वॉशिंगटन | 21 फरवरी 2026
अमेरिका में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक ऐतिहासिक टकराव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी तुरंत प्रभाव से खत्म हो गया है। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के महज 3 घंटे के भीतर ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 10% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।
यहाँ इस अदालती फैसले, ट्रम्प की प्रतिक्रिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर का विस्तृत विवरण दिया गया है:
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रम्प प्रशासन की व्यापारिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया:
कानूनी आधार का अभाव: कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प ने IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, 1977) का गलत इस्तेमाल किया। टैरिफ एक प्रकार का टैक्स है, और टैक्स लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत केवल संसद (कांग्रेस) को है, राष्ट्रपति को नहीं।
फटाकर: जजों ने कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ 'युद्ध' की स्थिति में नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इस तरह के व्यापक टैरिफ नहीं थोपे जा सकते।
अल्पमत की राय: जस्टिस ब्रेट कैवनॉ समेत तीन जजों ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए टैरिफ का समर्थन करते हुए इसे विदेश नीति का हिस्सा माना था।
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रम्प ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और जजों को "देश के लिए कलंक" बताया। उन्होंने हार मानने के बजाय ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 122' का सहारा लिया:
10% ग्लोबल टैरिफ: ट्रम्प ने 24 फरवरी से दुनिया भर के देशों (भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ) पर 10% का एक समान टैरिफ लगा दिया है।
भारत को आंशिक राहत: चूंकि भारत पर पहले 18% टैरिफ था, अब वह घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर इसका असर नहीं पड़ेगा और पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त बने रहेंगे।
रिफंड से इनकार: ट्रम्प ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार अब तक वसूले गए 200 अरब डॉलर में से एक पैसा भी कंपनियों को वापस नहीं करेगी।
| टैरिफ की श्रेणी | पहले की स्थिति | वर्तमान स्थिति (कोर्ट के बाद) | ट्रम्प का नया आदेश (24 Feb से) |
| भारत पर टैरिफ | 18% (रेसिप्रोकल) | 0% (अवैध घोषित) | 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) |
| चीन पर टैरिफ | 34% (बेसलाइन) | 0% (अवैध घोषित) | 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) |
| मैक्सिको/कनाडा | 25% (फेंटेनाइल मुद्दा) | 0% (अवैध घोषित) | 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) |
| स्टील/एल्युमिनियम | अलग कानून के तहत | लागू रहेगा | लागू रहेगा |
यह अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक आपातकालीन शक्ति है जिसका उपयोग 55 साल पहले रिचर्ड निक्सन ने किया था:
यह कानून राष्ट्रपति को तब अधिकार देता है जब देश को भारी व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो।
इसके तहत बिना संसद की मंजूरी के 150 दिनों तक अस्थायी टैरिफ लगाया जा सकता है।
ट्रम्प ने कुछ उत्पादों को इससे छूट दी है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, टमाटर और संतरा जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं।
पिछले एक साल में ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया भर से 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है।
कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कोई आदेश नहीं दिया है।
सरकार की दलील: ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि रिफंड देने से अमेरिकी खजाना खाली हो जाएगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह मामला अब अगले कई सालों तक अदालतों में खिंच सकता है।
ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ सिर्फ विदेशी देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी भारी विरोध था:
12 अमेरिकी राज्यों (न्यूयॉर्क, इलिनॉय, एरिजोना आदि) और कई छोटे कारोबारियों ने यह मुकदमा दायर किया था।
उनका तर्क था कि टैरिफ की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है और छोटे व्यापारियों की कमर टूट रही है।
