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US-India Trade Deal Controversy: राहुल गांधी और खड़गे का मोदी सरकार पर हमला; बोले- "टैरिफ डील में किया भारत का आत्मसमर्पण"।

अमेरिकी टैरिफ डील पर 'सियासी रार': विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा; राहुल गांधी बोले- "पीएम का विश्वासघात उजागर", खड़गे ने पूछा- "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?" नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 अमेरिकी टैरिफ और भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, भारतीय विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिना कानूनी स्थिति स्पष्ट हुए 'जल्दबाजी' में समझौता किया, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुँचा है। यहाँ विपक्ष के आरोपों, अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रम्प के नए 10% ग्लोबल टैरिफ का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. विपक्ष का प्रहार: "हताशा में किया गया आत्मसमर्पण" कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की 'ट्रेड डिप्लोमेसी' पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं: राहुल गांधी: शनिवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी का "विश्वासघात" अब सबके सामने है। उन्होंने दावा किया कि भारत इस व्यापार समझौते में फिर से "आत्मसमर्पण" कर देगा, जिससे देश की आर्थिक स्वायत्तता खतरे में पड़ेगी। मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष ने इस समझौते को एक 'ट्रैप डील' (Trap Deal) करार दिया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? क्या सरकार पर किसी तरह का दबाव था? जयराम रमेश: उन्होंने कहा कि यदि सरकार महज 18 दिन और रुक जाती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती थी। 2. दिग्गज नेताओं की 4 बड़ी टिप्पणियां विपक्ष के प्रमुख चेहरों ने सरकार की रणनीति को 'असंतुलित' बताया है: नेता मुख्य आरोप / टिप्पणी मल्लिकार्जुन खड़गे क्या यह 'एप्सटीन फाइल्स' का दबाव था? सरकार 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा करने में विफल रही। जयराम रमेश प्रधानमंत्री की हताशा के कारण यह समझौता भारत पर थोपा जा रहा है। 18 दिन का इंतजार भारी पड़ता। मनीष तिवारी यह फैसला लोकतंत्र के लिए जरूरी है। न्यायपालिका को कार्यपालिका की 'तानाशाही' वाली ज्यादती रोकनी ही चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी भारतीय निर्यात पर 10% टैरिफ और अमेरिकी आयात पर लगभग जीरो; यह डील पूरी तरह असंतुलित और एकतरफा है। 3. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 'ऐतिहासिक' फैसला शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट का तर्क: संविधान के अनुसार, टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) को है। राष्ट्रपति 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का बहाना बनाकर संसद की शक्तियों को नहीं छीन सकते। भारत पर असर: इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ कानूनी तौर पर अवैध हो गया था। विपक्ष का तर्क यही है कि यदि भारत रुकता, तो उसे कोई भी टैरिफ देने की जरूरत नहीं पड़ती। 4. ट्रम्प का जवाबी दांव: 10% नया ग्लोबल टैरिफ कोर्ट के फैसले के मात्र 3 घंटे के भीतर डोनाल्ड ट्रम्प ने नया दांव खेल दिया: नया कानून (Section-122): ट्रम्प ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 का उपयोग करते हुए दुनिया भर पर 10% टैरिफ लगा दिया। लागू होने की तारीख: यह नया टैरिफ 24 फरवरी 2026 की आधी रात से लागू होगा। भारत की स्थिति: बीबीसी के अनुसार, अब भारत पर टैरिफ 18% से घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि ट्रेड डील जारी रहेगी। 5. व्यापार समझौते का वर्तमान स्टेटस वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, विवादों के बावजूद प्रक्रिया जारी है: फरवरी अंत: अंतरिम व्यापार समझौता फाइनल हो जाएगा। मार्च: समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। अप्रैल: डील पूरी तरह लागू हो जाएगी। भारत की रियायत: भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने पर सहमति जताई है।

