उत्तर प्रदेश

प्रयागराज हनुमान मंदिर में अभद्रता: रिटायर्ड IPS शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत, 'VIP पास' न होने पर पुलिस ने किया अपमान

रवि चौहान नवम्बर 29, 2025 0
पूर्व डीजी जेल शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत
पूर्व डीजी जेल शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत

पूर्व डीजी जेल शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत: इलाहाबाद के बड़े हनुमान जी मंदिर में दर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का गंभीर आरोप 

 

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) स्थित पवित्र संगम क्षेत्र के निकट, आस्था और श्रद्धा के प्रतीक बड़े हनुमान जी मंदिर में हुई एक घटना ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और धार्मिक स्थलों पर VIP संस्कृति के बोलबाले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब के पूर्व डीजी जेल और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक सम्मानित सेवानिवृत्त अधिकारी शशिकांत ने 25 नवंबर को मंदिर में दर्शन के दौरान अपने साथ हुई अभद्रता का विस्तृत उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया है।

शशिकांत, जो वर्ष 2012 में पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी नशे के खिलाफ अपनी मुखर मुहिम और सामाजिक सक्रियता के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं, उनका यह आरोप साधारण नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि जब एक वरिष्ठ नागरिक और एक रिटायर्ड शीर्ष पुलिस अधिकारी को भी अपने ही देश के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर पुलिसकर्मियों द्वारा सम्मान और सहायता नहीं मिलती, तो आम दर्शनार्थियों और बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार होता होगा।

पूर्व डीजी जेल ने इस प्रकरण की शिकायत सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रदेश में आम लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। यह मामला न केवल पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जवाबदेही तय करने की मांग करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पवित्र धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किस प्रकार की रुखी और धमकी भरी कार्यशैली हावी है।

यह विस्तृत आलेख पूर्व डीजी जेल शशिकांत के सोशल मीडिया पर साझा किए गए अनुभव का विस्तृत वर्णन, पुलिसकर्मियों द्वारा की गई अभद्रता की प्रकृति, सीनियर सिटिजन से इस तरह के व्यवहार के सामाजिक निहितार्थ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई शिकायत का विवरण, प्रयागराज पुलिस की प्रतिक्रिया, और नशे के खिलाफ शशिकांत की पहचान को केंद्र में रखते हुए इस पूरे घटनाक्रम का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।


 

1. 🛑 मंदिर में अभद्रता का घटनाक्रम: एक रिटायर्ड IPS का अपमान

 

25 नवंबर को बड़े हनुमान जी मंदिर, जिसे 'लेटे हुए हनुमान जी' के नाम से भी जाना जाता है, पर हुई घटना ने शशिकांत को सार्वजनिक रूप से अपना गुस्सा व्यक्त करने पर मजबूर कर दिया।

 

1.1. सहायता का अनुरोध और पहली अभद्रता

 

  • स्थान और समय: घटना प्रयागराज के संगम क्षेत्र स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर में दर्शन के दौरान हुई।

  • स्थिति: शशिकांत ने बताया कि मंदिर में उस समय काफी भीड़ थी। एक वरिष्ठ नागरिक होने के नाते उन्हें दर्शन में सहायता की आवश्यकता थी।

  • अनुरोध: उन्होंने मंदिर में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी से सहायता का अनुरोध किया।

  • पहचान देना: उन्होंने अपनी पहचान एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पंजाब के पूर्व डीजी जेल के रूप में दी।

  • पुलिसकर्मी का व्यवहार: शशिकांत के अनुसार, परिचय देने के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मी ने उनके साथ अभद्रता से बात की और उन्हें सहायता देने के बजाय गेट की ओर भेज दिया

 

1.2. गेट पर धमकी भरा लहजा

 

  • दूसरी घटना: गेट पर मौजूद पुलिसकर्मी से जब शशिकांत ने अपनी स्थिति और पूर्व परिचय का हवाला दिया, तो वहाँ भी उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा।

  • रुखा व्यवहार: गेट पर तैनात पुलिसकर्मी ने कथित रूप से रुखे और धमकी भरे लहजे में कहा—“पीछे हटो, VIP पास लाओ”

