलम: 60 साल में पहली बार अल-अक्सा बंद इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के कारण यरुशलम में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है। ऐतिहासिक पाबंदी: 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार है, जब अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया। सुरक्षा घेरा: यरुशलम के पुराने शहर (Old City) में केवल स्थानीय निवासियों को प्रवेश की अनुमति है। मस्जिद के बाहर इजराइली पुलिस और नमाजियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं, जहाँ भीड़ 'अल्लाहु अकबर' के नारों के साथ अंदर जाने की कोशिश कर रही थी। नियम: भीड़ पर सख्त पाबंदी है—मस्जिद के अंदर केवल 100 और बाहर 50 लोगों के इकट्ठा होने की इजाजत दी गई है। 2. ईरान: गम और श्रद्धांजलि की ईद ईरान में शुक्रवार को ईद मनाई गई, लेकिन यहाँ उत्सव के बजाय मातम का माहौल अधिक दिखा। वीरान बाजार: तेहरान के बाजारों में रौनक गायब रही। लोग जश्न मनाने के बजाय उन 170 बच्चों की कब्रों पर श्रद्धांजलि देने पहुँचे, जो पिछले दिनों अमेरिकी-इजराइली स्कूल हमले में मारे गए थे। प्रतीकात्मक नमाज: तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में नमाज के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं ईरान के राष्ट्रीय झंडे में लिपटी नजर आईं, जो युद्ध के समय राष्ट्रवाद और एकजुटता का संदेश दे रही थीं। 3. खाड़ी देश: खुले मैदानों में नमाज पर रोक कतर, यूएई (UAE) और कुवैत जैसे देशों में आज शनिवार को ईद मनाई जा रही है। सुरक्षा अलर्ट: युद्ध की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने 'ईदगाह' या खुले मैदानों में सामूहिक नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। सभी नमाजें केवल मस्जिदों के भीतर कड़ी सुरक्षा में अदा की गईं। यूएई में 4 दिन की छुट्टी: हालांकि अबू धाबी और दुबई के मॉल्स में लाइटिंग की गई है, लेकिन सुरक्षा जांच (Security Checkpoints) के कारण लोगों की आवाजाही कम रही। 4. गाजा और लेबनान: मलबे के ढेर पर इबादत गाजा की तबाही: हमास और इस्लामिक जिहाद के सदस्य तबाही के बीच लोगों को मुबारकबाद देते नजर आए। भुखमरी और आर्थिक संकट के कारण फलों और खिलौनों के दाम आसमान छू रहे हैं। लेबनान का संकट: दक्षिण लेबनान में इजराइली हमलों के कारण हजारों लोग शरणार्थी शिविरों (Shelters) में ईद मनाने को मजबूर हैं। यहाँ अब तक युद्ध में 1,000 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। 5. रूस और तुर्किये: इबादत का बड़ा केंद्र मिडिल ईस्ट के तनाव से दूर रूस में एक अलग तस्वीर देखने को मिली: रूस में रिकॉर्ड भीड़: मॉस्को की 4 प्रमुख मस्जिदों में 2 लाख से ज्यादा लोग नमाज के लिए जुटे। सेंट पीटर्सबर्ग में भी 1 लाख से अधिक लोग शामिल हुए। पुतिन का संदेश: राष्ट्रपति पुतिन ने मुस्लिम समुदाय की तारीफ करते हुए उन्हें 'देशभक्त' बताया और कहा कि कई मुस्लिम सैनिक इस समय मोर्चे पर देश की सुरक्षा कर रहे हैं। तुर्किये: इस्तांबुल की ग्रैंड कैमलिका मस्जिद (तुर्किये की सबसे बड़ी मस्जिद) में हजारों लोगों ने शांति की दुआ मांगी। 📊 वैश्विक ईद 2026: एक नजर में देश / स्थान नमाज की स्थिति विशेष टिप्पणी अल-अक्सा (इजराइल) पूरी तरह बंद 1967 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। रूस (मॉस्को) 2 लाख+ नमाजी पुतिन ने मुस्लिम समुदाय को बधाई दी। बर्मिंघम (ब्रिटेन) भारी भीड़ स्मॉल हीथ पार्क में बड़ी नमाज अदा की गई। ईरान सादगी और गम मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। इराक तनावपूर्ण खामेनेई के पोस्टरों के साथ नमाज अदा की गई। 6. कूटनीतिक जीत: पाक-अफगान युद्ध पर 4 दिन का ब्रेक ईद के सम्मान में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही जंग 4 दिनों के लिए रोक दी गई है। सीजफायर: यह विराम 18 मार्च से 24 मार्च तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि किसी भी आतंकी हमले की स्थिति में ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। 7. हवाई सेवा: ईद स्पेशल फ्लाइट्स भारतीय यात्रियों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए 16 विशेष उड़ानें संचालित करने का फैसला किया है। युद्ध के कारण कुछ रूट प्रभावित हुए हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाए जा रहे हैं।
पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात: सेना प्रमुख असीम मुनीर का शिया समुदाय को अल्टीमेटम— "ईरान इतना पसंद है तो वहीं चले जाओ"; 3.7 करोड़ आबादी में आक्रोश रावलपिंडी/कराची | 21 मार्च 2026 पाकिस्तान इस समय न केवल आर्थिक और बाहरी मोर्चे पर जंग लड़ रहा है, बल्कि अब देश के भीतर सांप्रदायिक दरार भी गहरी हो गई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल असीम मुनीर के एक ताजा और विवादित बयान ने देश की 15% शिया आबादी को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। रावलपिंडी में एक इफ्तार पार्टी के दौरान मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं से दो-टूक कहा कि जिनकी वफादारी पाकिस्तान के बजाय ईरान के प्रति है, उनके लिए देश के दरवाजे खुले हैं—वे ईरान जा सकते हैं। यहाँ इस पूरे विवाद, शिया समुदाय की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान के भीतर सुलगती आग की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. इफ्तार पार्टी में विवाद: "दरवाजे खुले हैं, ईरान चले जाएं" रावलपिंडी में शिया उलेमाओं के साथ आयोजित एक औपचारिक इफ्तार बैठक में माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब जनरल मुनीर ने शिया समुदाय की देशभक्ति पर सवाल उठाए: वफादारी का सवाल: मुनीर ने कहा, "हम किसी को भी दूसरे देश के प्रति अपनी वफादारी की आड़ में पाकिस्तान में अफरा-तफरी फैलाने की इजाजत नहीं देंगे। जो लोग ईरान से इतना प्यार करते हैं, वे वहां चले जाएं।" अचानक प्रस्थान: बैठक के बाद उलेमाओं को बताया गया था कि चर्चा जारी रहेगी, लेकिन जनरल मुनीर अचानक कार्यक्रम छोड़कर चले गए। शिया नेताओं ने इसे न केवल सामुदायिक बल्कि व्यक्तिगत अपमान के रूप में देखा। 2. विवाद की जड़: अयातुल्ला खामेनेई की मौत और विरोध प्रदर्शन यह कड़वाहट 1 मार्च को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या/मौत के बाद शुरू हुई। देशव्यापी प्रदर्शन: पाकिस्तान के कराची, इस्लामाबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान में शिया समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। हिंसा और मौतें: कराची में अमेरिकी दूतावास में घुसने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर अमेरिकी मरीन की फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई। गिलगित और स्कार्दू में संयुक्त राष्ट्र (UN) के दफ्तरों में आगजनी की गई। मुनीर का आरोप: सेना प्रमुख का मानना है कि शिया समुदाय पाकिस्तान के आंतरिक हितों के बजाय ईरान के एजेंडे को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे देश की सुरक्षा खतरे में है। 3. शिया नेतृत्व का पलटवार: "जिन्ना भी शिया थे" प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मोहम्मद शिफा नजफी ने जनरल मुनीर के सामने ही कड़ी आपत्ति दर्ज कराई: ऐतिहासिक संदर्भ: नजफी ने याद दिलाया कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना स्वयं शिया थे और पाकिस्तान के निर्माण में इस समुदाय का खून-पसीना शामिल है। धार्मिक जुड़ाव vs देशभक्ति: शिया नेताओं का कहना है कि मक्का, मदीना, नजफ (इराक) और ईरान (मशहद) से उनका जुड़ाव उनकी आस्था का हिस्सा है, जिसे 'देशद्रोह' या 'गद्दारी' नहीं कहा जा सकता। सेना में योगदान: उन्होंने मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तान की सेना के कई उच्च पदों पर शिया अधिकारी देश की रक्षा कर रहे हैं। 📊 पाकिस्तान में शिया समुदाय की स्थिति (एक नजर में) विवरण आंकड़े/जानकारी कुल आबादी लगभग 15% (3.77 करोड़ लोग) प्रभावित क्षेत्र कराची, इस्लामाबाद, लाहौर, गिलगित-बाल्टिस्तान, कुर्रम मुख्य मांग धार्मिक पहचान और देशभक्ति को अलग रखा जाए। हालिया हिंसा अमेरिकी दूतावास फायरिंग (10 मौतें), UN दफ्तरों में आगजनी। 4. कूटनीतिक बदलाव: ईरान से दूरी, सऊदी से नजदीकी विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर का यह बयान केवल आंतरिक नहीं, बल्कि एक बड़ी विदेश नीति का संकेत है: सऊदी अरब का प्रभाव: पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सेना अब सऊदी अरब और खाड़ी देशों (UAE) के और करीब जा रही है, जो ईरान के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी हैं। संतुलन का अंत: दशकों तक पाकिस्तान ने ईरान और सऊदी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन अब जनरल मुनीर के नेतृत्व में सेना ने स्पष्ट रूप से 'प्रो-सऊदी' रुख अपना लिया है। 5. सेना का आधिकारिक स्पष्टीकरण विवाद बढ़ता देख पाकिस्तान सेना (ISPR) ने एक संभला हुआ बयान जारी किया: सेना ने कहा कि जनरल मुनीर ने केवल राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की थी। बयान के अनुसार, मुनीर का उद्देश्य धार्मिक नेताओं को बाहरी ताकतों के बहकावे में आने से रोकना था। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जमीनी हकीकत काफी कड़वी थी।
ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग: 22वां दिन | नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर भीषण हमला, हिंद महासागर में अमेरिकी बेस पर मिसाइलें और डिएगो गार्सिया की तकरार तेहरान/वॉशिंगटन/यरुशलम | 21 मार्च 2026 आज 21 मार्च 2026 है और मध्य पूर्व (Middle East) में छिड़ी महाजंग अपने 22वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। आज की सुबह दुनिया के लिए सबसे चौंकाने वाली खबर लेकर आई, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के सबसे संवेदनशील और सबसे बड़े परमाणु ठिकाने 'नतांज न्यूक्लियर सेंटर' को निशाना बनाया। इसके साथ ही जंग का दायरा अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गया है। यहाँ आज के घटनाक्रम, सैन्य कार्रवाई और वैश्विक कूटनीति की सबसे विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला: क्या परमाणु खतरा बढ़ा? ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तसनीम' के अनुसार, शनिवार सुबह अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमानों ने नतांज परमाणु केंद्र पर कई मिसाइलें दागीं। हमले का मकसद: नतांज ईरान का वह केंद्र है जहाँ यूरेनियम इनरिचमेंट (संवर्धन) किया जाता है। इजराइल का मानना है कि यहाँ ईरान गुप्त रूप से परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा था। जमीनी स्थिति: इस प्लांट का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे (Underground) बना है ताकि बंकर-बस्टर मिसाइलों से बचा जा सके। राहत की खबर: ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले के बावजूद अभी तक कोई रेडियोएक्टिव (परमाणु विकिरण) रिसाव नहीं हुआ है। आसपास की नागरिक आबादी पूरी तरह सुरक्षित है। 2. हिंद महासागर में कोहराम: डिएगो गार्सिया पर ईरानी मिसाइलें जंग अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रही। ईरान ने पहली बार इतनी लंबी दूरी की मार करते हुए हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के साझा सैन्य बेस 'डिएगो गार्सिया' को निशाना बनाया है। हमला: शुक्रवार सुबह ईरान ने 2 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुसार, दोनों मिसाइलें बेस को हिट करने में नाकाम रहीं और समुद्र में जा गिरीं। ब्रिटेन की निंदा: ब्रिटेन ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ब्रिटेन सीधे तौर पर जंग में शामिल नहीं है, लेकिन उसने अमेरिका को अपने इस रणनीतिक द्वीप (Diego Garcia) का उपयोग करने की अनुमति दी है। महत्व: तेहरान से यह बेस करीब 3,800 से 5,000 किलोमीटर दूर है। यहाँ से अमेरिका अपने बी-52 बॉम्बर और टैंकर विमान संचालित करता है। 3. लाइव ब्लॉग अपडेट्स: पल-पल की खबरें (21 मार्च 2026) समय स्थान घटना 05:10 PM डिएगो गार्सिया ब्रिटेन ने ईरानी हमले को क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताया। 05:05 PM इजराइल IRGC का दावा- इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, उड़ानें प्रभावित। 04:32 PM रामसर, ईरान एक घर पर अमेरिकी-इजराइली हवाई हमला; माता-पिता और एक मासूम बच्चे की मौत। 04:18 PM बगदाद, इराक इराकी खुफिया मुख्यालय के पास ड्रोन गिरा; एक उच्च अधिकारी की मौत। 03:12 PM बगदाद रिहायशी इलाके में दूसरा ड्रोन हमला; एक स्पोर्ट्स क्लब में गिरा निगरानी ड्रोन। 01:38 PM तेहरान IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी का अंतिम संस्कार, हजारों की भीड़ उमड़ी। 4. कूटनीतिक हलचल: पीएम मोदी और पुतिन का रुख एक ओर जहाँ मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी ओर नवरोज और ईद के मौके पर बड़े नेताओं के बीच बातचीत भी हुई: पीएम मोदी का संदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजश्कियान से फोन पर बात की। उन्होंने ईद और नवरोज की बधाई दी, लेकिन साथ ही समुद्री रास्तों (Shipping Routes) की सुरक्षा पर चिंता जताई। मोदी ने स्पष्ट कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए जहाजों के रास्ते सुरक्षित रहना अनिवार्य है। पुतिन की 'सच्ची दोस्ती': रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान को अपना 'वफादार दोस्त' बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई से तेल संकट बढ़ेगा। रूस ने ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई को निशाना बनाने की कोशिशों की भी निंदा की। 5. ईरान की रणनीति: "होर्मुज बंद नहीं, लेकिन..." ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में दो टूक बातें कहीं: रास्ते की शर्त: उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है, लेकिन केवल उन देशों के लिए जो ईरान के संपर्क में रहेंगे। हमलावर देशों के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। जंग का अंत: अराघची ने कहा कि ईरान को सिर्फ 'सीजफायर' (युद्धविराम) नहीं चाहिए, बल्कि जंग पूरी तरह खत्म होने की लिखित गारंटी चाहिए। 6. साइबर वॉर: इजराइली जनरल का ईमेल हैक? ईरानी हैकर ग्रुप 'हंदाला' ने दावा किया है कि उन्होंने इजराइली ब्रिगेडियर जनरल एरन ओरताल का ईमेल हैक कर लिया है। दावा: हैकर्स के पास 1 लाख से ज्यादा सीक्रेट ईमेल होने की बात कही गई है, जिनमें इजराइली सेना की भविष्य की योजनाओं का विवरण है। हालांकि, इजराइल ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। 7. ट्रम्प का 'विक्ट्री कार्ड' और नाटो पर गुस्सा डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर अपने लक्ष्यों को स्पष्ट किया: ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना। ईरान के रक्षा उत्पादन ढांचे को नष्ट करना। नौसेना और वायुसेना को पंगु बनाना। यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु बम न बना सके। नाटो की आलोचना: ट्रम्प ने नाटो देशों को 'कमजोर' बताते हुए कहा कि वे तेल की महंगाई पर रोते तो हैं, लेकिन होर्मुज खुलवाने में अमेरिका की मदद नहीं करते। 8. आर्थिक राहत: भारत के लिए ईरानी तेल का रास्ता खुला अमेरिकी ट्रेजरी ने 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। नियम: जो ईरानी तेल 20 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे भारत और अन्य एशियाई देश खरीद सकते हैं। उपलब्धता: फिलहाल समुद्र में करीब 18 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है। भारतीय रिफाइनरियां अब इस 'डिस्काउंटेड' तेल को उतारने की तैयारी कर रही हैं, जिससे घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
