भारतीय क्रिकेट टीम इस समय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है, खासकर घरेलू परिस्थितियों में। गुवाहाटी टेस्ट में साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार की कगार पर खड़ी टीम इंडिया अगर यह मैच गंवा देती है, तो वह 13 महीने के भीतर दूसरी बार घरेलू कंडीशन में सीरीज़ क्लीन स्वीप हो जाएगी। इस अप्रत्याशित और निराशाजनक प्रदर्शन का सीधा दारोमदार हेड कोच गौतम गंभीर की रणनीतियों और फैसलों पर है।
गंभीर, जिन्हें जुलाई 2024 में भारतीय टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया था, व्हाइट बॉल क्रिकेट (टी-20) में सफल रहे हैं, लेकिन रेड बॉल (टेस्ट) क्रिकेट में उनकी कोचिंग में टीम का प्रदर्शन चिंताजनक रहा है। न्यूजीलैंड से 2024 में 3-0 से हारने के बाद, अब साउथ अफ्रीका 25 साल बाद भारत में टेस्ट सीरीज़ जीतने के कगार पर खड़ी है। पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन ने तो गंभीर को टेस्ट कोच के पद से हटाकर राहुल द्रविड़ को वापस लाने तक की मांग कर दी है।
यह विस्तृत आलेख गंभीर की कोचिंग में टेस्ट क्रिकेट में आई गिरावट, उनकी चार प्रमुख रणनीतिक गलतियों, और भारतीय टीम पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
गौतम गंभीर का टेस्ट कोचिंग रिकॉर्ड पिछले 12 सालों में किसी भी भारतीय कोच से काफी खराब रहा है।
गंभीर ने जुलाई 2024 में हेड कोच का पद संभाला। उनके 18 महीने के कोचिंग करियर में भारत अब तक 4 घरेलू टेस्ट हार चुका है, और अगर गुवाहाटी टेस्ट हारता है, तो यह 5वीं हार होगी।
तुलनात्मक विश्लेषण (12 साल बनाम 13 महीने): गंभीर से पहले भारत को घर में 4 टेस्ट हारने में पूरे 12 साल लग गए थे। इस दौरान टीम ने 40 मैच जीते थे।
डंकन फ्लेचर: 2012 में इंग्लैंड से 2-1 की सीरीज़ हार में 2 टेस्ट हारे।
अनिल कुंबले: ऑस्ट्रेलिया से 1 टेस्ट हारे।
रवि शास्त्री: इंग्लैंड से 1 टेस्ट हारे।
राहुल द्रविड़: 2 टेस्ट हारे।
निष्कर्ष: 12 साल में 3 अलग-अलग कोच के नेतृत्व में 4 हार, जबकि गंभीर की कोचिंग में 13 महीने के भीतर ही 4 (संभवतः 5) टेस्ट में हार मिली।
न्यूजीलैंड (2024): गंभीर की कोचिंग में न्यूजीलैंड ने 36 साल में पहली बार भारत में टेस्ट सीरीज़ जीती और 3-0 से क्लीन स्वीप किया। भारत को होम कंडीशन में 12 साल बाद सीरीज़ हार का सामना करना पड़ा था।
साउथ अफ्रीका (2025): साउथ अफ्रीका ने कोलकाता में पहला टेस्ट जीता। अगर वे गुवाहाटी में दूसरा मैच जीतते हैं, तो भारत 13 महीने के अंदर दूसरी बार घरेलू कंडीशन में क्लीन स्वीप हो जाएगा। साउथ अफ्रीका के पास 25 साल बाद भारत में सीरीज़ जीत का मौका है।
गंभीर की कोचिंग में भारत अब तक 19 टेस्ट खेल चुका है।
विदेशी दौरे: ऑस्ट्रेलिया में 5 टेस्ट (1 जीत, 3 हार, 1 ड्रॉ) और इंग्लैंड में 5 टेस्ट (2-2 से ड्रॉ)।
घरेलू प्रदर्शन: बांग्लादेश और वेस्टइंडीज को 4 मैच हराए, लेकिन न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका से 4 मैच गंवा दिए (गुवाहाटी का संभावित परिणाम 5 हार)।
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया की टेस्ट नींव पूरी तरह हिल चुकी है।
पूर्व क्रिकेटर सबा करीम ने कहा है कि टीम इंडिया टेस्ट खेलना ही भूल चुकी है। यह विफलता कोचिंग स्टाफ की रणनीति में गहरे दोषों को इंगित करती है।
गंभीर की कोचिंग की सबसे बड़ी गलती 'व्हाइट बॉल' मानसिकता को टेस्ट क्रिकेट में लाना है, जिसके तहत ऑलराउंडर्स पर बहुत ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