  • दोहरा मापदंड: शशिकांत ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह पुलिसकर्मी उस समय अन्य लोगों को प्रवेश दे रहा था, लेकिन एक वरिष्ठ नागरिक और पूर्व अधिकारी को बिना "VIP पास" के आगे बढ़ने से रोका गया।

 

1.3. सहयोगी पुलिसकर्मियों की चुप्पी

 

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक और चिंताजनक पहलू सामने आया:

  • मूक दर्शक: शशिकांत ने लिखा कि आसपास मौजूद अन्य पुलिस कर्मी इस पूरी स्थिति पर मुस्कुराते रहे

  • हस्तक्षेप का अभाव: किसी भी अन्य पुलिसकर्मी ने हस्तक्षेप नहीं किया या शशिकांत को सहायता देने की कोशिश नहीं की। यह एक सामूहिक कार्यशैली या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की कमी को दर्शाता है, जहाँ ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी विनम्रता और सहायता की भावना को दरकिनार करते हैं।


 

2. 🚨 सीनियर सिटिजन और आम आदमी का अपमान

 

शशिकांत का यह प्रकरण केवल एक व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सेवाओं और धार्मिक स्थलों पर आम जनता, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।

 

2.1. VIP संस्कृति का वर्चस्व

 

  • पास की मांग: पुलिसकर्मी द्वारा "VIP पास लाओ" की मांग स्पष्ट रूप से दिखाती है कि धार्मिक स्थलों पर भी VIP संस्कृति का दबदबा है। यह आस्था के स्थल को पहुँच के आधार पर विभाजित करता है, जहाँ आम दर्शनार्थियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

  • वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा: शशिकांत जैसे एक वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटिजन) के साथ ऐसा बर्ताव भारत के उस सांस्कृतिक मूल्य के विपरीत है, जहाँ बुजुर्गों के प्रति सम्मान अपेक्षित है। यदि एक रिटायर्ड डीजी जेल के साथ ऐसा हो सकता है, तो कमजोर और साधनहीन सीनियर सिटिजन के साथ पुलिसकर्मी कैसा व्यवहार करते होंगे, इसकी कल्पना करना मुश्किल नहीं है।

 

2.2. सरकारी निर्देशों की अवहेलना

 

योगी आदित्यनाथ सरकार अक्सर कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के विनम्र व्यवहार पर जोर देती रही है। इस तरह की घटनाएँ दर्शाती हैं कि शीर्ष स्तर के निर्देश जमीनी स्तर पर या तो पहुँच नहीं रहे हैं, या उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।


 

3. 🎯 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी शिकायत

 

शशिकांत ने इस मामले को हल्के में न लेते हुए सीधे राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी से शिकायत दर्ज कराई है।

 

3.1. शिकायत का आधार

 

  • अस्वीकार्य व्यवहार: पूर्व डीजी जेल ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदेश में आम लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है।

  • जवाबदेही की मांग: उनकी शिकायत का मुख्य उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत अपमान का विरोध करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जवाबदेही तय हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

 

3.2. शशिकांत की सामाजिक पहचान

 

शशिकांत की पहचान इस शिकायत को और भी वजन देती है।

  • पूर्व डीजी जेल, पंजाब: वह पंजाब पुलिस में एक उच्च पद पर कार्यरत थे।

  • नशे के खिलाफ मुहिम: वह वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद से नशे के खिलाफ अपनी कड़े रुख और मुहिम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्य किए हैं और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपनी आवाज उठाते रहे हैं।

  • सक्रियता: एक पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद उनकी सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि यह मामला दबाया न जाए और प्रयागराज पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़े।


 

4. 👮 प्रयागराज पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

 

मामले को एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया पर उठाए जाने और सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने के बाद प्रयागराज पुलिस को तत्काल प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

 

4.1. डीसीपी सिटी का बयान

 

  • सुरक्षा उद्देश्य: डीसीपी सिटी ने बताया कि बड़े हनुमान जी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।

