एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: "प्रसिद्ध होने का मतलब कानून से ऊपर होना नहीं"; सांप के जहर कांड में वन्यजीवों के दुरुपयोग पर सख्त रुख नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026 यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सांपों के जहर (Snake Venom) से जुड़े चर्चित मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समाज के प्रभावशाली और प्रसिद्ध लोग ही वन्यजीवों का दुरुपयोग करेंगे और कानून का उल्लंघन करेंगे, तो इससे समाज में बेहद गलत संदेश जाएगा। यहाँ इस अदालती सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और मामले की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "बोलने में असमर्थ प्राणियों का दुरुपयोग गलत" जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज चार्जशीट और आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। समाज पर असर: बेंच ने कहा, "यदि आप जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति वन्यजीवों जैसे 'बोलने में असमर्थ' प्राणियों का इस तरह उपयोग करते हैं, तो यह समाज को बहुत गलत संदेश देता है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि वह मनमानी करेगा और जो चाहे वह करेगा।" कानून की सर्वोच्चता: अदालत ने याद दिलाया कि Wildlife (Protection) Act, 1972 सभी के लिए समान है और इसकी धाराओं के तहत यह जांचना आवश्यक है कि क्या कानून का उल्लंघन हुआ है। 2. एल्विश के वकील का तर्क: "केवल अतिथि के रूप में थे मौजूद" एल्विश यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा: स्वामित्व से इनकार: वकील ने तर्क दिया कि एल्विश न तो उन सांपों के मालिक थे और न ही उन्होंने किसी अवैध गतिविधि को अंजाम दिया। म्यूजिक वीडियो का हवाला: कोर्ट को बताया गया कि एल्विश केवल गायक फाजिलपुरिया के एक म्यूजिक वीडियो शूट में 'अतिथि' (Guest) के रूप में मौजूद थे। सुरक्षा का दावा: डिफेंस की ओर से कहा गया कि वीडियो में इस्तेमाल किए गए सांपों के पास न तो जहर की थैलियां (Venom Sacs) थीं और न ही दांत। साथ ही यह दावा किया गया कि प्रोडक्शन टीम ने इसके लिए जरूरी अनुमति ली थी। 3. प्रशासन और पुलिस की जांच: क्या हुआ था खुलासा? दूसरी ओर, सरकारी पक्ष और पुलिस ने कोर्ट को मामले की गंभीरता से अवगत कराया: बरामदगी: पुलिस ने जांच के दौरान कई सांप और संदिग्ध जहर बरामद किया था। अब यह जांच का मुख्य विषय है कि क्या वह जहर अवैध रूप से निकाला गया था। अनुमति पर सवाल: कोर्ट ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) को निर्देश दिया है कि वे यह स्पष्ट करें कि क्या वीडियो शूट के लिए वास्तव में सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। 📊 एल्विश यादव 'स्नेक वेनम' केस: अब तक क्या हुआ? समय घटनाक्रम नवंबर 2023 नोएडा में रेव पार्टियों में सांपों के जहर के इस्तेमाल के आरोप में FIR दर्ज। मार्च 2024 एल्विश यादव को गिरफ्तार किया गया और कुछ दिनों बाद जमानत मिली। अप्रैल 2024 पुलिस ने 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें एनडीपीएस एक्ट की धाराएं भी शामिल थीं। फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एल्विश को फटकार लगाई। 4. क्या है पूरा विवाद? (पृष्ठभूमि) यह मामला नोएडा पुलिस द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आया था। आरोप था कि नोएडा और एनसीआर की हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों में मनोरंजन और नशे के लिए सांपों के जहर की आपूर्ति की जाती थी। आरोप: पीपुल फॉर एनिमल्स (PFA) संस्था की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की थी, जिसमें कोबरा सहित कई दुर्लभ सांप मिले थे। एल्विश की भूमिका: एल्विश पर आरोप लगा कि वे इन पार्टियों के आयोजकों और सपेरों के संपर्क में थे, हालांकि उन्होंने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है। 5. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का महत्व भारत में वन्यजीवों को सुरक्षा देने के लिए यह कानून बेहद सख्त है। इसके तहत जंगली जानवरों को बंदी बनाना, उनका व्यावसायिक उपयोग करना या उन्हें नुकसान पहुँचाना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि मनोरंजन (Entertainment) के नाम पर जानवरों के साथ की जाने वाली क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
