विदेश

एपस्टीन फाइल्स- अनिल अंबानी की चैट सामने आई
जेफ्री एपस्टीन के साथ अनिल अंबानी की चैट्स लीक; स्कारलेट जोहानसन और 'स्वीडिश ब्लॉन्ड' पर चर्चा का खुलासा।

एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी का नाम: 'स्वीडिश ब्लॉन्ड' और स्कारलेट जोहानसन को लेकर हुई चैट्स का खुलासा; रसूखदारों के सिंडिकेट का पर्दाफाश न्यूयॉर्क/मुंबई | 7 फरवरी 2026 कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के नए दस्तावेजों ने भारत के कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन फाइलों में रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुए ईमेल और चैट्स का विवरण है। ये खुलासे उस समय के हैं जब एपस्टीन पहले ही यौन अपराधों के लिए सजा काट चुका था। यहाँ इस मामले से जुड़े प्रमुख और चौंकाने वाले बिंदु दिए गए हैं: 1. 'मजेदार मुलाकात' के लिए 'स्वीडिश ब्लॉन्ड' की चर्चा दस्तावेजों के अनुसार, 9 मार्च 2017 को अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक संवाद हुआ: सुझाव की मांग: अंबानी ने एपस्टीन से मुलाकात को लेकर सुझाव मांगा। एपस्टीन का जवाब: एपस्टीन ने लिखा कि मुलाकात को 'मजेदार' बनाने के लिए एक 'लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला' बेहतर होगी। अंबानी की प्रतिक्रिया: रिपोर्ट का दावा है कि अंबानी ने इसके जवाब में 'इसे अरेंज करो' (Arrange it) लिखा। 2. फेवरेट हीरोइन और स्कारलेट जोहानसन का जिक्र चैट्स में निजी पसंद और हॉलीवुड से जुड़े संदर्भ भी सामने आए हैं: पसंदीदा अभिनेत्री: जब एपस्टीन ने पसंदीदा महिला के बारे में पूछा, तो अंबानी ने स्कारलेट जोहानसन का नाम लिया। (उस वक्त अंबानी की कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट जोहानसन की फिल्म ‘घोस्ट इन द शेल’ की को-प्रोड्यूसर थी)। मुलाकातें: रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मई 2019 में अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के मैनहैटन स्थित घर पर उससे मिले थे। इसके अलावा पेरिस और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में भी मिलने की योजनाएं बनी थीं। 3. भारतीय सेलिब्रिटीज का भी नाम आया सामने फाइलों में केवल कारोबारी ही नहीं, बल्कि भारत के कई सांस्कृतिक और फिल्म जगत के चेहरों के नाम भी सामाजिक या पेशेवर संपर्कों के तौर पर दर्ज हैं: मीरा नायर और गिस्लेन मैक्सवेल: 2009 में मीरा नायर की फिल्म 'एमेलिया' की रिलीज के बाद एपस्टीन की पार्टनर गिस्लेन मैक्सवेल ने एक 'आफ्टर-पार्टी' होस्ट की थी, जिसमें नायर शामिल हुई थीं। अन्य नाम: फाइलों में अनुराग कश्यप, नंदिता दास, और दीपक चोपड़ा जैसे नामों का भी जिक्र है। महत्वपूर्ण नोट: विशेषज्ञों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन फाइलों में नाम होने मात्र का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति किसी अपराध में शामिल था। ये केवल एपस्टीन के व्यापक नेटवर्क को दर्शाते हैं। 📊 जेफ्री एपस्टीन: रसूख और अपराध का साम्राज्य श्रेणी विवरण काम करने का तरीका 'लोलिता एक्सप्रेस' (प्राइवेट जेट) के जरिए नाबालिगों की तस्करी। नेटवर्क डोनाल्ड ट्रंप, बिल गेट्स, प्रिंस एंड्रयू और अनिल अंबानी जैसे शक्तिशाली लोगों से संपर्क। अंत 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तारी के बाद जेल में आत्महत्या। मैक्सवेल की सजा एपस्टीन की मददगार गिस्लेन मैक्सवेल फिलहाल 20 साल की सजा काट रही हैं। 4. मी टू (#MeToo) मूवमेंट और एपस्टीन का पतन एपस्टीन का मामला 2005 में शुरू हुआ था, लेकिन 2017 में हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ शुरू हुए 'मी टू' मूवमेंट ने एपस्टीन के पुराने काले कारनामों को फिर से हवा दी। वर्जीनिया ग्रिफे सहित 80 से ज्यादा महिलाओं के साहस ने इस रसूखदार अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाया, जहाँ उसकी मौत एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है।

रवि चौहान फ़रवरी 7, 2026 0
अमेरिका ने PoK-अक्साई चिन को भारत का हिस्सा बताया
US Shares Full Indian Map with PoK & Aksai Chin: अमेरिका ने दिखाया भारत का 'अखंड' नक्शा; व्यापार समझौते में भारी टैक्स कटौती।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिका ने जारी किया भारत का 'अखंड' मैप; PoK और अक्साई चिन को दिखाया भारत का हिस्सा वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 7 फरवरी 2026 भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) के साथ ही एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के साथ भारत का जो नक्शा साझा किया है, उसमें पूरा जम्मू-कश्मीर, PoK और अक्साई चिन को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया है। यहाँ इस समझौते और नक्शे से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है: 1. नक्शे का कूटनीतिक संदेश: पाकिस्तान और चीन को झटका अमेरिका द्वारा साझा किया गया यह मैप भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। बदला हुआ रुख: आमतौर पर पश्चिमी देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन PoK और अक्साई चिन को 'विवादित' बताते हुए अलग रंग या डॉटेड लाइन्स (Dotted Lines) से दिखाते थे। ट्रंप प्रशासन की मुहर: ट्रंप प्रशासन ने इस नक्शे के जरिए भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता को पूरी तरह मान्यता देने का संकेत दिया है। पाकिस्तान को जवाब: यह नक्शा पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के उस बयान के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की बात कही थी। 2. भारत-अमेरिका ट्रेड डील: निर्यातकों की 'दिवाली' दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) के फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है, जिसके भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूरगामी परिणाम होंगे: टैक्स में भारी कटौती: भारतीय सामानों पर लगने वाले अमेरिकी टैक्स को 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूसी तेल पर राहत: रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स हटा लिया गया है। बाजार की पहुंच: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का विशाल बाजार खोलेगी। भारत का वादा: भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा। 📊 समझौते के प्रमुख लाभ: किस क्षेत्र को क्या मिला? क्षेत्र (Sector) मिलने वाला लाभ / रियायत फार्मा (Generic Drugs) टैरिफ पूरी तरह खत्म (Zero Tariff) और नियामक नियमों में सुधार। रत्न और आभूषण हीरे और रत्नों के निर्यात पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। MSME और किसान अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच, टेक्सटाइल और हस्तशिल्प को बढ़ावा। ऑटो पार्ट्स विशेष 'टैरिफ रेट कोटा' के तहत अमेरिकी बाजार में एंट्री। विमान पार्ट्स सेक्शन 232 के तहत विशेष छूट मिलेगी। 3. ऐतिहासिक विवादों की पृष्ठभूमि PoK विवाद (1947): महाराजा हरि सिंह के विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बावजूद पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है। अमेरिका के इस नए नक्शे ने पाकिस्तान के 'आजाद कश्मीर' वाले दावे को खारिज कर दिया है। अक्साई चिन (1962): चीन ने 1962 के युद्ध के बाद लद्दाख के लगभग 38,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा किया था। अमेरिकी मैप में इसे भारत का हिस्सा दिखाना चीन के विस्तारवाद के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

रवि चौहान फ़रवरी 7, 2026 0
अमेरिकी नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की चेतावनी
US Iran Crisis 2026: अमेरिका ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा; ओमान में परमाणु वार्ता शुरू; USS अब्राहम लिंकन तैनात।