सिर्फ 3 स्पेशलिस्ट बैटर: इसका सीधा असर टीम कंपोजिशन पर हुआ है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ दोनों टेस्ट में भारत ने सिर्फ 3-3 स्पेशलिस्ट बैटर्स को ही खिलाया।
पहले टेस्ट (कोलकाता): यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, शुभमन गिल (3)
दूसरे टेस्ट (गुवाहाटी): यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन (3)
निचले क्रम का पतन: गुवाहाटी की पहली पारी में जहां तीन स्पेशलिस्ट बैटर्स ने 95 रन बनाए, वहीं 4 से 7 नंबर के बल्लेबाज मिलकर सिर्फ 23 रन ही बना सके।
रिस्की शॉट्स: ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल जैसे खिलाड़ी रिस्की शॉट खेलने की कोशिश में विकेट दे बैठे, जबकि टेस्ट फॉर्मेट में ऐसे शॉट्स की आवश्यकता कम होती है। यह ऑलराउंड स्किल पर भरोसा करने की कीमत है।
गंभीर की कोचिंग में भारतीय मध्यक्रम, विशेषकर महत्वपूर्ण नंबर-3 और नंबर-5 की पोजिशन, अस्थिर हो गई है।
नंबर-3 की चिंता: गंभीर के कोच बनने से पहले, राहुल द्रविड़ और बाद में चेतेश्वर पुजारा ने 25 साल तक इस पोजिशन को संभाले रखा था। गंभीर की कोचिंग में यह पोजिशन फिक्स नहीं हो पा रही है।
साउथ अफ्रीका टेस्ट: पहले मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर और दूसरे में साई सुदर्शन ने नंबर-3 पर बैटिंग की।
करुण नायर को भी आजमाया गया, लेकिन किसी को भी पर्याप्त समय नहीं मिला।
नंबर-5 की परेशानी: यह पोजिशन भी एक्सपेरिमेंट का शिकार है। यहां ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा को ट्राई किया जा रहा है। इस पोजिशन को पहले वीवीएस लक्ष्मण और अजिंक्य रहाणे ने मजबूत किया था।
परिणाम: अत्यधिक एक्सपेरिमेंट के कारण टीम में स्थिरता नहीं आ पा रही है, जिससे मध्यक्रम दबाव में बिखर जाता है।
एशियाई कंडीशन में भारत के दबदबे की बड़ी वजह रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी थी।
अश्विन का रिटायरमेंट: न्यूजीलैंड से पिछले साल घर में क्लीन स्वीप के बाद भारत के सेकेंड टॉप विकेट टेकर रविचंद्रन अश्विन ने संन्यास ले लिया।
सुंदर को प्राथमिकता: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन की जगह ऑफ स्पिन ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता दी गई, जिसके बाद अश्विन ने आगे खेलना कंटिन्यू नहीं किया।
जडेजा पर भार: अश्विन के जाने के बाद जडेजा अकेले पड़ गए हैं। टीम मैनेजमेंट अब सुंदर और अक्षर पटेल जैसे स्पिन ऑलराउंडर्स पर फोकस कर रही है, लेकिन उनमें अश्विन जैसी विकेट लेने वाली क्षमता नजर नहीं आती।
प्रतिभा की अनदेखी: घरेलू क्रिकेट में साई किशोर, सारांश जैन और सौरभ कुमार जैसे स्ट्राइक फिंगर स्पिनर्स मौजूद हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिल रहा है।
गंभीर का अति-आत्मविश्वास सुंदर, अक्षर, जडेजा और नीतीश रेड्डी की ऑलराउंड स्किल पर टिका है।
प्लेटाइम: ज्यादातर मुकाबलों में 4 में से 3 खिलाड़ी तो प्लेइंग-11 का हिस्सा रहते ही हैं।
निष्पादन में विफलता:
सुंदर और अक्षर: ये बैट से तो प्रभाव छोड़ पा रहे हैं, लेकिन टेस्ट टीम में ऑफ स्पिनर का काम नहीं कर पा रहे हैं।
जडेजा: वह कई बार विकेट झटक ले रहे हैं, लेकिन एशियन कंडीशन में उनकी बैटिंग फ्लॉप साबित हो रही है।
नीतीश रेड्डी: उन्हें इंडियन कंडीशन में प्लेइंग-11 में शामिल करने का कोई मतलब नजर नहीं आ रहा। न उनके बैट से रन आ रहे और न ही उनकी गेंदबाजी में कमाल हो रहा। उन्हें ज़्यादा बॉलिंग के मौके भी नहीं दिए जा रहे।
बेहतर विकल्प: नीतीश रेड्डी की जगह किसी स्पेशलिस्ट बल्लेबाज को मौका देकर टीम मध्यक्रम को मज़बूती दे सकती थी।
गौतम गंभीर का कोचिंग करियर दो ध्रुवों पर बंटा हुआ है।
