भारत सरकार ने मोबाइल फोन पर 'संचार साथी' ऐप के प्री-इंस्टॉलेशन (पहले से डाउनलोड) की अनिवार्यता वाले अपने विवादास्पद आदेश को अंततः वापस ले लिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को घोषणा की कि ऐप की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए इसे नए और मौजूदा हैंडसेट में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। यह कदम तब आया जब केंद्र सरकार को विपक्ष और निजता समूहों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने इसे नागरिकों की 'जासूसी' करने और उनकी 'प्राइवेसी पर सीधा हमला' बताया था।
यह पूरा विवाद 28 नवंबर को तब शुरू हुआ था, जब DoT ने Apple, Samsung, Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी मोबाइल फोन निर्माताओं को एक गोपनीय आदेश जारी कर 90 दिनों के भीतर भारत में बेचे जाने वाले सभी नए फोनों में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने और पुराने फोनों में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे डालने को कम्पल्सरी कर दिया था, जिसे डिलीट या डिसेबल नहीं किया जा सकता था।
विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने इसे "तानाशाही थोपने" का प्रयास बताया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "जासूसी ऐप" करार दिया। इस विरोध के जवाब में, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को संसद में स्पष्ट किया था कि ऐप 'ऑप्शनल' है और यूजर्स इसे जब चाहें हटा सकते हैं। बुधवार को लोकसभा में सिंधिया ने एक बार फिर दोहराया कि संचार साथी ऐप से जासूसी करना न तो संभव है, न ही जासूसी होगी।
सरकार का दावा है कि यह ऐप साइबर फ्रॉड रोकने, चोरी के मोबाइल ट्रैक करने और फर्जी IMEI नंबर से होने वाले स्कैम को रोकने के लिए एक आवश्यक डिजिटल सुरक्षा टूल है। वहीं, इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, इस आदेश से Apple जैसी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई थीं, जिनकी इंटरनल पॉलिसी थर्ड-पार्टी ऐप्स के प्री-इंस्टॉलेशन की अनुमति नहीं देती है।
यह विस्तृत आलेख संचार साथी ऐप पर हुए पूरे विवाद (28 नवंबर से 3 दिसंबर) का कालक्रमिक और विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता वापस लेने के पीछे के कारणों (बढ़ते डाउनलोड और राजनीतिक विरोध), विपक्ष के 'जासूसी' के आरोपों का गहन विश्लेषण, केंद्र सरकार का बचाव (सिंधिया का स्पष्टीकरण), ऐप की तकनीकी कार्यप्रणाली (IMEI ट्रैकिंग, फ्रॉड रिपोर्टिंग), और निजता के अधिकार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के टकराव के कानूनी और सामाजिक निहितार्थों का 5000 शब्दों में गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
संचार साथी ऐप को लेकर उठे विवाद ने एक सप्ताह के भीतर ही सरकार को अपना कड़ा फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया।
आदेश की शुरुआत: दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी मोबाइल फोन निर्माताओं (एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो, शाओमी आदि) को एक गोपनीय आदेश जारी किया।
अनिवार्यता: आदेश में कहा गया कि कंपनियां भारत में बेचे जाने वाले सभी नए मोबाइल फोन में सरकारी साइबर सेफ्टी ऐप 'संचार साथी' को पहले से इंस्टॉल (प्री-इंस्टॉल) करके बेचें।
डिलीट पर रोक: आदेश में सबसे विवादास्पद बिंदु यह था कि यूजर्स इस ऐप को डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे।
पुराने फ़ोन: पुराने हैंडसेटों में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह ऐप इंस्टॉल करने को भी अनिवार्य किया गया था।
उद्देश्य: सरकार ने दावा किया कि यह साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और फोन की चोरी को रोकने के लिए आवश्यक है।