11 घंटे Ago
US Supreme Court strikes down Trump Tariffs: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को किया अवैध; राष्ट्रपति ने 10% नया ग्लोबल टैरिफ थोपा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रम्प को बड़ा झटका: दुनियाभर पर लगाए गए टैरिफ रद्द; राष्ट्रपति ने 3 घंटे में 'सेक्शन 122' के जरिए फिर ठोका 10% ग्लोबल टैरिफ वॉशिंगटन | 21 फरवरी 2026 अमेरिका में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक ऐतिहासिक टकराव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी तुरंत प्रभाव से खत्म हो गया है। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के महज 3 घंटे के भीतर ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 10% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। यहाँ इस अदालती फैसले, ट्रम्प की प्रतिक्रिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला: "राष्ट्रपति संसद का स्थान नहीं ले सकते" सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रम्प प्रशासन की व्यापारिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया: कानूनी आधार का अभाव: कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प ने IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, 1977) का गलत इस्तेमाल किया। टैरिफ एक प्रकार का टैक्स है, और टैक्स लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत केवल संसद (कांग्रेस) को है, राष्ट्रपति को नहीं। फटाकर: जजों ने कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ 'युद्ध' की स्थिति में नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इस तरह के व्यापक टैरिफ नहीं थोपे जा सकते। अल्पमत की राय: जस्टिस ब्रेट कैवनॉ समेत तीन जजों ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए टैरिफ का समर्थन करते हुए इसे विदेश नीति का हिस्सा माना था। 2. ट्रम्प का पलटवार: 'सेक्शन 122' के तहत नया आदेश सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रम्प ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और जजों को "देश के लिए कलंक" बताया। उन्होंने हार मानने के बजाय ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 122' का सहारा लिया: 10% ग्लोबल टैरिफ: ट्रम्प ने 24 फरवरी से दुनिया भर के देशों (भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ) पर 10% का एक समान टैरिफ लगा दिया है। भारत को आंशिक राहत: चूंकि भारत पर पहले 18% टैरिफ था, अब वह घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर इसका असर नहीं पड़ेगा और पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त बने रहेंगे। रिफंड से इनकार: ट्रम्प ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार अब तक वसूले गए 200 अरब डॉलर में से एक पैसा भी कंपनियों को वापस नहीं करेगी। 📊 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली हुई स्थिति टैरिफ की श्रेणी पहले की स्थिति वर्तमान स्थिति (कोर्ट के बाद) ट्रम्प का नया आदेश (24 Feb से) भारत पर टैरिफ 18% (रेसिप्रोकल) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) चीन पर टैरिफ 34% (बेसलाइन) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) मैक्सिको/कनाडा 25% (फेंटेनाइल मुद्दा) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) स्टील/एल्युमिनियम अलग कानून के तहत लागू रहेगा लागू रहेगा 3. 'सेक्शन 122' क्या है? यह अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक आपातकालीन शक्ति है जिसका उपयोग 55 साल पहले रिचर्ड निक्सन ने किया था: यह कानून राष्ट्रपति को तब अधिकार देता है जब देश को भारी व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो। इसके तहत बिना संसद की मंजूरी के 150 दिनों तक अस्थायी टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रम्प ने कुछ उत्पादों को इससे छूट दी है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, टमाटर और संतरा जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। 4. 200 अरब डॉलर का रिफंड सस्पेंस पिछले एक साल में ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया भर से 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है। कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कोई आदेश नहीं दिया है। सरकार की दलील: ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि रिफंड देने से अमेरिकी खजाना खाली हो जाएगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह मामला अब अगले कई सालों तक अदालतों में खिंच सकता है। 5. मुकदमे की पृष्ठभूमि: 12 राज्यों ने खोला था मोर्चा ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ सिर्फ विदेशी देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी भारी विरोध था: 12 अमेरिकी राज्यों (न्यूयॉर्क, इलिनॉय, एरिजोना आदि) और कई छोटे कारोबारियों ने यह मुकदमा दायर किया था। उनका तर्क था कि टैरिफ की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है और छोटे व्यापारियों की कमर टूट रही है। निचली अदालतों ने भी पहले इसे गैरकानूनी करार दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लग गई है।