पाकिस्तान में ऊर्जा आपातकाल: सिर्फ 11 दिन का तेल बचा; रूस की 'सस्ते तेल' की पेशकश, लेकिन इस्लामाबाद खामोश | स्पेशल रिपोर्ट इस्लामाबाद/कराची | 18 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध की तपिश अब पाकिस्तान की दहलीज तक पहुँच गई है। देश एक भीषण ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ा है। जहाँ एक ओर पाकिस्तान के पास मात्र 11 दिनों का कच्चा तेल शेष बचा है, वहीं दूसरी ओर रूस ने उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 30 डॉलर सस्ता तेल देने की पेशकश की है। हैरानी की बात यह है कि रूस की इस 'लाइफलाइन' पर पाकिस्तान सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यहाँ पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था और तेल-गैस संकट की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. रूस की पेशकश: "हम तैयार हैं, पाकिस्तान पहल करे" पाकिस्तान में रूसी राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि रूस पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। कीमतों का अंतर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत $95 से $105 प्रति बैरल के बीच झूल रही है, जबकि रूस पाकिस्तान को यही तेल $70 से $76 में देने को तैयार है। पेच कहाँ फंसा है? राजदूत खोरेव के मुताबिक, रूस की ओर से दरवाजा खुला है, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक इसके लिए कोई 'ऑफिशियल रिक्वेस्ट' नहीं भेजी है। 2. पाकिस्तान का 'ऑयल शॉक': 11 दिन और 3 करोड़ की सब्सिडी पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव ने संसदीय समिति के सामने देश की डरावनी तस्वीर पेश की है: स्टॉक खत्म: देश के पास फिलहाल केवल 11 दिनों का कच्चा तेल बचा है। महंगाई का बोझ: पेट्रोल 321 PKR और डीजल 335 PKR प्रति लीटर की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहा है। गरीबों को राहत: सरकार ने 23 अरब पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी का ऐलान किया है, जो मोटरसाइकिल और रिक्शा चलाने वाले 3 करोड़ लोगों को दी जाएगी। 3. होर्मुज और रेड सी का संकट: सप्लाई चेन टूटी पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का 70% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जो अब युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित है। बढ़ा हुआ समय: पहले जो तेल 4-5 दिन में पहुँच जाता था, अब रेड सी (लाल सागर) के रास्ते आने में 12 दिन लग रहे हैं। ईरान से बातचीत: पाकिस्तान सरकार ईरान से गुहार लगा रही है कि उसके 4 जहाजों को होर्मुज स्ट्रैट से गुजरने की इजाजत दी जाए। गैस की किल्लत: कतर से आने वाली LNG सप्लाई लगभग ठप है। मार्च में 8 में से सिर्फ 2 कार्गो पहुँचे हैं, जिससे 14 अप्रैल के बाद देश में भारी गैस संकट की चेतावनी दी गई है। 4. रूसी तेल और पाकिस्तान का 'कड़वा' इतिहास पाकिस्तान रूस से तेल लेने में हिचकिचा क्यों रहा है? इसके पीछे 2023 के कड़वे अनुभव हैं: रिफाइनिंग की समस्या: पाकिस्तान की रिफाइनरियां रूसी तेल (Urals) को प्रोसेस करने के लिए अनुकूल नहीं हैं। इससे पेट्रोल कम निकलता है और 'फर्नेस ऑयल' ज्यादा, जो मुनाफे का सौदा नहीं है। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स: रूस से दूरी अधिक होने के कारण शिपिंग खर्च बढ़ जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पोर्ट बड़े जहाजों को हैंडल नहीं कर सकते, जिससे तेल को छोटे जहाजों में बदलना पड़ता है (Ship-to-Ship transfer), जिससे लागत और बढ़ जाती है। मुद्रा संकट: पिछली बार भुगतान चीनी युआन में करना पड़ा था, और पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार की पहले से ही भारी कमी है। 5. अमेरिका की 30 दिन की 'छूट': एक मौका? 13 मार्च को अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए दुनिया भर के देशों को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। ट्रम्प का दबाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि बाजार में तेल की सप्लाई बढ़े ताकि कीमतें $100 के नीचे आ सकें। सीमित अवसर: यह छूट केवल उस तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड है। पाकिस्तान के पास अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह एक छोटा सा 'विंडो' है। 📊 पाकिस्तान ऊर्जा संकट: मुख्य आंकड़े श्रेणी स्थिति / आंकड़े कच्चे तेल की दैनिक जरूरत 5 से 6 लाख बैरल वर्तमान स्टॉक केवल 11 दिन का LPG/LNG संकट 14 अप्रैल से भारी कमी की आशंका तेल आयात का स्रोत 70% मिडिल ईस्ट से डीजल की कीमत ( PKR) 335 रुपये प्रति लीटर 6. UN की इमरजेंसी बैठक और होर्मुज का भविष्य UN की समुद्री संस्था IMO (International Maritime Organization) जल्द ही लंदन में एक इमरजेंसी बैठक बुलाने वाली है। जहाजों की सुरक्षा: जापान, सिंगापुर और UAE जैसे देश फंसे हुए नाविकों के लिए सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) चाहते हैं। ईरान का रुख: ईरान ने स्पष्ट किया है कि समुद्र में असुरक्षा के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। हालांकि, युद्ध के बावजूद अब तक करीब 90 जहाज होर्मुज से चुपचाप (बिना सिग्नल के) निकलने में सफल रहे हैं।
ट्रम्प का अगला निशाना क्यूबा: "मैं इसे अपने कब्जे में लूंगा"; तेल की सप्लाई रोकी, अंधेरे में डूबा द्वीप और 65 साल पुराने संघर्ष की पूरी रिपोर्ट वॉशिंगटन/हवाना | 18 मार्च 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अपनी 'विनाशकारी कूटनीति' से दुनिया को चौंका दिया है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने खुले तौर पर घोषणा की है कि उनका इरादा क्यूबा को अपने नियंत्रण में लेने का है। वेनेजुएला और ईरान के बाद अब ट्रम्प प्रशासन की नजरें कैरेबियाई द्वीप क्यूबा पर टिक गई हैं, जिसे वे एक "असफल देश" मान रहे हैं। यहाँ इस भू-राजनीतिक भूचाल, क्यूबा के जमीनी हालात और दोनों देशों के खूनी इतिहास की विस्तृत और गहन रिपोर्ट दी गई है: 1. ओवल ऑफिस से ट्रम्प की 'खुली चेतावनी' सोमवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने क्यूबा को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उनके बयान के मुख्य अंश: कब्जे का इरादा: "मैं किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा... चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।" असफल देश का तमगा: "उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है। वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक सुंदर द्वीप है लेकिन वर्तमान में पूरी तरह विफल है।" प्राथमिकता की सूची: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता ईरान है, और उसके तुरंत बाद वे क्यूबा मामले को पूरी तरह से 'हैंडल' करेंगे। विश्लेषण: न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका के 65 साल के तनावपूर्ण इतिहास में यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रपति ने इतनी स्पष्टता से क्यूबा पर कब्जे या सीधे नियंत्रण की बात कही है। 2. क्यूबा की घेराबंदी: तेल की किल्लत और ब्लैकआउट अमेरिका ने क्यूबा को घुटनों पर लाने के लिए 'इकोनॉमिक स्ट्रैंगुलेशन' (आर्थिक गला घोंटना) की रणनीति अपनाई है: तेल पर प्रहार: जनवरी 2026 से अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई लगभग ठप कर दी है। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को बीच समुद्र में रोक लिया। महंगाई का तांडव: सप्लाई रुकने से क्यूबा के ब्लैक मार्केट में पेट्रोल की कीमत $35 प्रति गैलन (लगभग ₹3000/लीटर) तक पहुँच गई है। अंधेरे में डूबा देश: सोमवार को पूरे क्यूबा में ब्लैकआउट रहा। राजधानी हवाना का 70% हिस्सा मंगलवार सुबह तक बिना बिजली के था। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं और खाने-पीने की चीजों का अकाल पड़ गया है। 3. क्यूबा सरकार का 'सरेंडर' मोड और रूस का रुख हालात इतने खराब हैं कि क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल को झुकने पर मजबूर होना पड़ा है: अमेरिका से बातचीत: डियाज-कैनेल ने माना कि वे अमेरिका के साथ डील की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही अपनी अर्थव्यवस्था को खोल सकते हैं। सत्ता परिवर्तन का दबाव: रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि डियाज-कैनेल पद छोड़ें, ठीक वैसी ही रणनीति जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी। रूस की एंट्री: इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह अपने पुराने साथी क्यूबा को अकेला नहीं छोड़ेगा और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद मुहैया कराएगा। 📊 क्यूबा का संकट: एक नजर में (मार्च 2026) समस्या वर्तमान स्थिति प्रभाव तेल सप्लाई 9 जनवरी से लगभग बंद परिवहन और उद्योग ठप। बिजली रोजाना 15-20 घंटे की कटौती सोमवार को राष्ट्रव्यापी ब्लैकआउट। स्वास्थ्य दवाओं की भारी कमी इमरजेंसी सर्जरी रुकीं। अर्थव्यवस्था 1959 के बाद सबसे बुरा दौर रूस और अमेरिका के बीच फंसा देश। 4. ट्रम्प का 'बिजनेस माइंडसेट': क्यूबा में गोल्फ और निवेश ट्रम्प क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक दुश्मन नहीं, बल्कि एक रियल एस्टेट अवसर के रूप में देखते हैं: पुराना कनेक्शन: 1998 में ट्रम्प की कंपनी ने गुप्त रूप से क्यूबा का दौरा किया था। 2011-12 में उनके अधिकारियों ने वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावना तलाशी थी। जमीन की तारीफ: ट्रम्प ने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ करते हुए इसे निवेश के लिए बेहतरीन जगह बताया। हालांकि, उन्होंने यह गलत दावा भी किया कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि क्यूबा हर साल बड़े तूफानों का सामना करता है। 5. इतिहास के पन्ने: फिदेल कास्त्रो और 600 हत्या की कोशिशें अमेरिका और क्यूबा के बीच की यह दुश्मनी 65 साल पुरानी है: 1959 की क्रांति: फिदेल कास्त्रो ने तानाशाह बतिस्ता को हटाकर सत्ता संभाली और अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली। कोल्ड वॉर का केंद्र: अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद क्यूबा सोवियत संघ (रूस) के करीब चला गया, जिससे 1962 में 'मिसाइल संकट' पैदा हुआ। हत्या की साजिशें: अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) ने कास्त्रो को मारने के लिए 600 से ज्यादा बार कोशिश की। इसमें 'जहरीले सिगार', 'विस्फोटक शंख' और 'जहरीली कोल्ड क्रीम' जैसे अजीबोगरीब तरीके अपनाए गए, लेकिन कास्त्रो हर बार बच निकले। ओबामा की पहल: 55 साल बाद 2015 में बराक ओबामा क्यूबा जाने वाले पहले राष्ट्रपति बने थे, लेकिन ट्रम्प अब उस सुधार को पूरी तरह पलट रहे हैं।