ईरान-अमेरिका तनाव: अमेरिका ने नागरिकों को देश छोड़ने के लिए कहा; ओमान में परमाणु वार्ता शुरू, मिडिल ईस्ट में भारी सैन्य तैनाती तेहरान/मस्कट | 6 फरवरी 2026 ईरान में गहराते आंतरिक संकट और अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए 'एडवाइजरी' जारी कर तुरंत देश छोड़ने की सख्त चेतावनी दी है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है और नागरिक सुरक्षित निकलने के लिए सरकारी मदद पर निर्भर न रहें। यहाँ इस तनावपूर्ण स्थिति और ओमान में हो रही वार्ता की मुख्य जानकारी दी गई है: 1. नागरिकों को चेतावनी: "अपने निकलने का प्लान खुद बनाएं" अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त होने का हवाला देते हुए नागरिकों को आगाह किया है: सीमित सहायता: अमेरिका का ईरान में कोई कूटनीतिक मिशन नहीं है (स्विट्जरलैंड दूतावास हितों का प्रतिनिधित्व करता है), इसलिए आधिकारिक मदद मिलना लगभग नामुमकिन है। दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship): जिनके पास अमेरिका और ईरान दोनों की नागरिकता है, उनके लिए सबसे ज्यादा खतरा है। ईरान दोहरी नागरिकता नहीं मानता, जिससे ऐसे लोगों की गिरफ्तारी और लंबी हिरासत का जोखिम बढ़ गया है। जरूरी सलाह: प्रदर्शनों से दूर रहें, खाना-पानी और दवाओं का स्टॉक रखें और इंटरनेट ब्लैकआउट के लिए तैयार रहें। 2. मस्कट में परमाणु वार्ता: कूटनीति बनाम ताकत 9 महीनों के अंतराल और जून 2025 के संघर्ष के बाद, ओमान की राजधानी मस्कट में आज हाई-लेवल मीटिंग शुरू हो रही है। प्रमुख वार्ताकार: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ व जैरेड कुशनेर के बीच मुलाकात होनी है। ट्रंप का रुख: व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि वे 'जीरो परमाणु क्षमता' चाहते हैं। यदि कूटनीति विफल हुई, तो राष्ट्रपति सैन्य विकल्प (ताकत का इस्तेमाल) के लिए तैयार हैं। 3. अमेरिका की 4 कड़ी शर्तें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने समझौते के लिए ईरान के सामने ये मांगें रखी हैं: यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर पूर्ण प्रतिबंध। पहले से संवर्धित यूरेनियम को देश से हटाना। लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना। क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों (जैसे हिजबुल्लाह, हूती) को मदद बंद करना। 📊 मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य शक्ति (CENTCOM) युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका ने अरब सागर और लाल सागर में अपनी घेराबंदी मजबूत कर ली है: सैन्य ईकाई विवरण USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर, जो ऑपरेशन में सक्रिय है। सैन्य उपस्थिति करीब 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक पूरे क्षेत्र में तैनात। मिसाइल विध्वंसक 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए तैनात। रणनीतिक ठिकाने कतर, बहरीन, सऊदी अरब और जॉर्डन के एयरबेस पर वायुसेना अलर्ट पर। 4. वार्ता से पहले ईरान का शक्ति प्रदर्शन बातचीत की टेबल पर बैठने से ठीक पहले ईरान ने आक्रामक रुख दिखाया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपनी घातक खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल को तैनात किया है। तेहरान का कहना है कि वे केवल परमाणु मुद्दे पर बात करेंगे, जबकि अमेरिका मिसाइल प्रोग्राम और मानवाधिकारों को भी शामिल करना चाहता है।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
पाकिस्तानी PM बोले- कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा
शहबाज शरीफ का विवादित बयान; कश्मीर को बताया पाकिस्तान का हिस्सा; सिंधु जल संधि पर भारत को दी धमकी।

शहबाज शरीफ का PoK में फिर जहर: बोले- 'कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा'; भारत के खिलाफ आतंकी और पानी के मुद्दे पर दी धमकी मुजफ्फराबाद | 6 फरवरी 2026 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की विधानसभा में एक बार फिर भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी की। 'कश्मीर एकजुटता दिवस' के मौके पर मुजफ्फराबाद पहुंचे शहबाज ने कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने का राग अलापा और भारत पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के झूठे आरोप लगाए। यहाँ शहबाज शरीफ के संबोधन और भारत-पाक तनाव की मुख्य जानकारी दी गई है: 1. कश्मीर पर विवादित बयान और जिन्ना का हवाला शहबाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद विधानसभा को संबोधित करते हुए कश्मीर मुद्दे को अपनी विदेश नीति की नींव बताया। "पाकिस्तान का हिस्सा": शहबाज ने दावा किया कि कश्मीर अंततः पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा। उन्होंने कश्मीर विवाद को फिलिस्तीन मुद्दे के समान बताया। लाइफ लाइन: उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए कश्मीर को पाकिस्तान की 'लाइफ लाइन' करार दिया। UNSC का राग: शरीफ ने फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के दशकों पुराने प्रस्तावों को लागू करने की मांग दोहराई। 2. 2025 के सैन्य संघर्ष का जिक्र और झूठे दावे पाकिस्तानी पीएम ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 4 दिवसीय सैन्य संघर्ष को याद करते हुए जीत का दावा किया। विमान गिराने का दावा: शहबाज ने एक बार फिर मनगढ़ंत दावा किया कि पाकिस्तान ने उस संघर्ष के दौरान भारत के 7 विमान गिराए थे। आतंकवाद का आरोप: उन्होंने भारत पर BLA (बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी) के जरिए पाकिस्तान में 'प्रॉक्सी वॉर' और आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया, जिसे भारत हमेशा सिरे से खारिज करता रहा है। 3. 'सिंधु जल संधि' पर भारत को धमकी अक्टूबर 2025 में सिंधु जल संधि को लेकर हुए विवाद पर शहबाज ने आक्रामक रुख दिखाया। "बूंद भर पानी नहीं देंगे": शरीफ ने धमकी देते हुए कहा, "दुश्मन पाकिस्तान से एक बूंद पानी भी नहीं छीन सकता। अगर पानी रोकने की कोशिश की तो पाकिस्तान ऐसा सबक सिखाएगा जिसे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।" 📊 फ्लैशबैक: भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' (मई 2025) शहबाज शरीफ के दावों के विपरीत, सच्चाई यह है कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा प्रहार किया था: क्यों हुआ हमला: पहलगाम आतंकी हमले (26 मौतें) के जवाब में। ठिकाने: भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों (मुरिदके, कोटली, भिंबर, बहावलपुर आदि) को तबाह किया। नतीजा: 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे। 4. भारत का कड़ा स्टैंड भारत ने हमेशा की तरह पाकिस्तान के इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन बंद करना चाहिए। PoK पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है, जिस पर चर्चा की जानी चाहिए।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
एपस्टीन की नई फाइलों में दावा-लड़कियों को जबरन प्रेग्नेंट कराया
एपस्टीन फाइल्स में 'ह्यूमन इनक्यूबेटर' और हत्याओं का खुलासा; मस्क, गेट्स और ब्रिटिश पीएम पर संकट।

एपस्टीन फाइल्स का महाविस्फोट: 'ह्यूमन इनक्यूबेटर' और मर्डर मिस्ट्री का खुलासा; मस्क, गेट्स और ट्रंप समेत कई दिग्गजों के नाम वॉशिंगटन/लंदन | 6 फरवरी 2026 दुनिया के सबसे कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच की लाखों फाइलें अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DoJ) द्वारा सार्वजनिक किए जाने के बाद वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है। 30 लाख पेज, 1.80 लाख तस्वीरों और 2 हजार वीडियो के इस डेटा ने उन डरावने रहस्यों से पर्दा उठाया है, जो अब तक एपस्टीन के निजी आइलैंड और 'जोरो रैंच' फार्म हाउस की दीवारों के पीछे दबे थे। यहाँ नवीनतम फाइलों से निकले 5 सबसे चौंकाने वाले खुलासे दिए गए हैं: 1. 'ह्यूमन इनक्यूबेटर' और गायब होते बच्चे दस्तावेजों में एक नाबालिग पीड़िता का बयान सामने आया है जिसने खुद को 'ह्यूमन इनक्यूबेटर' बताया। जबरन गर्भधारण: आरोप है कि न्यू मैक्सिको स्थित 'जोरो रैंच' में लड़कियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन बच्चे पैदा कराए जाते थे। रहस्यमयी मौतें: एक फाइल के अनुसार, दो विदेशी महिलाओं की यौन शोषण के दौरान गला घोंटकर हत्या कर दी गई और उन्हें फार्म हाउस में ही दफना दिया गया। इसमें एपस्टीन की साथी गिस्लेन मैक्सवेल की भूमिका भी संदिग्ध है। 2. लपेटे में दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग जारी की गई फाइलों में कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों के नाम और उनके बीच हुए ईमेल संवाद दर्ज हैं। इलॉन मस्क: नवंबर 2012 के एक ईमेल में मस्क ने एपस्टीन के आइलैंड पर 'वाइल्ड पार्टी' के बारे में पूछा था। प्रिंस एंड्रयू: तस्वीरों में ब्रिटिश प्रिंस एक अज्ञात महिला के ऊपर झुके हुए नजर आ रहे हैं। दिग्गज नाम: बिल गेट्स, डोनाल्ड ट्रंप, रिचर्ड ब्रैनसन और पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन का भी जिक्र है। नोट: सरकारी एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि नाम आने का मतलब यह नहीं है कि ये सभी व्यक्ति अपराध में शामिल थे। 3. ब्रिटेन में राजनीतिक भूचाल: स्टार्मर से इस्तीफे की मांग एपस्टीन फाइल्स के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। पीटर मैंडेलसन विवाद: पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन की एक आपत्तिजनक तस्वीर सामने आई है। स्टार्मर पर आरोप है कि उन्हें मैंडेलसन और एपस्टीन की दोस्ती का पता था, फिर भी उन्होंने नियुक्ति की। माफी: प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस मामले से आहत लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है, लेकिन इस्तीफे का दबाव बढ़ता जा रहा है। 4. भारतीय कनेक्शन: पूर्व उच्चायुक्त का नाम दस्तावेजों में ब्रिटेन में भारत के पूर्व उच्चायुक्त वाई.के. सिन्हा के नाम का भी उल्लेख है। वे बाद में भारत के मुख्य सूचना आयुक्त भी रहे। हालांकि, उनके नाम का संदर्भ क्या है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है और उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 📊 एपस्टीन केस: एक नज़र में विवरण सांख्यिकी / जानकारी डेटा का आकार 30 लाख पेज, 1.80 लाख फोटो, 2000 वीडियो लेनदेन का तरीका पारंपरिक बैंक के बजाय बिटकॉइन (Crypto) का इस्तेमाल प्राइवेट जेट 'लोलिता एक्सप्रेस' (नाबालिगों को लाने के लिए इस्तेमाल) मुख्य अपराधी जेफ्री एपस्टीन (जेल में आत्महत्या), गिस्लेन मैक्सवेल (20 साल की सजा) लापरवाही जस्टिस डिपार्टमेंट ने पीड़ितों के नाम और फोन नंबर सार्वजनिक करने की गलती मानी 5. शोषण का तरीका: फिल्म और शॉपिंग का लालच दस्तावेजों से पता चला है कि गिस्लेन मैक्सवेल 1994 से 1997 के बीच नाबालिग लड़कियों को फंसाने के लिए 'ग्रूमिंग' करती थीं। वे लड़कियों से दोस्ती करतीं, उन्हें फिल्में दिखाने या शॉपिंग पर ले जातीं और फिर धीरे-धीरे उन्हें एपस्टीन के पास 'मसाज' के लिए भेजतीं, जहाँ उनका यौन शोषण होता था।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
पाकिस्तानी शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान ब्लास्ट
इस्लामाबाद में मस्जिद पर आत्मघाती हमला; 24 की मौत; पाकिस्तान बना दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश।