टी-20 फॉर्मेट में गंभीर की कोचिंग में भारत का प्रदर्शन असाधारण रहा है:
आँकड़े: 1 जुलाई 2024 से 32 मैच खेले, 26 जीते और महज 4 गंवाए (2 बेनतीजा)।
उपलब्धियां: टीम ने एशिया कप जीता और टूर्नामेंट में पाकिस्तान को लगातार 3 मैच भी हराए।
वनडे फॉर्मेट में उनका प्रदर्शन मिलाजुला रहा:
सफलता: भारत ने इंग्लैंड को सीरीज़ हराई और चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी जीता।
विफलता: टीम श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में सीरीज़ नहीं जीत सकी।
गंभीर व्हाइट बॉल क्रिकेट को शायद ज़्यादा बेहतर समझते हैं, जहाँ ऑलराउंडर और आक्रामक शॉट्स काम आते हैं। लेकिन टेस्ट क्रिकेट, जिसके लिए दृढ़ता, विशेषज्ञता और रूढ़िवादी दृष्टिकोण की ज़रूरत होती है, उसमें उनकी रणनीतियाँ पूरी तरह विफल रही हैं।
टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद गंभीर की जमकर आलोचना हो रही है:
अतुल वासन: पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने मांग की है कि गंभीर को टेस्ट से हटा देना चाहिए और उनकी जगह राहुल द्रविड़ को फिर से लाना चाहिए।
सबा करीम: पूर्व सिलेक्टर ने कहा कि टीम इंडिया टेस्ट खेलना ही भूल चुकी है।
भारतीय टेस्ट क्रिकेट का भविष्य अब संकट में है। गौतम गंभीर को जल्द से जल्द अपनी रणनीतियों को सुधारना होगा, मध्यक्रम में स्थिरता लानी होगी, और स्पिन गेंदबाजी में विकेट लेने वाले विकल्प खोजने होंगे, अन्यथा घरेलू ज़मीन पर लगातार मिल रही हार भारतीय क्रिकेट की साख को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
PCB का बड़ा खुलासा: अनफिट थे बाबर और फखर, फिर भी खिलाया टी-20 वर्ल्ड कप; मेडिकल पैनल की रिपोर्ट से पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल लाहौर | 18 मार्च 2026 पाकिस्तान क्रिकेट में एक बार फिर 'फिटनेस और चयन' को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के मेडिकल पैनल ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि पूर्व कप्तान बाबर आजम और स्टार बल्लेबाज फखर जमान टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान पूरी तरह फिट नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों खिलाड़ी चोटिल होने के बावजूद टीम का हिस्सा बने रहे, जिसका सीधा असर पाकिस्तान के प्रदर्शन पर पड़ा। यहाँ इस विवाद, मेडिकल रिपोर्ट के दावों और चयन प्रक्रिया पर उठते सवालों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. मेडिकल पैनल का दावा: अनफिट खिलाड़ियों पर लगाया दांव PCB के मेडिकल पैनल की आंतरिक जांच में यह बात सामने आई है कि चयन के समय दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं थी: अधूरी रिकवरी: पैनल के अनुसार, बाबर और फखर अपनी पुरानी चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पाए थे। इसके बावजूद उन्हें 'मैच फिट' घोषित कर दिया गया। जांच की मांग: सीनियर सेलेक्टर आकिब जावेद ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस बात की जांच की मांग की है कि आखिर किसके दबाव में अनफिट खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर भेजा गया। 2. वर्ल्ड कप के बाद खुली पोल: डॉ. जावेद मुगल की रिपोर्ट यह मामला तब और गंभीर हो गया जब यूके के प्रसिद्ध स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. जावेद मुगल ने खिलाड़ियों की जांच की। गंभीर चोट: जांच में पाया गया कि बाबर आजम की हैमस्ट्रिंग की समस्या शुरुआती आकलन से कहीं अधिक गंभीर थी। फखर का संघर्ष: फखर जमान भी पिछले कई महीनों से लगातार फिटनेस की समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने इसे दबाए रखा। डोमेस्टिक क्रिकेट से किनारा: वर्ल्ड कप से लौटने के बाद जब बाबर आजम से नेशनल टी-20 चैंपियनशिप में खेलने को कहा गया, तो उन्होंने हैमस्ट्रिंग इंजरी का हवाला देकर अपना नाम वापस ले लिया। इससे मेडिकल पैनल के दावों को और मजबूती मिली। 