मिडिल ईस्ट महाजंग Day 18: भारत की 'सॉफ्ट पावर' और 'एनर्जी सिक्योरिटी' का तालमेल; ईरान को भेजी मेडिकल मदद, मुंद्रा पहुँचा कच्चा तेल नई दिल्ली/तेहरान/तेल अवीव | 18 मार्च 2026 इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति और विनाशक हमले साथ-साथ चल रहे हैं। एक तरफ जहाँ इजराइल ने ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को मारने का दावा कर तेहरान के सुरक्षा तंत्र की चूलें हिला दी हैं, वहीं भारत ने युद्ध की विभीषिका के बीच मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ईरान को मेडिकल सहायता की पहली खेप भेजी है। समुद्र के रास्ते भी भारत के लिए अच्छी खबर है। होर्मुज स्ट्रैट के तनावपूर्ण पानी को पार कर भारतीय तेल टैंकर 'जग लाडकी' गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुँच चुका है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को बड़ी राहत मिली है। यहाँ 18वें दिन के युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. भारत की मानवीय पहल: ईरान को दवाओं की सप्लाई जंग के बीच भारत ने साबित किया है कि वह 'विश्व बंधु' की अपनी भूमिका पर अडिग है। रेड क्रिसेंट को मदद: भारत ने ईरान की 'रेड क्रिसेंट सोसाइटी' को जीवन रक्षक दवाओं और जरूरी मेडिकल उपकरणों की पहली खेप सफलतापूर्वक सौंप दी है। ईरान का आभार: तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने इस मदद का वीडियो साझा किया, जिसके बाद ईरान ने इसे "भारतीय लोगों का निस्वार्थ सहयोग" बताते हुए आभार व्यक्त किया। कूटनीतिक महत्व: यह मदद ऐसे समय में भेजी गई है जब ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध के कारण दवाओं की भारी किल्लत झेल रहा है। 2. इजराइल का बड़ा दावा: इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब ढेर! इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया है कि एक सटीक एयरस्ट्राइक में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मार गिराया गया है। कौन थे इस्माइल खातिब? वे ईरान के आंतरिक सुरक्षा नेटवर्क के सर्वेसर्वा थे। उन्हें अयातुल्ला खामेनेई का करीबी और 'हार्डलाइनर' माना जाता था। ईरान का पावर स्ट्रक्चर: यदि इस खबर की पुष्टि होती है, तो यह ईरान के खुफिया तंत्र के लिए लारीजानी की मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा। इससे ईरान के भीतर जासूसी रोकने और रणनीतिक फैसलों में बड़ी बाधा आएगी। 3. 'जग लाडकी' की मुंद्रा वापसी: भारत की ऊर्जा सुरक्षा भारतीय झंडे वाला विशाल तेल टैंकर 'जग लाडकी' सफलतापूर्वक मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) पहुँच गया है। कच्चे तेल का भंडार: इस टैंकर में 80,886 मीट्रिक टन (करीब 6 लाख बैरल) कच्चा तेल लदा है। कहाँ से आया? यह जहाज UAE के फुजैराह पोर्ट से चला था और युद्ध के सबसे खतरनाक क्षेत्र होर्मुज स्ट्रैट को पार कर भारत पहुँचा है। खपत का गणित: भारत रोजाना करीब 5.6 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है। 'जग लाडकी' जैसी सुरक्षित लैंडिंग भारत के पेट्रोलियम रिजर्व को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी है। 4. इजराइल का 'एनर्जी वॉर': साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला इजराइल ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी ऊर्जा ढांचे पर हमला शुरू कर दिया है। साउथ पार्स गैस फील्ड: इजराइली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरान के बुशेहर प्रांत में स्थित दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र 'साउथ पार्स' से जुड़ी सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक की। कतर की निंदा: कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, क्योंकि यह गैस फील्ड कतर के 'नॉर्थ फील्ड' का ही विस्तार है। कतर के मुताबिक, ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना "वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सुसाइड मिशन" जैसा है। ईरान की जवाबी चेतावनी: ईरान की IRGC ने सऊदी अरब, UAE और कतर को चेतावनी दी है कि वे अपने तेल ठिकानों से दूर रहें, क्योंकि अब ईरान भी दुश्मन के उन ठिकानों को निशाना बनाएगा जिन्हें अब तक 'सुरक्षित' माना जाता था। 📊 युद्ध का प्रभाव: ताजा आंकड़े (18 मार्च 2026) घटना / विवरण डेटा / स्थिति प्रभाव भारतीयों की वापसी 2.6 लाख (28 फरवरी से अब तक) विदेश मंत्रालय द्वारा बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल महंगा। इराक-तुर्किये समझौता पाइपलाइन फिर से शुरू तेल सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते की खोज। बहरीन का दावा 130 मिसाइलें मार गिराईं खाड़ी क्षेत्र में भारी हवाई युद्ध। 5. यूक्रेन के लिए 'बुरी खबर': जेलेंस्की की चिंता यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि मिडिल ईस्ट की जंग यूक्रेन के लिए काल साबित हो रही है। मिसाइलों की कमी: जेलेंस्की के मुताबिक, अमेरिका के पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम अब यूक्रेन के बजाय इजराइल की ओर मोड़े जा रहे हैं। पुतिन का फायदा: जेलेंस्की का मानना है कि इस जंग से रूस के राष्ट्रपति पुतिन सबसे ज्यादा खुश हैं, क्योंकि इससे पश्चिमी देशों का ध्यान और संसाधन यूक्रेन से हटकर मिडिल ईस्ट पर केंद्रित हो गए हैं। 6. राष्ट्रगान विवाद और महिला फुटबॉल टीम की वापसी ईरान की महिला फुटबॉल टीम, जिसने ऑस्ट्रेलिया में मैच के दौरान अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था, अब वतन लौट आई है। गद्दार से 'बेटी' तक का सफर: पहले उन्हें ईरानी मीडिया में गद्दार कहा गया, लेकिन अब ईरान के संसद अध्यक्ष कालीबाफ ने उन्हें "देश की प्यारी बेटियां" कहते हुए भव्य स्वागत का वादा किया है।
मिडिल ईस्ट महाजंग: 15वां दिन | भारत के लिए बड़ी राहत, होर्मुज स्ट्रैट से निकले गैस जहाज; ट्रम्प का खार्ग आइलैंड पर भीषण प्रहार और वैश्विक ऊर्जा संकट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान | 15 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज 15वां दिन है। इस महायुद्ध के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत की खबर सामने आई है। युद्ध के कारण ठप पड़े दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज स्ट्रैट (Strait of Hormuz) से भारत के दो विशाल LPG जहाज सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। जहाँ एक ओर समुद्र में भारत को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर जमीन और आसमान में बारूद की बारिश जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड पर भीषण हमले का फुटेज जारी कर हलचल मचा दी है। यहाँ 15वें दिन के युद्ध और उससे जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों की विस्तृत और गहन रिपोर्ट दी गई है: 1. भारत की बड़ी जीत: 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' की सुरक्षित वापसी मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद भारत में रसोई गैस (LPG) की किल्लत बढ़ गई थी, क्योंकि भारत के कई जहाज युद्ध क्षेत्र में फंस गए थे। सुरक्षित मार्ग: शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पुष्टि की है कि भारतीय झंडे वाले दो LPG कैरियर— 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' ने शनिवार को सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रैट पार कर लिया है। बड़ी खेप: ये दोनों जहाज अपने साथ कुल 92,700 टन LPG लेकर आ रहे हैं। यह खेप भारत में गैस की कमी को दूर करने में संजीवनी का काम करेगी। गंतव्य: ये जहाज गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं और अगले 48 से 72 घंटों में भारत पहुँच जाएंगे। ईरान का रुख: ईरान ने कूटनीतिक बातचीत के बाद इन जहाजों को गुजरने की अनुमति दी। ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने संकेत दिया है कि अन्य भारतीय जहाजों को भी धीरे-धीरे रास्ता दिया जा सकता है। 2. ट्रम्प का 'ऑपरेशन खार्ग आइलैंड': 90 सैन्य ठिकाने तबाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके सबसे बड़े तेल केंद्र खार्ग आइलैंड (Kharg Island) पर 'लार्ज-स्केल प्रिसिजन स्ट्राइक' की है। हमले का दायरा: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस हमले में ईरान के 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है। इनमें मिसाइल स्टोरेज बंकर, नौसैनिक माइंस डिपो और रडार सिस्टम शामिल हैं। तेल इंफ्रास्ट्रक्चर: अमेरिका ने दावा किया है कि उसने फिलहाल तेल के कुओं या रिफाइनरी को नुकसान नहीं पहुँचाया है, लेकिन यह एक चेतावनी है। यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट नहीं खोला, तो उसके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी राख कर दिया जाएगा। ईरान का पलटवार: ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि खार्ग आइलैंड से तेल निर्यात सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी हमले बेअसर रहे हैं। 3. युद्ध के मैदान से अन्य बड़े अपडेट्स A. ईरान की धमकी: "अमेरिकी बेस सुरक्षा नहीं, खतरा हैं" ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने खाड़ी देशों (जैसे कतर, बहरीन, UAE) को चेतावनी दी है कि उनके यहाँ मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे क्षेत्र के लिए खतरा हैं। ईरान का मानना है कि अमेरिका केवल इजराइल के हितों के लिए अरब देशों की सुरक्षा को दांव पर लगा रहा है। B. UAE और बहरीन पर हमले ईरान की IRGC नौसेना ने दावा किया है कि उसने अबू धाबी के अल-धफरा एयरबेस और बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए हैं। UAE ने पलटवार करते हुए कहा कि उसने ईरान की 9 बैलिस्टिक मिसाइलें और 33 ड्रोन मार गिराए हैं। UAE ने इसे ईरान का 'नैतिक दिवालियापन' करार दिया है। C. इजराइल पर मिसाइल बारिश ईरान ने इजराइल के दक्षिणी शहर इलात पर मिसाइल हमला किया, जिससे सड़क पर एक बड़ा गड्ढा (क्रेटर) बन गया। इस हमले में एक 12 साल के बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं। उधर, लेबनान से हिजबुल्लाह ने भी उत्तरी इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर रॉकेट दागे हैं। 4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल और महंगाई का तांडव युद्ध का असर अब आम आदमी की जेब पर साफ दिखने लगा है: अमेरिका में हाहाकार: अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें युद्ध शुरू होने के बाद 23% तक बढ़ गई हैं। गैस की औसत कीमत $3.68 प्रति गैलन पहुँच गई है। पाकिस्तान की बदहाली: ईंधन संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 5% से 30% तक की कटौती कर दी है। सरकारी गाड़ियों के ईंधन में 50% की कटौती की गई है। तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $103 प्रति बैरल के पार निकल गया है। 📊 युद्ध का प्रभाव: एक नजर में क्षेत्र / देश प्रभाव वर्तमान स्थिति भारत 2 LPG जहाज सुरक्षित निकले गैस किल्लत में थोड़ी राहत की उम्मीद। अमेरिका पेट्रोल कीमतें 23% बढ़ीं महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी। पाकिस्तान सैलरी में 30% तक कटौती आर्थिक आपातकाल जैसे हालात। जापान ऑस्ट्रेलिया से LNG की मांग ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए पार्टनर्स की तलाश। ईरान खार्ग आइलैंड पर हमला सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान। 5. कूटनीतिक हलचल: क्या सरकार गिरेगी? अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा सरकार गिरती है, तो वे अंतरिम शासन (Transitional System) संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने इसके लिए ईरान के भीतर और बाहर के विशेषज्ञों की एक टीम भी तैयार कर ली है। 6. कोच्चि में खड़ा ईरानी युद्धपोत केरल के कोच्चि बंदरगाह पर ईरानी नौसेना का जहाज IRIS लावन अब भी खड़ा है। तकनीकी खराबी और युद्ध के कारण यह जहाज वापस नहीं जा पाया है। हालांकि, भारत ने मानवीय आधार पर इसके क्रू मेंबर्स को चार्टर्ड फ्लाइट से वापस भेजने में मदद की है।
अमेरिका का 'सेक्शन 301' प्रहार: वैश्विक व्यापार युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव का संपूर्ण विश्लेषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। 'सेक्शन 301' के तहत शुरू की गई यह जांच केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह "अमेरिका फर्स्ट" नीति का एक आक्रामक विस्तार है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को इसके हर सूक्ष्म पहलू से समझते हैं। 1. पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की रणनीति फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि राष्ट्रपति के पास बिना ठोस आधार या विधायी स्पष्टता के इस तरह के एकतरफा टैक्स लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। इस झटके के बाद, ट्रम्प प्रशासन ने पीछे हटने के बजाय 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' के 'सेक्शन 301' का सहारा लिया है। यह एक ऐसा हथियार है जिसे कानूनी रूप से चुनौती देना कठिन है क्योंकि यह "अनुचित व्यापार व्यवहार" (Unfair Trade Practices) की जांच पर आधारित होता है। 2. 'सेक्शन 301' क्या है और यह क्यों खतरनाक है? यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को किसी भी विदेशी देश की उन नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जो: अमेरिकी वाणिज्य को बाधित करती हैं। अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं। अमेरिकी कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बनाती हैं। ताकत: इसके तहत अमेरिका बिना WTO (विश्व व्यापार संगठन) की अनुमति के सीधे जवाबी टैरिफ लगा सकता है। यह एक तरह की "आर्थिक दादागिरी" या "प्रोटेक्शनिज्म" (संरक्षणवाद) का उपकरण माना जाता है। 3. जांच के दायरे में आए 16 देश: एक तुलनात्मक अध्ययन ट्रम्प प्रशासन ने इस बार केवल चीन को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि अपने मित्रों और सहयोगियों को भी रडार पर रखा है। श्रेणी देश मुख्य कारण महाशक्ति चीन भारी व्यापार अधिशेष और सब्सिडी रणनीतिक साझेदार भारत, जापान, दक्षिण कोरिया डिजिटल टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग नीतियां पड़ोसी मैक्सिको ऑटोमोबाइल डंपिंग और यूएसएमसीए उल्लंघन यूरोपीय गुट यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे कृषि सब्सिडी और स्टील विवाद दक्षिण-पूर्व एशिया वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, आदि डंपिंग और मुद्रा हेरफेर का संदेह 4. एक्सेस कैपेसिटी (अतिरिक्त क्षमता) का संकट: जूते वाली फैक्ट्री का गणित अमेरिका का सबसे बड़ा आरोप 'एक्सेस कैपेसिटी' पर है। इसे "स्टेट-स्पॉन्सर्ड डंपिंग" भी कहा जाता है। समस्या: चीन और भारत जैसे देश अपनी घरेलू जरूरतों से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर लेते हैं। प्रभाव: जब घरेलू मांग कम होती है, तो वे कंपनियां बंद न हों, इसके लिए सरकारें उन्हें सब्सिडी देती हैं। फिर यह माल वैश्विक बाजार (विशेषकर अमेरिका) में इतनी कम कीमत पर बेचा जाता है कि अमेरिकी स्थानीय कंपनियां दिवालिया होने लगती हैं। उदाहरण: स्टील, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 5. भारत की स्थिति: राहत या चिंता? भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है लेकिन चिंताजनक अधिक है। सकारात्मक: 2024 की तुलना में 2025 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा कम होकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया है। यह दर्शाता है कि भारत से आयात संतुलित हो रहा है। नकारात्मक: कमी के बावजूद, भारत 'टॉप 16' की सूची में है। अमेरिका को भारत की 'मेक इन इंडिया' सब्सिडी और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में लगने वाले आयात शुल्क से आपत्ति है। यदि सेक्शन 301 के तहत भारत को "दोषी" माना गया, तो हमारे आईटी सेक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। 