पंजाब के जालंधर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक साधारण कार चेकिंग का मामला देखते ही देखते VIP कल्चर बनाम जनता के अधिकार के बीच एक हाई-वोल्टेज टकराव में बदल गया। पुलिस स्टेशन परिसर में एक वाहन की सामान्य जाँच कर रही थी, लेकिन इस दौरान एक महिला और एक स्थानीय युवक के बीच हुई तीखी बहस ने लगभग 10 मिनट तक माहौल को हंगामेदार बनाए रखा। इस पूरे विवाद का केंद्र महिला द्वारा दी गई "मेरा मामा DSP है" वाली धमकी और युवक का "कानून सबके लिए बराबर है" वाला अडिग जवाब था। यह घटना न केवल सार्वजनिक स्थानों पर नागरिक अधिकारों की सीमाएँ निर्धारित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे 'पहचान' और 'रसूख' का इस्तेमाल आज भी भारतीय समाज में साधारण कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता है।
इस विवाद ने कई गंभीर प्रश्न खड़े किए: क्या एक नागरिक को सार्वजनिक स्थान पर हो रही सरकारी कार्रवाई (पुलिस चेकिंग) का वीडियो बनाने का अधिकार है? क्या पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी रसूखदार रिश्तेदार का नाम लेना जांच को रोक सकता है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या कानून के सामने वीआईपी और आम जनता के बीच वास्तव में कोई अंतर है?
इस विस्तृत आलेख में जालंधर रेलवे स्टेशन पर हुए इस 10 मिनट के हंगामे का मिनट-दर-मिनट विश्लेषण, महिला और युवक के बीच हुई तू-तू, मैं-मैं का संपूर्ण संवाद, इस घटना के कानूनी और सामाजिक निहितार्थ (जैसे कि पुलिस चेकिंग का अधिकार, वीडियोग्राफी का अधिकार, और सार्वजनिक स्थान पर व्यवहार), महिला द्वारा बार-बार 'DSP मामा' की धमकी और GRP कर्मी की उपस्थिति के बावजूद युवक के दृढ़ रुख का महत्व, और अंततः, यह घटना भारतीय समाज में शक्ति और विशेषाधिकार की संस्कृति को कैसे उजागर करती है, इन सभी पहलुओं पर 5000 शब्दों का गहन सामाजिक-कानूनी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
जालंधर रेलवे स्टेशन के परिसर में सुरक्षा जांच के दौरान यह घटना हुई, जिसने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा और भीड़ जमा हो गई।
कार चेकिंग: पुलिस (संभवतः GRP या रेलवे सुरक्षा बल) एक कार की सामान्य जांच कर रही थी, जो रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
वीडियोग्राफी: इसी दौरान, वहाँ मौजूद एक युवक ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
विवाद की चिंगारी: कार में मौजूद महिला (जो खुद को ऑन ड्यूटी और कार में बैठे GRP कर्मी की जानकार बता रही थी) ने युवक से तुरंत कैमरा बंद करने को कहा। युवक के मना करने पर महिला भड़क गई और बहस शुरू हो गई।
तू-तू, मैं-मैं: बहस जल्द ही तीखी तू-तू, मैं-मैं में बदल गई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
DSP मामा का प्रवेश: विवाद चरम पर तब पहुँचा जब महिला ने अपनी पहचान और पहुँच बताते हुए युवक को धमकी दी, "तू मुझे जानता नहीं, मेरा मामा DSP है।"
युवक का रुख: युवक अपने रुख पर अडिग रहा, उसने स्पष्ट कहा कि "चाहे कोई भी रिश्तेदार हो। कानून सबके लिए बराबर है और जांच हर वाहन की होगी।"
अंदरूनी कनेक्शन: कार में एक GRP कर्मी भी बैठा हुआ दिखाई दिया। महिला ने बार-बार दावा किया कि यह पुलिसकर्मी उसका जानकार है और वे 'फैमिली मेंबर' हैं।
कर्मी की प्रतिक्रिया: GRP कर्मी ने विवाद को शांत करने और महिला को बार-बार गाड़ी में बैठाने की कोशिश की, लेकिन महिला की मांग थी कि चेकिंग रोकी जाए और युवक लाइव होना बंद करे।
पुलिस की कार्रवाई: तमाम हंगामे के बावजूद, पुलिस ने अपनी चेकिंग जारी रखी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि रसूख की धमकी का उनकी ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ा।
महिला और युवक के बीच हुई बहस, कानून और वीआईपी संस्कृति पर उनके विरोधाभासी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
महिला का प्रश्न: महिला ने चेकिंग के औचित्य पर सवाल उठाया: "किस बात के लिए गाड़ी चेक की जाए।... किस के लिए गाड़ी चेक की जाए, हम काला माल बेच रहे हैं?"