राजनीतिक विरोध: आदेश की खबर सार्वजनिक होते ही, विपक्षी दलों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया।
प्रियंका गांधी का हमला: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "जासूसी एप" और "लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला" बताया। उन्होंने सरकार पर 'हर नागरिक की निगरानी' करने का आरोप लगाया।
संसद में हंगामा: कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया, हालांकि इस पर चर्चा नहीं हो सकी।
निजता पर सवाल: विपक्ष ने तर्क दिया कि साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम जरूरी है, लेकिन ऐप को डिलीट न करने देने का आदेश लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल जैसा है।
सरकार की सफाई: विपक्ष के सवालों के बीच, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को संसद में सरकार का बचाव किया।
डिलीट करने की छूट: सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यह ऐप 'ऑप्शनल' है और यूजर्स जब चाहें इसे अपने फोन से हटा सकते हैं।
डेटा सुरक्षा: उन्होंने दोहराया कि यह ऐप केवल वही नंबर या SMS लेता है जिसे यूजर खुद फ्रॉड या स्पैम रिपोर्ट करता है, इससे बाहर कुछ नहीं लेता।
भाजपा का समर्थन: भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी ऐप को 'डिजिटल सुरक्षा का टूल' बताया, जो फर्जी सिम और चोरी के मोबाइल ट्रैक करने के लिए है, न कि निगरानी के लिए।
फैसला पलटा: विवाद के बाद, बुधवार को DoT ने मोबाइल फोन पर संचार साथी ऐप के प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता खत्म कर दी।
आधिकारिक कारण: DoT ने कहा कि ऐप की बढ़ती लोकप्रियता और रिकॉर्ड डाउनलोड (1.40 करोड़) को देखते हुए, अनिवार्यता खत्म की गई है।
सिंधिया का स्पष्टीकरण: लोकसभा में सिंधिया ने दोहराया कि मंत्रालय ने फीडबैक पर आदेश में बदलाव किया है, और ऐप से जासूसी करना संभव नहीं है।
सरकार का दावा है कि संचार साथी ऐप एक साइबर सुरक्षा उपकरण है जिसका मुख्य लक्ष्य नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड से बचाना है।
लॉन्च: संचार साथी ऐप 17 जनवरी 2025 को लॉन्च हुआ था।
उद्देश्य: ऐप का मुख्य उद्देश्य तीन क्षेत्रों पर केंद्रित है:
चोरी/गुम हुए फोन को ब्लॉक करना (IMEI ट्रैकिंग)।
फर्जी या डुप्लीकेट IMEI नंबर से होने वाले साइबर क्राइम को रोकना।
फ्रॉड कॉल या मैसेज की रिपोर्टिंग की सुविधा देना।
IMEI का महत्व: IMEI (International Mobile Equipment Identity) एक 15 डिजिट का यूनीक कोड होता है, जो प्रत्येक मोबाइल फोन की पहचान करता है।
समस्या: भारत में फर्जी या डुप्लीकेट IMEI नंबर की वजह से साइबर क्राइम बढ़ रहा है। अपराधी इसे क्लोन करके चोरी के फोन को ट्रैक से बचाते हैं और ब्लैक मार्केट में बेचते हैं।
सरकारी सफलता: सरकार का दावा है कि इस ऐप के जरिए अब तक 7 लाख से ज्यादा गुम या चोरी हुए मोबाइल वापस मिल चुके हैं, और 22.76 लाख डिवाइस ट्रेस हो चुके हैं।
उपयोगकर्ता रिपोर्टिंग: ऐप यूजर्स को कॉल, मैसेज या वॉट्सएप चैट रिपोर्ट करने में मदद करेगा, जिसे सरकार फ्रॉड डिटेक्शन और स्पैम को रोकने के लिए इस्तेमाल करेगी।
सुरक्षा का तर्क: सरकार का तर्क है कि यह ऐप केवल वही डेटा लेता है जिसे यूजर खुद फ्रॉड या स्पैम रिपोर्ट करता है, जिससे प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं होता।
प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता और डिलीट न करने देने के आदेश ने निजता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता के बीच के टकराव को जन्म दिया।
डिलीट न करने देना: निजता समूहों का सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर ऐप सुरक्षा के लिए है, तो इसे डिलीट या डिसेबल क्यों नहीं किया जा सकता?