3. फिजियो क्लिफ डीकन पर उठे सवाल सिलेक्शन कमेटी और मेडिकल पैनल के बीच इस मामले को लेकर खींचतान जारी है: क्लियरेंस का विवाद: सिलेक्शन पैनल का कहना है कि उन्होंने टीम फिजियो क्लिफ डीकन से फिटनेस क्लियरेंस मिलने के बाद ही खिलाड़ियों को चुना था। पक्षपात के आरोप: डीकन पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे खिलाड़ियों के साथ अपने निजी और करीबी रिश्तों के कारण हल्की चोटों को नजरअंदाज कर देते हैं और उन्हें खेलने की अनुमति दे देते हैं। 📊 खिलाड़ियों का हालिया प्रदर्शन और स्थिति खिलाड़ी वर्ल्ड कप 2026 प्रदर्शन वर्तमान स्थिति आगामी लक्ष्य बाबर आजम 6 मैच, मात्र 91 रन NCA में रिहैब जारी PSL (पेशावर जाल्मी कप्तानी) फखर जमान 3 मैच (चोट के कारण बाहर) टी-20 टूर्नामेंट के लिए तैयार फॉर्म और फिटनेस साबित करना 4. बांग्लादेश दौरे पर पड़ा असर बाबर आजम और फखर जमान की अनुपलब्धता का खामियाजा पाकिस्तान को बांग्लादेश दौरे पर भुगतना पड़ा: सीरीज हार: पाकिस्तान को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में 1-2 से करारी हार का सामना करना पड़ा। चयनकर्ताओं का रुख: सूत्रों के मुताबिक, बाबर आजम को केवल चोट की वजह से नहीं, बल्कि उनके खराब फॉर्म के कारण भी टीम से बाहर करने की योजना पहले ही बन चुकी थी। 5. पीएसएल (PSL) पर नजरें बाबर आजम फिलहाल नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) में मेडिकल पैनल की कड़ी निगरानी में रिहैब (Rehab) कर रहे हैं। 26 मार्च से वापसी: बाबर के फैंस को उम्मीद है कि वे 26 मार्च से शुरू हो रहे पाकिस्तान सुपर लीग में वापसी करेंगे, जहाँ वे पेशावर जाल्मी की कमान संभालेंगे। फखर की सफाई: फखर जमान ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि वे बांग्लादेश सीरीज के लिए फिट नहीं थे, लेकिन अब घरेलू टी-20 टूर्नामेंट के जरिए अपनी लय हासिल करने को बेताब हैं।
क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल धमाका: भारत-पाक मैच ने तोड़े व्यूअरशिप के सभी रिकॉर्ड; 16.3 करोड़ लोगों ने लाइव देख रचा नया कीर्तिमान कोलंबो/नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026 भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक भावना है और टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ताजा आंकड़ों ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले ने डिजिटल व्यूअरशिप के दुनिया भर के पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस मैच को रिकॉर्ड 16.3 करोड़ (163 मिलियन) यूजर्स ने देखा, जो टी-20 क्रिकेट इतिहास में किसी भी आईसीसी (ICC) इवेंट के लिए एक मैच की सबसे अधिक पहुंच (Reach) है। 1. 2024 के फाइनल को भी पछाड़ा: व्यूअरशिप के बड़े आंकड़े इस मुकाबले ने न केवल मौजूदा टूर्नामेंट के अन्य मैचों को, बल्कि पिछले वर्ल्ड कप के फाइनल को भी पीछे छोड़ दिया है: 20 बिलियन मिनट का वॉच टाइम: इस मैच को सभी प्लेटफॉर्म मिलाकर कुल 20 अरब मिनट तक देखा गया। यह पिछले 2024 वर्ल्ड कप की तुलना में 42% की भारी बढ़ोतरी है। डिजिटल रीच में उछाल: 2024 के भारत-पाकिस्तान मैच के मुकाबले इस बार डिजिटल पहुंच में 56% का इजाफा दर्ज किया गया। 