युवक का जवाब: युवक ने पुलिसकर्मी से चेकिंग जारी रखने की मांग की, यह दर्शाता है कि वह पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के महिला के प्रयास को रोकना चाहता था।
महिला का आरोप: महिला ने युवक पर बिना अनुमति लाइव होने और उसकी निजता पर हमला करने का आरोप लगाया: "तुम किस से पूछ कर लाइव हुए हो?..."
युवक का तर्क: युवक ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान पर वीडियोग्राफी के लिए उसे किसी से पूछने की जरूरत नहीं है: "मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं, आप स्टेशन पर खड़े हो।"
विवाद का स्तर: बहस जल्द ही व्यक्तिगत हमलों तक पहुँच गई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को 'तू' कहकर संबोधित किया और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया।
युवक की मांग: युवक ने पुलिसकर्मी से महिला को "बोलने की तमीज तो सिखाओ" कहा, जबकि महिला ने उसे "प्रेस रिपोर्टर नहीं" होने की बात कही।
वीआईपी कार्ड: यह बहस का सबसे निर्णायक मोड़ था। महिला ने अपने रिश्तेदार का नाम लेकर धौंस जमाने की कोशिश की: "मेरे भी हैं पुलिस वाले, मेरा मामा DSP है।"
युवक का दृढ़ संकल्प: युवक ने तुरंत इसे खारिज कर दिया: "मैं क्या करूं DSP है तो मैं किसी से नहीं डरता। मैं अपना काम कर रहा हूं। मुझे किसी DSP कोई टेंशन नहीं।"
कानूनी समानता: युवक ने पुलिसकर्मी से भी सवाल किया: "मामा डीएसपी लगा है। क्या मामा की गाड़ी चेक नहीं हो सकती।" यह सवाल भारतीय कानूनी व्यवस्था के मूल सिद्धांत - कानून के समक्ष समानता - को स्थापित करता है।
महिला का दावा: महिला ने खुद को पुलिसकर्मी का 'जानकार' और 'फैमिली मेंबर' बताया। अंत में उसने अजीबोगरीब दावा किया: "मैं ऑन ड्यूटी थी। मेरी बहन को भूख लगी थी। तो हम परांठे खाने आए थे।"
युवक का प्रश्न: युवक ने इस विरोधाभासी दावे पर तुरंत सवाल उठाया: "स्टेशन पर कौन सी ड्यूटी कर रहे हो।"
यह घटना कई महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालती है।
निजता बनाम पारदर्शिता: भारत में, सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी घटना या सरकारी अधिकारी की कार्रवाई का वीडियो बनाना कानूनी रूप से सही माना जाता है, बशर्ते इससे निजता का गंभीर उल्लंघन न हो। युवक स्टेशन परिसर में चेकिंग का वीडियो बना रहा था, जो कि उसकी ड्यूटी थी। युवक का तर्क कि "मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं, आप स्टेशन पर खड़े हो," कानूनी रूप से मजबूत था।
पारदर्शिता को बढ़ावा: ऐसे वीडियो पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता लाते हैं और मनमानी को रोकते हैं। महिला का कैमरा बंद करने का आग्रह उसके रसूख के दुरुपयोग की कोशिश को छिपाने जैसा था।
सुरक्षा प्रोटोकॉल: रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों पर, पुलिस या सुरक्षा बलों के पास किसी भी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की जांच करने का अधिकार होता है।
शक्की व्यवहार: युवक का यह कहना कि "हमें शक्की लगी। हमने चेक करवा दी," पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराता है, जो किसी भी नागरिक द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किया गया सहयोग माना जा सकता है।
'DSP मामा' सिंड्रोम: यह घटना भारतीय समाज में गहरे बैठी VIP कल्चर या 'पावर ब्रोक्रेजिंग' की मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ लोग कानूनी प्रक्रियाओं से बचने के लिए अपने रसूखदार रिश्तेदारों का नाम लेते हैं।
युवक का प्रतिरोध: युवक का दृढ़ता से यह कहना कि "मैं किसी से नहीं डरता... मुझे किसी DSP कोई टेंशन नहीं," कानून के समक्ष समानता के संवैधानिक सिद्धांत पर आम जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
इस घटना में GRP कर्मी की उपस्थिति ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
रिश्तेदारी: GRP कर्मी ने खुद स्वीकार किया कि महिला उनकी "रिश्तेदार" है। यह पुलिस बल के भीतर भाई-भतीजावाद की ओर इशारा करता है।