AI समिट विवाद पर शशि थरूर का संतुलित रुख: 'बड़े आयोजनों में छोटी गड़बड़ियां मुमकिन'; गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद के बीच राहुल गांधी ने सरकार को घेरा नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' अपने समापन की ओर है, लेकिन यह आयोजन तकनीकी नवाचारों से अधिक राजनीतिक विवादों और 'गलगोटिया यूनिवर्सिटी कांड' के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। जहाँ एक ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस समिट को 'डिसऑर्गनाइज्ड पीआर तमाशा' करार दिया है, वहीं कांग्रेस के ही वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने एक संतुलित टिप्पणी करते हुए आयोजन की सराहना की है। यहाँ शशि थरूर के बयान, गलगोटिया विवाद और इस समिट से जुड़ी हर बड़ी जानकारी का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. शशि थरूर की टिप्पणी: "बड़े इवेंट में ऐसी समस्याएं हो सकती हैं" अपनी नई किताब (श्री नारायण गुरु के जीवन पर आधारित) के विमोचन के दौरान थरूर ने समिट और देश की रक्षा नीति पर अपने विचार साझा किए: सकारात्मक पक्ष: थरूर ने कहा कि समिट के पहले कुछ दिन शानदार रहे। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी एक 'एकीकृत दुनिया' (Integrated World) का मजबूत संदेश देती है। विवाद पर नरम रुख: गलगोटिया विवाद पर उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में कुछ गड़बड़ियां हो सकती हैं, लेकिन मुख्य फोकस भारत की लीडरशिप पर होना चाहिए। रक्षा नीति पर सरकार का समर्थन: थरूर ने 'राफेल' और भारत की रक्षा तैयारियों पर सरकार का बचाव किया। उन्होंने इसे "डिफेंसिव डिफेंस" (Defensive Defense) बताया, जिसका अर्थ है खुद को इतना मजबूत करना कि कोई दूसरा देश हमला करने का दुस्साहस न कर सके। 'केरल स्टोरी 2' का विरोध: थरूर ने आने वाली फिल्म 'केरल स्टोरी 2' को 'नफरत फैलाने वाली' बताया और कहा कि कुछ इक्का-दुक्का मामलों को बड़ी कहानी बनाकर पेश करना गलत है। 2. गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद: चीनी रोबोट को बताया अपना 'आविष्कार' समिट के दौरान उस समय बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग 'ओरायन' प्रदर्शित किया गया। धोखाधड़ी का आरोप: यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि यह उनका स्वदेशी नवाचार है। हालांकि, जल्द ही यह खुलासा हुआ कि यह चीनी कंपनी यूनिट्री (Unitree) का 'Go2' मॉडल है, जो बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इसके अलावा एक रेडीमेड कोरियन ड्रोन को भी अपना बताया गया। आयोजकों की कार्रवाई: विवाद बढ़ते ही यूनिवर्सिटी को एक्सपो से बाहर कर दिया गया। उनके पवेलियन की बिजली काट दी गई और वहां ताला लगाकर बेरीकेडिंग कर दी गई। यूनिट्री रोबोट की विशेषता: यूनिट्री का यह रोबोटिक डॉग AI से लैस है जो उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने और बाधाओं को पहचानने में सक्षम है। 3. राहुल गांधी और कांग्रेस का कड़ा प्रहार: "देश का मजाक बनवाया" कांग्रेस ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और विशेषकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तीखा हमला बोला है: राहुल गांधी का बयान: नेता विपक्ष ने कहा कि भारत के पास डेटा और टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन सरकार ने इस समिट को केवल एक 'डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल' (अव्यवस्थित प्रचार तमाशा) बनाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय छवि: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चीनी मीडिया भारतीय समिट का मजाक उड़ा रही है, क्योंकि हम उनके रोबोट को अपना बताकर पेश कर रहे थे। उन्होंने इसे देश की छवि को अपूरणीय क्षति बताया। 4. गलगोटिया यूनिवर्सिटी की सफाई: "चलता-फिरता क्लासरूम" चौतरफा घिरने के बाद यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा: दावे का खंडन: यूनिवर्सिटी ने अब मान लिया है कि उन्होंने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी इसे अपना आविष्कार नहीं कहा (हालांकि वायरल वीडियो में स्टाफ इसे अपना प्रोजेक्ट बताते दिखे थे)। सीखने का जरिया: यूनिवर्सिटी का तर्क है कि वे दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी कैंपस में लाते हैं ताकि छात्र उन पर प्रयोग कर सकें और भविष्य में ऐसी मशीनें भारत में बना सकें। उन्होंने इसे छात्रों के लिए एक 'चलता-फिरता क्लासरूम' बताया। 