2024 फाइनल का रिकॉर्ड टूटा: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए 2024 टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल की व्यूअरशिप को भी इस लीग मैच ने मात दे दी है। 2. 'जियोहॉटस्टार' का बयान: क्रिकेट के प्रति जुनून की जीत ब्रॉडकास्टिंग पार्टनर जियोहॉटस्टार (JioHotstar) ने इन आंकड़ों पर अपनी खुशी जाहिर की है: अनूप गोविंदन (स्पोर्ट्स सेल्स हेड): "ये आंकड़े बताते हैं कि दर्शकों का इस खेल के प्रति जुड़ाव किस स्तर पर पहुँच चुका है। यह एडवरटाइजर्स और ब्रॉडकास्टर्स के लिए एक ऐतिहासिक पल है।" सिद्धार्थ शर्मा (कंटेंट हेड): "16.3 करोड़ का आंकड़ा इस बात का सबूत है कि भारत में टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर किस कदर जुनून है।" 3. मैदान पर भारत का दबदबा: पाकिस्तान के खिलाफ 8-1 का रिकॉर्ड सिर्फ व्यूअरशिप में ही नहीं, बल्कि मैदान पर भी टीम इंडिया ने तिरंगा लहराया: एकतरफा रिकॉर्ड: इस जीत के साथ टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रिकॉर्ड अब 8-1 हो गया है। मैच के हीरो: तिलक वर्मा द्वारा शादाब खान का विकेट लेना और अक्षर पटेल द्वारा बाबर आजम को क्लीन बोल्ड करना इस मैच के सबसे ज्यादा देखे गए 'मोमेंट्स' रहे। सुपर-8 का टिकट: इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने शान से सुपर-8 में प्रवेश कर लिया है। 📊 टी-20 वर्ल्ड कप 2026: व्यूअरशिप की तुलना श्रेणी 2024 संस्करण 2026 संस्करण (भारत-पाक) बढ़ोतरी (%) डिजिटल रीच ~10.4 करोड़ 16.3 करोड़ 56.7% कुल वॉच टाइम 14.1 अरब मिनट 20 अरब मिनट 42% प्लेटफ़ॉर्म मोबाइल + टीवी डिजिटल (प्रायोरिटी) रिकॉर्ड तोड़ 4. सुपर-8 की जंग: खिताब बचाने की चुनौती 21 फरवरी से वर्ल्ड कप का असली रोमांच शुरू होने जा रहा है, जहाँ 8 टीमें सेमीफाइनल के टिकट के लिए भिड़ेंगी: फॉर्मेट: 4-4 टीमों के 2 ग्रुप बनाए गए हैं। हर ग्रुप की टीम अपने ग्रुप की बाकी टीमों से 3-3 मैच खेलेगी। डबल हेडर: 22 फरवरी, 26 फरवरी और 1 मार्च को एक दिन में दो-दो मुकाबले खेले जाएंगे। फाइनल की राह: * पहला सेमीफाइनल: 4 मार्च। दूसरा सेमीफाइनल: 5 मार्च (वानखेड़े, मुंबई)। महामुकाबला (Final): 8 मार्च। पाकिस्तान का विशेष नियम: यदि पाकिस्तान नॉकआउट (सेमीफाइनल) में पहुँचता है, तो सुरक्षा कारणों और हाइब्रिड मॉडल के तहत उसके सभी मैच कोलंबो में आयोजित होंगे।
T20 वर्ल्ड कप 2026: बीसीसीआई का कड़ा फैसला; वर्ल्ड कप के दौरान फैमिली साथ नहीं रख सकेंगे खिलाड़ी, नियम तोड़ने पर IPL और कॉन्ट्रैक्ट से धोना पड़ सकता है हाथ नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026 टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की तैयारियों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अनुशासन को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। बीसीसीआई ने टीम मैनेजमेंट की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें खिलाड़ियों की पत्नियों और मंगेतरों (WAGs) को टूर्नामेंट के दौरान टीम होटल में साथ रहने की अनुमति मांगी गई थी। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मिली हार और खिलाड़ियों की एकाग्रता को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों का पूरा ध्यान केवल खेल पर होना चाहिए। 