कर्तव्य बनाम संबंध: कर्मी की कोशिश थी कि वह महिला को शांत करे और उसे जाने के लिए कहे। यह उसकी दुविधा दिखाता है—एक तरफ अपनी ड्यूटी (चेकिंग जारी रखना) और दूसरी तरफ अपने संबंध (रिश्तेदार को बचाना)।
पेशेवर रवैया: हंगामे के बावजूद, चेकिंग कर रहे पुलिसकर्मियों ने जांच जारी रखी, जो उनके पेशेवर रवैये को दर्शाता है। उन्होंने रसूख की धमकी या रिश्तेदार की उपस्थिति को अपनी ड्यूटी में बाधा नहीं बनने दिया।
अंततः कानून की जीत: भले ही महिला ने धमकी दी और हंगामा किया, लेकिन पुलिस ने अपनी कार्रवाई पूरी की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कानून और प्रक्रियाएं अंतिम रूप से लागू रहीं।
जालंधर रेलवे स्टेशन का यह 10 मिनट का विवाद भारतीय समाज में शक्ति, अधिकार और पारदर्शिता के बीच चल रहे संघर्ष को सूक्ष्म रूप से दर्शाता है।
VIP संस्कृति का प्रतिरोध: यह घटना उन अनगिनत छोटे प्रतिरोधों में से एक है जहाँ आम नागरिक सोशल मीडिया और वीडियोग्राफी को एक हथियार के रूप में उपयोग करके वीआईपी संस्कृति और मनमानी का विरोध कर रहे हैं।
जागरूकता की जीत: युवक ने, जिसका दावा था कि वह "अपना काम कर रहा हूं", जनता की जागरूकता और सार्वजनिक स्थान पर नियमों के पालन की मांग को सफलतापूर्वक रखा।
आगे का मार्ग: यह घटना पुलिस बलों के लिए भी एक सबक है कि उन्हें अपने कर्मियों के व्यक्तिगत संबंधों और पेशेवर कर्तव्यों के बीच की रेखा को स्पष्ट रूप से बनाए रखना होगा, ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके। इस विवाद का अंत चेकिंग के साथ हुआ, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय लोकतंत्र में 'DSP मामा' के नाम पर कानून को झुकाया नहीं जा सकता।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
राम मंदिर उड़ाने की साजिश रचने वाले आतंकी का जेल में मर्डर: फरीदाबाद की नीमका जेल में खूंखार कैदी 'अब्बू जट' ने नुकीली चीज से उतारा मौत के घाट फरीदाबाद | 9 फरवरी 2026 हरियाणा की हाई-सिक्योरिटी वाली फरीदाबाद (नीमका) जेल से सनसनीखेज खबर सामने आई है। अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश रचने के आरोपी अलकायदा (AQIS) के आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई है। इस वारदात को मर्डर केस में बंद खूंखार कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने अंजाम दिया। यहाँ इस हाई-प्रोफाइल मर्डर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हाई-सिक्योरिटी सेल में खूनी संघर्ष घटना रविवार देर रात की है, जब नीमका जेल की अति विशेष सुरक्षा सेल (High Security Cell) में बंद दोनों कैदियों के बीच विवाद हुआ। नुकीली चीज से हमला: अरुण चौधरी ने किसी नुकीली चीज से अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ वार किए। आतंकी अब्दुल लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मर्डर का समय: जेल प्रशासन को देर रात वारदात का पता चला, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल भिजवाया गया। 2. कौन था आतंकी अब्दुल रहमान? यूपी के मिल्कीपुर का रहने वाला 20 वर्षीय अब्दुल रहमान कोई साधारण अपराधी नहीं था: राम मंदिर की साजिश: उसे 2 मार्च 2025 को फरीदाबाद के पाली इलाके से गुजरात ATS और हरियाणा STF ने पकड़ा था। उसके पास से 2 जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे। आतंकी कनेक्शन: वह अलकायदा (AQIS) के हैंडलर अबू सूफियान के संपर्क में था और उसे 4 अप्रैल को अयोध्या में धमाका करने का निर्देश मिला था। सोशल मीडिया से भर्ती: पेशे से ई-रिक्शा चलाने वाला अब्दुल भड़काऊ वीडियो के जरिए आतंकियों के रडार पर आया था। जांच एजेंसियां हैरान थीं कि एक गरीब रिक्शा चालक के पास महंगा मोबाइल और हथियार कहाँ से आए। 