6. चीन: व्यापार युद्ध का केंद्र बिंदु चीन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025 में चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया है। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पूरी दुनिया में अपना माल डंप कर रहा है। 'सेक्शन 301' के जरिए चीन पर 60% से 100% तक टैरिफ लगाने की जमीन तैयार की जा रही है। 7. मानवाधिकार और व्यापार: 'फोर्स्ड लेबर' जांच USTR जेमिसन ग्रीर ने एक और मोर्चा खोला है—फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम)। यह जांच नैतिक आधार पर व्यापार को रोकने का प्रयास है। शिनजियांग (चीन) के बाद अब अमेरिका वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों के टेक्सटाइल उद्योगों की जांच कर सकता है। यदि किसी उत्पाद की सप्लाई चेन में बंधुआ मजदूरी का अंश मिला, तो उस पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है। 8. टाइमलाइन: गर्मियों में आएगा 'आर्थिक तूफान' 15 अप्रैल 2026: जनता और व्यापारिक समूहों से फीडबैक लेने की अंतिम तिथि। 5 मई 2026: सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing), जहाँ देश अपना पक्ष रखेंगे। जुलाई 2026: अस्थाई टैरिफ की समय सीमा समाप्त होगी और सेक्शन 301 के नए टैरिफ लागू हो सकते हैं। 9. निष्कर्ष और भविष्य की राह डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने वाला है। अमेरिका अब केवल व्यापार नहीं करना चाहता, वह अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता है। एक्सपोर्टर्स के लिए सुझाव: बाजार विविधीकरण (Diversification): केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी बाजारों की ओर देखें। अनुपालन (Compliance): अपनी फैक्ट्री में लेबर स्टैंडर्ड और सब्सिडी के कागजातों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखें। लागत प्रबंधन: जुलाई के बाद टैरिफ बढ़ने से आपकी कीमतें बढ़ेंगी, इसलिए अभी से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर विचार करें।
होर्मुज स्ट्रैट में बढ़ा खतरा: अमेरिका ने तेल टैंकरों को सुरक्षा देने से किया इनकार; भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ईरान से 'महा-मंथन' वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 12 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे बड़ी चिंता सामने आई है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल होर्मुज स्ट्रैट (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा (Escort) प्रदान नहीं करेगा। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को लेकर डर बढ़ा दिया है। वहीं, भारत के लिए राहत और चिंता दोनों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपने 9,000 नागरिकों और ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। यहाँ इस युद्ध के ताज़ा अपडेट्स और कूटनीतिक हलचलों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. अमेरिका का बड़ा फैसला: "अभी टैंकरों की सुरक्षा नहीं" अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने CNBC को दिए इंटरव्यू में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना अभी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है। इसके पीछे की मुख्य वजहें: प्राथमिकता में बदलाव: अमेरिका का वर्तमान फोकस तेल टैंकरों को बचाने के बजाय ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमताओं और उनके पीछे खड़े उद्योगों को नष्ट करने पर है। समय सीमा: क्रिस राइट के अनुसार, टैंकरों की सुरक्षा का मिशन महीने के अंत (मार्च के आखिर) तक ही शुरू हो सकता है। फिलहाल रक्षा विभाग इस पर केवल चर्चा कर रहा है। रणनीतिक जोखिम: विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का मतलब ईरान के साथ सीधी समुद्री जंग में उतरना होगा, जिसके लिए फिलहाल अमेरिका अपनी पूरी ताकत को बचाकर रखना चाहता है। 2. भारत-ईरान कूटनीति: क्या भारतीय जहाज सुरक्षित हैं? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की स्थिति स्पष्ट की: लगातार बातचीत: पिछले कुछ दिनों में भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच 3 बार उच्च स्तरीय वार्ता हुई है। मुख्य मुद्दा समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई है। जहाजों की आवाजाही: जब पूछा गया कि क्या ईरान ने भारतीय जहाजों को रास्ता देने का वादा किया है, तो MEA ने कहा कि इस पर अभी कुछ भी कहना "जल्दबाजी" होगी। खामेनेई को श्रद्धांजलि: भारत ने कूटनीतिक शिष्टाचार निभाते हुए दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी है। विदेश सचिव ने 5 मार्च को शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे। 📊 विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान की 4 बड़ी बातें मुख्य बिंदु विवरण वर्तमान स्थिति भारतीयों की संख्या ईरान में कुल भारतीय नागरिक 9,000 (छात्र, नाविक, कारोबारी और तीर्थयात्री) सुरक्षित निकासी वैकल्पिक रास्ते अजरबैजान और आर्मेनिया के जरिए वापसी में सरकार मदद कर रही है। पीएम मोदी की पहल खाड़ी नेताओं से संवाद पीएम ने जल्द शांति के लिए 'संवाद और कूटनीति' (Dialogue & Diplomacy) पर जोर दिया। मानवीय चिंता नागरिकों की सुरक्षा भारत ने युद्ध में आम लोगों को निशाना न बनाने की सख्त अपील की है। 3. युद्ध की विभीषिका: ताज़ा हमले और तस्वीरें जंग का मैदान अब रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल चुका है: दुबई पर हमला: बुधवार देर रात दुबई के आलीशान एड्रेस क्रीक हार्बर होटल पर ड्रोन हमला हुआ। पर्यटन के केंद्र दुबई में इस हमले से विदेशी नागरिकों में दहशत है। ओमान में तबाही: ओमान के सलालाह बंदरगाह पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद भारी आग लग गई, जिससे खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाहों पर कामकाज ठप है। फारस की खाड़ी: बुधवार रात एक अज्ञात मिसाइल हमले के बाद एक तेल टैंकर धू-धू कर जल उठा। किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इजराइली एयरस्ट्राइक: इजराइल ने बेरूत (लेबनान) में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अब तक का सबसे सटीक हमला करने का दावा किया है। 4. ऊर्जा सुरक्षा: भारत के सामने चुनौतियां होर्मुज स्ट्रैट से तेल सप्लाई न मिलने का मतलब भारत के लिए गंभीर आर्थिक संकट हो सकता है: महंगाई का खतरा: अगर तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल पार करती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई की कीमतें बढ़ जाएंगी। LNG सप्लाई: कतर से आने वाली गैस सप्लाई बाधित होने से बिजली और फर्टिलाइजर उत्पादन पर असर पड़ सकता है। वैकल्पिक स्रोत: भारत अब रूस और अफ्रीका से तेल आयात बढ़ाने की संभावनाओं को तलाश रहा है, लेकिन लंबी समुद्री दूरी परिवहन लागत बढ़ा देगी।
खार्ग आइलैंड: ईरान की अर्थव्यवस्था की 'शह रग' जिस पर टिकी है महाजंग की दिशा; क्या ट्रम्प लेंगे कब्जे का बड़ा फैसला? नई दिल्ली/तेहरान | 10 मार्च 2026 अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष में अब सारा ध्यान एक छोटे से द्वीप पर टिक गया है— खार्ग आइलैंड (Kharg Island)। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान के लिए महज जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की 'शह रग' (Jugular Vein) है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट डेटा के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन इस द्वीप पर कब्जे या इसके तेल टर्मिनल्स को ठप करने के सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि इस आइलैंड पर हमला होता है, तो यह न केवल ईरान को घुटनों पर ला सकता है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में प्रलय ला सकता है। आइए समझते हैं खार्ग आइलैंड की सामरिक अहमियत और इस पर मंडराते खतरों की विस्तृत रिपोर्ट: 1. खार्ग आइलैंड: ईरान का 'मनी मशीन' ईरान दुनिया का एक प्रमुख तेल उत्पादक है, और खार्ग आइलैंड उस उत्पादन को दुनिया तक पहुँचाने का मुख्य द्वार है। निर्यात का केंद्र: ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का 80% से 90% हिस्सा अकेले इसी द्वीप से होकर गुजरता है। विशाल क्षमता: यहाँ के टर्मिनल्स से प्रतिदिन 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है। स्टोरेज की ताकत: इस आइलैंड पर 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल जमा है, जो किसी भी संकट की स्थिति में 10-12 दिनों के निर्यात के लिए पर्याप्त है। 2. 'डार्क फ्लीट' और जंग के बीच गुप्त निर्यात जंग के 11 दिन बीत जाने के बाद भी ईरान ने तेल बेचना बंद नहीं किया है। ट्रैकिंग से गायब जहाज: ईरान 'डार्क फ्लीट' (Dark Fleet) का उपयोग कर रहा है। ये वे टैंकर हैं जो अपना AIS (Automatic Identification System) बंद कर देते हैं ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न हो सके। आंकड़े: 28 फरवरी 2026 से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल तेल चोरी-छिपे निर्यात किया जा चुका है। युद्ध से पहले की तैयारी: युद्ध शुरू होने से ठीक पहले (15-20 फरवरी) ईरान ने निर्यात को तीन गुना बढ़ाकर 30 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया था, ताकि युद्ध के लिए फंड जुटाया जा सके। 3. अमेरिका की 'रेड लाइन' और कब्जे की रणनीति हडसन इंस्टीट्यूट के माइकल डोरान और अन्य एक्सपर्ट्स के अनुसार, खार्ग आइलैंड अब तक बचा हुआ है क्योंकि यह अमेरिका की 'रेड लाइन' में आता था। अर्थव्यवस्था की तबाही: ट्रम्प प्रशासन जानता है कि खार्ग आइलैंड को तबाह करने का मतलब है ईरान की आय का सबसे बड़ा स्रोत खत्म करना। बिना तेल के पैसे के, ईरान के लिए अपनी सेना और प्रोक्सी समूहों (हिजबुल्लाह, हूती) को फंड करना नामुमकिन हो जाएगा। सैन्य विकल्प: अमेरिकी रक्षा विभाग इस बात का आकलन कर रहा है कि क्या आइलैंड पर कब्जा करना उसे नष्ट करने से बेहतर विकल्प है, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह टूटने से बचाया जा सके। 📊 खार्ग आइलैंड: रणनीतिक फैक्ट फाइल विशेषता विवरण सामरिक महत्व स्थिति ईरान तट से 25-30 किमी दूर (फारस की खाड़ी) होर्मुज स्ट्रैट के पास, जहाजों के लिए सुलभ। तेल पाइपलाइन्स अहवाज, मरून और गचसरान से जुड़ी मुख्य तेल क्षेत्रों का सीधा संपर्क। वैश्विक योगदान कुल वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का 4.5% इसके रुकने से तेल की कीमतें $10-15 बढ़ सकती हैं। इतिहास 1980 के ईरान-इराक युद्ध में हमला हुआ पहले भी युद्ध का मुख्य लक्ष्य रहा है। 4. अगर हमला हुआ, तो क्या होगा? (परिणाम) विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खार्ग आइलैंड पर हमले के परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं: तीसरा विश्व युद्ध: यदि ईरान की आय का एकमात्र स्रोत छिना, तो वह पूरे मिडिल ईस्ट में 'आत्मघाती' हमले शुरू कर सकता है, जिससे अमेरिका और इजराइल सीधे युद्ध में खिंच जाएंगे। वैश्विक महंगाई: दुनिया का 20% तेल होर्मुज स्ट्रैट से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर सबसे ज्यादा होगा। पर्यावरण का संकट: तेल टर्मिनल्स पर धमाकों से फारस की खाड़ी में तेल का रिसाव हो सकता है, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर देगा। 5. इतिहास की गूँज: कार्टर और रीगन की नीतियां खार्ग आइलैंड हमेशा से अमेरिका के रडार पर रहा है: 1979 (जिमी कार्टर): बंधक संकट के दौरान कब्जे की सलाह दी गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। 1980 के दशक (रोनाल्ड रीगन): अमेरिका ने अन्य ठिकानों पर हमले किए, लेकिन खार्ग को छोड़ दिया ताकि वैश्विक तेल संकट न हो। ईरान-इराक युद्ध: इराक ने यहाँ भारी तबाही मचाई थी, लेकिन ईरान ने इसे फिर से खड़ा कर लिया।