बैकग्राउंड ट्रैकिंग: आशंका थी कि ऐप बैकग्राउंड में चलता रहेगा और यूजर्स की जानकारी (स्थान, उपयोग पैटर्न) को केंद्र सरकार तक पहुँचाएगा, जिससे नागरिक की अवांछित निगरानी होगी।
भविष्य के फीचर्स: सरकार ने कहा था कि भविष्य में ऐप में AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन और बेहतर ट्रैकिंग जैसे फीचर्स जुड़ सकते हैं, जिससे प्राइवेसी को लेकर चिंताएँ और बढ़ गईं।
निजता का अधिकार: केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है। सरकार का कोई भी कदम जो नागरिकों की निगरानी करता है, उसे समानुपातिकता (Proportionality) और वैधता (Legality) के कठोर परीक्षण से गुजरना पड़ता है।
अवांछित सॉफ्टवेयर: किसी भी नागरिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके निजी डिवाइस पर सरकारी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए मजबूर करना, संविधान के तहत निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
राजनीतिक दबाव: सरकार द्वारा आदेश वापस लेना सीधे तौर पर विपक्षी और जनता के विरोध का परिणाम है, जिसने यह साबित कर दिया कि निजता का मुद्दा अब भारत में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार बन चुका है।
विश्वास का निर्माण: प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता खत्म करके और डिलीट करने की छूट देकर, सरकार ने जनता में विश्वास बहाली की कोशिश की है।
इस आदेश ने ग्लोबल मोबाइल निर्माताओं के लिए बड़ी परिचालन और नीतिगत समस्याएँ खड़ी कर दी थीं।
नीतिगत रोक: इंडस्ट्री सोर्सेज ने बताया कि एपल जैसी कंपनियों की इंटरनल पॉलिसी किसी भी सरकारी या थर्ड-पार्टी ऐप को फोन की बिक्री से पहले प्री-इंस्टॉल करने की अनुमति नहीं देती है।
पहले का टकराव: एपल का पहले भी टेलीकॉम रेगुलेटर से एंटी-स्पैम ऐप को लेकर टकराव हो चुका है।
समाधान: एक्सपर्ट्स का मानना था कि एपल सरकार से नेगोशिएशन कर सकती है या यूजर्स को वॉलंटरी प्रॉम्प्ट (स्वेच्छा से डाउनलोड करने का सुझाव) देने का सुझाव दे सकती है।
परिचालन जटिलता: ग्लोबल कंपनियों को भारत में बिकने वाले फोन के लिए विशेष सॉफ्टवेयर बनाने पड़ते, जिससे उनकी उत्पादन श्रृंखला (Supply Chain) जटिल हो जाती।
वैश्विक मानक: प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता वैश्विक सॉफ्टवेयर मानकों और ऐप स्टोर की नीतियों का भी उल्लंघन कर रही थी।
सरकार द्वारा फैसला वापस लेना एक स्वागत योग्य कदम है, जो डिजिटल युग में जनता की आवाज की शक्ति को दर्शाता है।
लोकतंत्र में प्रतिक्रिया: सिंधिया का यह बयान कि "फीडबैक पर मंत्रालय ने एप इंस्टॉल करने के आदेश में बदलाव किया है," यह स्थापित करता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में नागरिकों की चिंताएँ सर्वोच्च हैं।
ऐप की लोकप्रियता: DoT ने दावा किया कि ऐप के डाउनलोड 1.40 करोड़ तक पहुँच गए हैं, जिससे यह सिद्ध हुआ कि लोग स्वेच्छा से सुरक्षा टूल का उपयोग करने को तैयार हैं, लेकिन जबरदस्ती नहीं।
वॉलंटरी मॉडल: संचार साथी ऐप अब एक वॉलंटरी मॉडल पर काम करेगा। सरकार अब प्रचार और जागरूकता के माध्यम से लोगों को इसे डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करेगी, न कि अनिवार्यता से।
डेटा सुरक्षा की चुनौती: सरकार को अभी भी यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐप द्वारा एकत्र किए गए डेटा का उपयोग केवल साइबर सुरक्षा के लिए हो, न कि राजनीतिक निगरानी के लिए। आईटी अधिनियम और नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) के तहत कड़े नियम बनाने होंगे।
'संचार साथी' विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल युग में, सरकारें अब गोपनीयता और निजता के सवालों को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं। जबरदस्ती थोपी गई सुरक्षा, अंततः नागरिकों की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है। सरकार द्वारा अनिवार्यता वापस लेना डिजिटल सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
राम मंदिर उड़ाने की साजिश रचने वाले आतंकी का जेल में मर्डर: फरीदाबाद की नीमका जेल में खूंखार कैदी 'अब्बू जट' ने नुकीली चीज से उतारा मौत के घाट फरीदाबाद | 9 फरवरी 2026 हरियाणा की हाई-सिक्योरिटी वाली फरीदाबाद (नीमका) जेल से सनसनीखेज खबर सामने आई है। अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश रचने के आरोपी अलकायदा (AQIS) के आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई है। इस वारदात को मर्डर केस में बंद खूंखार कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने अंजाम दिया। यहाँ इस हाई-प्रोफाइल मर्डर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हाई-सिक्योरिटी सेल में खूनी संघर्ष घटना रविवार देर रात की है, जब नीमका जेल की अति विशेष सुरक्षा सेल (High Security Cell) में बंद दोनों कैदियों के बीच विवाद हुआ। नुकीली चीज से हमला: अरुण चौधरी ने किसी नुकीली चीज से अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ वार किए। आतंकी अब्दुल लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मर्डर का समय: जेल प्रशासन को देर रात वारदात का पता चला, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल भिजवाया गया। 