इस्लामाबाद में बड़ा आतंकी हमला: जुमे की नमाज के दौरान इमामबाड़े में आत्मघाती धमाका; 24 की मौत, 101 घायल इस्लामाबाद | 6 फरवरी 2026 पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद आज एक भीषण आत्मघाती हमले से दहल उठी। शहजाद टाउन इलाके में स्थित एक शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) को उस समय निशाना बनाया गया जब वहां जुमे की नमाज अदा की जा रही थी। पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट 'डॉन' के मुताबिक, इस आत्मघाती हमले में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 101 से अधिक लोग घायल हैं। यहाँ इस दुखद घटना की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. हमले का घटनाक्रम: नमाज के दौरान मची चीख-पुकार लोकेशन: हमला इस्लामाबाद के बाहरी इलाके शहजाद टाउन में हुआ। समय: दोपहर में जब मस्जिद नमाजियों से खचाखच भरी थी, तभी एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इमरजेंसी: इस्लामाबाद पुलिस चीफ ने पूरे शहर में हाई अलर्ट और इमरजेंसी घोषित कर दी है। अस्पतालों में 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है क्योंकि कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 2. राष्ट्रपति और सरकार की प्रतिक्रिया आसिफ अली जरदारी: राष्ट्रपति ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'इंसानियत के खिलाफ' बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ितों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी: संसदीय मामलों के मंत्री ने कहा कि ऐसी आतंकी घटनाएं देश का हौसला नहीं तोड़ सकतीं और सभी को एकजुट होने की जरूरत है। 📊 पाकिस्तान में बढ़ता आतंकी ग्राफ: एक विश्लेषण पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था लगातार चरमरा रही है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) की हालिया रिपोर्ट चौंकाने वाली है: सूचकांक विवरण GTI 2025 रैंकिंग पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश (बुर्किना फासो के बाद)। हमलों में वृद्धि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों में 90% की बढ़ोतरी। सबसे खतरनाक संगठन TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) - लगातार दूसरे साल। सबसे प्रभावित क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान (90% आतंकी घटनाएं यहीं हुईं)। पिछला हमला 11 नवंबर 2025: कोर्ट के बाहर धमाका (12 मौतें)। 3. 'दहशत का केंद्र' बना पाकिस्तान सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) ने अब ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ इस्लामाबाद जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। 2024 में पाकिस्तान चौथे स्थान पर था, लेकिन केवल एक साल में वह दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक है।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
ट्रम्प बोले- भारत ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा
Trump Claims India-Venezuela Oil Deal: भारत अब ईरान नहीं, वेनेजुएला से खरीदेगा तेल; ट्रम्प का बड़ा खुलासा; रिलायंस फिर शुरू करेगी आयात।

ट्रम्प का बड़ा दावा: भारत अब ईरान नहीं, वेनेजुएला से खरीदेगा तेल; मोदी-रोड्रिग्ज बातचीत के बाद 'ऑयल डील' पर लगी मुहर वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 1 फरवरी 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना बंद करने और उसकी जगह वेनेजुएला से तेल आयात करने का बड़ा सौदा कर लिया है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि इस सौदे का 'कॉन्सेप्ट' तय हो चुका है और जल्द ही भारत वेनेजुएलाई तेल का बड़ा खरीदार बनेगा। यहाँ इस रणनीतिक बदलाव और तेल सौदे की पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. ट्रम्प का बयान: ईरान को झटका, भारत को विकल्प ट्रम्प ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका की नई ऊर्जा नीति के तहत भारत अब वेनेजुएला की ओर रुख करेगा। डील पक्की: ट्रम्प ने कहा, "हमने पहले ही एक डील कर ली है। भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा, ईरान से नहीं।" चीन को न्योता: ट्रम्प ने यह भी जोड़ दिया कि यदि चीन चाहे, तो वह भी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते वह अमेरिकी शर्तों का पालन करे। 2. मोदी-रोड्रिग्ज बातचीत: सौदे की नींव ट्रम्प का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच 30 जनवरी को हुई टेलीफोनिक बातचीत के ठीक बाद आया है। द्विपक्षीय संबंध: पीएम मोदी ने X पर बताया कि दोनों देश अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। रणनीतिक साझेदारी: विशेषज्ञों का मानना है कि इस बातचीत का मुख्य केंद्र ऊर्जा सुरक्षा और तेल आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना था। 3. वेनेजुएला का तेल और भारत: उतार-चढ़ाव का इतिहास वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत का आयात प्रभावित होता रहा है। 2019 का प्रतिबंध: अमेरिका ने वेनेजुएला पर 'सेकेंडरी सेंक्शंस' लगाए थे, जिसके बाद भारत का 6% तेल आयात (जो वेनेजुएला से आता था) बंद हो गया। 2024-25 की स्थिति: प्रतिबंधों में ढील मिलने पर भारत ने फिर से 1.41 अरब डॉलर का तेल खरीदा, लेकिन मई 2025 में सख्ती बढ़ने पर यह आयात फिर गिरकर 0.3% रह गया। 4. रिलायंस की बड़ी भूमिका: जामनगर रिफाइनरी तैयार भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला से तेल आयात फिर से शुरू करने के लिए अमेरिकी प्रशासन (ट्रेजरी विभाग) से लगातार बातचीत कर रही है। जामनगर कॉम्प्लेक्स: रिलायंस के पास गुजरात में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है (14 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता), जो वेनेजुएला के 'भारी कच्चे तेल' (Heavy Crude) को प्रोसेस करने के लिए सबसे उपयुक्त है। रूस का विकल्प: पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात घटाने का दबाव बना रहे हैं, ऐसे में रिलायंस वेनेजुएला को एक मजबूत वैकल्पिक सप्लाई चेन के रूप में देख रही है। 📊 वेनेजुएला तेल सौदा: मुख्य आंकड़े विवरण सांख्यिकी / जानकारी तेल भंडार दुनिया में नंबर-1 (OPEC सदस्य) अमेरिका को आपूर्ति 3 से 5 करोड़ बैरल (डेल्सी रोड्रिग्ज का वादा) सौदे की कीमत (5 करोड़ बैरल) लगभग ₹25,000 करोड़ रिलायंस का पिछला आयात ~63,000 बैरल प्रतिदिन (2025 की शुरुआत) अमेरिकी नियंत्रण तेल की बिक्री से मिलने वाली रकम पर ट्रम्प का कंट्रोल रहेगा। 5. रणनीतिक प्रभाव: ईरान और रूस पर असर अगर भारत ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदता है, तो इसके गहरे मायने हैं: ईरान पर दबाव: अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए उसकी तेल कमाई को पूरी तरह बंद करना चाहता है। ऊर्जा सुरक्षा: भारत के लिए रूस और मिडिल ईस्ट के अलावा लैटिन अमेरिका में तेल का एक सस्ता और बड़ा स्रोत खुल जाएगा।

रवि चौहान फ़रवरी 1, 2026 0
नाबालिग लड़कियों का रोजाना रेप करता था एपस्टीन
इलॉन मस्क के आइलैंड से जुड़े ईमेल और बिल गेट्स पर यौन बीमारी (STD) के दावों का खुलासा।