मिडल ईस्ट महाजंग Day 11: ईरान पर आज होगा 'सबसे भीषण' हमला; अमेरिकी रक्षा मंत्री की चेतावनी— "तेहरान को मिटाने की तैयारी", 116 डॉलर के पार पहुँचा कच्चा तेल तेहरान/वॉशिंगटन/दुबई | 10 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब अपने सबसे निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। आज जंग का 11वां दिन है और दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि मंगलवार को ईरान पर "इतिहास का सबसे तीव्र हवाई हमला" किया जाएगा। इस बीच, खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने के कारण दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। यहाँ 11वें दिन की युद्ध स्थिति, वैश्विक ऊर्जा संकट और राजनीतिक बयानबाजी की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. वॉर रूम अपडेट: "ईरान पर आज होगा महाप्रलय" अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' के अगले चरण की घोषणा की है: सबसे बड़ा हमला: रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, आज मंगलवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा। इसमें B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की लहरें शामिल होंगी। ईरान का पलटवार: ईरान ने सोमवार रात इजराइल पर 1 टन वारहेड वाली मिसाइलें दागकर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। साथ ही, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ट्रम्प की चेतावनी: डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका ईरान के उन ठिकानों को मिटा देगा जिन्हें दोबारा बनाना असंभव होगा। 2. ऊर्जा संकट: तेल की किल्लत से दुनिया में मची 'इमरजेंसी' ईरान-इजराइल युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले 'ऊर्जा क्षेत्र' को पंगु बना दिया है: भारत पर असर: भारत अपनी 59% LNG कतर और UAE से खरीदता है। होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से सप्लाई रुक गई है, जिससे देश में महंगाई और ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है। अब तक 52,000 भारतीय सुरक्षित वतन लौट चुके हैं। पाकिस्तान और अन्य देश: पाकिस्तान में मंत्रियों की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई है और स्कूल 2 हफ्ते के लिए बंद हैं। थाईलैंड में लोगों को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने और 'वर्क फ्रॉम होम' करने को कहा गया है। सऊदी अरामको की चेतावनी: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कहा है कि दुनिया में तेल का भंडार पिछले 5 साल के न्यूनतम स्तर पर है। सप्लाई बाधित होने से वैश्विक मंदी (Global Recession) आना तय है। 📊 युद्ध का प्रभाव: 11 दिनों की भयावहता (डेटा शीट) प्रभाव क्षेत्र विवरण वर्तमान स्थिति मानवीय क्षति (ईरान) तेहरान और अन्य शहर 1,200+ मौतें, 10,000+ घायल बच्चों की मौत ईरान सरकार का दावा 193 बच्चों की जान गई वायु रक्षा (बहरीन) इंटरसेप्ट की गई मिसाइलें 105 मिसाइलें, 176 ड्रोन रिफाइनरी हमला अबू धाबी (रुवैस कॉम्प्लेक्स) ड्रोन हमले से भीषण आग हवाई यातायात मिडिल ईस्ट एयरस्पेस इराक, ईरान, इजराइल, UAE बंद 3. रणनीतिक तैनाती: तुर्किये और दक्षिण कोरिया का रुख युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक फैल रही है: तुर्किये में पैट्रियट: तुर्किये ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए नाटो (NATO) के सहयोग से मालात्या शहर में MIM-104 पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। दक्षिण कोरिया की चिंता: दक्षिण कोरिया से अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम को युद्ध क्षेत्र में भेजने की खबरों से वहां तनाव है, हालांकि राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि वे अमेरिका को अपने हथियार ले जाने से नहीं रोक सकते। रूस को फायदा: यूरोपीय परिषद ने दावा किया है कि इस युद्ध से सबसे ज्यादा फायदा रूस को हो रहा है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से उसकी आय बढ़ी है और दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हट गया है। 4. ईरान की 'नो सीजफायर' पॉलिसी ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं: अली लारीजानी का जवाब: उन्होंने ट्रम्प को चेतावनी दी कि ईरान को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद मिट जाएंगे। ईरान ने किसी भी प्रकार के युद्धविराम (Ceasefire) से इनकार किया है। होर्मुज स्ट्रैट पर टैक्स: ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'सिक्योरिटी टैक्स' लगाने की योजना बना रहा है, ताकि अमेरिका के सहयोगियों पर दबाव बनाया जा सके।
मिडल ईस्ट महाजंग: 12 देश युद्ध की आग में, लेकिन यमन के 'हूती' अब तक चुप क्यों? क्या यह किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है? सना/दुबई | 9 मार्च 2026 इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमलों के बाद पूरा पश्चिम एशिया (Middle East) बारूद के ढेर पर बैठा है। इस महाजंग में अब तक ईरान, इजराइल, सऊदी अरब, लेबनान और यूएई समेत 12 देश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। लेकिन एक नाम जो पिछले दो वर्षों से रेड सी (Red Sea) और इजराइल के लिए सिरदर्द बना हुआ था, वह इस बार रहस्यमयी तरीके से शांत है— यमन के हूती विद्रोही। जंग के 9 दिन बीत जाने के बाद भी हूतियों की ओर से केवल बयानबाजी हुई है, कोई बड़ा सैन्य एक्शन नहीं। क्या यह हूतियों की कमजोरी है या किसी बड़ी रणनीतिक साजिश का हिस्सा? आइए समझते हैं इस युद्ध के समीकरण और यमन की चुप्पी के पीछे की विस्तृत रिपोर्ट: 1. हूतियों की चुप्पी: डर या सोची-समझी रणनीति? एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूतियों का इस जंग से फिलहाल दूर रहना उनकी 'अस्तित्व बचाने' की रणनीति (Survival Strategy) का हिस्सा है। पिछला जख्म: 28 अगस्त 2025 को इजराइल ने यमन के सना में एक भीषण एयरस्ट्राइक की थी। इस हमले में हूती सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और आर्मी चीफ मोहम्मद अल-घुमारी समेत 12 टॉप लीडर्स मारे गए थे। सीधी कार्रवाई का डर: मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार लुका नेवोला के अनुसार, हूतियों की प्राथमिकता अब अमेरिका और इजराइल की सीधी जवाबी कार्रवाई से बचना है। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने कोई बड़ी मिसाइल दागी, तो उनकी बची-कुची टॉप लीडरशिप और सना के नियंत्रण वाले इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इजराइली खुफिया तंत्र का खौफ: हूतियों को आभास है कि इजराइल का खुफिया तंत्र उनके सुरक्षित ठिकानों तक पहुँच चुका है। 2. ईरान का 'प्लान-B': हूतियों को रिजर्व फोर्स के रूप में बचाना? यमनी राजनीतिक विश्लेषक सदाम अल-हुरैबी का तर्क है कि हूतियों की चुप्पी के पीछे खुद तेहरान (ईरान) का हाथ हो सकता है: ताकत को बचाकर रखना: ईरान फिलहाल अपने सभी पत्तों को एक साथ नहीं खोलना चाहता। वह हूतियों को एक 'रिजर्व फोर्स' के रूप में देख रहा है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाएगा जब इजराइल या अमेरिका ईरान के भीतर और गहरे घाव देंगे। हथियारों की तस्करी का संकट: अगर ईरान का शासन कमजोर पड़ता है या गिर जाता है, तो यमन तक पहुँचने वाले ईरानी हथियारों की सप्लाई लाइन कट जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूतियों के पास मौजूद ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलें रूस, चीन और ईरान की तकनीक से बनी हैं, जो तस्करी के जरिए वहां पहुँचती हैं। 📊 हूती विद्रोहियों का प्रोफाइल: ताकत और चुनौतियां श्रेणी विवरण प्रभाव मुख्य लीडर अब्दुल मलिक अल-हूती ईरान के कट्टर समर्थक और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' के सदस्य। सैन्य क्षमता बैलिस्टिक मिसाइल, सुसाइड ड्रोन रेड सी के व्यापारिक जहाजों और इजराइल के ईलात शहर तक मारक क्षमता। आर्थिक प्रभाव रेड सी (Red Sea) ब्लॉक करना सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर के समुद्री व्यापार को बाधित करने की क्षमता। बड़ा नुकसान अगस्त 2025 का हमला प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ की मौत से संगठन को गहरा धक्का। 3. क्या हूती फिर से रेड सी में कोहराम मचाएंगे? साल 2023 से 2025 के बीच हूतियों ने लाल सागर (Red Sea) में जहाजों पर हमले कर वैश्विक व्यापार को हिला दिया था। पिछला रिकॉर्ड: इस दौरान 9 नाविकों की मौत हुई और 4 जहाज डूब गए। संभावित टारगेट: नेवोला के अनुसार, अगर युद्ध लंबा चला, तो हूती केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि अमेरिकी युद्धपोतों, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बेसों और इजराइल के सहयोगियों जैसे UAE और सोमालिलैंड को भी निशाना बना सकते हैं। अब्दुल मलिक की चेतावनी: हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इस हफ्ते कहा है कि उनके सैनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी समय 'सैन्य कार्रवाई' शुरू की जा सकती है। 4. कौन हैं हूती? (इतिहास और शिया-सुन्नी विवाद) यमन का गृह युद्ध केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि सदियों पुराने शिया-सुन्नी विवाद का आधुनिक रूप है: 2014 की क्रांति: शिया विद्रोहियों (हूतियों) ने तत्कालीन सुन्नी सरकार (अब्दरब्बू मंसूर हादी) के खिलाफ मोर्चा खोला और देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। ईरान बनाम सऊदी: इस जंग में हूतियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला, जबकि यमन की सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का साथ मिला। मौजूदा स्थिति: यमन का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है, हूतियों के नियंत्रण में है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार निर्वासन में या दक्षिण के कुछ हिस्सों में सिमटी हुई है।
मिडल ईस्ट महाजंग Day 10: तेहरान-इस्फहान पर इजराइल की 'वाइड-स्केल' एयरस्ट्राइक; नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई घायल, लेबनान में 83 बच्चों की मौत तेहरान/यरूशलेम/लंदन | 9 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज दसवां दिन है। युद्ध अब अपने सबसे विनाशकारी दौर में पहुँच चुका है। इजराइल ने 'ऑपरेशन लियोनस् रोर' के तहत ईरान के पावर सेंटर पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला शुरू किया है। इस बीच, ईरान की सत्ता में हुए ऐतिहासिक बदलाव और युद्ध की विभीषिका ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। यहाँ दसवें दिन के युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक संकट की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. ईरान का नया नेतृत्व: मुजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर ईरान में 35 साल पुराने युग का अंत हो गया है। 28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। सत्ता परिवर्तन: 88 इमामों की काउंसिल ने मुजतबा को ईरान का सर्वोच्च नेता चुना। ईरान के कानून के मुताबिक, इस पद के लिए 'अयातुल्ला' होना अनिवार्य है, जो एक उच्च धार्मिक पदवी है। मुजतबा घायल: नियुक्ति के कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि मुजतबा खामेनेई युद्ध में घायल हो गए हैं। ईरानी सरकारी टीवी ने उन्हें 'जानबाज' (युद्ध में घायल योद्धा) कहकर संबोधित किया। हालांकि, उनके घायल होने की सटीक जगह और स्थिति गोपनीय रखी गई है। पुतिन की बधाई: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुजतबा को बधाई देते हुए कहा कि रूस इस कठिन समय में ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है। 2. इजराइल का 'वाइड-स्केल' हमला: आग की नदियां और मलबे का ढेर इजराइली वायुसेना ने ईरान के सैन्य और आर्थिक ढांचे को पंगु बनाने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर हमले किए हैं: निशाना: राजधानी तेहरान, परमाणु केंद्र इस्फहान और दक्षिणी बंदरगाह इलाकों में IRGC के कमांड सेंटर्स, रॉकेट इंजन फैक्ट्रियों और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया। आग की नदी: तेहरान में तेल भंडारण ठिकानों (Oil Storage) पर हमले के बाद सड़कों पर तेल बहने लगा, जिसमें आग लग गई। सोशल मीडिया पर सड़कों के किनारे 'आग की नदी' बहने के दृश्य वायरल हो रहे हैं। कुवैत बेस पर प्रहार: ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत में अमेरिकी अल-अदीरी हेलीकॉप्टर एयरबेस पर ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से हमला किया, जिससे अमेरिकी लॉजिस्टिक ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। 3. लेबनान फ्रंट: बच्चों के लिए 'डेथ जोन' बना युद्ध इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी जंग में मासूम बच्चों की बलि चढ़ रही है: यूनिसेफ की रिपोर्ट: पिछले 7 दिनों में लेबनान में 83 बच्चों की मौत हो चुकी है और 254 घायल हैं। औसतन हर दिन 10 से ज्यादा बच्चे अपनी जान गंवा रहे हैं। विस्थापन: करीब 7 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, जिनमें 2 लाख बच्चे हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा है कि जनता युद्ध से थक चुकी है, लेकिन इजराइल ने हमलों की तीव्रता कम नहीं की है। व्हाइट फॉस्फोरस का आरोप: ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया है कि इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में खतरनाक व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। 📊 युद्ध का प्रभाव: 10 दिनों की विनाशलीला (आंकड़े) श्रेणी विवरण संख्या / स्थिति कुल मौतें (ईरान) 9 दिनों का आधिकारिक आंकड़ा 1,255 लोग बच्चों की मौत मिनाब स्कूल और लेबनान मिलाकर 250+ बच्चे मिसाइल/ड्रोन UAE द्वारा रोके गए हमले 253 मिसाइलें, 1,440 ड्रोन तेल की कीमत वैश्विक बाजार में कच्चा तेल $116 प्रति बैरल (25% उछाल) भारतीय हताहत तेल अवीव में मिसाइल मलबा 1 घायल (हालत स्थिर) 4. वैश्विक आर्थिक संकट: G7 की आपात बैठक युद्ध के कारण दुनिया भर के शेयर बाजार और ऊर्जा बाजार धराशायी हो रहे हैं: शेयर बाजार में कोहराम: जापान का निक्केई 7% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8% तक गिर गया। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में 9,000 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। G7 की बैठक: तेल की आसमान छूती कीमतों ($116/बैरल) को नियंत्रित करने के लिए G7 देशों के वित्त मंत्री आज 'आपातकालीन तेल भंडार' (Emergency Oil Reserves) जारी करने पर चर्चा करेंगे। यूरोपीय संघ का रुख: फ्रांस ने लाल सागर में अपने युद्धपोत भेजने का फैसला किया है, जबकि जर्मनी ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है। 5. भारत की स्थिति: 67 हजार नागरिकों की वापसी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार मिडिल ईस्ट के हालात पर पैनी नजर रखे हुए है: सुरक्षित वापसी: अब तक 67,000 भारतीय नागरिकों को युद्धग्रस्त इलाकों से वापस लाया जा चुका है। कूटनीति: भारत ने ईरान और अन्य खाड़ी देशों से शांति की अपील की है, हालांकि तेहरान के नेतृत्व में बदलाव के कारण सीधी बातचीत चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