  • विनम्रता के निर्देश: उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे दर्शनार्थियों से मृदुल व्यवहार करें और उनकी सहायता सुनिश्चित करें। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से उन निर्देशों के उल्लंघन को स्वीकार करता है जो ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किए।

  • जांच का आश्वासन: डीसीपी ने कहा कि प्रकरण की जानकारी ली जा रही है और आवश्यक होने पर कार्रवाई भी की जाएगी

 

4.2. आवश्यक कार्रवाई की प्रकृति

 

प्रयागराज पुलिस के लिए यह मामला एक त्वरित और पारदर्शी जांच की मांग करता है। आवश्यक कार्रवाई में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • पहचान: अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान करना।

  • स्पष्टीकरण: उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगना।

  • दंडात्मक कार्रवाई: दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या निलंबन।

  • संवेदनशीलता प्रशिक्षण: भविष्य में ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए धार्मिक स्थलों पर तैनात पुलिस बल के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।


 

5. 🔔 निष्कर्ष: पुलिस सुधार और धार्मिक स्थलों पर सम्मान

 

शशिकांत के साथ बड़े हनुमान जी मंदिर में हुई अभद्रता की घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह भारतीय पुलिस बल में आवश्यक व्यवहार परिवर्तन और संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है।

  • व्यवस्था बनाम संवेदना: धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य है, लेकिन यह कर्तव्य विनम्रता और सहायता की भावना के साथ निभाया जाना चाहिए, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के प्रति।

  • पारदर्शिता की मांग: यह मामला पुलिस को यह सुनिश्चित करने का अवसर देता है कि VIP संस्कृति को समाप्त किया जाए और सभी नागरिकों के साथ समान और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।

  • CM योगी का हस्तक्षेप: अब यह देखना बाकी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से इस गंभीर शिकायत पर कितनी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई होती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर आम नागरिक या सीनियर सिटिजन को "VIP पास" न होने के कारण अपमान का सामना न करना पड़े।

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#Prayagraj #HanumanMandir #UPPolice #CMYogi #IPSShashikant #VIPCulture #SeniorCitizen #PoliceMisconduct
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अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो

Shankaracharya Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration: माघ मेला प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस चस्पा।

ठाकुर लड़के-दलित लड़की की लव स्टोरी

जेल में पारस सोम का खुलासा; 'रूबी ने दी थी भागने की सलाह, उसी के जूते पहनकर भागा था'; 3 साल की लवस्टोरी का सच।

सोनू हत्याकांड- मेरठ कमिश्नरी पर प्रदर्शन
मेरठ में कश्यप समाज का बड़ा प्रदर्शन; 'जिंदा जलाने' के आरोपी को बचाने का आरोप; बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल।