एपस्टीन सेक्स स्कैंडल: 30 लाख पन्नों की नई फाइलें जारी; प्रिंस एंड्रयू की आपत्तिजनक तस्वीरें आई सामने; बिल गेट्स, मस्क और मीरा नायर के नाम का खुलासा वाशिंगटन | 31 जनवरी 2026 अमेरिकी न्याय विभाग (Justice Department) ने दुनिया के सबसे चर्चित और घिनौने जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़े दस्तावेजों का नया जखीरा सार्वजनिक किया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी इन फाइलों में 30 लाख पन्ने, 1.8 लाख तस्वीरें और 2,000 से अधिक वीडियो शामिल हैं। इन दस्तावेजों ने न केवल एपस्टीन के जुल्मों की दास्तां बयां की है, बल्कि दुनिया की कई दिग्गज हस्तियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ नई फाइलों से हुए 5 सबसे बड़े खुलासे दिए गए हैं: 1. प्रिंस एंड्रयू: "पेट छूते और झुके हुए" तस्वीरें वायरल ब्रिटिश शाही परिवार के प्रिंस एंड्रयू के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। नई तस्वीरों में वे बेहद आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं: तस्वीरों का सच: फाइलों में प्रिंस एंड्रयू एक जमीन पर लेटी महिला के ऊपर झुके हुए दिख रहे हैं। एक तस्वीर में वे महिला के पेट को छूते नजर आ रहे हैं। रूसी महिला से मुलाकात: 2010 के ईमेल दिखाते हैं कि एपस्टीन ने प्रिंस एंड्रयू की मुलाकात एक 26 साल की रूसी महिला से कराने के लिए डिनर का न्योता दिया था। दबाव: प्रिंस एंड्रयू पहले भी एपस्टीन के साथ दोस्ती को लेकर विवादों में रहे हैं, लेकिन ये नई तस्वीरें उनके दावों को कमजोर कर सकती हैं। 2. इलॉन मस्क: 'वाइल्ड पार्टी' और आइलैंड का न्योता टेस्ला और एक्स (X) के मालिक इलॉन मस्क का नाम पहली बार इन फाइलों में औपचारिक रूप से आया है: ईमेल एक्सचेंज: 2012-13 के बीच एपस्टीन ने मस्क को कई बार अपने निजी आइलैंड पर आने का न्योता दिया। सवाल-जवाब: एक ईमेल में मस्क ने एपस्टीन से पूछा था, "आपके आइलैंड पर सबसे ‘वाइल्ड पार्टी’ किस दिन होगी?" * मस्क की सफाई: मस्क ने हमेशा कहा है कि उन्होंने न्योता ठुकरा दिया था और वे कभी वहां नहीं गए। दस्तावेजों में भी उनके आइलैंड जाने की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं मिली है। 3. बिल गेट्स: यौन बीमारी (STD) और 'गुप्त' दवाइयों का दावा माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को लेकर एपस्टीन के ईमेल में चौंकाने वाला दावा किया गया है: दवाइयों की मांग: एपस्टीन ने एक ड्राफ्ट ईमेल में लिखा कि बिल गेट्स को रूसी लड़कियों से संबंध के बाद यौन बीमारी (STD) हुई थी और उन्होंने अपनी पत्नी मेलिंडा को चुपचाप देने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं। तलाक की वजह: मेलिंडा गेट्स पहले ही कह चुकी हैं कि बिल के एपस्टीन से संबंध उनके तलाक की मुख्य वजहों में से एक थे। बिल गेट्स ने इन संबंधों पर पछतावा जताया है। 4. मीरा नायर: मैक्सवेल के घर 'आफ्टर-पार्टी' में मौजूदगी भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर का नाम भी एक ईमेल में आया है: फिल्म 'एमेलिया' की पार्टी: 2009 में मीरा नायर की फिल्म 'एमेलिया' की रिलीज के बाद एपस्टीन की पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल के घर पर एक पार्टी हुई थी। VVIP गेस्ट लिस्ट: इस पार्टी में मीरा नायर के साथ पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और अमेजन के जेफ बेजोस भी मौजूद थे। हालांकि, मीरा नायर के खिलाफ किसी गलत हरकत का कोई आरोप नहीं है। 5. एपस्टीन का 'ऑपरेशन' तरीका: मसाज के नाम पर शोषण दस्तावेजों में बताया गया है कि एपस्टीन का पाम बीच वाला घर एक नरक की तरह था: सिस्टम: लड़कियों को निजी गाड़ी से लाया जाता था, उनकी जानकारी नोट की जाती थी और फिर मसाज टेबल वाले कमरे में भेजा जाता था। मजबूरी: नाबालिग लड़कियों को एक-दूसरे के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। मना करने पर उन्हें धमकाया जाता था। रेट: हर बार शोषण के बाद लड़कियों को 200 डॉलर दिए जाते थे। 📊 एपस्टीन केस: एक नजर में विवरण जानकारी मुख्य आरोपी जेफ्री एपस्टीन (करोड़पति फाइनेंसर) पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल (20 साल की जेल काट रही है) प्राइवेट जेट 'लोलिता एक्सप्रेस' (लड़कियों को लाने-ले जाने के लिए) कुल फाइलें (नई) 30 लाख पन्ने, 1.8 लाख फोटो, 2000 वीडियो प्रमुख हस्तियां प्रिंस एंड्रयू, बिल क्लिंटन, बिल गेट्स, इलॉन मस्क

रवि चौहान जनवरी 31, 2026 0
पाकिस्तानी PM बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है
Pakistan Economic Crisis 2026: 'दुनिया से पैसे मांगने में शर्म आती है' - शहबाज शरीफ का बड़ा बयान; पाकिस्तान पर 76,000 अरब का कर्ज।

शहबाज शरीफ का कबूलनामा: 'दुनिया से भीख मांगने में आती है शर्म' इस्लामाबाद | 31 जनवरी 2026 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की जर्जर आर्थिक स्थिति और विदेशी कर्ज पर बढ़ती निर्भरता को लेकर अपना दर्द साझा किया है। इस्लामाबाद में व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने माना कि बार-बार दूसरे देशों के सामने हाथ फैलाने से देश के आत्मसम्मान को ठेस पहुँच रही है। यहाँ पाकिस्तान के आर्थिक संकट और शहबाज के संबोधन की बड़ी बातें दी गई हैं: 1. "भीख मांगने में आती है शर्म" प्रधानमंत्री ने देश की बदहाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: सम्मान पर बोझ: शहबाज शरीफ ने कहा, "जब सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे मांगने जाते हैं, तो हमें शर्मिंदगी महसूस होती है। यह कर्ज हमारे आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है।" शर्तों की मजबूरी: उन्होंने स्वीकार किया कि कर्ज के बदले कई बार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और देशों की उन शर्तों को भी मानना पड़ता है, जिन्हें वे 'ना' कहना चाहते हैं। 2. दोस्त देशों के सहारे टिकी है पाकिस्तान की सांसें पाकिस्तान वर्तमान में पूरी तरह से बाहरी मदद और 'कर्ज रोलओवर' पर निर्भर है: हर मौसम का दोस्त (चीन): चीन ने पाकिस्तान के 4 अरब डॉलर के कर्ज की समय-सीमा बढ़ा दी है। चीन अब तक पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश (CPEC) कर चुका है। सऊदी अरब और खाड़ी देश: सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर बैंक में जमा कराए और तेल उधार पर दिया। UAE और कतर भी बिजली, बंदरगाह और कृषि क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश का वादा कर चुके हैं। 📊 पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली: आंकड़ों की जुबानी पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़े देश की भयावह स्थिति को दर्शाते हैं: श्रेणी वर्तमान स्थिति (2025-26) 2018 की स्थिति गरीबी दर 45% (लगभग आधी आबादी) 21.9% अत्यधिक गरीबी 16.5% 4.9% बेरोजगारी 80 लाख+ लोग (7.1%) - कुल सरकारी कर्ज ₹76,000 अरब+ 4 साल में दोगुना 3. भविष्य की राह: "पुराना तरीका अब नहीं चलेगा" शहबाज शरीफ ने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान को अपनी इज्जत बचानी है, तो उसे दूसरे रास्ते तलाशने होंगे: इनोवेशन की कमी: पीएम ने माना कि पाकिस्तान ने रिसर्च, डेवलपमेंट और तकनीक पर काम नहीं किया। क्षेत्रों पर ध्यान: उन्होंने सॉफ्टवेयर, कृषि और पशुपालन में सुधार की जरूरत बताई ताकि निर्यात (Export) केवल कपड़ा उद्योग तक सीमित न रहे। 4. निवेश की उम्मीद या नया कर्ज? शहबाज सरकार अब विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के जरिए सऊदी और कतर से निवेश लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राजनीतिक स्थिरता और बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं होता, तब तक केवल निवेश के वादे देश को डिफॉल्ट होने से नहीं बचा पाएंगे।

रवि चौहान जनवरी 31, 2026 0
बलूचिस्तान में एकसाथ 12 जगहों पर बलूचों का हमला
बलूचिस्तान में BLA का 'ऑपरेशन हेरोफ': 12 जगहों पर हमले, 47 लोगों की मौत