मिडल ईस्ट महाजंग Day 7: ईरान का 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4' और 22वीं मिसाइल लहर; कुवैत में अमेरिकी बेस पर सुसाइड ड्रोन अटैक, खामेनेई का बंकर तबाह तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगटन | 6 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज सातवां दिन है। युद्ध की विभीषिका कम होने के बजाय और अधिक आक्रामक होती जा रही है। ईरान ने इजराइल के विरुद्ध मिसाइलों की अपनी 22वीं बड़ी खेप दागी है, जिसे अब तक का सबसे सघन हमला माना जा रहा है। वहीं, युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी सुसाइड ड्रोनों से हमला करने का दावा किया है। यहाँ सातवें दिन के युद्ध, रणनीतिक बदलावों और वैश्विक प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. ईरान का 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4': मिसाइल वर्षा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि इजराइल के खिलाफ उसके सैन्य अभियान का चौथा चरण शुरू हो चुका है। मिसाइलें: ईरान ने इस बार अपनी सबसे उन्नत मिसाइलों— खोर्रमशहर-4, खैबर और फत्ताह (हाइपरसोनिक)—का इस्तेमाल किया है। निशाना: इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों के 'अंदरूनी हिस्सों' (हार्टलैंड) को निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को भेदने में सफल रही हैं। कलस्टर बमों का उपयोग: खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कलस्टर बमों का इस्तेमाल किया, जिससे नागरिक इलाकों में भारी नुकसान की आशंका है। 2. कुवैत में अमेरिकी बेस पर सुसाइड ड्रोन हमला ईरानी सेना के जमीनी बलों ने युद्ध को क्षेत्रीय स्तर पर फैलाते हुए कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सुसाइड ड्रोन अटैक: ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, 'बड़ी संख्या में विनाशकारी सुसाइड ड्रोन' अमेरिकी बेस की ओर भेजे गए। कुवैत का बयान: कुवैत की सेना ने पुष्टि की है कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम 'दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों' से मुकाबला कर रहा है। 20 बेसों को नुकसान: ईरान का दावा है कि कुवैत, बहरीन और यूएई में फैले करीब 20 अमेरिकी ठिकानों को अब तक के युद्ध में भारी क्षति पहुंची है। 3. इजराइल का बड़ा प्रहार: खामेनेई का 'सीक्रेट बंकर' तबाह इजराइली वायुसेना ने ईरान के मनोबल पर गहरी चोट करते हुए तेहरान में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता का दावा किया है: 50 फाइटर जेट्स का मिशन: इजराइल के 50 लड़ाकू विमानों ने तेहरान के केंद्र में स्थित अयातुल्ला अली खामेनेई के विशाल अंडरग्राउंड बंकर को जमींदोज कर दिया। बंकर की बनावट: यह बंकर तेहरान की कई मुख्य सड़कों के नीचे फैला हुआ था, जिसमें अत्याधुनिक मीटिंग रूम और संचार केंद्र थे। इजराइल का दावा है कि खामेनेई की मौत (विवादित रिपोर्ट) के बाद भी ईरानी शीर्ष अधिकारी यहीं से युद्ध का संचालन कर रहे थे। लॉन्चरों की तबाही: इजराइल ने पिछले 24 घंटों में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने का दावा किया है। 📊 युद्ध का लेखा-जोखा: 7 दिनों की तबाही (आंकड़े) श्रेणी विवरण संख्या / स्थिति कुल मौतें (ईरान) अमेरिका-इजराइल हमलों में 1332 लोग स्कूल हमला (मिनाब) गर्ल्स स्कूल पर हमला 175 मौतें (150 बच्चियां) मेडिकल सेंटर ईरानी अस्पताल / क्लीनिक 14 केंद्र तबाह बुनियादी ढांचा बिजली और पानी सप्लाई ईरान के 60% हिस्सों में ठप विस्थापित युद्ध प्रभावित लोग 20 लाख से अधिक (अनुमानित) 4. वैश्विक प्रभाव: रूस का फायदा और भारत को राहत युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार (Energy Market) में उथल-पुथल मची हुई है: रूस की चांदी: क्रेमलिन ने स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से रूसी तेल और गैस की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। भारत को 'स्पेशल लाइसेंस': अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी है। भारतीय रिफाइनरियां अब 3 अप्रैल तक समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकेंगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा टल गया है। UN की सख्ती: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरान के गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। 5. लेबनान फ्रंट: सिडोन पर हमला इजराइल ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान में भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दक्षिणी लेबनान के सिडोन शहर पर हुए इजराइली हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। इजराइल का मानना है कि लेबनान की जमीन का इस्तेमाल ईरान समर्थक गुट हमलों के लिए कर रहे हैं।
मिडल ईस्ट में महाजंग: इजराइल-अमेरिका का ईरान पर 'लियोनस् रोर' हमला; जवाब में ईरान ने दागीं 400 मिसाइलें, दुबई और अमेरिकी बेस भी निशाने पर तेहरान/तेल अवीव | 28 फरवरी 2026 शनिवार सुबह दुनिया एक भीषण युद्ध की गवाह बनी जब इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ अपना अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान 'लियोनस् रोर' (शेर की दहाड़) शुरू कर दिया। इस हमले ने न केवल ईरान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) को दहला दिया है। तेहरान से लेकर दुबई तक आसमान मिसाइलों और धुएं के गुबार से भर गया है। यहाँ इस भीषण युद्ध, इसके कारणों और अब तक हुए नुकसान का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. इजराइल-अमेरिका का 'जॉइंट एक्शन': ईरान के पावर सेंटर पर चोट इजराइली वायुसेना ने अमेरिकी खुफिया और सैन्य सहयोग के साथ ईरान के सबसे संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया है: टारगेट: हमले में ईरान का खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, और परमाणु ऊर्जा संगठन के मुख्यालयों को ध्वस्त कर दिया गया। सुप्रीम लीडर पर खतरा: इजराइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के ऑफिस को भी निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले से ठीक पहले खामेनेई को एक सुरक्षित भूमिगत बंकर में शिफ्ट कर दिया गया। नागरिक हताहत: इरना न्यूज एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी ईरान में हुए हमलों में एक स्कूल चपेट में आ गया, जिससे 40 छात्राओं की मौत हो गई और 45 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। 2. ईरान का प्रचंड पलटवार: 400 मिसाइलों से दहला इजराइल और खाड़ी ईरान ने इस हमले का जवाब 'आंख के बदले आंख' की तर्ज पर दिया है: मिसाइल वर्षा: ईरान ने इजराइल की ओर लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी बेसों पर हमला: ईरान ने केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइलें बरसाईं। दुबई पर हमला: यूएई के सबसे व्यस्त शहर दुबई को भी ईरान ने निशाना बनाया है, जिसके फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। 3. ट्रंप की चेतावनी और 'लियोनस् रोर' का मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है: ट्रंप का बयान: "ईरान का मिसाइल प्रोग्राम अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए सीधा खतरा है। हम ईरान की मिसाइल क्षमता को जड़ से खत्म करने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं।" मिशन लियोनस् रोर: इस जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह पंगु बनाना है। 📊 युद्ध का प्रभाव: एक नजर में प्रभावित क्षेत्र घटना / नुकसान हमलावर तेहरान (ईरान) रक्षा मंत्रालय और परमाणु साइट्स तबाह। इजराइल-अमेरिका दक्षिणी ईरान 40 छात्राओं की मौत, 45 घायल। इजराइल इजराइल 400 मिसाइलों का हमला, आयरन डोम सक्रिय। ईरान दुबई (UAE) रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में धमाके। ईरान बहरीन/कुवैत अमेरिकी मिलिट्री बेस पर डायरेक्ट हिट। ईरान 4. विवाद की जड़: बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु समझौता इस भीषण संघर्ष के पीछे लंबी चल रही कूटनीतिक तकरार है: परमाणु वार्ता में गतिरोध: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को भी बंद करे। ईरान की 'रेड लाइन': ईरान मिसाइल प्रोग्राम को अपनी सुरक्षा की गारंटी मानता है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में जब इजराइल ने उसकी परमाणु साइटों पर हमला करने की कोशिश की थी, तब इन्हीं मिसाइलों ने बचाव किया था। ट्रंप की नीति: ट्रंप प्रशासन का मानना है कि बातचीत से ईरान नहीं मानेगा, इसलिए सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प है। 5. ताजा स्थिति: दुनिया पर संकट के बादल ग्लोबल अलर्ट: अमेरिका ने अपने नागरिकों को इजराइल और मध्य पूर्व के देशों से तुरंत निकलने की सलाह दी है। तेल की कीमतें: खाड़ी में युद्ध छिड़ने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। विजिबिलिटी: तेहरान और दुबई जैसे शहरों में धुएं और आग के कारण विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है, सायरन लगातार बज रहे हैं।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध: 'गजब लिल हक' बनाम तालिबान का पलटवार; 300 से ज्यादा मौतें, भारत ने किया अफगानिस्तान का समर्थन इस्लामाबाद/काबुल | 27 फरवरी 2026 दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस वक्त पूर्ण युद्ध (Full-scale War) की कगार पर खड़े हैं। गुरुवार रात से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष शुक्रवार को और भी हिंसक हो गया है। पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) ने अफगानिस्तान के भीतरी इलाकों—काबुल, कंधार और खोस्त—में भीषण एयरस्ट्राइक की है। वहीं, तालिबान ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर सैन्य ठिकानों पर कब्जा करने और इस्लामाबाद के पास रणनीतिक ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है। इस संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों के 300 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। पाकिस्तान ने इसे 'ऑपरेशन गजब लिल हक' का नाम दिया है। 1. युद्ध की शुरुआत: कैसे भड़की चिंगारी? इस खूनी संघर्ष की नींव 22 फरवरी को पड़ी थी, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। तालिबान की जवाबी कार्रवाई: अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसने 22 फरवरी के हमले का बदला लेने के लिए गुरुवार रात पाकिस्तान की 19 अग्रिम चौकियों और एक सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तानी सैनिकों की मौत: तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, अफगान बलों ने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। पाकिस्तान का 'ऑपरेशन गजब लिल हक': अपने सैनिकों की मौत और चौकियों पर कब्जे से बौखलाए पाकिस्तान ने शुक्रवार सुबह बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी हमला शुरू किया, जिसे 'गजब लिल हक' नाम दिया गया है। 2. पाकिस्तान का दावा: 274 लड़ाके ढेर, 115 टैंक तबाह पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग (ISPR) के महानिदेशक अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान को हुए नुकसान का विवरण दिया: भारी हताहत: पाकिस्तान का दावा है कि उसकी एयरस्ट्राइक में 274 अफगान लड़ाके मारे गए हैं और 400 से अधिक घायल हैं। हथियारों की तबाही: पाक सेना ने दावा किया कि उन्होंने अफगानिस्तान के 115 टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और तोपखाने को नष्ट कर दिया है। सैन्य ठिकाने: लगमान प्रांत में तालिबान के एक मुख्य सैन्य कमांड सेंटर को पूरी तरह ध्वस्त करने का दावा किया गया है। 3. तालिबान का बड़ा दावा: पाकिस्तान का फाइटर जेट गिराया और न्यूक्लियर सेंटर पर हमला अफगानिस्तान की ओर से आ रही खबरें पाकिस्तान के लिए चिंताजनक हैं: जेट मार गिराया: अफगान मीडिया 'टोलो न्यूज' ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने एक पाकिस्तानी फाइटर जेट को मार गिराया है। सोशल मीडिया पर इसके मलबे के वीडियो वायरल हो रहे हैं (हालांकि स्वतंत्र पुष्टि बाकी है)। ड्रोन स्ट्राइक: पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा के अनुसार, तालिबान के ड्रोन ने पाकिस्तान के नौशेरा कैंट, जमरूद सैन्य बेस और इस्लामाबाद के पास एक न्यूक्लियर एनर्जी सेंटर को निशाना बनाया है। सैन्य साजो-सामान: तालिबान का कहना है कि उनके पास 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव और भारी मात्रा में आधुनिक हथियार मौजूद हैं, जो उन्होंने चौकियों पर कब्जे के दौरान हासिल किए। 📊 सैन्य शक्ति तुलना: पाकिस्तान बनाम तालिबान विशेषता पाकिस्तान (PAK) अफगान तालिबान ग्लोबल रैंकिंग टॉप 15 शक्तिशाली सेनाएं अनौपचारिक लड़ाकू बल हवाई शक्ति आधुनिक फाइटर जेट्स (F-16, JF-17) सीमित ड्रोन और पुराने हेलिकॉप्टर परमाणु शक्ति संपन्न (Nuclear Armed) नहीं युद्ध का तरीका पारंपरिक सैन्य युद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापामार लड़ाई) हथियारों का स्रोत चीन, अमेरिका और स्वदेशी अमेरिकी अवशेष और ब्लैक मार्केट 4. भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस युद्ध ने वैश्विक शक्तियों को चिंता में डाल दिया है: भारत का रुख: भारत ने पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान अपने आंतरिक संकटों से ध्यान हटाने के लिए निर्दोष अफगानों, महिलाओं और बच्चों को मार रहा है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया है। रूस और चीन: दोनों देशों ने तुरंत युद्धविराम की अपील की है। रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की है, जबकि चीन ने दोनों को बातचीत की मेज पर आने को कहा है। अमेरिका: अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए 'लेवल 4' (Do Not Travel) एडवाइजरी जारी की है और काबुल स्थित अपने मिशन के जरिए हालात पर नजर रख रहा है। कतर और ईरान: कतर ने शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया है, जबकि ईरान ने रमजान के महीने का हवाला देते हुए संयम बरतने की अपील की है। 5. पाकिस्तान का भारत पर आरोप तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपनी पुरानी रणनीति अपनाते हुए भारत पर आरोप लगाया है। सेना प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे भारत की योजना और फंडिंग है, जिसके लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन आरोपों को बिना सबूत के खारिज कर दिया है। 6. जमीनी हकीकत: कराची हाई अलर्ट पर युद्ध का असर अब पाकिस्तानी शहरों में भी दिखने लगा है: कराची: पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती इलाके: नंगरहार और खोस्त प्रांत के लोग घर छोड़कर भाग रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बमबारी इतनी भीषण है कि लोग अपने बच्चों तक को पीछे छोड़ गए हैं।