📊 इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: एक नजर में मुख्य बिंदु विवरण उद्घाटन 16 फरवरी 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा। स्थान भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली। उद्देश्य खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा में AI के उपयोग को बढ़ावा देना। थीम "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय"। मुख्य आकर्षण स्टार्टअप्स के पवेलियंस और ग्लोबल AI सॉल्यूशंस। प्रमुख विवाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी (चीनी रोबोट कांड) और यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन। 5. समिट का भविष्य और भारत की AI ड्राइव तमाम विवादों के बावजूद, यह समिट भारत के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके जरिए भारत को ग्लोबल AI हब बनाने का विजन रखा है। समिट में यह दिखाया गया है कि कैसे भविष्य में: खेती: एआई के जरिए फसलों की बीमारियों और मौसम का सटीक अनुमान। शिक्षा: छात्रों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग टूल्स। स्वास्थ्य: बीमारियों का शुरुआती स्तर पर सटीक डायग्नोसिस।
ट्रम्प का नया दावा: '200% टैरिफ' की धमकी देकर रुकवाया भारत-पाक युद्ध; शहबाज शरीफ को सभा में खड़ा कर बोले- इन्होंने मुझे 'रक्षक' माना वॉशिंगटन | 20 फरवरी 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। वॉशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) की पहली ऐतिहासिक बैठक में ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक भीषण युद्ध को अपनी सख्त 'टैरिफ कूटनीति' के जरिए रोका। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में उन्हें "दक्षिण एशिया का रक्षक" बताए जाने का जिक्र भी किया। यहाँ ट्रम्प के दावों, 'बोर्ड ऑफ पीस' की बैठक और भारत के रुख का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. "200% टैरिफ की धमकी और फोन कॉल": ट्रम्प का दावा ट्रम्प ने कार्यक्रम में बताया कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष चरम पर था, तब उन्होंने हस्तक्षेप किया: सख्त चेतावनी: ट्रम्प के अनुसार, उन्होंने पीएम मोदी और शहबाज शरीफ दोनों को फोन किया और साफ कहा कि अगर संघर्ष नहीं रुका, तो अमेरिका दोनों देशों पर 200% आयात शुल्क (Tariff) लगा देगा और कोई भी ट्रेड डील नहीं करेगा। विमानों का गिरना: ट्रम्प ने दावा किया कि उस दौरान 11 फाइटर जेट्स गिराए जा चुके थे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे या यह घटना किस विशेष तारीख की है। 2.5 करोड़ जानों का खतरा: राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी मध्यस्थता न होती तो इस युद्ध में ढाई करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। 2. शहबाज शरीफ को सभा में खड़ा किया: वीडियो वायरल बैठक के दौरान एक अजीबोगरीब वाकया तब हुआ जब ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का जिक्र किया: सार्वजनिक प्रशंसा: ट्रम्प ने कहा कि शहबाज शरीफ ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने स्वीकार किया कि ट्रम्प की वजह से युद्ध टला। खड़े होने का आदेश: ट्रम्प ने भाषण के बीच में शहबाज शरीफ से खड़े होने को कहा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शरीफ ने ट्रम्प को 'दक्षिण एशिया का रक्षक' (Protector of South Asia) करार दिया। 3. क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace)? यह ट्रम्प का एक नया वैश्विक कूटनीतिक मंच है, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प या पूरक के तौर पर देखा जा रहा है: उद्देश्य: इसकी शुरुआत सितंबर 2025 में गाजा युद्ध को खत्म करने के लिए हुई थी, लेकिन अब यह दुनिया भर के संघर्षों को सुलझाने का दावा करता है। सदस्यता की शर्त: बोर्ड का चार्टर कहता है कि जो देश 3 साल से अधिक समय तक सदस्य रहना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। गाजा राहत पैकेज: बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये ($17 बिलियन) के पैकेज का ऐलान हुआ। इसमें से अमेरिका खुद 10 अरब डॉलर देगा। 4. भारत का रुख: 'ऑब्जर्वर' के तौर पर मौजूदगी भारत ने इस बैठक में हिस्सा तो लिया, लेकिन बेहद संभलकर कदम बढ़ा रहा है: सीनियर अधिकारी की भागीदारी: भारत की ओर से चार्ज द’अफेयर्स नमग्या सी खम्पा ने 'ऑब्जर्वर' (पर्यवेक्षक) देश के तौर पर हिस्सा लिया। पूर्ण सदस्यता पर संशय: भारत ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह 1 अरब डॉलर देकर इसका फुल-टाइम सदस्य बनेगा या नहीं। भारत हमेशा से 'तीसरे पक्ष की मध्यस्थता' (Third-party mediation) का विरोध करता आया है। 5. चीन दौरा और शी जिनपिंग पर चुटकी ट्रम्प ने घोषणा की कि वे अप्रैल 2026 में चीन के दौरे पर जाएंगे। उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों को 'बेहतरीन' बताया, लेकिन चीनी सैनिकों के अनुशासन पर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों का कद और अनुशासन इतना सटीक था कि उनके सिर पर बिलियर्ड खेला जा सकता था। 📊 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक: मुख्य बिंदु विवरण जानकारी अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिकी राष्ट्रपति) कुल न्योता ~60 देशों को भेजा गया गाजा पैकेज 1.5 लाख करोड़ रुपये ($17 Billion) भारत की भूमिका ऑब्जर्वर (Observer State) अगला बड़ा मिशन रूस-यूक्रेन और भारत-पाक शांति मध्यस्थता