बलूचिस्तान में 'गृहयुद्ध' जैसे हालात: BLA का 12 जगहों पर एक साथ हमला; 10 सुरक्षाकर्मियों की मौत, 37 लड़ाके ढेर; शहबाज शरीफ ने भारत पर मढ़ा दोष क्वेटा/इस्लामाबाद | 31 जनवरी 2026 पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत बलूचिस्तान शनिवार को एक बार फिर भीषण हिंसा की आग में झुलस गया। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 'ऑपरेशन हेरोफ' के तहत राज्य के 12 से ज्यादा जिलों में एक साथ बड़े हमले किए। इस खूनी संघर्ष में कम से कम 10 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि जवाबी कार्रवाई में 37 बलूच लड़ाके मारे गए। यहाँ बलूचिस्तान के मौजूदा बिगड़ते हालातों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. 'ऑपरेशन हेरोफ': क्वेटा से ग्वादर तक बारूद का धुआं शनिवार सुबह बलूच विद्रोहियों ने सुनियोजित तरीके से सुरक्षाबलों, प्रशासनिक अधिकारियों और मुख्य राजमार्गों को निशाना बनाया। घेराबंदी: BLA लड़ाकों ने क्वेटा, पसनी, मस्तुंग, नुश्की और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर में हमले किए। बाजार पर कब्जा: BLA ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि क्वेटा के एक मुख्य बाजार इलाके पर उनका नियंत्रण हो गया है। हथियारबंद लड़ाकों ने कुछ समय के लिए पूरे इलाके को सील कर दिया। डिप्टी कमिश्नर का अपहरण: विद्रोहियों ने नुश्की जिले के डिप्टी कमिश्नर का अपहरण कर लिया है, जिससे प्रशासन में हड़कंप मचा है। 2. शहबाज शरीफ का पुराना राग: "हमलों के पीछे भारत" हमलों के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुरक्षाबलों की प्रशंसा की लेकिन साथ ही अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ दिया। आरोप: शहबाज ने दावा किया कि इन हमलों की साजिश भारत में रची गई है। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई सबूत पेश नहीं किया। संकल्प: पीएम ने कहा कि जब तक पाकिस्तान से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, यह जंग जारी रहेगी। 📊 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025: पाकिस्तान की बदहाली हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित देश बन गया है। संगठन हमलों में वृद्धि (2024-25) मुख्य प्रभाव क्षेत्र TTP (तालिबान) 90% खैबर पख्तूनख्वा BLA (बलूच आर्मी) 60% बलूचिस्तान IS-K (खुरासान) सक्रियता बढ़ी शहरी इलाके नोट: पाकिस्तान में होने वाली 90% आतंकी घटनाएं केवल खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हो रही हैं। 3. बलूचिस्तान: प्राकृतिक रूप से अमीर, आर्थिक रूप से कंगाल बलूचिस्तान का विद्रोह केवल सीमा पार की साजिश नहीं, बल्कि दशकों के शोषण का नतीजा है: संसाधनों की लूट: बलूच लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और चीन (CPEC के जरिए) उनके खनिज, तेल और गैस संसाधनों का शोषण कर रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग गरीबी और अशिक्षा में जी रहे हैं। गुरिल्ला रणनीति: BLA पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर पाकिस्तानी सेना पर हमला करती है और सुरक्षित ठिकानों पर लौट जाती है। वे विशेष रूप से चीनी नागरिकों और अन्य प्रांतों से आए मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। 4. आम जनता का दर्द: बंदूक की नोक पर जिंदगी क्वेटा के स्थानीय निवासी अब्दुल वली की आपबीती बलूचिस्तान की हकीकत बयां करती है। उन्होंने बताया कि शहर में लगातार धमाके हो रहे हैं और पुलिस घायलों की मदद करने वालों पर भी बंदूक तान रही है। पूरा कारोबार ठप है और सड़कें सुनसान हैं।

रवि चौहान जनवरी 31, 2026 0
बांग्लादेश ने भारत से स्पेशल इकोनॉमिक जोन छीना
चीन की एंट्री: यह जमीन अब चीन को ड्रोन फैक्ट्री और 'मिलिट्री इकोनॉमिक जोन' के लिए सौंपी गई।

यूनुस सरकार का भारत को झटका: चटगांव SEZ आवंटन रद्द, चीन बनाएगा 'ड्रोन फैक्ट्री'; 100 किमी दूर सीमा पर मंडराएगा खतरा ढाका/बीजिंग | 30 जनवरी 2026 बांग्लादेश की मुहम्मद यूनुस सरकार ने भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को बड़ा झटका देते हुए चटगांव में आवंटित 850 एकड़ की स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) जमीन का आवंटन रद्द कर दिया है। 2015 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान तय हुई इस जमीन को अब चीन को सौंप दिया गया है, जहाँ बीजिंग एक विशाल ड्रोन फैक्ट्री स्थापित करेगा। भारत की सीमा से मात्र 100 किमी दूर बन रहा यह प्लांट रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। 1. भारत का SEZ रद्द, चीन की 'मिलिट्री' एंट्री जमीन का नया उपयोग: यूनुस सरकार ने मीरसाराई (चटगांव) की इस भूमि को 'डिफेंस इकोनॉमिक जोन' घोषित कर दिया है। यहाँ चीन की सैन्य कंपनी CETC ड्रोन निर्माण इकाई लगाएगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: चीन न केवल ड्रोन बनाएगा, बल्कि बांग्लादेश को टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर करेगा। यहाँ मध्यम दूरी और वर्टिकल लिफ्ट वाले एडवांस ड्रोन बनेंगे। उत्पादन का समय: इस साल के अंत तक फैक्ट्री में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। 2. 20 हजार करोड़ की 'फाइटर जेट डील' चीन और बांग्लादेश के बीच केवल ड्रोन ही नहीं, बल्कि फाइटर जेट्स को लेकर भी बड़ी डील हुई है: J-10CE जेट्स: बांग्लादेश चीन से 20 J-10CE मल्टीरोल फाइटर जेट खरीद रहा है। इनकी डिलीवरी 2027 तक पूरी होगी। बड़ी मोहलत: 2.2 अरब डॉलर (20 हजार करोड़ रुपये) के इस सौदे का भुगतान बांग्लादेश अगले 10 सालों में करेगा। ट्रेनिंग: चीनी वायुसेना पहले ही बांग्लादेशी पायलट्स को ट्रेनिंग देना शुरू कर चुकी है। 📊 भारत को मिलने वाले फायदे अब खत्म लाभ के क्षेत्र क्या खोया भारत ने? निवेश: भारतीय कंपनियों (अडाणी पोर्ट्स आदि) को मिलने वाली विशेष सुविधाएं और टैक्स छूट। निर्यात: LoC की शर्तों के तहत भारतीय सामान की 85% अनिवार्य खरीद का मौका। कनेक्टिविटी: उत्तर-पूर्व (North-East) राज्यों के लिए लॉजिस्टिक्स और ट्रेड रूट का विकल्प। रणनीतिक: बंगाल की खाड़ी में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की क्षमता। 3. पाकिस्तान जैसा 'चीनी पैटर्न' विशेषज्ञ इसे बांग्लादेश का 'पाकिस्तानीकरण' मान रहे हैं। चीन ने इसी तरह पाकिस्तान को भी 36 J-10CE जेट दिए हैं। हालांकि, मई 2025 के संघर्ष में भारतीय रक्षा प्रणाली (ब्रह्मोस और आकाशतीर) ने इन चीनी हथियारों और PL-15E मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया था।

रवि चौहान जनवरी 30, 2026 0
ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे
ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

ट्रम्प बनाम यूरोप: ग्रीनलैंड पर 'आर्कटिक वॉर'; 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा, जवाब में EU ने तैनात किए सैनिक और लोड किया 'ट्रेड बाजूका' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की धमकियों और 'खरीदने' की जिद के जवाब में, डेनमार्क और उसके 8 नाटो (NATO) सहयोगियों ने सैन्य मोर्चा खोल दिया है। इसके पलटवार में ट्रम्प ने इन देशों पर 10% से 25% तक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है, जिसे यूरोपीय नेताओं ने 'ब्लैकमेल' करार दिया है। 1. 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस': ग्रीनलैंड में यूरोपीय फौज की एंट्री डेनमार्क की अगुवाई में ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' शुरू किया गया है। यह एक सैन्य अभ्यास है, लेकिन इसका संदेश पूरी तरह राजनीतिक है। किसने कितने सैनिक भेजे: फ्रांस ने अपनी घातक 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री के 15 सैनिक भेजे हैं। जर्मनी ने 13, जबकि नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड्स ने प्रतीकात्मक रूप से 2-2 सैनिक तैनात किए हैं। ब्रिटेन ने भी अपना सैन्य अधिकारी भेजा है। मकसद: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि यह संख्या भले छोटी है, लेकिन यह नाटो की एकजुटता का प्रमाण है। यह अमेरिका को संदेश है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। 2. ट्रम्प का 'टैरिफ हथियार': 1 फरवरी से लागू होगी सजा यूरोपीय देशों की सैन्य सक्रियता से भड़के ट्रम्प ने शनिवार (17 जनवरी) को Truth Social पर एक कड़ा फैसला सुनाया। 10% टैरिफ: डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10% अतिरिक्त टैक्स लगेगा। 25% की चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि अगर 1 जून तक ग्रीनलैंड की 'खरीद' पर डील नहीं हुई, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। तर्क: ट्रम्प का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं और केवल अमेरिका ही इसे बचा सकता है। 3. 'ट्रेड बाजूका' (Anti-Coercion Instrument): यूरोप का पलटवार यूरोपीय संघ (EU) अब अमेरिका के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' (जिसे ट्रेड बाजूका कहा जाता है) को सक्रिय करने की तैयारी में है। क्या है यह हथियार: इसके तहत EU उन देशों पर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है जो उसे आर्थिक रूप से डराने की कोशिश करते हैं। इसमें अमेरिकी टेक कंपनियों (गूगल, एप्पल आदि) पर पाबंदी और 93 अरब यूरो के अमेरिकी सामान पर काउंटर-टैरिफ शामिल है। मंजूरी पर रोक: यूरोपीय सांसदों ने अमेरिका के साथ होने वाले नए ट्रेड एग्रीमेंट (0% टैरिफ डील) को 'होल्ड' पर डाल दिया है। 📊 ग्रीनलैंड विवाद: क्यों भिड़े हैं दुनिया के दो बड़े दोस्त? रणनीतिक कारण विवरण मिलिट्री बेस अमेरिका का 'थुले एयर बेस' यहाँ है, जो रूस पर नजर रखने के लिए फ्रंटलाइन है। खनिज संपदा यहाँ Rare Earth Elements के विशाल भंडार हैं, जिन पर अभी चीन का एकाधिकार है। शिपिंग रूट्स बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं, जो व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। नाटो कानून नाटो का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सब पर हमला है। 4. 'ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री': अगला बड़ा नाटो मिशन यूरोपीय देश अब 'आर्कटिक सेंट्री' (Baltic Sentry की तर्ज पर) नाम से एक स्थायी मिशन बनाने पर विचार कर रहे हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक, इसमें कई महीने लग सकते हैं, लेकिन इसका लक्ष्य ग्रीनलैंड के आसपास 24x7 सैन्य निगरानी रखना होगा ताकि कोई भी देश (सहित अमेरिका) वहां एकतरफा कार्रवाई न कर सके। 5. क्या ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं? कानूनी तौर पर यह नामुमकिन के करीब है: नाटो संधियाँ: एक नाटो देश दूसरे पर हमला नहीं कर सकता। स्वतंत्रता का नियम: 2009 के एक्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड के लोग खुद तय करेंगे कि उन्हें किसके साथ रहना है। जनमत संग्रह (Referendum) के बिना कोई बदलाव नहीं हो सकता। जनता का विरोध: नुउक और कोपेनहेगन की सड़कों पर "Hands Off Greenland" के पोस्टर लेकर हजारों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 19, 2026 0
दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला
ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