11 घंटे Ago
India-US Trade Deal Update: ट्रम्प का 10% ग्लोबल टैरिफ और भारत पर प्रभाव; अप्रैल से लागू होगा ऐतिहासिक व्यापार समझौता।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रम्प का बड़ा ऐलान, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी जारी रहेगा समझौता; भारत को मिल सकती है 18% के बजाय 10% टैरिफ की राहत वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर शुक्रवार का दिन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द करने के फैसले और उसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए नए 10% ग्लोबल टैरिफ के बावजूद, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) पर काले बादल छंट गए हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ होने जा रहा ऐतिहासिक समझौता अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगा। यहाँ इस ट्रेड डील, नए टैरिफ नियमों और भारतीय निर्यातकों पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. ट्रम्प का 'ग्लोबल टैरिफ' दांव: भारत को फायदा या नुकसान? शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही पुराने टैरिफ रद्द किए, उसके 3 घंटे के भीतर ट्रम्प ने धारा 122 के तहत दुनिया भर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। टैरिफ में कटौती: बीबीसी की रिपोर्ट और व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, भारत जैसे देश जिनके साथ अमेरिका व्यापार समझौते कर रहा है, उन्हें अब पहले से तय 18% टैरिफ के बजाय केवल 10% ग्लोबल टैरिफ का ही सामना करना पड़ेगा। सीधा लाभ: यदि यह दर लागू होती है, तो भारतीय सामान अमेरिका में और भी सस्ता हो जाएगा, जिससे निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा। हालांकि, ट्रम्प ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह 10% अतिरिक्त होगा या कुल (Total)। 2. ट्रेड डील की टाइमलाइन: मार्च में हस्ताक्षर, अप्रैल से लागू केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित समझौते का पूरा रोडमैप साझा किया: फरवरी का अंत: 'अंतरिम व्यापार समझौता' (ITA) का ड्राफ्ट फाइनल हो जाएगा। 23 फरवरी की बैठक: भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक अमेरिका में शुरू होगी, जहाँ दर्पण जैन (चीफ नेगोशिएटर) कानूनी ड्राफ्ट को अंतिम रूप देंगे। मार्च 2026: समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। अप्रैल 2026: यह समझौता पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। 3. भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन अवसर' 7 फरवरी को घोषित इस समझौते के तहत भारत को कई महत्वपूर्ण रियायतें मिली हैं: जीरो टैरिफ: भारतीय कृषि उत्पाद (जैसे चावल, फल, मसाले) अमेरिका में जीरो ड्यूटी पर निर्यात किए जाएंगे। टैक्स में कटौती: कपड़ा, चमड़ा, और जेम्स-ज्वैलरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर लगने वाला टैक्स 25% से घटाकर 18% (या नए नियमों के तहत 10%) किया जा रहा है। रूस-तेल विवाद सुलझा: रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स हटा लिया गया है, जो भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। 📊 भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: मुख्य बिंदु समझौता पहलू विवरण भारतीय खरीदारी अगले 5 साल में अमेरिका से 50,000 करोड़ डॉलर ($500B) के उत्पाद। कृषि नियम भारत में GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फूड को एंट्री नहीं दी जाएगी। नॉन-टैरिफ बाधाएं मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन और मूल्य निर्धारण नियमों को सरल बनाया जाएगा। तीसरा देश नियम सख्त नियम बनाए जाएंगे ताकि चीन जैसे देश इस डील का गलत फायदा न उठा सकें। 4. ब्रिटेन और ओमान के साथ भी 'फ्री ट्रेड' की तैयारी अप्रैल 2026 भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 'सुपर मंथ' होने वाला है: भारत-ब्रिटेन FTA: अप्रैल से लागू होने की उम्मीद है। भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में 'जीरो ड्यूटी' एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटिश कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ कम करेगा। भारत-ओमान डील: ओमान ने भारत के 98% से ज्यादा उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है, जिससे खाड़ी देशों के बाजार भारत के लिए खुल जाएंगे। 5. नॉन-टैरिफ बैरियर्स: व्यापार को आसान बनाने की कोशिश सिर्फ टैक्स कम करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यापार की जटिलताओं को दूर करना भी प्राथमिकता है। मेडिकल सेक्टर: अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को भारत में रजिस्ट्रेशन की देरी और कीमत तय करने के नियमों से छूट मिलेगी। सप्लाई चेन: दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि सप्लाई चेन सुरक्षित रहे और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से बची रहे।