Gemini said ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन का 'नो': ट्रम्प और स्टार्मर के बीच बढ़ी तल्खी; डिएगो गार्सिया को लेकर चागोस समझौते पर मंडराया संकट लंदन/वॉशिंगटन | 21 फरवरी 2026 हिंद महासागर की लहरों के बीच स्थित एक छोटा सा द्वीप डिएगो गार्सिया आज वैश्विक राजनीति और युद्ध की आहट का केंद्र बन गया है। ब्रिटेन ने अमेरिका के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें ईरान पर संभावित हमले के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों (एयरबेस) के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी। इस फैसले ने दशकों पुरानी ब्रिटेन-अमेरिका की 'विशेष दोस्ती' (Special Relationship) में दरार पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर अब चागोस द्वीप समूह के भविष्य पर पड़ता दिख रहा है। यहाँ इस भू-राजनीतिक टकराव, डिएगो गार्सिया के सामरिक महत्व और ट्रम्प-स्टार्मर विवाद का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. ब्रिटेन का इनकार: क्यों पीछे हटा लंदन? डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान मिशन के लिए RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की इजाजत देने से मना कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानून का डर: ब्रिटेन को डर है कि यदि वह ईरान पर किसी ऐसे हमले में शामिल होता है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'अवैध' माना जाए, तो उसे भी युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इराक युद्ध की सीख: इराक और अफगानिस्तान युद्धों के बाद ब्रिटेन की जनता और राजनीति में 'बिना ठोस कानूनी आधार' के सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के प्रति गहरी अरुचि है। संप्रभुता का अधिकार: समझौतों के अनुसार, ब्रिटेन के किसी भी बेस से हमला करने के लिए ब्रिटिश पीएम की स्पष्ट सहमति अनिवार्य है। 2. ट्रम्प की नाराजगी और 'चागोस' पर पलटवार ब्रिटेन के इस 'असहयोग' से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बेहद खफा हैं। उन्होंने इसका बदला लेने के लिए चागोस द्वीप समूह के मुद्दे को हथियार बनाया है: समझौते से समर्थन वापसी: कीर स्टार्मर सरकार ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने का जो ऐतिहासिक समझौता किया था, ट्रम्प ने अब उससे अमेरिकी समर्थन वापस ले लिया है। "बहुत बड़ी गलती": ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि डिएगो गार्सिया जैसा अहम रणनीतिक ठिकाना छोड़ना एक ऐतिहासिक भूल होगी। उन्होंने 100 साल की लीज जैसे फैसलों को कमजोर नीति करार दिया। ईरान के खिलाफ कंट्रोल: ट्रम्प का मानना है कि यदि ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता, तो अमेरिका को हिंद महासागर में पूर्ण नियंत्रण वाले बेस की जरूरत होगी। 3. डिएगो गार्सिया: ईरान के लिए क्यों है यह 'किलर' बेस? ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए किसी 'तुरुप के इक्के' से कम नहीं है। इसकी अहमियत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: दूरी और सुरक्षा: यह ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 3,800 किलोमीटर दूर है। यह दूरी इतनी है कि अमेरिकी बमवर्षक ईरान की मिसाइलों की रेंज से बाहर रहते हुए हमला कर सकते हैं। भारी बमवर्षकों का घर: यहाँ का रनवे इतना बड़ा है कि B-2 स्टील्थ और B-52 जैसे विशालकाय परमाणु सक्षम बमवर्षक यहाँ से उड़ान भर सकते हैं। गहरे पानी का बंदरगाह: यहाँ गहरे पानी की प्राकृतिक गोदी है, जहाँ अमेरिकी विमानवाहक पोत और परमाणु पनडुब्बियां ईंधन और गोला-बारूद भर सकती हैं। निगरानी केंद्र: यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है, जहाँ से पूरे मध्य-पूर्व और एशिया पर नजर रखी जा सकती है। 📊 चागोस आइलैंड्स: विवाद और इतिहास कालखंड घटनाक्रम 1814 ब्रिटेन ने नेपोलियन को हराकर चागोस आइलैंड्स पर कब्जा किया। 