निचली अदालतों ने भी पहले इसे गैरकानूनी करार दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लग गई है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रम्प को बड़ा झटका: दुनियाभर पर लगाए गए टैरिफ रद्द; राष्ट्रपति ने 3 घंटे में 'सेक्शन 122' के जरिए फिर ठोका 10% ग्लोबल टैरिफ वॉशिंगटन | 21 फरवरी 2026 अमेरिका में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक ऐतिहासिक टकराव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी तुरंत प्रभाव से खत्म हो गया है। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के महज 3 घंटे के भीतर ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 10% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। यहाँ इस अदालती फैसले, ट्रम्प की प्रतिक्रिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला: "राष्ट्रपति संसद का स्थान नहीं ले सकते" सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रम्प प्रशासन की व्यापारिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया: कानूनी आधार का अभाव: कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प ने IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, 1977) का गलत इस्तेमाल किया। टैरिफ एक प्रकार का टैक्स है, और टैक्स लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत केवल संसद (कांग्रेस) को है, राष्ट्रपति को नहीं। फटाकर: जजों ने कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ 'युद्ध' की स्थिति में नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इस तरह के व्यापक टैरिफ नहीं थोपे जा सकते। अल्पमत की राय: जस्टिस ब्रेट कैवनॉ समेत तीन जजों ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए टैरिफ का समर्थन करते हुए इसे विदेश नीति का हिस्सा माना था। 2. ट्रम्प का पलटवार: 'सेक्शन 122' के तहत नया आदेश सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रम्प ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और जजों को "देश के लिए कलंक" बताया। उन्होंने हार मानने के बजाय ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 122' का सहारा लिया: 10% ग्लोबल टैरिफ: ट्रम्प ने 24 फरवरी से दुनिया भर के देशों (भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ) पर 10% का एक समान टैरिफ लगा दिया है। भारत को आंशिक राहत: चूंकि भारत पर पहले 18% टैरिफ था, अब वह घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर इसका असर नहीं पड़ेगा और पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त बने रहेंगे। रिफंड से इनकार: ट्रम्प ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार अब तक वसूले गए 200 अरब डॉलर में से एक पैसा भी कंपनियों को वापस नहीं करेगी। 📊 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली हुई स्थिति टैरिफ की श्रेणी पहले की स्थिति वर्तमान स्थिति (कोर्ट के बाद) ट्रम्प का नया आदेश (24 Feb से) भारत पर टैरिफ 18% (रेसिप्रोकल) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) चीन पर टैरिफ 34% (बेसलाइन) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) मैक्सिको/कनाडा 25% (फेंटेनाइल मुद्दा) 0% (अवैध घोषित) 10% (नया ग्लोबल टैरिफ) स्टील/एल्युमिनियम अलग कानून के तहत लागू रहेगा लागू रहेगा 3. 'सेक्शन 122' क्या है? यह अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक आपातकालीन शक्ति है जिसका उपयोग 55 साल पहले रिचर्ड निक्सन ने किया था: यह कानून राष्ट्रपति को तब अधिकार देता है जब देश को भारी व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो। इसके तहत बिना संसद की मंजूरी के 150 दिनों तक अस्थायी टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रम्प ने कुछ उत्पादों को इससे छूट दी है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, टमाटर और संतरा जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। 4. 200 अरब डॉलर का रिफंड सस्पेंस पिछले एक साल में ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया भर से 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है। कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कोई आदेश नहीं दिया है। सरकार की दलील: ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि रिफंड देने से अमेरिकी खजाना खाली हो जाएगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह मामला अब अगले कई सालों तक अदालतों में खिंच सकता है। 5. मुकदमे की पृष्ठभूमि: 12 राज्यों ने खोला था मोर्चा ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ सिर्फ विदेशी देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी भारी विरोध था: 12 अमेरिकी राज्यों (न्यूयॉर्क, इलिनॉय, एरिजोना आदि) और कई छोटे कारोबारियों ने यह मुकदमा दायर किया था। उनका तर्क था कि टैरिफ की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है और छोटे व्यापारियों की कमर टूट रही है। निचली अदालतों ने भी पहले इसे गैरकानूनी करार दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लग गई है।