3. कातिल अरुण चौधरी: जम्मू का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल की हत्या करने वाला अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट भी अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है: अक्षय शर्मा हत्याकांड: अरुण जम्मू के सांबा में हुए चर्चित अक्षय शर्मा मर्डर केस का मुख्य आरोपी है। कठुआ जेल से ट्रांसफर: 2024 में उसने इंस्टाग्राम लाइव आकर कठुआ जेल प्रशासन पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे फरीदाबाद की नीमका जेल शिफ्ट किया गया था। 📊 जेल सुरक्षा पर सवाल: एक साथ क्यों थे दोनों? कैदी का नाम श्रेणी केस / आरोप अब्दुल रहमान आतंकी (AQIS) राम मंदिर उड़ाने की साजिश, विस्फोटक अधिनियम अरुण चौधरी गैंगस्टर हत्या, रंगदारी और जेल प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप विवाद का विषय: सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक कट्टरपंथी आतंकी और एक खूंखार गैंगस्टर को एक ही हाई-सिक्योरिटी सेल में क्यों रखा गया था? 4. जांच और सुरक्षा ऑडिट जेल सूत्रों के मुताबिक, अरुण चौधरी को सुरक्षा कारणों से 'अति विशेष सेल' में रखा गया था, जहाँ अब्दुल रहमान भी बंद था। हत्या में इस्तेमाल की गई 'नुकीली चीज' जेल के भीतर कैसे पहुंची, इसकी जांच के लिए DC और जेल महानिदेशक ने सख्त आदेश दिए हैं। डबुआ थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।
मणिपुर फिर अशांत: डिप्टी सीएम नेम्चा किप्गेन के खिलाफ चुराचांदपुर में हिंसक प्रदर्शन; विधायकों को मारने पर 'इनाम' का ऐलान चुराचांदपुर | 6 फरवरी 2026 मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में गुरुवार शाम से शुरू हुई हिंसा शुक्रवार को और भयावह हो गई है। राज्य की नई सरकार में नेम्चा किप्गेन को उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाए जाने के विरोध में कुकी समुदाय के बीच गहरी दरार पैदा हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सुरक्षाबलों पर पथराव किया, बल्कि विधायकों के खिलाफ 'डेथ वारंट' जैसी विवादित घोषणाएं भी की हैं। यहाँ मणिपुर के मौजूदा तनाव की पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हिंसक झड़पें और सुरक्षाबलों का पीछे हटना चुराचांदपुर के तुइबोंग मेन मार्केट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है: सुरक्षाबलों पर हमला: सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को बैरकों में धकेलने की कोशिश की और भारी पत्थरबाजी की। असम राइफल्स की तैनाती: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए असम राइफल्स को लगाया गया, लेकिन भीड़ के हिंसक रुख को देखते हुए उन्हें अस्थाई रूप से पीछे हटना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए हैं। चक्का जाम: प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया है। 2. विधायकों को जान से मारने की धमकी और 'इनाम' हिंसा के बीच कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने चौंकाने वाले ऐलान किए हैं: नेम्चा किप्गेन: डिप्टी सीएम को मारने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की बात कही गई है। विधायक एलएम खाउते और एन सेनाते: इन विधायकों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। विश्वासघात का आरोप: कुकी संगठनों का आरोप है कि इन विधायकों ने मैतेई-बहुल सरकार का साथ देकर अपने समुदाय के साथ 'गद्दारी' की है। 📊 मणिपुर विधानसभा में कुकी विधायकों की स्थिति कुल कुकी विधायक भाजपा के विधायक हमार जनजाति प्रतिनिधि ताजा विवाद की वजह 10 07 एन सेनाते (NDA हिस्सा) नई सरकार में डिप्टी सीएम पद स्वीकार करना 3. कुकी समुदाय में दो फाड़ सरकार गठन को लेकर कुकी समाज अब दो गुटों में बंट गया है: विरोध करने वाला धड़ा: इनका मानना है कि इंफाल में हुई हत्याओं और संपत्तियों के नुकसान के बाद मैतेई नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होना शहीदों का अपमान है। आदिवासी संगठन 'जॉइंट फोरम ऑफ सेवन' ने आज 12 घंटे का बंद बुलाया है। समर्थन करने वाला धड़ा: विधायकों का कहना है कि वे समुदाय की सुरक्षा, विकास और बातचीत के रास्ते खोलने के लिए सरकार का हिस्सा बने हैं। 4. पहली महिला डिप्टी सीएम पर संकट नेम्चा किप्गेन मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच चुकी हैं, लेकिन उनके अपने ही गृह जिले चुराचांदपुर में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। कुकी वीमेंस ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने उनके पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया है।