1965 मॉरीशस से अलग कर इसे 'ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र' बनाया गया। 1970 का दशक अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर डिएगो गार्सिया पर सैन्य बेस बनाया। 2019 अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने ब्रिटेन को ये द्वीप मॉरीशस को लौटाने का आदेश दिया। 2024-25 लेबर पार्टी (स्टार्मर सरकार) ने मॉरीशस को द्वीप लौटाने का समझौता किया। Export to Sheets 4. ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों में खटास की 4 बड़ी वजहें सालों पुराने मित्र देशों के बीच आज कई मुद्दों पर मतभेद सतह पर आ गए हैं: कानून बनाम ताकत: ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों (International Law) को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति सख्त सैन्य कार्रवाई में यकीन रखती है। चागोस का भविष्य: ब्रिटेन कानूनी विवाद खत्म करने के लिए मॉरीशस को द्वीप लौटाना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे हिंद महासागर में अपनी पकड़ कमजोर होना मान रहा है। आर्थिक बोझ: चागोस समझौते पर करीब 35 बिलियन पाउंड (4 लाख करोड़ रुपये) का खर्च आना है, जिसे अमेरिका फिजूलखर्ची मान रहा है। ग्रीनलैंड और अन्य मुद्दे: ट्रम्प की ग्रीनलैंड खरीदने की इच्छा और डेनमार्क के साथ उनके व्यवहार ने भी ब्रिटेन जैसे यूरोपीय सहयोगियों को असहज किया है। 5. निष्कर्ष: क्या युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया? ब्रिटेन के इनकार के बावजूद, ट्रम्प प्रशासन ईरान के प्रति अपने कड़े रुख पर अड़ा हुआ है। डिएगो गार्सिया का नियंत्रण अब एक बड़ी कूटनीतिक जंग बन चुका है। यदि ब्रिटेन अपने रुख पर कायम रहता है, तो अमेरिका हिंद महासागर में अपनी रणनीति बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और व्यापार मार्गों पर पड़ेगा।
एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: "प्रसिद्ध होने का मतलब कानून से ऊपर होना नहीं"; सांप के जहर कांड में वन्यजीवों के दुरुपयोग पर सख्त रुख नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026 यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सांपों के जहर (Snake Venom) से जुड़े चर्चित मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समाज के प्रभावशाली और प्रसिद्ध लोग ही वन्यजीवों का दुरुपयोग करेंगे और कानून का उल्लंघन करेंगे, तो इससे समाज में बेहद गलत संदेश जाएगा। यहाँ इस अदालती सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और मामले की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "बोलने में असमर्थ प्राणियों का दुरुपयोग गलत" जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज चार्जशीट और आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। समाज पर असर: बेंच ने कहा, "यदि आप जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति वन्यजीवों जैसे 'बोलने में असमर्थ' प्राणियों का इस तरह उपयोग करते हैं, तो यह समाज को बहुत गलत संदेश देता है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि वह मनमानी करेगा और जो चाहे वह करेगा।" कानून की सर्वोच्चता: अदालत ने याद दिलाया कि Wildlife (Protection) Act, 1972 सभी के लिए समान है और इसकी धाराओं के तहत यह जांचना आवश्यक है कि क्या कानून का उल्लंघन हुआ है। 2. एल्विश के वकील का तर्क: "केवल अतिथि के रूप में थे मौजूद" एल्विश यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा: स्वामित्व से इनकार: वकील ने तर्क दिया कि एल्विश न तो उन सांपों के मालिक थे और न ही उन्होंने किसी अवैध गतिविधि को अंजाम दिया। म्यूजिक वीडियो का हवाला: कोर्ट को बताया गया कि एल्विश केवल गायक फाजिलपुरिया के एक म्यूजिक वीडियो शूट में 'अतिथि' (Guest) के रूप में मौजूद थे। सुरक्षा का दावा: डिफेंस की ओर से कहा गया कि वीडियो में इस्तेमाल किए गए सांपों के पास न तो जहर की थैलियां (Venom Sacs) थीं और न ही दांत। साथ ही यह दावा किया गया कि प्रोडक्शन टीम ने इसके लिए जरूरी अनुमति ली थी। 3. प्रशासन और पुलिस की जांच: क्या हुआ था खुलासा? दूसरी ओर, सरकारी पक्ष और पुलिस ने कोर्ट को मामले की गंभीरता से अवगत कराया: बरामदगी: पुलिस ने जांच के दौरान कई सांप और संदिग्ध जहर बरामद किया था। अब यह जांच का मुख्य विषय है कि क्या वह जहर अवैध रूप से निकाला गया था। अनुमति पर सवाल: कोर्ट ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) को निर्देश दिया है कि वे यह स्पष्ट करें कि क्या वीडियो शूट के लिए वास्तव में सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। 