खामेनेई का 'खूनी प्लान': ईरान में नरसंहार के लिए बुलाए 5,000 इराकी लड़ाके; जब सेना ने अपनों पर गोली चलाने से किया इनकार, तब विदेशी मिलिशिया ने मचाई तबाही तेहरान/न्यूयॉर्क | 17 जनवरी 2026 ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी ऐतिहासिक विद्रोह को कुचलने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। CNN और न्यूयॉर्क पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए इराक से 5,000 से अधिक कट्टरपंथी शिया लड़ाकों को तैनात किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब ईरान की अपनी सेना और सुरक्षा बलों ने अपने ही नागरिकों पर सीधी गोलीबारी करने से मना कर दिया था। विदेशी लड़ाकों के इस 'नरसंहार' के बाद ईरान की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। 1. खामेनेई की रणनीति: सेना के इनकार के बाद विदेशी 'भाड़े के सैनिक' रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनों के दूसरे हफ्ते में ईरानी सेना के भीतर असंतोष फैलने लगा था। कई सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। सहानुभूति का डर: खामेनेई को डर था कि स्थानीय पुलिस और सेना के जवान अपने ही भाई-बहनों और रिश्तेदारों के प्रति नरम पड़ सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का चुनाव: इसीलिए जान-बूझकर ऐसे लड़ाकों को बुलाया गया जिनकी ईरान के लोगों के साथ कोई भाषाई या भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ये लड़ाके अरबी भाषी हैं, जबकि ईरान की मुख्य भाषा फारसी है। इससे प्रदर्शनकारियों और लड़ाकों के बीच सहानुभूति पनपने की कोई गुंजाइश नहीं रही। 2. 'तीर्थयात्री' बनकर आईं मौत की बसें इन लड़ाकों को ईरान लाने के लिए एक बेहद गुप्त और शातिर तरीका अपनाया गया। धार्मिक कवर: 11 जनवरी को इराक-ईरान बॉर्डर पर 60 से ज्यादा बसों का काफिला देखा गया। इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी. के अनुसार, इन्हें 'तीर्थयात्री' बताया गया। पहचान: इन बसों में न तो महिलाएं थीं, न बच्चे और न ही बुजुर्ग। सभी लड़ाके जवान थे और उन्होंने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्हें इराक के मायसान, वासित और दियाला प्रांतों के रास्ते ईरान में दाखिल कराया गया। संगठन: ये लड़ाके पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत आने वाले कताइब हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा और बद्र संगठन जैसे कट्टरपंथी समूहों से जुड़े हैं, जिन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ही पैसा और हथियार देती है। 📊 ईरान नरसंहार: डेटा और जमीनी हकीकत श्रेणी विवरण और साक्ष्य कुल विदेशी लड़ाके 5,000+ (शुरुआती अनुमान 800 था)। मौतों का आंकड़ा अब तक लगभग 3,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। प्रमुख हथियार सड़कों पर तैनात लड़ाकों के पास भारी मशीनगन और ड्रोन हैं। वर्तमान स्थिति तेहरान और प्रमुख शहरों में 'कब्रिस्तान जैसी शांति'। सेंसरशिप 180 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट जारी। 3. सड़कों पर मशीनगन और ड्रोन का पहरा तेहरान के निवासियों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म जैसी है। मशीनगन का खौफ: एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, "विदेशी लड़ाके अरबी में चिल्ला रहे थे और जो भी घर से बाहर दिख रहा था, उस पर सीधे फायर कर रहे थे। उन्होंने सरकारी इमारतों और चौराहों पर कब्जा कर लिया है।" ड्रोन निगरानी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को तेहरान के आसमान में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ते देखे गए। इसी डर के कारण फिलहाल सड़कों पर प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की चिंता: ओस्लो स्थित 'ईरान मानवाधिकार' (IHR) के महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने चेतावनी दी है कि यह 'शांति' केवल डर के कारण है, और विदेशी लड़ाकों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। 4. इराक के ये लड़ाके ईरान के प्रति वफादार क्यों? ये मिलिशिया ग्रुप भले ही इराक के हैं, लेकिन इनका 'रिमोट कंट्रोल' तेहरान में है। ट्रेनिंग और फंडिंग: IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) इन समूहों को सालाना करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई करती है। वफादारी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन लड़ाकों की पहली निष्ठा इराक की सरकार के प्रति नहीं, बल्कि अयातुल्ला खामेनेई के प्रति है। यही कारण है कि वे खामेनेई की सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या
गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

बांग्लादेश: गाजीपुर में हिंदू कारोबारी की फावड़े से काटकर हत्या; कर्मचारी को बचाने आए लिटन घोष पर हमला; भारत ने जताई गहरी चिंता गाजीपुर (बांग्लादेश) | 17 जनवरी 2026 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार (17 जनवरी) को गाजीपुर जिले के कलिगंज में एक 55 वर्षीय हिंदू कारोबारी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर और फावड़े से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब लिटन अपनी दुकान में काम करने वाले एक नाबालिग हिंदू कर्मचारी को कट्टरपंथियों के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे थे। 1. मामूली विवाद और मौत का तांडव घटना सुबह करीब 11 बजे कलिगंज नगरपालिका क्षेत्र के बरनगर रोड स्थित 'बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल' में हुई। विवाद की शुरुआत: मसूम मिया (28) नाम का युवक दुकान पर आया और 17 साल के कर्मचारी अनंत दास के साथ किसी मामूली बात पर उलझ गया। देखते ही देखते मसूम ने नाबालिग कर्मचारी को पीटना शुरू कर दिया। पूरा परिवार बना हमलावर: विवाद बढ़ा तो मसूम के पिता मोहम्मद स्वपन मिया (55) और मां मजीदा खातून (45) भी मौके पर पहुँच गए। बीच-बचाव की कीमत: दुकान मालिक लिटन चंद्र घोष ने जब अपने कर्मचारी अनंत को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया। इसी दौरान लिटन के सिर पर फावड़े (Spade) से जोरदार वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 2. आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों को दबोचा हत्या की खबर मिलते ही स्थानीय हिंदू समुदाय और व्यापारियों में भारी गुस्सा फैल गया। नागरिक कार्रवाई: वहां मौजूद लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे तीनों आरोपियों (पिता, माता और बेटे) को चारों तरफ से घेरकर पकड़ लिया। पुलिस हिरासत: कलिगंज थाने के प्रभारी (OC) मोहम्मद जाकिर हुसैन ने बताया कि तीनों आरोपियों—स्वपन मिया, मजीदा खातून और मसूम मिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। 📊 बांग्लादेश में अल्पसंख्यक: बढ़ता खतरा और डेटा श्रेणी विवरण मृतक लिटन चंद्र घोष उर्फ काली (55 वर्ष), हिंदू कारोबारी। आरोपी मसूम मिया, स्वपन मिया और मजीदा खातून (एक ही परिवार के)। अल्पसंख्यक आबादी बांग्लादेश में अब हिंदू, सूफी और ईसाई 10% से भी कम बचे हैं। भारत का रुख "अल्पसंख्यकों पर हमलों का पैटर्न चिंताजनक" - विदेश मंत्रालय। चुनाव का साया फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा में 40% की वृद्धि। 3. भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: "सांप्रदायिक हिंसा का डरावना पैटर्न" भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। रणधीर जायसवाल (प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक खतरनाक पैटर्न देख रहे हैं। कट्टरपंथ का बचाव: भारत ने चिंता जताई कि कई बार इन हमलों को 'निजी रंजिश' का नाम देकर दबा दिया जाता है, जिससे कट्टरपंथियों को और बल मिलता है। भारत ने मांग की है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इन घटनाओं से सख्ती से निपटे। 4. सत्तापलट के बाद सुलगता बांग्लादेश 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में इस्लामी संगठनों (जैसे हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी) की सक्रियता बढ़ गई है। असुरक्षा का माहौल: 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के अनुसार, अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों को निशाना बनाना अब आम बात हो गई है। यूनुस सरकार का दावा: हालांकि, अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत के दावों को यह कहकर खारिज किया है कि ये खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं, लेकिन लिटन घोष जैसी घटनाएं जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे
अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