मेरठ का सोनू हत्याकांड: कमिश्नरी पर कश्यप समाज का 'महाआक्रोश'; 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' के आरोपों से गरमाई सियासत; 80 हजार की लूट और जिंदा जलाने की दहला देने वाली कहानी मेरठ (उत्तर प्रदेश) | 16 जनवरी 2026 मेरठ का ज्वालागढ़ क्षेत्र आज एक बार फिर सुलग उठा है। सोनू कश्यप की नृशंस हत्या के विरोध में शुक्रवार को कश्यप और निषाद समाज ने कमिश्नरी पार्क पर धावा बोल दिया। भारी पुलिस बल, PAC की दो कंपनियों और बैरिकेडिंग के बावजूद हजारों की संख्या में लोग 'सोनू को न्याय दो' के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए हैं। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि 'OBC बनाम ठाकुर' की राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आरोपी मुख्यमंत्री की बिरादरी से है, इसलिए पुलिस उसे बचा रही है। 1. दहला देने वाली वारदात: 80 हजार की लूट और जिंदा जलाया ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्याकांड किसी भी रूह को कंपा देने वाला है। आखिरी बातचीत: सोनू की मौसी मदनवती ने बताया कि 5 जनवरी को सोनू ने फोन कर कहा था, "मौसी, मैं 80 हजार रुपए लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ मिलकर नई बाइक खरीदेंगे।" * क्रूरता की हद: सोनू को बाइक तो क्या मिली, उसकी जान ले ली गई। पहले उसके सिर पर ईंट से हमला किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पहचान छिपाने के लिए उसके शरीर पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया गया। लूट: परिजनों का आरोप है कि सोनू के पास मौजूद 80 हजार रुपए गायब हैं, जिसका पुलिस ने कोई हिसाब नहीं दिया है। 2. प्रदर्शनकारियों की 5 प्रमुख मांगें सोनू के परिजनों और कश्यप समाज ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं: निष्पक्ष जांच: पुलिस केवल एक 'नाबालिग ऑटो ड्राइवर' को पकड़कर पल्ला झाड़ रही है, जबकि परिवार का दावा है कि इसमें कई रसूखदार लोग शामिल हैं। आर्थिक सहायता: गरीब परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद मुआवजे की तत्काल मांग। सरकारी नौकरी: सोनू की बड़ी बहन आरती कश्यप को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। सुरक्षा: गवाहों और परिवार को जान का खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग। रुपयों की बरामदगी: लूटे गए 80 हजार रुपए बरामद कर परिवार को सौंपे जाएं। 📊 मेरठ लाइव अपडेट: पल-पल की हलचल समय घटनाक्रम और अपडेट 02:02 PM सोनू की बहन आरती कश्यप का रो-रोकर बुरा हाल; कहा- पुलिस हमारे समर्थकों को रोक रही है। 02:30 PM आगरा, मुजफ्फरनगर और शामली से समर्थकों का पहुंचना जारी; पुलिस ने शहर की सीमाओं पर की नाकाबंदी। 03:44 PM सपा MLC किरण पाल को पुलिस ने सराधना पुल पर रोका; वे समर्थकों संग हाईवे पर ही धरने पर बैठे। 04:57 PM VIP पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का तीखा हमला- "पिछड़ा वर्ग का आरोपी होता तो अब तक बुलडोजर चल गया होता।" 06:48 PM कमिश्नरी पार्क छावनी में तब्दील; कश्यप समाज ने रात भर धरना देने का किया ऐलान। 3. 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' पर छिड़ी जंग विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और कश्यप समाज के नेताओं ने सरकार की 'बुलडोजर नीति' पर सवाल उठाए हैं। पक्षपात का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलडोजर बिरादरी देखकर चलता है। अगर अपराधी ठाकुर समाज का है, तो कानून ढीला हो जाता है। वोट की चोट: "हम सरकार बना सकते हैं तो गिरा भी सकते हैं।" निषाद पार्टी और कश्यप समाज के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आगामी चुनावों में भाजपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 4. पुलिस का 'हाउस अरेस्ट' और घेराबंदी प्रशासन ने इस महापंचायत को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। नजरबंदी: आजाद समाज पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीव पाल समेत कई नेताओं को उनके घरों में ही 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर दिया गया है। सुरक्षा घेरा: कमिश्नरी पार्क की ओर आने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है ताकि भीड़ और न बढ़ सके।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ब्लू ड्रम केस में फरवरी तक हो सकती है सजा

मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत मर्डर केस में फरवरी में आएगा फैसला; पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को हो सकती है फांसी।

मेरठ सोनू कश्यप हत्याकांड पर शुरू हुई सियासत

रोनू कश्यप हत्याकांड पर भड़की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने की मुआवजे की मांग; 18 को महापंचायत।

बच्चे की तरह भाई से चिपकी कपसाड़ कांड पीड़िता

रूबी पहुंची घर; वीडियो में दिखे सजे हाथ और नया सूट, उठी शादी की चर्चा; आरोपी पारस के नाबालिग होने का दावा।

'मेरा रूबी से 3 साल पुराना अफेयर, मैं निर्दोष हूं'
पारस सोम जेल भेजा गया; कोर्ट में कहा- 'रिश्ता सच्चा है'; रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा।