2. कौन था आतंकी अब्दुल रहमान? यूपी के मिल्कीपुर का रहने वाला 20 वर्षीय अब्दुल रहमान कोई साधारण अपराधी नहीं था: राम मंदिर की साजिश: उसे 2 मार्च 2025 को फरीदाबाद के पाली इलाके से गुजरात ATS और हरियाणा STF ने पकड़ा था। उसके पास से 2 जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे। आतंकी कनेक्शन: वह अलकायदा (AQIS) के हैंडलर अबू सूफियान के संपर्क में था और उसे 4 अप्रैल को अयोध्या में धमाका करने का निर्देश मिला था। सोशल मीडिया से भर्ती: पेशे से ई-रिक्शा चलाने वाला अब्दुल भड़काऊ वीडियो के जरिए आतंकियों के रडार पर आया था। जांच एजेंसियां हैरान थीं कि एक गरीब रिक्शा चालक के पास महंगा मोबाइल और हथियार कहाँ से आए। 3. कातिल अरुण चौधरी: जम्मू का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल की हत्या करने वाला अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट भी अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है: अक्षय शर्मा हत्याकांड: अरुण जम्मू के सांबा में हुए चर्चित अक्षय शर्मा मर्डर केस का मुख्य आरोपी है। कठुआ जेल से ट्रांसफर: 2024 में उसने इंस्टाग्राम लाइव आकर कठुआ जेल प्रशासन पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे फरीदाबाद की नीमका जेल शिफ्ट किया गया था। 📊 जेल सुरक्षा पर सवाल: एक साथ क्यों थे दोनों? कैदी का नाम श्रेणी केस / आरोप अब्दुल रहमान आतंकी (AQIS) राम मंदिर उड़ाने की साजिश, विस्फोटक अधिनियम अरुण चौधरी गैंगस्टर हत्या, रंगदारी और जेल प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप विवाद का विषय: सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक कट्टरपंथी आतंकी और एक खूंखार गैंगस्टर को एक ही हाई-सिक्योरिटी सेल में क्यों रखा गया था? 4. जांच और सुरक्षा ऑडिट जेल सूत्रों के मुताबिक, अरुण चौधरी को सुरक्षा कारणों से 'अति विशेष सेल' में रखा गया था, जहाँ अब्दुल रहमान भी बंद था। हत्या में इस्तेमाल की गई 'नुकीली चीज' जेल के भीतर कैसे पहुंची, इसकी जांच के लिए DC और जेल महानिदेशक ने सख्त आदेश दिए हैं। डबुआ थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।
मणिपुर फिर अशांत: डिप्टी सीएम नेम्चा किप्गेन के खिलाफ चुराचांदपुर में हिंसक प्रदर्शन; विधायकों को मारने पर 'इनाम' का ऐलान चुराचांदपुर | 6 फरवरी 2026 मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में गुरुवार शाम से शुरू हुई हिंसा शुक्रवार को और भयावह हो गई है। राज्य की नई सरकार में नेम्चा किप्गेन को उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाए जाने के विरोध में कुकी समुदाय के बीच गहरी दरार पैदा हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सुरक्षाबलों पर पथराव किया, बल्कि विधायकों के खिलाफ 'डेथ वारंट' जैसी विवादित घोषणाएं भी की हैं। यहाँ मणिपुर के मौजूदा तनाव की पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हिंसक झड़पें और सुरक्षाबलों का पीछे हटना चुराचांदपुर के तुइबोंग मेन मार्केट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है: सुरक्षाबलों पर हमला: सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को बैरकों में धकेलने की कोशिश की और भारी पत्थरबाजी की। असम राइफल्स की तैनाती: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए असम राइफल्स को लगाया गया, लेकिन भीड़ के हिंसक रुख को देखते हुए उन्हें अस्थाई रूप से पीछे हटना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए हैं। चक्का जाम: प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया है। 2. विधायकों को जान से मारने की धमकी और 'इनाम' हिंसा के बीच कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने चौंकाने वाले ऐलान किए हैं: नेम्चा किप्गेन: डिप्टी सीएम को मारने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की बात कही गई है। विधायक एलएम खाउते और एन सेनाते: इन विधायकों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। विश्वासघात का आरोप: कुकी संगठनों का आरोप है कि इन विधायकों ने मैतेई-बहुल सरकार का साथ देकर अपने समुदाय के साथ 'गद्दारी' की है। 