11 घंटे Ago
Pakistan Cricket Crisis: भारत से हार के बाद शाहीन अफरीदी बाहर, बाबर आजम का बदला रोल; कोच माइक हेसन ने बताई वजह।

पाकिस्तान क्रिकेट में 'सर्जिकल स्ट्राइक': भारत से हार के बाद शाहीन अफरीदी टीम से बाहर, बाबर का बैटिंग ऑर्डर बदला; कोच माइक हेसन ने बताया मास्टर प्लान कोलंबो | 21 फरवरी 2026 टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारत के हाथों मिली 61 रनों की करारी शिकस्त ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम की नींव हिला दी है। इस हार का असर इतना गहरा था कि अगले ही 'करो या मरो' वाले मुकाबले में पाकिस्तान ने अपने सबसे बड़े स्ट्राइक बॉलर शाहीन शाह अफरीदी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया और पूर्व कप्तान बाबर आजम का बल्लेबाजी क्रम बदल दिया। हालांकि, टीम के मुख्य कोच माइक हेसन ने इन बदलावों को 'पैनिक रिएक्शन' मानने से इनकार कर दिया है। यहाँ पाकिस्तान टीम में हुए इन बड़े बदलावों, कोच की सफाई और आगामी सुपर-8 की रणनीति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. शाहीन अफरीदी का 'ड्रॉप' होना: सजा या रणनीति? भारत के खिलाफ मैच में शाहीन अफरीदी काफी महंगे साबित हुए थे। उन्होंने 2 ओवरों में 31 रन लुटाए और केवल एक विकेट हासिल किया। इसके बाद नामीबिया के खिलाफ उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। कोच की सफाई: माइक हेसन ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, "शाहीन को बाहर करना कोई सजा नहीं थी। हम सलमान मिर्जा को आजमाना चाहते थे क्योंकि वे इसके हकदार थे। यह पिच की स्थितियों और टीम की तात्कालिक जरूरत को देखते हुए लिया गया एक रणनीतिक फैसला था।" विशेषज्ञों की राय: क्रिकेट जानकारों का मानना है कि शाहीन की शुरुआती ओवरों में विकेट न निकाल पाने की अक्षमता पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जिसके कारण मैनेजमेंट को कड़ा फैसला लेना पड़ा। 2. बाबर आजम का 'डिमोशन': पावरप्ले में स्ट्राइक रेट का संकट बाबर आजम, जो लंबे समय तक पाकिस्तान के ओपनर रहे हैं, अब मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते दिख रहे हैं। भारत के खिलाफ वे महज 5 रन बनाकर आउट हो गए थे। हेसन का कड़ा रुख: कोच हेसन ने साफ किया कि पावरप्ले (शुरुआती 6 ओवर) में बाबर का स्ट्राइक रेट 100 से कम है, जो आधुनिक टी-20 क्रिकेट के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है। नया रोल: हेसन के मुताबिक, "बाबर खुद जानते हैं कि हमें पावरप्ले में विस्फोटक शुरुआत चाहिए। बाबर मिडिल ओवर्स के उस्ताद हैं। अगर टीम जल्दी विकेट गंवाती है, तो वे पारी को संभाल सकते हैं। उन्हें इसी 'एन्कर' रोल के लिए टीम में नीचे भेजा गया है।" नामीबिया मैच का उदाहरण: नामीबिया के खिलाफ जब रन गति बढ़ाने की जरूरत थी, तो बाबर की जगह शादाब खान को भेजा गया और बाबर को बल्लेबाजी का मौका ही नहीं मिला। 3. भारत-पाक मैच का फ्लैशबैक: जहाँ से शुरू हुई गिरावट कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए उस मैच ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी की पोल खोल दी थी: भारत का स्कोर: 175/7 (20 ओवर) पाकिस्तान का स्कोर: 114/10 (17.6 ओवर) हार का अंतर: 61 रन पाकिस्तान ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी थी, लेकिन न तो उनके गेंदबाज भारत को रोक पाए और न ही बल्लेबाज लक्ष्य का पीछा कर सके। इसी प्रदर्शन ने टीम में 'ओवरहाल' (बदलाव) की नींव रखी। 📊 पाकिस्तान की नई रणनीति बनाम पुरानी रणनीति क्षेत्र पुरानी रणनीति (भारत के खिलाफ) नई रणनीति (सुपर-8 के लिए) ओपनिंग बाबर आजम और रिजवान आक्रामक हिटर (साहिबजादा फरहान आदि) पेस अटैक शाहीन शाह अफरीदी (लीडर) सलमान मिर्जा और अन्य युवा विकल्प बाबर आजम का रोल पारी की शुरुआत करना मध्यक्रम में संकटमोचक (Anchor) पावरप्ले लक्ष्य विकेट बचाकर खेलना 50+ रन बनाने का प्रयास करना 4. सुपर-8 की चुनौती: शनिवार को न्यूजीलैंड से भिड़ंत ग्रुप स्टेज की उथल-पुथल के बाद अब पाकिस्तान सुपर-8 के अपने पहले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ उतरेगा। स्पिनर्स की भूमिका: कोलंबो की पिच अब धीमी हो रही है, जिससे शादाब खान और अबरार अहमद जैसे स्पिनर्स की भूमिका अहम हो जाएगी। पावरप्ले पर फोकस: कोच हेसन ने स्पष्ट किया है कि कीवी टीम के खिलाफ टीम की प्राथमिकता पावरप्ले का अधिकतम लाभ उठाना होगी।