📊 एल्विश यादव 'स्नेक वेनम' केस: अब तक क्या हुआ? समय घटनाक्रम नवंबर 2023 नोएडा में रेव पार्टियों में सांपों के जहर के इस्तेमाल के आरोप में FIR दर्ज। मार्च 2024 एल्विश यादव को गिरफ्तार किया गया और कुछ दिनों बाद जमानत मिली। अप्रैल 2024 पुलिस ने 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें एनडीपीएस एक्ट की धाराएं भी शामिल थीं। फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एल्विश को फटकार लगाई। 4. क्या है पूरा विवाद? (पृष्ठभूमि) यह मामला नोएडा पुलिस द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आया था। आरोप था कि नोएडा और एनसीआर की हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों में मनोरंजन और नशे के लिए सांपों के जहर की आपूर्ति की जाती थी। आरोप: पीपुल फॉर एनिमल्स (PFA) संस्था की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की थी, जिसमें कोबरा सहित कई दुर्लभ सांप मिले थे। एल्विश की भूमिका: एल्विश पर आरोप लगा कि वे इन पार्टियों के आयोजकों और सपेरों के संपर्क में थे, हालांकि उन्होंने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है। 5. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का महत्व भारत में वन्यजीवों को सुरक्षा देने के लिए यह कानून बेहद सख्त है। इसके तहत जंगली जानवरों को बंदी बनाना, उनका व्यावसायिक उपयोग करना या उन्हें नुकसान पहुँचाना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि मनोरंजन (Entertainment) के नाम पर जानवरों के साथ की जाने वाली क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया। 🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा। 💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। 🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया। 🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ। 🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025 – भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ कारोबार बंद किया। हफ्ते के आखिरी दिन बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंकों (0.90%) की गिरावट के साथ 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 236.15 अंकों (0.95%) की गिरावट के साथ 24,654.70 अंक पर बंद हुआ। बाजार पर दबाव का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर, 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के इंपोर्ट पर 100% तक के टैरिफ की घोषणा की है। इसके असर से आज फार्मा सेक्टर सहित कई अन्य सेक्टर्स में बिकवाली हुई और बाजार में भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सेंसेक्स की 30 कंपनियों में सिर्फ 4 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी 25 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में रहे। निफ्टी 50 में भी सिर्फ 6 कंपनियों के शेयर बढ़त में, जबकि 44 कंपनियों के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। आज सेंसेक्स में एलएंडटी का शेयर सबसे अधिक 2.38% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 3.62% गिरा। पॉजिटिव मूव के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर टाटा मोटर्स: 1.32% बढ़त आईटीसी: 1.21% बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज: 0.39% बढ़त गिरावट के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर एटरनल: 3.39% गिरावट टाटा स्टील: 2.81% गिरावट बजाज फाइनेंस: 2.75% गिरावट एशियन पेंट्स: 2.62% गिरावट सनफार्मा: 2.55% गिरावट टेक महिंद्रा: 2.51% गिरावट इंफोसिस: 2.43% गिरावट टीसीएस: 2.04% गिरावट एचसीएल टेक: 2.00% गिरावट बीईएल: 1.87% गिरावट और अन्य प्रमुख शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। निष्कर्ष आज के कारोबार में वैश्विक और घरेलू घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला। फार्मा सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का असर और त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू नीति निर्णयों पर निर्भर करेगी।
⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है। क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी? शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है। सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए। प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है। अन्य सुझाव व उपाय धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए। जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”