अमेरिका का 'वीजा बैन' (2026): 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेस पर रोक; पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी देश शामिल ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका के इमिग्रेशन इतिहास का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 21 जनवरी 2026 से दुनिया के 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा (स्थायी निवास) की प्रक्रिया को पूरी तरह से रोकने का ऐलान किया है। इस सूची में भारत के पड़ोसी देश—पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) के एक गुप्त मेमो के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका आने वाले विदेशियों की संख्या में भारी कटौती करना और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले 'वेलफेयर' के बोझ को कम करना है। 1. 'पब्लिक चार्ज' का डर: क्यों रोका गया वीजा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन लोगों को रोकने का फैसला किया है, जो अमेरिका आकर सरकारी मदद या वेलफेयर योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं। तर्क: ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि जो लोग खुद का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का अनुचित लाभ उठाते हैं। सत्यापन प्रक्रिया: दूतावासों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक आवेदकों की वित्तीय स्थिति और सत्यापन की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक वीजा आवेदन खारिज किए जाएं। सोशल मीडिया जांच: ट्रम्प प्रशासन अब सभी वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी गहन जांच करेगा ताकि उनकी विचारधारा और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। 2. बैन वाले देशों की सूची (एशिया और पड़ोसी देश) एशिया के 22 देशों पर इस कड़े कानून का असर पड़ा है। विशेष रूप से भारत के आसपास के देशों की स्थिति चिंताजनक है: भारत के पड़ोसी: पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार (बर्मा) और अफगानिस्तान। मध्य पूर्व और अन्य: ईरान, इराक, सीरिया, यमन, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और थाईलैंड। 📊 बैन का दायरा और प्रभाव प्रभावित वर्ग स्थिति इमिग्रेंट वीजा (Green Card) पूरी तरह से निलंबित (Suspended); नई समीक्षा होने तक कोई प्रोसेस नहीं। टूरिस्ट/बिजनेस वीजा फिलहाल इस फैसले से बाहर, लेकिन जांच और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सोशल मीडिया ऑडिट अनिवार्य; अब आपकी पोस्ट्स तय करेंगी कि आपको वीजा मिलेगा या नहीं। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 दर्शक आ सकेंगे, लेकिन सख्त सुरक्षा स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन के बाद। 3. ट्रम्प की 'यूरोपीय प्राथमिकता' और डिपोर्टेशन का आंकड़ा राष्ट्रपति ट्रम्प का विजन स्पष्ट है—वे गैर-यूरोपीय देशों से होने वाले इमिग्रेशन को सीमित करना चाहते हैं। बयानबाजी: ट्रम्प ने सोमालिया जैसे देशों के बजाय नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों के लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है। रिकॉर्ड रद्दीकरण: ट्रम्प की वापसी के बाद से अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए जा चुके हैं। महा-डिपोर्टेशन: पिछले एक महीने में 6 लाख से ज्यादा लोगों को जबरन निकाला गया है, जबकि 25 लाख लोग डर के कारण खुद अमेरिका छोड़कर चले गए हैं। 4. घटना जिसने आग में घी का काम किया नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास हुई एक गोलीबारी की घटना, जिसमें एक अफगान नागरिक शामिल था, ने ट्रम्प प्रशासन को 'थर्ड वर्ल्ड' देशों के खिलाफ सख्त होने का बड़ा मौका दे दिया। इसके बाद से ही इमिग्रेशन को स्थायी रूप से रोकने की मांग तेज हो गई थी।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी वॉरशिप
ट्रम्प का ईरान पर 'साउदर्न स्पीयर' जैसा हमला? दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ अमेरिकी नौसेना का सबसे ताकतवर बेड़ा।

ईरान की घेराबंदी: दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हुआ अमेरिकी 'सुपरकैरियर' USS अब्राहम लिंकन; क्या वेनेजुएला की तर्ज पर होगा हमला? ईरान में 19 दिनों से जारी ऐतिहासिक जन-विद्रोह के बीच अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य चाल चल दी है। अमेरिकी नौसेना का घातक परमाणु-शक्ति संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' के साथ दक्षिण चीन सागर को छोड़कर मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो चुका है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया था और क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 1. USS अब्राहम लिंकन: समुद्र पर तैरता एक अभेद्य किला USS अब्राहम लिंकन केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक पूरी सैन्य शक्ति है। इसके मिडिल ईस्ट पहुँचने का मतलब है कि अमेरिका किसी भी समय बड़े स्तर पर 'ऑपरेशन' शुरू कर सकता है। न्यूक्लियर पावर: यह जहाज परमाणु ऊर्जा से चलता है, जिसका मतलब है कि इसे ईंधन के लिए बार-बार रुकने की जरूरत नहीं है। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3): लिंकन अकेला नहीं आ रहा है। इसके साथ 3-6 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (जो मिसाइल डिफेंस में माहिर हैं), 1-2 न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियां (जो टॉमहॉक मिसाइलों से लैस हैं) और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज भी शामिल हैं। हवाई ताकत: इस पर 65 से 70 घातक विमान तैनात हैं, जिनमें F-35C लाइटनिंग II और F/A-18 सुपर हॉर्नेट शामिल हैं। 2. वेनेजुएला मॉडल: क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? विशेषज्ञ इस तैनाती की तुलना हाल ही में हुए 'ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर' (वेनेजुएला) से कर रहे हैं। पैटर्न: अगस्त 2025 में भी ट्रम्प ने इसी तरह USS गेराल्ड आर. फोर्ड को वेनेजुएला के तट पर तैनात किया था। परिणाम: जनवरी 2026 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने अचानक छापेमारी कर राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ लिया और सत्ता पलट दी। ईरान का डर: जिस तरह वेनेजुएला में 'घेराबंदी' के बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुई, ईरान को डर है कि लिंकन की मौजूदगी तेहरान के लिए अंत की शुरुआत हो सकती है। 📊 सैन्य तुलना: अमेरिका बनाम ईरान शक्ति का पैमाना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ईरान (Islamic Republic) सैन्य बजट/रैंक दुनिया में नंबर 1 दुनिया में 16वां विमान (Airpower) 13,000+ (F-35, B-2 शामिल) ~500 (ज्यादातर पुराने रूसी/चीनी) नौसैनिक बेड़ा 11 सुपरकैरियर, 60+ पनडुब्बियां छोटी पनडुब्बियां, गश्ती नावें मुख्य ताकत ग्लोबल स्ट्राइक, सैटेलाइट इंटेलिजेंस मिसाइल आर्सेनल (2000 किमी रेंज), ड्रोन रणनीतिक हथियार टॉमहॉक, न्यूक्लियर सबमरीन हॉर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक करने की क्षमता 3. 'पोश्चर चेंज': कतर बेस से कर्मचारियों की निकासी अमेरिकी अधिकारियों ने कतर के अल उदैद एयर बेस (मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा बेस) से कुछ गैर-जरूरी कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। उद्देश्य: इसे आधिकारिक तौर पर 'पोश्चर चेंज' कहा जा रहा है, लेकिन इसका असली मकसद संभावित ईरानी मिसाइल हमले की स्थिति में अमेरिकी हताहतों की संख्या को कम करना है। विशेषज्ञों की राय: B-2 बॉम्बर या लंबी दूरी की मिसाइलों के बजाय पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' को बुलाने का मतलब है कि अमेरिका केवल एक "हिट एंड रन" हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी कर रहा है। 4. ईरान में गृहयुद्ध और 'नो फ्लाई जोन' ईरान के भीतर 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शन अब अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को हिला रहे हैं। आर्थिक पतन: रियाल की कीमत शून्य के बराबर पहुँच चुकी है ($1 = 14.5 लाख रियाल)। हवाई क्षेत्र पर पाबंदी: ईरान ने कुछ घंटों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया, जिससे एयर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। अब भारतीय विमान ईरान को छोड़कर दूसरे रास्तों से जा रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 2,000 से 12,000 मौतों का दावा किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का दबाव बढ़ गया है।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा
ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रम्प की 'भयानक' चेतावनी के आगे झुका तेहरान; प्रदर्शनकारियों की फांसी पर लगी रोक, अयातुल्ला शासन में बड़ी दरार ईरान में जारी गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सीधी सैन्य कार्रवाई और "भयानक परिणाम" भुगतने की धमकी के बाद ईरान सरकार बैकफुट पर आ गई है। तेहरान ने 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी सहित अन्य कैदियों को फांसी देने के अपने फैसले को फिलहाल टाल दिया है। 1. ट्रम्प का 'अल्टीमेटम' और ईरान का यू-टर्न बुधवार (14 जनवरी 2026) को दुनिया ने देखा कि कैसे एक 'ट्वीट' और सख्त चेतावनी ने फांसी के फंदे को रोक दिया। ट्रम्प की धमकी: राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट कहा था, "अगर ईरान ने फांसी देना जारी रखा, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे जो पहले कभी नहीं देखा (भयानक)।" * ईरान का जवाब: धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने 'फॉक्स न्यूज' पर आकर सफाई दी कि "फांसी देने की हमारी कोई योजना नहीं है।" सुलतानी की जान बची: इरफान सुल्तानी, जिन्हें 'ईश्वर के खिलाफ युद्ध' (मोहरेबेह) के आरोप में आज फांसी दी जानी थी, उनकी सजा फिलहाल रोक दी गई है। 2. ईरान की जवाबी धमकी: "इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी" हालाँकि ईरान फांसी से पीछे हट गया है, लेकिन उसने अमेरिका को सीधी जान से मारने की धमकी दी है। प्रोपेगैंडा वीडियो: ईरान के सरकारी टीवी पर पर्शियन भाषा में एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें 2024 के बटलर (पेंसिल्वेनिया) हमले की फुटेज दिखाई गई और संदेश दिया गया कि "इस बार ट्रम्प का बचना नामुमकिन है।" ट्रम्प का रुख: ट्रम्प ने इस धमकी को नजरअंदाज करते हुए निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी जनता पहलवी को नेता चुनती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 📊 ईरान संकट: अब तक के ताज़ा आंकड़े और प्रभाव श्रेणी ताज़ा रिपोर्ट और डेटा मौत का आंकड़ा 3,428 (NGO दावा) से 12,000 (ईरान इंटरनेशनल) तक। गिरफ्तारियां 10,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी जेलों में बंद। आर्थिक स्थिति महंगाई 70% पार; रियाल की वैल्यू मिट्टी के बराबर। हवाई क्षेत्र बुधवार को 2 घंटे के लिए 'नो फ्लाई जोन' घोषित। भारतीय नागरिक 10,000+ भारतीय फंसे; सरकार ने देश छोड़ने को कहा। 3. 'नो फ्लाई जोन' और भारत की एडवायजरी ईरान और अमेरिका के बीच मिसाइल युद्ध की आशंका ने वैश्विक हवाई यातायात को अस्त-व्यस्त कर दिया है। एयरलाइंस पर असर: ईरान ने बुधवार को अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे इंडिगो, एयर इंडिया और लुफ्थांसा जैसी कंपनियों की उड़ानों में देरी हुई। एयर इंडिया अब ईरानी क्षेत्र को छोड़कर दूसरे लंबे रास्तों का उपयोग कर रही है। भारत की चेतावनी: विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एडवायजरी जारी कर सभी भारतीयों (छात्र, व्यापारी, पर्यटक) को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कड़ी बात की है। 4. विद्रोह की जड़: क्यों जल रहा है ईरान? यह प्रदर्शन 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा विद्रोह है: आर्थिक बदहाली: ब्रेड और चाय जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। व्यापारियों की हड़ताल ने अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया है। सत्ता परिवर्तन की मांग: अयातुल्ला खामेनेई के 37 साल के शासन के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं। वे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों द्वारा सरेआम की जा रही गोलीबारी ने गुस्से को और भड़का दिया है।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत
Thailand Train Accident: थाईलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 की मौत, 67 घायल; छात्रों से भरी थी ट्रेन।