ट्रम्प का 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण: भारत-पाक परमाणु जंग रुकवाने का 101वीं बार दावा; ईरान-वेनेजुएला पर बड़ी घोषणाएं और संसद में भारी हंगामा वाशिंगटन डीसी | 25 फरवरी 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार सुबह (भारतीय समयानुसार) अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में अपना बहुप्रतीक्षित 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (SOTU) भाषण दिया। लगभग 1 घंटा 50 मिनट तक चले इस मैराथन संबोधन में ट्रम्प ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का गुणगान किया, वैश्विक संघर्षों में अपनी भूमिका का दावा किया और विरोधियों पर तीखे प्रहार किए। जहाँ रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रम्प का स्वागत "फोर मोर ईयर्स" के नारों और तालियों से किया, वहीं डेमोक्रेटिक सांसदों ने उनके दावों को "झूठ का पुलिंदा" करार देते हुए सदन में ही विरोध प्रदर्शन किया। यहाँ ट्रम्प के भाषण की प्रमुख घोषणाएं, विवाद और वैश्विक प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर 'परमाणु युद्ध' का दावा ट्रम्प ने एक बार फिर दक्षिण एशिया के दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच मध्यस्थता का श्रेय खुद को लिया। 3.5 करोड़ मौतों का दावा: ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपनी कूटनीति से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका। उन्होंने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के हवाले से दावा किया कि इस जंग में साढ़े तीन करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। भारत का रुख: गौरतलब है कि भारत ने ट्रम्प के इस तरह के दावों को पहले भी 'काल्पनिक' और 'तथ्यहीन' बताकर खारिज किया है। भारत का हमेशा से स्टैंड रहा है कि पाकिस्तान के साथ मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। 2. ईरान को सीधी चेतावनी और न्यूक्लियर प्रोग्राम ट्रम्प ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया: हमले का दावा: राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले साल जुलाई में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। मिसाइल खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक मार कर सकती हैं। प्रदर्शनकारियों की मौत: ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान ने हालिया महंगाई विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अपने ही 32,000 नागरिकों की हत्या की है। 3. वेनेजुएला: अमेरिका का 'नया दोस्त' वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य दखल के करीब डेढ़ महीने बाद ट्रम्प ने वहां की स्थिति को अपनी जीत बताया: तेल उत्पादन: ट्रम्प ने दावा किया कि वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण के बाद वहां उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है। दोस्ती का हाथ: उन्होंने वेनेजुएला को अमेरिका का नया रणनीतिक साझेदार और दोस्त करार दिया, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई। 4. घरेलू नीतियां: महंगाई, तेल और टैरिफ ट्रम्प ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़े आंकड़े पेश किए: एनर्जी बूम: उन्होंने बताया कि उनकी नीतियों की वजह से अमेरिका में तेल का उत्पादन रोजाना 6 लाख बैरल बढ़ गया है। 15% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ट्रम्प ने नया 15% वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की। महंगाई: ट्रम्प ने पिछले डेमोक्रेटिक शासन को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया और वादा किया कि उनकी नीतियां कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक नीचे लाएंगी। 5. संसद के भीतर का ड्रामा: एपस्टीन पीड़ितों की मौजूदगी भाषण के दौरान सदन में जबरदस्त राजनीतिक तनाव देखने को मिला: एपस्टीन विवाद: डेमोक्रेटिक सांसदों ने जेफ्री एपस्टीन के मामलों के पीड़ितों को गैलरी में बिठाया था ताकि ट्रम्प पर फाइलों को सार्वजनिक करने का दबाव बनाया जा सके। हालांकि, ट्रम्प ने अपने पूरे भाषण में 'एपस्टीन फाइल' का जिक्र तक नहीं किया। इल्हान उमर का हमला: सोमाली-अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने ट्रम्प को हत्यारा कहा, जिस पर ट्रम्प ने उन्हें मंच से ही "शर्म करने" की सलाह दी। सांसद अल ग्रीन को निकाला गया: "काले लोग बंदर नहीं होते" का पोस्टर दिखाने पर डेमोक्रेटिक सांसद अल ग्रीन को मार्शल द्वारा सदन से बाहर कर दिया गया। 📊 ट्रम्प के भाषण के मुख्य बिंदु: एक नजर में विषय ट्रम्प का दावा / घोषणा विपक्ष (डेमोक्रेट्स) की प्रतिक्रिया विदेश नीति भारत-पाक परमाणु युद्ध रुकवाया (3.5 करोड़ जानें बचाईं)। इसे पूरी तरह झूठ और ध्यान भटकाने वाला बताया। ईरान परमाणु कार्यक्रम नष्ट कर दिया, मिसाइल खतरा बरकरार। ईरान के साथ अकारण युद्ध की योजना बनाने का आरोप। गाजा सीजफायर और बंधकों की रिहाई को बड़ी जीत बताया। मानवीय संकट को नजरअंदाज करने की बात कही। अर्थव्यवस्था 15% वैश्विक टैरिफ और तेल उत्पादन में वृद्धि। टैरिफ को अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बताया। वेनेजुएला कब्जा सफल, तेल उत्पादन बढ़ा, नया दोस्त बना। संप्रभु देश पर अवैध कब्जे का विरोध किया। 6. विपक्ष का पलटवार: "चीन-रूस के आगे सरेंडर सरकार" डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से वर्जीनिया की गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने आधिकारिक जवाब दिया: तानाशाहों के आगे समर्पण: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रम्प पुतिन जैसे तानाशाहों के सामने झुक रहे हैं और चीन को तकनीकी बढ़त सौंप रहे हैं। लोकतंत्र को खतरा: विपक्ष ने कहा कि ट्रम्प संघीय एजेंटों का उपयोग अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कर रहे हैं और बिना वारंट के गिरफ्तारियां करवा रहे हैं। भटकाने की राजनीति: स्पैनबर्गर ने कहा कि राष्ट्रपति असली समस्याओं (जैसे स्वास्थ्य सेवा और क्लाइमेट चेंज) का समाधान देने के बजाय केवल अपना चेहरा चमका रहे हैं।
अमेरिका में 'बर्फ़ीला क़हर': 153 साल में पहली बार नहीं छपा बोस्टन ग्लोब; 11,000 उड़ानें रद्द, 6 लाख घरों की बत्ती गुल वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क | 25 फरवरी 2026 अमेरिका का उत्तर-पूर्वी हिस्सा इस वक्त पिछले एक दशक के सबसे शक्तिशाली 'नॉरईस्टर' (Nor'easter) बर्फीले तूफान का सामना कर रहा है। रविवार से मंगलवार के बीच कुदरत के इस कहर ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स और रोड आइलैंड जैसे राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे न केवल जमीन बल्कि आसमान के रास्ते भी बंद हो गए हैं। यहाँ इस बर्फीले तूफान के प्रभाव, रिकॉर्ड और इसके पीछे के विज्ञान का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. एविएशन सेक्टर में हाहाकार: 11,000+ उड़ानें रद्द खराब विजिबिलिटी और रनवे पर जमी कई फीट बर्फ के कारण अमेरिका के प्रमुख एयरपोर्ट्स को अपना परिचालन रोकना पड़ा: उड़ानें रद्द: फ्लाइटअवेयर (FlightAware) के मुताबिक, रविवार से मंगलवार के बीच 11,055 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल की गईं। सोमवार का संकट: अकेले सोमवार को देश भर की करीब 20% उड़ानें (लगभग 5,700) रद्द रहीं। प्रभावित यात्री: हजारों यात्री न्यूयॉर्क के जेएफके (JFK), लागार्डिया और बोस्टन के लोगान एयरपोर्ट पर फंसे रहे। 2. 153 साल का रिकॉर्ड टूटा: अखबार तक नहीं छपा इस तूफान की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द बोस्टन ग्लोब' ने अपने 153 साल के इतिहास में पहली बार प्रिंटिंग बंद रखी। वजह: भारी बर्फबारी के कारण प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी दफ्तर तक नहीं पहुंच सके और वितरण सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। अंधेरे में डूबे शहर: उत्तर-पूर्वी राज्यों में 6 लाख से ज्यादा घरों और दफ्तरों की बिजली गुल हो गई। सोमवार शाम तक करीब 5.2 लाख लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर थे। 3. बर्फबारी के नए रिकॉर्ड और इमरजेंसी नेशनल वेदर सर्विस (NWS) के आंकड़ों ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है: रोड आइलैंड: प्रोविडेंस में 32.8 इंच बर्फ गिरी, जिसने 1978 का 28.6 इंच का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कुछ हिस्सों में यह 37 इंच तक पहुंच गई। न्यूयॉर्क: सेंट्रल पार्क में 20 इंच और लॉन्ग आइलैंड में 22 इंच बर्फ दर्ज की गई। राज्यों की प्रतिक्रिया: न्यूयॉर्क: गवर्नर कैथी होचुल ने पूरे राज्य में इमरजेंसी घोषित कर नेशनल गार्ड को तैनात किया है। मैसाचुसेट्स व रोड आइलैंड: गवर्नर्स ने सख्त ट्रैवल बैन लागू किया है, जिससे सड़कों पर केवल इमरजेंसी वाहनों को ही अनुमति दी गई है। 📊 तूफान का प्रभाव: एक नजर में राज्य / शहर बर्फबारी (इंच) मुख्य प्रभाव रोड आइलैंड 32.8 - 37" 1978 के बाद का सबसे भीषण तूफान; पूर्ण ट्रैवल बैन। न्यूयॉर्क सिटी 20 - 22" स्कूल, ब्रिज और ट्रेन सेवाएं (Amtrak) सस्पेंड। मैसाचुसेट्स 30"+ 5 लाख से अधिक घरों में ब्लैकआउट; अखबार प्रिंटिंग बंद। विमान सेवाएं - 11,055 उड़ानें रद्द (देशभर का 20% ट्रैफिक प्रभावित)। 4. क्या होता है 'नॉरईस्टर' और यह क्यों आता है? वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई सामान्य बर्फबारी नहीं बल्कि एक शक्तिशाली नॉरईस्टर (Nor'easter) तूफान है। नाम का अर्थ: इसे नॉरईस्टर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें हवाएं मुख्य रूप से उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा से आती हैं। निर्माण की प्रक्रिया: 1. ठंडी हवा: कनाडा की ओर से आने वाली ध्रुवीय ठंडी हवा दक्षिण की ओर बढ़ती है। 2. गर्म हवा: अटलांटिक महासागर से उठने वाली नम और गर्म हवा इससे टकराती है। 3. टक्कर: जब ये दोनों विपरीत हवाएं मिलती हैं, तो कम दबाव का क्षेत्र बनता है जो तेज हवाओं और भारी बर्फबारी में बदल जाता है। जेट स्ट्रीम की भूमिका: आसमान में ऊंचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम हवाएं इस सिस्टम को और अधिक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे हवा की रफ्तार 110 मील प्रति घंटे तक पहुंच गई। 5. जनजीवन पर अन्य प्रभाव ट्रेन सेवाएं: न्यूयॉर्क और बोस्टन के बीच रेल सेवा (Amtrak) सोमवार रात तक पूरी तरह बंद रही। मनोरंजन: न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध थिएटर हब 'ब्रॉडवे' के सभी शो रद्द करने पड़े। स्कूल: न्यूयॉर्क में मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार से स्कूल खोलने की घोषणा की है, लेकिन कई इलाकों में अभी भी सड़कों से बर्फ हटाने का काम जारी है।