मेरठ हत्याकांड: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं, हमारा रिश्ता सच्चा है" — कोर्ट में पारस की गुहार; 14 दिन की जेल, रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा मेरठ के कपसाड़ गांव में मां की हत्या और बेटी के कथित अपहरण मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी पारस सोम ने मेरठ की कोर्ट में खुद को बेगुनाह बताते हुए इस पूरी घटना को 'प्रेम प्रसंग' का नाम दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पारस को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। यहाँ इस पूरे कानूनी ड्रामे और पुलिस की जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. कोर्ट रूम ड्रामा: पारस सोम की दलील विशेष सीजेएम विकास सावन की कोर्ट में पेशी के दौरान पारस सोम ने भावुक होकर जज के सामने अपनी बात रखी। बयान: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं। मेरा और रूबी का रिश्ता 3 साल पुराना और सच्चा है। कोई किडनैपिंग नहीं हुई, वह अपनी मर्जी से मेरे साथ आई थी।" बचाव पक्ष का दावा: पारस के वकील बलराम सोम का कहना है कि उनके मुवक्किल को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और वे जेल में मिलकर पूरी सच्चाई सामने लाएंगे। न्यायिक आदेश: कोर्ट ने पारस को जेल भेज दिया है। दूसरी ओर, रूबी को एसीजेएम-2 नम्रता की कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। 📍 फरारी की पूरी टाइमलाइन (60 घंटे का घटनाक्रम) तारीख समय स्थान और गतिविधि 8 जनवरी दोपहर कपसाड़ में हत्या के बाद पारस और रूबी खतौली पहुँचे। 8 जनवरी रात दिल्ली के एक होटल में रुके। यहाँ रूबी को मां की मौत की खबर मिली। 9 जनवरी दिन गुरुग्राम में दोस्त के यहाँ रुके; मीडिया के जरिए गांव के हालात देखे। 9 जनवरी रात गुरुग्राम से ट्रेन पकड़कर सहारनपुर (टपरी गांव) अपनी बहन के घर पहुँचे। 10 जनवरी शाम हरिद्वार जाते समय रुड़की रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने दोनों को दबोचा। 2. एसएसपी मेरठ का बयान: "4 राज्यों के 7 जिलों में दबिश" एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सफल ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया: पुलिस की तत्परता: 10 से ज्यादा टीमें गठित की गई थीं। 60 घंटों के भीतर आरोपी को अरेस्ट और युवती को सकुशल बरामद किया गया। ट्रैकिंग: मैनुअल मुखबिरी, इंटेलिजेंस और सर्विलांस के जरिए पुलिस ने इनका पीछा किया। 4 राज्यों के 7 जिलों में पुलिस ने छापे मारे थे। मेडिकल और बयान: युवती का मेडिकल कराया गया है और कोर्ट में उसके बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। इन्हीं बयानों के आधार पर मुकदमे में आगे की धाराएं बढ़ाई जाएंगी। 3. सियासत और गांव का तनाव यह मामला दलित बनाम राजपूत होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। चंद्रशेखर और अतुल प्रधान: सांसद चंद्रशेखर आजाद और सपा विधायक अतुल प्रधान के हस्तक्षेप के बाद गांव में भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) तैनात है। अंतिम संस्कार: वारदात के 30 घंटे बाद और प्रशासन द्वारा 10 लाख की मदद के आश्वासन के बाद ही मृतका का अंतिम संस्कार हो सका था।

रवि चौहान जनवरी 12, 2026 0
मेरठ में अगवा करके दलित लड़की को दिल्ली ले गया

रूबी और पारस सहारनपुर से गिरफ्तार; 3 साल के अफेयर की कहानी आई सामने; मेरठ कोर्ट में पेशी आज।

मेरठ में दलित मां का 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार; सपा विधायक- पुलिस में धक्का-मुक्की

मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण मामले में 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

यूपी SIR - हर पांचवां वोटर लिस्ट से बाहर

UP SIR Draft Voter List 2026: 2.89 Crore Names Deleted; हर 5वां वोटर लिस्ट से बाहर; अपना नाम कैसे चेक करें?

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रवि चौहान फ़रवरी 1, 2026 0