संसद में 'किताब' पर रार: नरवणे की बुक लेकर पहुंचे राहुल गांधी; बिट्टू को कहा 'गद्दार दोस्त', मिला करारा जवाब नई दिल्ली | 4 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का छठा दिन भी भारी हंगामे और व्यक्तिगत छींटाकशी की भेंट चढ़ गया। पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की 'अनपब्लिश्ड बुक' (अप्रकाशित किताब) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी बनाम केंद्र सरकार की सीधी लड़ाई में बदल गया है। वहीं, संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। यहाँ आज की कार्यवाही और विवादों की बड़ी रिपोर्ट दी गई है: 1. "ये रही किताब": राहुल गांधी की पीएम को चुनौती राहुल गांधी बुधवार को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की उस किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे, जिसके अस्तित्व से सरकार इनकार कर रही है। विवादित पेज: राहुल ने मीडिया को किताब का वह हिस्सा दिखाया जिसमें कथित तौर पर लिखा है कि प्रधानमंत्री ने लद्दाख गतिरोध के दौरान आर्मी चीफ से कहा था— "जो उचित समझो वह करो!" पीएम को ऑफर: राहुल ने कहा, "रक्षा मंत्री कह रहे हैं कि ऐसी कोई किताब नहीं है। मैं आज यह किताब लेकर आया हूँ। अगर प्रधानमंत्री में हिम्मत है और वे सदन में आते हैं, तो मैं खुद उन्हें यह किताब भेंट करूँगा ताकि वे इसे पढ़ें।" सदन में अड़ंगा: राहुल इस किताब के अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी है। 2. राहुल vs बिट्टू: "गद्दार दोस्त" और "नंबर वन टेररिस्ट" संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई बहस ने सबका ध्यान खींचा: राहुल का तंज: बिट्टू को देखकर राहुल ने हंसते हुए कहा, "देखो एक गद्दार आ रहा है... हैलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त! चिंता मत करो, तुम वापस कांग्रेस में ही आओगे।" बिट्टू का पलटवार: केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने राहुल से हाथ नहीं मिलाया और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मेरा देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है।" इतिहास की कड़वाहट: गौरतलब है कि बिट्टू पहले कांग्रेस में ही थे और राहुल के करीबी माने जाते थे। 2024 चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए। बिट्टू ने पूर्व में राहुल गांधी को "देश का नंबर वन टेररिस्ट" भी कहा था। 📊 रवनीत सिंह बिट्टू: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर विवरण जानकारी कांग्रेस कार्यकाल 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस सांसद रहे। बीजेपी एंट्री 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले। 2024 चुनाव परिणाम लुधियाना से चुनाव हारे (कांग्रेस के राजा वारिंग से)। वर्तमान पद राज्यसभा सांसद और रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री। 3. नरवणे की किताब का क्या है विवाद? पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की संस्मरण (Memoirs) 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के प्रकाशन पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा रखी है। आरोप: विपक्ष का दावा है कि इस किताब में अग्निपथ योजना और लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव को लेकर ऐसी बातें हैं जो सरकार की छवि बिगाड़ सकती हैं। सरकार का पक्ष: रक्षा मंत्रालय और बीजेपी सांसदों का कहना है कि यह किताब अभी आधिकारिक तौर पर आई ही नहीं है, इसलिए इसके किसी भी आर्टिकल या अंश को सदन के रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा सकता।