11 घंटे Ago
अमेरिकी टैरिफ डील, राहुल बोले- मोदी ने विश्वासघात किया
देश
US-India Trade Deal Controversy: राहुल गांधी और खड़गे का मोदी सरकार पर हमला; बोले- "टैरिफ डील में किया भारत का आत्मसमर्पण"।

अमेरिकी टैरिफ डील पर 'सियासी रार': विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा; राहुल गांधी बोले- "पीएम का विश्वासघात उजागर", खड़गे ने पूछा- "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?" नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 अमेरिकी टैरिफ और भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, भारतीय विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिना कानूनी स्थिति स्पष्ट हुए 'जल्दबाजी' में समझौता किया, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुँचा है। यहाँ विपक्ष के आरोपों, अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रम्प के नए 10% ग्लोबल टैरिफ का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. विपक्ष का प्रहार: "हताशा में किया गया आत्मसमर्पण" कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की 'ट्रेड डिप्लोमेसी' पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं: राहुल गांधी: शनिवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी का "विश्वासघात" अब सबके सामने है। उन्होंने दावा किया कि भारत इस व्यापार समझौते में फिर से "आत्मसमर्पण" कर देगा, जिससे देश की आर्थिक स्वायत्तता खतरे में पड़ेगी। मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष ने इस समझौते को एक 'ट्रैप डील' (Trap Deal) करार दिया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? क्या सरकार पर किसी तरह का दबाव था? जयराम रमेश: उन्होंने कहा कि यदि सरकार महज 18 दिन और रुक जाती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती थी। 2. दिग्गज नेताओं की 4 बड़ी टिप्पणियां विपक्ष के प्रमुख चेहरों ने सरकार की रणनीति को 'असंतुलित' बताया है: नेता मुख्य आरोप / टिप्पणी मल्लिकार्जुन खड़गे क्या यह 'एप्सटीन फाइल्स' का दबाव था? सरकार 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा करने में विफल रही। जयराम रमेश प्रधानमंत्री की हताशा के कारण यह समझौता भारत पर थोपा जा रहा है। 18 दिन का इंतजार भारी पड़ता। मनीष तिवारी यह फैसला लोकतंत्र के लिए जरूरी है। न्यायपालिका को कार्यपालिका की 'तानाशाही' वाली ज्यादती रोकनी ही चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी भारतीय निर्यात पर 10% टैरिफ और अमेरिकी आयात पर लगभग जीरो; यह डील पूरी तरह असंतुलित और एकतरफा है। 3. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 'ऐतिहासिक' फैसला शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट का तर्क: संविधान के अनुसार, टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) को है। राष्ट्रपति 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का बहाना बनाकर संसद की शक्तियों को नहीं छीन सकते। भारत पर असर: इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ कानूनी तौर पर अवैध हो गया था। विपक्ष का तर्क यही है कि यदि भारत रुकता, तो उसे कोई भी टैरिफ देने की जरूरत नहीं पड़ती। 4. ट्रम्प का जवाबी दांव: 10% नया ग्लोबल टैरिफ कोर्ट के फैसले के मात्र 3 घंटे के भीतर डोनाल्ड ट्रम्प ने नया दांव खेल दिया: नया कानून (Section-122): ट्रम्प ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 का उपयोग करते हुए दुनिया भर पर 10% टैरिफ लगा दिया। लागू होने की तारीख: यह नया टैरिफ 24 फरवरी 2026 की आधी रात से लागू होगा। भारत की स्थिति: बीबीसी के अनुसार, अब भारत पर टैरिफ 18% से घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि ट्रेड डील जारी रहेगी। 5. व्यापार समझौते का वर्तमान स्टेटस वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, विवादों के बावजूद प्रक्रिया जारी है: फरवरी अंत: अंतरिम व्यापार समझौता फाइनल हो जाएगा। मार्च: समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। अप्रैल: डील पूरी तरह लागू हो जाएगी। भारत की रियायत: भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने पर सहमति जताई है।