1. बीसीसीआई का आदेश: होटल में साथ नहीं ठहरेंगे परिवार इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई ने टीम इंडिया के लिए नई 'फैमिली पॉलिसी' जारी की है: नो फैमिली रूम: टूर्नामेंट के दौरान किसी भी खिलाड़ी की पत्नी, मंगेतर या परिवार के सदस्य को आधिकारिक टीम होटल में खिलाड़ियों के साथ रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। खुद का इंतजाम: यदि कोई खिलाड़ी चाहता है कि उसका परिवार मैच देखने आए, तो उसे होटल में अलग से कमरे की व्यवस्था खुद के खर्च पर करनी होगी। बोर्ड की जिम्मेदारी नहीं: बीसीसीआई परिवार के ठहरने, यात्रा या लॉजिस्टिक्स का कोई भी जिम्मा नहीं उठाएगा। खिलाड़ियों को अपने परिवार से मिलने के लिए भी बोर्ड द्वारा तय समय और प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। 2. नियम बदलने की पीछे की बड़ी वजह: BGT 2024-25 की हार भारतीय क्रिकेट में 'फैमिली कल्चर' को लेकर बीसीसीआई का यह यू-टर्न हालिया प्रदर्शनों का परिणाम माना जा रहा है: ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबक: बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) 2024-25 में भारतीय टीम को 1-3 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। बोर्ड के कुछ अधिकारियों का मानना था कि लंबे विदेशी दौरों पर परिवार की मौजूदगी से खिलाड़ियों का ध्यान भटक रहा है। 45 दिन वाला नियम: पुरानी नीति के अनुसार, 45 दिनों से अधिक लंबे दौरों पर परिवार को 14 दिन साथ रहने की अनुमति थी। लेकिन बीसीसीआई ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम ICC टूर्नामेंट (वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी) या मल्टीनेशन इवेंट्स पर लागू नहीं होगा। कोविड काल का अंत: कोरोना महामारी के दौरान 'बायो-बबल' की थकान कम करने के लिए पूरे दौरे पर परिवार को साथ रखने की छूट दी गई थी, जिसे अब बोर्ड ने पूरी तरह खत्म कर दिया है। 3. गाइडलाइंस न मानने पर 'कैरियर' पर खतरा बोर्ड ने इस बार केवल सलाह नहीं दी है, बल्कि इसे एक सख्त अनुशासन नियमावली बना दिया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले खिलाड़ियों पर निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है: सस्पेंशन: खिलाड़ी को बीच टूर्नामेंट या आगामी सीरीज से बाहर किया जा सकता है। IPL पर बैन: बीसीसीआई नियमों की अवहेलना करने पर खिलाड़ी को IPL में खेलने से भी रोक सकता है, जो किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए बड़ा वित्तीय झटका होगा। कॉन्ट्रैक्ट और सैलरी: बोर्ड खिलाड़ी का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर सकता है या उसकी मैच फीस/सैलरी में कटौती कर सकता है। विशेष अनुमति: केवल अत्यंत आपातकालीन स्थिति में ही चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच की पूर्व अनुमति से ही नियमों में ढील दी जाएगी। 📊 बीसीसीआई की नई फैमिली पॉलिसी: एक नजर में श्रेणी पुरानी नीति (कोविड के बाद) नई नीति (T20 वर्ल्ड कप 2026) ठहरने की व्यवस्था टीम होटल में साथ रहने की अनुमति थी। टीम होटल में साथ रहने पर पूर्ण प्रतिबंध। खर्च कुछ दौरों पर बोर्ड उठाता था। पूरी तरह खिलाड़ी को खुद उठाना होगा। अवधि पूरे दौरे के लिए अनुमति थी। वर्ल्ड कप के दौरान शून्य (0) दिन। दंडात्मक कार्रवाई केवल चेतावनी दी जाती थी। IPL बैन, कॉन्ट्रैक्ट रद्दीकरण और सस्पेंशन। 4. श्रीलंका दौरा और बीसीसीआई का तर्क चूँकि भारत टी-20 वर्ल्ड कप का सह-मेजबान (Co-host) है, इसलिए बोर्ड का तर्क है कि खिलाड़ियों को विदेश में लंबे समय तक नहीं रहना है। छोटा दौरा: भारतीय टीम को केवल पाकिस्तान के खिलाफ मैच और कुछ अन्य मुकाबलों के लिए श्रीलंका जाना है। बाकी मैच भारत में ही होने हैं। होम एडवांटेज: बोर्ड चाहता है कि खिलाड़ी घर में खेलते समय अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को पूरी तरह अलग रखें ताकि खिताब जीतने की संभावना बढ़ सके।