थाईलैंड ट्रेन हादसा: 65 फीट ऊंचाई से पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 लोगों की मौत, 67 घायल; ट्रेन में सवार थे 195 छात्र थाईलैंड के नाखोन राचासिमा प्रांत में बुधवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना हुई। एक निर्माणाधीन रेल ब्रिज पर काम कर रही विशालकाय क्रेन अचानक 65 फीट की ऊंचाई से तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन पर गिर गई। इस जघन्य हादसे में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 67 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। 1. कैसे हुआ हादसा? (घटनाक्रम) समय और स्थान: यह दुर्घटना बुधवार को नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी की ओर जा रही थी। तेज रफ्तार: हादसे के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। अचानक प्रहार: रेल ब्रिज के निर्माण में लगी क्रेन अचानक ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिर गई। क्रेन का वजन और ऊंचाई इतनी अधिक थी कि ट्रेन का एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया। आग और विस्फोट: स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्रेन गिरने के बाद दो जोरदार धमाके हुए और डिब्बों में भीषण आग लग गई। 2. हताहतों का विवरण: डिब्बों में फंसे थे छात्र ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे। मौत: अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव दल ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा है। घायल: 67 घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। ड्राइवर की स्थिति: क्रेन इतनी अचानक गिरी कि ड्राइवर को आपातकालीन ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिला। 📸 हादसे की भयावहता: मुख्य बिंदु विवरण प्रभाव क्रेन की ऊंचाई 65 फीट से सीधी टक्कर। ट्रेन की गति 120 किमी/घंटा। नुकसान ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, दो हिस्सों में कटे और आग लगी। रेस्क्यू ऑपरेशन कटर मशीनों से डिब्बे काटकर यात्रियों को निकाला गया। 3. जांच और लापरवाही के सवाल रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच की जा रही है: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: क्या ब्रिज निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? तकनीकी विफलता: क्या क्रेन में कोई यांत्रिक खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है?

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी
eT Terrorist Abu Musa Threatens Hindus: 'गर्दन काटने' की धमकी; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा PoK में सक्रिय।

लश्कर आतंकी अबू मूसा की 'गर्दन काटने' की धमकी: PoK में उगल रहा जहर; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड और पाकिस्तानी नेताओं पर भी हमला आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ऑपरेटिंग कमांडर अबू मूसा कश्मीरी का एक बेहद भड़काऊ वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खुलेआम हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और कश्मीर में 'जिहाद' की बात कर रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिए गए इस भाषण में मूसा ने न केवल भारत को धमकी दी, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को भी 'इस्लाम विरोधी' करार देकर अपनी ही सरकार को चुनौती दी है। 1. अबू मूसा की धमकी: "भीख से नहीं, गर्दन काटने से मिलेगी आजादी" लश्कर से जुड़े संगठन 'जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट' (JKUM) के सदस्य अबू मूसा ने अपने संबोधन में कट्टरपंथ और हिंसा का खुला समर्थन किया। हिंसा का आह्वान: मूसा ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का हल केवल 'जिहाद' में है। उसने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि आजादी भीख मांगने से नहीं, बल्कि हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। इजराइल-गाजा से तुलना: उसने कश्मीर की स्थिति की तुलना गाजा और फिलिस्तीन से की। मूसा का दावा है कि जिस तरह हमास ने इजराइल को चुनौती दी, वैसा ही कश्मीर में भी किया जाएगा। उसने कहा, "जब इजराइल को घुटने पर ले आए, तो कश्मीर में भी करेंगे।" 2. पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड: कौन है अबू मूसा? अबू मूसा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, वह भारतीय सुरक्षा बलों की हिटलिस्ट में शामिल एक खतरनाक आतंकी हैंडलर है। 22 अप्रैल 2025 का हमला: पिछले साल पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा को ही माना जाता है। पाकिस्तानी हैंडलर: जांच में सामने आया था कि PoK से दो हैंडलर—अबू मूसा और रिजवान हनीफ—आतंकियों को निर्देश दे रहे थे। आतंकी ट्रेनिंग: मूसा ने ही पाकिस्तान के मुरीदके में अफगान लड़ाकों को कश्मीर में घुसपैठ और हमले के लिए विशेष ट्रेनिंग दी थी। वह लश्कर के खूंखार आतंकी सैफुल्लाह कसूरी का बेहद करीबी माना जाता है। 📊 लश्कर की आतंकी प्रोफाइल: अबू मूसा और उसकी गतिविधियां श्रेणी विवरण और जानकारी नाम अबू मूसा कश्मीरी संगठन लश्कर-ए-तैयबा / जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट (JKUM) प्रमुख अपराध पहलगाम हमला (अप्रैल 2025), मुरीदके में ट्रेनिंग कैंप का संचालन। विचारधारा गाजा-फिलिस्तीन की तर्ज पर कश्मीर में 'जिहाद' का समर्थक। वर्तमान स्थिति पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय, घुसपैठ का मास्टरमाइंड। 3. 'पालतू सांप' अब पाकिस्तान को ही डसने लगे! हैरानी की बात यह है कि ये आतंकी अब अपने ही आकाओं (पाकिस्तान सरकार और सेना) पर सवाल उठा रहे हैं। पाकिस्तानी नेताओं को चुनौती: मूसा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक गए हैं। उसने कहा कि जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे हुकूमत करने का हक नहीं है। उसने मुजफ्फराबाद में पाक पीएम शहबाज शरीफ के सामने भी यह बात कहने का दावा किया। अशफाक राणा का तंज: लश्कर के एक अन्य कमांडर अशफाक राणा ने सीधे जनरल आसिम मुनीर को निशाने पर लिया। उसने कहा कि IMF से मिला कर्ज अधिकारियों ने बर्बाद किया। यदि यह पैसा सही जगह लगता, तो पाकिस्तान आज ब्रिटेन या स्पेन से ज्यादा विकसित होता। उसने दावा किया कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा कर्ज के बोझ के साथ जन्म ले रहा है। 4. भारतीय सुरक्षा बलों का कड़ा रुख आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सीमा पार 8 आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं। ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेना 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट कर रही है। हाई अलर्ट: अबू मूसा जैसे आतंकियों के भड़काऊ वीडियो सामने आने के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जा सके।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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