मेक्सिको में 'ड्रग वॉर' का सबसे खौफनाक अध्याय: सबसे बड़ा सरगना 'एल मेंचो' ढेर; सेना के ऑपरेशन के बाद जल उठा देश, भारतीय दूतावास की एडवाइजरी मेक्सिको सिटी | 23 फरवरी 2026 मेक्सिको की सेना ने रविवार को एक ऐतिहासिक और साहसी सैन्य अभियान में दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग माफिया और 'जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल' (CJNG) के सरगना नेमेसियो रूबन ओसेगुएरा सर्वेंट्स, जिसे दुनिया 'एल मेंचो' के नाम से जानती है, को मार गिराया है। इस कार्रवाई के बाद पूरा मेक्सिको हिंसा की आग में झुलस रहा है। मेंचो के समर्थकों ने शहरों को बंधक बना लिया है, हाईवे जाम कर दिए हैं और दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया है। यहाँ इस सैन्य ऑपरेशन, एल मेंचो के साम्राज्य और मेक्सिको में बिगड़ते हालातों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. ऑपरेशन 'एल मेंचो': घायल होने के बाद हुई मौत मेक्सिको सेना ने खुफिया जानकारी के आधार पर तलपला शहर में रविवार को धावा बोला। मुठभेड़: सेना और कार्टेल के गुर्गों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। इस ऑपरेशन में एल मेंचो के अलावा उसके 9 करीबी शूटर भी मारे गए। मौत का घटनाक्रम: गोलीबारी के दौरान मेंचो गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच एयरलिफ्ट कर मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। अमेरिकी इनाम: मेंचो पर अमेरिकी सरकार ने 136 करोड़ रुपए ($10 Million) का इनाम रखा था। 2. हिंसा की लपटों में मेक्सिको: सड़कों पर तांडव सरगना की मौत की खबर फैलते ही जलिस्को कार्टेल के गुर्गों ने देश के कई हिस्सों में आतंक मचाना शुरू कर दिया: हाईवे जाम और आगजनी: समर्थकों ने प्रमुख हाईवे को अवरुद्ध कर दिया। ट्रक, बस और निजी कारों को रोककर उनमें पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। टूरिस्ट शहर निशाने पर: प्यूर्टो वालार्टा और चापाला जैसे पर्यटन स्थलों पर आसमान में काले धुएं का गुबार देखा गया। एयर कनाडा सहित कई विदेशी एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। सुपरमार्केट और पेट्रोल पंप: भीड़ ने सुपरमार्केट में लूटपाट के बाद आग लगा दी। कई पेट्रोल पंपों पर कब्जा कर उन्हें ब्लास्ट करने की कोशिश की गई। 📊 मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स: एक प्राइवेट सेना विशेषता जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल (CJNG) सिनालोआ कार्टेल (प्रतिद्वंद्वी) सैन्य शक्ति टैंक, ड्रोन और रॉकेट लॉन्चर्स से लैस। 600 से ज्यादा विमान और हेलिकॉप्टर। नेटवर्क अमेरिका के 50 राज्यों में मौजूदगी। वैश्विक ड्रग तस्करी का गढ़। सालाना कमाई करीब 1 लाख करोड़ रुपए ($12.1 Billion) तस्करी और फिरौती का विशाल नेटवर्क। प्रमुख ड्रग्स फेंटेनाइल, कोकीन और मेथ। हेरोइन और कोकीन। 3. ट्रम्प का दबाव और अमेरिका-मेक्सिको संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से मेक्सिको पर कार्टेल्स के खिलाफ 'युद्ध' छेड़ने का दबाव बना रहे थे। ट्रम्प की चेतावनी: ट्रम्प ने मेक्सिको को चेतावनी दी थी कि अगर वे एल मेंचो को नहीं पकड़ते, तो अमेरिका अपनी सेना भेज सकता है। उन्होंने कार्टेल्स को 'विदेशी आतंकवादी संगठन' घोषित कर रखा है। फेंटेनाइल संकट: अमेरिका में हर साल फेंटेनाइल के कारण लाखों लोगों की मौत होती है। ट्रम्प का मानना है कि इन मौतों के लिए मेक्सिकन कार्टेल्स जिम्मेदार हैं। संव्रभुता बनाम सहयोग: मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने पहले ट्रम्प के बयानों का विरोध किया था, लेकिन इस सफल सैन्य ऑपरेशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी (DEA) और मेक्सिको के बीच बढ़ा हुआ तालमेल साफ दिखाई दे रहा है। 4. इतिहास की पुनरावृत्ति: क्यों डरा हुआ है मेक्सिको? मेक्सिको का इतिहास गवाह है कि जब भी किसी बड़े सरगना को मारा या पकड़ा गया है, देश में 'गृहयुद्ध' जैसी स्थिति बनी है: अल चापो (2016): सिनालोआ कार्टेल के सरगना की गिरफ्तारी के बाद हफ्तों तक खून-खराबा चला था। ओविदियो गुजमान (2019): जब अल चापो के बेटे को पकड़ा गया, तो उसके गुर्गों ने कुलियाकान शहर को बंधक बना लिया, जिसके बाद सरकार को उसे छोड़ना पड़ा था। वर्तमान खतरा: एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 'जलिस्को कार्टेल' के अंदर उत्तराधिकार की जंग छिड़ी, तो मेक्सिको की सड़कों पर लाशों का अंबार लग सकता है। 5. भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी मेक्सिको में जारी हिंसा को देखते हुए भारतीय दूतावास ने तत्काल सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं: प्रभावित इलाके: जलिस्को, तमाउलिपास, मिचोआकान, गुरेरो और न्यूवो लियोन में रह रहे भारतीयों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। संपर्क सूत्र: किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिक +52-55-4847-7539 पर संपर्क कर सकते हैं या स्थानीय आपातकालीन नंबर 911 डायल कर सकते हैं। सावधानी: अनावश्यक यात्रा से बचें और भीड़भाड़ वाले इलाकों, विशेषकर हाईवे और शॉपिंग सेंटर्स से दूर रहें।
नेपाल में भीषण सड़क हादसा: पोखरा से काठमांडू जा रही बस त्रिशूली नदी में गिरी; 2 विदेशी नागरिकों समेत 18 की मौत, 25 घायल धादिंग (नेपाल) | 23 फरवरी 2026 नेपाल के धादिंग जिले से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। सोमवार देर रात एक यात्री बस अनियंत्रित होकर त्रिशूली नदी में जा गिरी, जिससे 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। पहाड़ी रास्तों पर रात के अंधेरे में हुआ यह हादसा इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए। यहाँ हादसे के कारणों, बचाव कार्य और त्रिशूली नदी के इतिहास का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. मध्यरात्रि का कहर: कैसे हुआ हादसा? नेपाली मीडिया और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बस (नंबर: Ga 1 Kha 1421) पोखरा से राजधानी काठमांडू की ओर जा रही थी। समय और स्थान: हादसा देर रात करीब 1:30 बजे धादिंग जिले के बेनिघाट रोरांग इलाके में हुआ। यह क्षेत्र पृथ्वी हाईवे का हिस्सा है, जो नेपाल की लाइफलाइन माना जाता है। अनियंत्रित बस: शुरुआती जांच के मुताबिक, ड्राइवर ने एक मोड़ पर बस से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद बस सड़क से फिसलकर सीधे नीचे बह रही गहरी त्रिशूली नदी में जा गिरी। यात्रियों की संख्या: दुर्घटना के समय बस में कुल 44 लोग सवार थे। 2. हताहतों का विवरण और रेस्क्यू ऑपरेशन आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) और स्थानीय निवासियों ने मिलकर रात में ही बचाव कार्य शुरू किया: मृतकों की संख्या: अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें 12 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। विदेशी नागरिक: मृतकों में एक विदेशी पुरुष और एक विदेशी महिला भी शामिल हैं। हालांकि, उनकी नागरिकता और पहचान की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। घायलों की स्थिति: हादसे में 25 लोग घायल हुए हैं। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल यात्रियों को काठमांडू रेफर कर दिया गया है। चुनौतियां: रात का समय और नदी का तेज बहाव रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बना। टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में बचाव कर्मियों ने नदी के ठंडे पानी से लोगों को बाहर निकाला। 📊 नेपाल में हालिया बड़े सड़क हादसे तारीख स्थान कारण हताहत 23 फरवरी 2026 धादिंग (त्रिशूली नदी) नियंत्रण खोना 18 मौत, 25 घायल 5 फरवरी 2026 बैतड़ी जिला ओवरलोडिंग (बारात की बस) 13 मौत, 34 घायल 2024 (मानसून) त्रिशूली नदी लैंडस्लाइड (दो बसें बहीं) 63 लोग (7 भारतीयों समेत) 3. त्रिशूली नदी: आस्था और खतरों का संगम त्रिशूली नदी नेपाल की सबसे प्रसिद्ध लेकिन मानसून और दुर्घटनाओं के लिहाज से सबसे खतरनाक नदियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि भगवान शिव ने गोसाइकुंडा में अपना त्रिशूल जमीन में गाड़ा था, जिससे तीन झरने निकले और त्रिशूली नदी का जन्म हुआ। इसी कारण इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। भौगोलिक स्थिति: यह नदी तिब्बत (चीन) से शुरू होती है और नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे जिलों से होते हुए नारायणी (गंडकी) नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 200 किलोमीटर है। पर्यटन और व्यापार: यह नदी राफ्टिंग और ट्रेकिंग के लिए सैलानियों की पहली पसंद है। इसके किनारे पृथ्वी हाईवे स्थित है, जो व्यापारिक दृष्टिकोण से काठमांडू और पोखरा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। खतरा: मानसून के दौरान पहाड़ी ढलानों से होने वाले लैंडस्लाइड और संकरे रास्तों के कारण इस हाईवे पर बसें अक्सर नदी में गिर जाती हैं, जिससे यह 'मौत का हाईवे' भी कहा जाने लगा है। 4. प्रशासन की कार्रवाई और जांच नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स की टीम दुर्घटनास्थल पर मौजूद है। हादसे की असल वजह का पता लगाने के लिए बस की मैकेनिकल जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या ड्राइवर को नींद की झपकी आई थी या बस की रफ्तार बहुत तेज थी।
बांग्लादेश: सत्ता संभालते ही तारिक रहमान का सेना में 'बड़ा क्लीन स्वीप'; इंटेलिजेंस और कमांड पदों पर तैनात किए वफादार, विपक्ष ने लगाया 'चुनावी हेरफेर' का आरोप ढाका | 23 फरवरी 2026 बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक और सैन्य गलियारों में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही दिनों के भीतर तारिक रहमान ने बांग्लादेशी सेना के ढांचे में आमूलचूल बदलाव कर दिए हैं। रविवार और सोमवार को जारी किए गए आदेशों के तहत सेना के सबसे संवेदनशील पदों—इंटेलिजेंस (DGFI), ऑपरेशनल कमांड और फील्ड डिविजन्स—पर नए चेहरों की नियुक्ति की गई है। यहाँ इस सैन्य फेरबदल, इसके पीछे की रणनीतिक वजहों और तारिक रहमान सरकार के सामने खड़ी चुनौतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सैन्य फेरबदल: कौन कहाँ नियुक्त हुआ? प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सोमवार को आर्म्ड फोर्स डिवीजन (AFD) में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया और प्रमुख नियुक्तियों पर मुहर लगाई: इंटेलिजेंस (DGFI) में बदलाव: मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस' (DGFI) का नया डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है। DGFI बांग्लादेश की सबसे शक्तिशाली खुफिया इकाई मानी जाती है। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS): लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का नया CGS बनाया गया है। यह पद सेना की रणनीतिक योजना और ऑपरेशंस के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO): लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिवीजन का PSO नियुक्त किया गया है। निवर्तमान PSO लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को विदेश मंत्रालय भेज दिया गया है। भारत से वापसी: भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के पद पर प्रमोट कर वापस बुला लिया गया है। उन्हें अब 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) बनाया गया है। अन्य फील्ड कमांड: मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 24वीं इन्फैंट्री डिविजन (चटगांव) का GOC नियुक्त किया गया है। 2. फेरबदल के पीछे की रणनीतिक वजहें विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि 'पावर कंसोलिडेशन' (सत्ता का सुदृढ़ीकरण) की एक सोची-समझी कोशिश है: सेना पर पकड़ मजबूत करना: छात्र आंदोलन (फरवरी 2024) के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कई पदों पर अपनी पसंद के अधिकारी नियुक्त किए थे। तारिक रहमान अपनी नई BNP सरकार के प्रति वफादार अधिकारियों को अहम पदों पर चाहते हैं ताकि तख्तापलट या बगावत की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। पुरानी व्यवस्था का अंत: शेख हसीना और मुहम्मद यूनुस के दौर के अधिकारियों को महत्वपूर्ण कमान पदों से हटाकर राजदूत बनाकर विदेशों में भेजा जा रहा है या 'रिटायरमेंट लीव' पर भेजा गया है। रणनीतिक स्थिरता: नई सरकार चाहती है कि सेना का नेतृत्व ऐसा हो जो BNP के राजनीतिक एजेंडे और सुरक्षा विजन के साथ तालमेल बिठा सके। 📊 बांग्लादेश की नई सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था पद नया अधिकारी पूर्व भूमिका प्रधानमंत्री तारिक रहमान (BNP) 17 फरवरी 2026 को शपथ ली चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान आर्मी ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख DGFI डायरेक्टर मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी आर्मी मुख्यालय PSO (आर्म्ड फोर्सेस) लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान GOC, 24वीं इन्फैंट्री डिविजन GOC, 55वीं डिविजन मेजर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान भारत में रक्षा सलाहकार 3. भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर संभावित असर नई दिल्ली में तैनात रक्षा सलाहकार की वापसी और बांग्लादेश में मिलिट्री लीडरशिप के बदलने से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ना तय है: नया मिलिट्री संवाद: भारत और बांग्लादेश के बीच सैन्य सहयोग बहुत गहरा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद दिल्ली और ढाका के बीच रक्षा संवाद के नए चैनल स्थापित होंगे। संतुलन की चुनौती: तारिक रहमान की सरकार को भारत के साथ सुरक्षा चिंताओं (जैसे सीमा प्रबंधन और आतंकवाद) पर फिर से तालमेल बिठाना होगा, क्योंकि नई लीडरशिप की प्राथमिकताएं पिछली सरकारों से अलग हो सकती हैं। 4. विपक्ष का 'चुनावी इंजीनियरिंग' का आरोप सेना में इस बड़े फेरबदल के बीच तारिक रहमान की लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठने लगे हैं: चुनाव में गड़बड़ी: जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) जैसे विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि 12 फरवरी के चुनाव में 'इंजीनियरिंग' की गई थी। भारी बहुमत पर शक: विपक्ष का कहना है कि 20 साल बाद BNP को मिली 200 से ज्यादा सीटें वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि नतीजों में की गई हेरफेर का परिणाम हैं। तानाशाही का डर: विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि सेना में यह बदलाव उन लोगों को डराने के लिए है जो चुनाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। 5. निष्कर्ष: क्या तारिक रहमान को मिलेगी स्थिरता? सेना में किया गया यह 'सर्जिकल ऑपरेशन' तारिक रहमान को तात्कालिक सुरक्षा तो प्रदान कर सकता है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर असंतोष बढ़ा सकता है। अगर वे सेना के माध्यम से सत्ता को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, तो छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के बीच एक बार फिर आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है। अगले कुछ महीने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।