📊 मणिपुर विधानसभा में कुकी विधायकों की स्थिति कुल कुकी विधायक भाजपा के विधायक हमार जनजाति प्रतिनिधि ताजा विवाद की वजह 10 07 एन सेनाते (NDA हिस्सा) नई सरकार में डिप्टी सीएम पद स्वीकार करना 3. कुकी समुदाय में दो फाड़ सरकार गठन को लेकर कुकी समाज अब दो गुटों में बंट गया है: विरोध करने वाला धड़ा: इनका मानना है कि इंफाल में हुई हत्याओं और संपत्तियों के नुकसान के बाद मैतेई नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होना शहीदों का अपमान है। आदिवासी संगठन 'जॉइंट फोरम ऑफ सेवन' ने आज 12 घंटे का बंद बुलाया है। समर्थन करने वाला धड़ा: विधायकों का कहना है कि वे समुदाय की सुरक्षा, विकास और बातचीत के रास्ते खोलने के लिए सरकार का हिस्सा बने हैं। 4. पहली महिला डिप्टी सीएम पर संकट नेम्चा किप्गेन मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच चुकी हैं, लेकिन उनके अपने ही गृह जिले चुराचांदपुर में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। कुकी वीमेंस ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने उनके पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया है।
संसद में 'किताब' पर रार: नरवणे की बुक लेकर पहुंचे राहुल गांधी; बिट्टू को कहा 'गद्दार दोस्त', मिला करारा जवाब नई दिल्ली | 4 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का छठा दिन भी भारी हंगामे और व्यक्तिगत छींटाकशी की भेंट चढ़ गया। पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की 'अनपब्लिश्ड बुक' (अप्रकाशित किताब) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी बनाम केंद्र सरकार की सीधी लड़ाई में बदल गया है। वहीं, संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। यहाँ आज की कार्यवाही और विवादों की बड़ी रिपोर्ट दी गई है: 1. "ये रही किताब": राहुल गांधी की पीएम को चुनौती राहुल गांधी बुधवार को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की उस किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे, जिसके अस्तित्व से सरकार इनकार कर रही है। विवादित पेज: राहुल ने मीडिया को किताब का वह हिस्सा दिखाया जिसमें कथित तौर पर लिखा है कि प्रधानमंत्री ने लद्दाख गतिरोध के दौरान आर्मी चीफ से कहा था— "जो उचित समझो वह करो!" पीएम को ऑफर: राहुल ने कहा, "रक्षा मंत्री कह रहे हैं कि ऐसी कोई किताब नहीं है। मैं आज यह किताब लेकर आया हूँ। अगर प्रधानमंत्री में हिम्मत है और वे सदन में आते हैं, तो मैं खुद उन्हें यह किताब भेंट करूँगा ताकि वे इसे पढ़ें।" सदन में अड़ंगा: राहुल इस किताब के अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी है। 2. राहुल vs बिट्टू: "गद्दार दोस्त" और "नंबर वन टेररिस्ट" संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई बहस ने सबका ध्यान खींचा: राहुल का तंज: बिट्टू को देखकर राहुल ने हंसते हुए कहा, "देखो एक गद्दार आ रहा है... हैलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त! चिंता मत करो, तुम वापस कांग्रेस में ही आओगे।" बिट्टू का पलटवार: केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने राहुल से हाथ नहीं मिलाया और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मेरा देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है।" इतिहास की कड़वाहट: गौरतलब है कि बिट्टू पहले कांग्रेस में ही थे और राहुल के करीबी माने जाते थे। 2024 चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए। बिट्टू ने पूर्व में राहुल गांधी को "देश का नंबर वन टेररिस्ट" भी कहा था। 📊 रवनीत सिंह बिट्टू: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर विवरण जानकारी कांग्रेस कार्यकाल 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस सांसद रहे। बीजेपी एंट्री 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले। 2024 चुनाव परिणाम लुधियाना से चुनाव हारे (कांग्रेस के राजा वारिंग से)। वर्तमान पद राज्यसभा सांसद और रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री। 3. नरवणे की किताब का क्या है विवाद? पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की संस्मरण (Memoirs) 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के प्रकाशन पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा रखी है। आरोप: विपक्ष का दावा है कि इस किताब में अग्निपथ योजना और लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव को लेकर ऐसी बातें हैं जो सरकार की छवि बिगाड़ सकती हैं। सरकार का पक्ष: रक्षा मंत्रालय और बीजेपी सांसदों का कहना है कि यह किताब अभी आधिकारिक तौर पर आई ही नहीं है, इसलिए इसके किसी भी आर्टिकल या अंश को सदन के रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा सकता।