रवि चौहान फ़रवरी 21, 2026 0
Photo:PIXABAY
Festive Shopping 2025: भारतीय उपभोक्ता बदलते अंदाज़ में कर रहे खरीदारी

नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।

जैसलमेर में बड़ा हादसा ( फोटो क्रेडिट NDTV )
जैसलमेर में बड़ा हादसाǃ स्लीपर बस में लगी आग‚ दरवाजा नही खुलने से जिंदा जले 21 यात्री

राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया।   🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके   बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा।   💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक   खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।   🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया   जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया।   🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत   पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ।   🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर   हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। 

शेयर मार्केट डाउन
Share Market Closing 26 September 2025: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, सिर्फ कुछ कंपनियों के शेयर बढ़त में

नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025 – भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ कारोबार बंद किया। हफ्ते के आखिरी दिन बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंकों (0.90%) की गिरावट के साथ 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 236.15 अंकों (0.95%) की गिरावट के साथ 24,654.70 अंक पर बंद हुआ। बाजार पर दबाव का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर, 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के इंपोर्ट पर 100% तक के टैरिफ की घोषणा की है। इसके असर से आज फार्मा सेक्टर सहित कई अन्य सेक्टर्स में बिकवाली हुई और बाजार में भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सेंसेक्स की 30 कंपनियों में सिर्फ 4 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी 25 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में रहे। निफ्टी 50 में भी सिर्फ 6 कंपनियों के शेयर बढ़त में, जबकि 44 कंपनियों के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। आज सेंसेक्स में एलएंडटी का शेयर सबसे अधिक 2.38% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 3.62% गिरा। पॉजिटिव मूव के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर टाटा मोटर्स: 1.32% बढ़त आईटीसी: 1.21% बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज: 0.39% बढ़त गिरावट के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर एटरनल: 3.39% गिरावट टाटा स्टील: 2.81% गिरावट बजाज फाइनेंस: 2.75% गिरावट एशियन पेंट्स: 2.62% गिरावट सनफार्मा: 2.55% गिरावट टेक महिंद्रा: 2.51% गिरावट इंफोसिस: 2.43% गिरावट टीसीएस: 2.04% गिरावट एचसीएल टेक: 2.00% गिरावट बीईएल: 1.87% गिरावट और अन्य प्रमुख शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। निष्कर्ष आज के कारोबार में वैश्विक और घरेलू घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला। फार्मा सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का असर और त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू नीति निर्णयों पर निर्भर करेगी।

Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई
Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई; शाहीन मलिक ने कहा- 'सिस्टम ने मुझे तोड़ दिया'

⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।

मां लक्ष्मी
धनतेरस आजǃ भूलकर भी ना खरीदें ये चीज़ें, नहीं तो नाराज हो सकती हैं मां लक्ष्मी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है।    क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी?   शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है।  सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए।  प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है।    अन्य सुझाव व उपाय   धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए।  जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।

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मेहराज और उसकी पत्नी नसीमन
“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

अक्टूबर 11, 2025

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