पाकिस्तान में गहराया संकट: BLA के कब्जे में रोते हुए पाकिस्तानी सैनिक; सेना ने पहचानने से किया इनकार, 22 फरवरी को फांसी का अल्टीमेटम क्वेटा/इस्लामाबाद | 21 फरवरी 2026 पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सामने आया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक नया वीडियो जारी किया है जिसमें पाकिस्तानी सेना के 7 जवान घुटनों के बल बैठे रोते हुए अपनी ही सरकार और सेना से मदद की गुहार लगा रहे हैं। यह वीडियो पाकिस्तान सेना के उस आधिकारिक दावे की धज्जियां उड़ा रहा है जिसमें कहा गया था कि उनका कोई भी सैनिक लापता या दुश्मन की कैद में नहीं है। यहाँ इस तनावपूर्ण स्थिति, BLA की मांग और पाकिस्तान में बढ़ते आतंकी संकट का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. "क्या ये ID कार्ड भी झूठा है?": रोते सैनिकों की मार्मिक अपील BLA के मीडिया विंग ‘हक्काल’ द्वारा जारी इस वीडियो में कैद सैनिकों की बेबसी साफ देखी जा सकती है: सेना का इनकार: BLA के लड़ाके वीडियो में सैनिकों से कह रहे हैं कि पाकिस्तान सरकार उन्हें अपना मानने से ही मना कर रही है। सैनिकों का सबूत: कैमरे के सामने अपने ऑफिशियल सर्विस और आइडेंटिटी कार्ड दिखाते हुए एक सैनिक फूट-फूट कर रोने लगा। उसने कहा, "ये कार्ड हमें आर्मी ने ही दिए थे, हमने खुद नहीं बनाए। हम देश के लिए लड़ते रहे और आज जब हम मुसीबत में हैं, तो सेना कह रही है कि हम उनके बंदे नहीं हैं।" वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल: बंदी जवानों ने पूछा कि जब उन्हें आधिकारिक तौर पर भर्ती किया गया और तैनात किया गया, तो संकट के समय उन्हें लावारिस क्यों छोड़ा जा रहा है? 2. 22 फरवरी का अल्टीमेटम: फांसी की चेतावनी BLA ने इन सैनिकों को 14 फरवरी को पकड़ा था और अब बातचीत के लिए समय सीमा तय कर दी है: मांग: BLA ने इन सैनिकों की रिहाई के बदले जेलों में बंद अपने बलूच लड़ाकों को छोड़ने की शर्त रखी है। डेडलाइन: पाकिस्तान सरकार को 22 फरवरी तक का वक्त दिया गया है। BLA ने चेतावनी दी है कि यदि इस तारीख तक बातचीत शुरू नहीं हुई, तो वे सभी बंदी सैनिकों को फांसी दे देंगे। सेना का रुख: अभी भी पाकिस्तानी सेना के आला अधिकारी सार्वजनिक रूप से यही दावा कर रहे हैं कि उनका कोई भी जवान लापता नहीं है, जिसे 'फेस सेविंग' की कोशिश माना जा रहा है। 3. बलूचिस्तान: संसाधनों की प्रचुरता और गरीबी का अभिशाप बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब और उपेक्षित प्रांत है। प्राकृतिक संसाधन: यह इलाका खनिज, गैस और सोने-तांबे के भंडारों से भरा हुआ है, लेकिन यहाँ के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। BLA का उदय: 2000 के दशक में बना यह संगठन बलूचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करता है। इनका आरोप है कि पाकिस्तान और चीन (CPEC के जरिए) मिलकर बलूच संसाधनों का शोषण कर रहे हैं। निशाना: BLA अक्सर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, पंजाब से आए मजदूरों और चीनी प्रोजेक्ट्स पर गुरिल्ला हमले करता है। 📊 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025: पाकिस्तान की बदहाली हालिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सुरक्षा के मामले में रसातल की ओर जा रहा है: विवरण रैंकिंग/आंकड़े स्थिति ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स दूसरे नंबर पर बुर्किना फासो के बाद सबसे असुरक्षित। TTP के हमले 90% की वृद्धि पाकिस्तान का सबसे खतरनाक संगठन। BLA के हमले 60% की वृद्धि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा सर्वाधिक प्रभावित। आतंकी घटनाओं का केंद्र 90% घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में केंद्रित। 4. पाकिस्तान के लिए 'तिहरा' खतरा पाकिस्तान इस समय एक साथ तीन मोर्चों पर आतंकी हमलों का सामना कर रहा है: तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP): 2024 में 482 हमलों के साथ सबसे सक्रिय समूह। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA): जो अब सीधे सैनिकों को बंधक बनाकर सौदेबाजी कर रही है। IS-K (इस्लामिक स्टेट-खुरासान): जिसने अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर पाकिस्तान के मुख्य शहरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। 5. निष्कर्ष: एक विफल होती रणनीति? पाकिस्तानी सेना का अपने ही सैनिकों को पहचानने से इनकार करना जवानों के मनोबल को तोड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 22 फरवरी तक कोई समाधान नहीं निकला, तो बलूचिस्तान में हिंसा का एक नया और अधिक घातक दौर शुरू हो सकता है। यह घटना न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की पोल खोलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उसकी किरकिरी कर रही है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और मैप विवाद: अमेरिका ने PoK-अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाने वाला नक्शा हटाया; जानें ऐतिहासिक विवाद और इस बड़ी डील के मायने वाशिंगटन/नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026 भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) के बाद शुरू हुआ 'मैप विवाद' अब एक नए मोड़ पर है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने अपने उस सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट कर दिया है, जिसमें PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) और अक्साई चिन को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और व्यापारिक संबंध अपनी ऊंचाइयों पर हैं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इस नक्शे को लेकर पाकिस्तान और चीन की ओर से भारी दबाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। 1. क्या था मैप विवाद? (गलती या कूटनीतिक संकेत) 7 फरवरी को अमेरिका के ट्रेड ऑफिस (USTR) ने एक ग्राफिक्स शेयर किया था, जिसमें भारत का पूरा नक्शा दिखाया गया था। बदलाव: दशकों से अमेरिकी एजेंसियां PoK और अक्साई चिन को 'डॉटेड लाइन्स' (विवादित क्षेत्र) के रूप में दिखाती आई हैं। लेकिन इस पोस्ट में पूरा कश्मीर और अक्साई चिन भारत के हिस्से के रूप में रंगा हुआ था। डिलीट का कारण: बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के पोस्ट को हटा लिया गया। जानकारों का मानना है कि यह या तो USTR की ग्राफिक्स टीम की 'तकनीकी चूक' थी या फिर चीन-पाकिस्तान की नाराजगी को भांपते हुए अमेरिका ने कदम पीछे खींच लिए। 2. PoK: 1947 से आज तक की कूटनीतिक लड़ाई भारत और पाकिस्तान के बीच PoK (Pakistan Occupied Kashmir) का विवाद एशिया की सबसे पुरानी सीमाओं में से एक है। विभाजन की विरासत: 1947 में महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे पूरा जम्मू-कश्मीर कानूनी रूप से भारत का हिस्सा बन गया। अवैध कब्जा: 1947-48 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया, उसे भारत 'PoK' और पाकिस्तान 'आजाद कश्मीर' कहता है। ताजा बयानबाजी: हाल ही में 5 फरवरी को पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने दोबारा कश्मीर को 'लाइफ लाइन' बताया। इसके जवाब में भारत ने स्पष्ट किया है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब PoK को वापस लेना ही एकमात्र एजेंडा बचा है। 3. अक्साई चिन: 1962 की जंग और चीन की घुसपैठ अक्साई चिन का विवाद भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर स्थित है। रणनीतिक महत्व: लगभग 38,000 वर्ग किमी का यह इलाका चीन के शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाले काराकोरम हाईवे (G219) के लिए चीन के लिए बेहद जरूरी है। 1962 का युद्ध: चीन ने 1950 के दशक में चुपके से यहां सड़क बनाई थी। 1962 की जंग के बाद चीन ने इस पर अपना नियंत्रण बनाए रखा, जिसे भारत आज भी अवैध कब्जा मानता है। 4. भारत-अमेरिका ट्रेड डील: एक नया आर्थिक युग नक्शे के विवाद के पीछे की असली बड़ी खबर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता (ITA) है, जिसे 13 फरवरी 2025 से शुरू हुई वार्ता के बाद अब फ्रेमवर्क का रूप दिया गया है। इस समझौते की 5 बड़ी बातें: टैक्स में भारी कटौती: भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस के तेल पर राहत: रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स अमेरिका ने हटा लिया है। बाजार तक पहुंच: कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के अनुसार, यह डील 30 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार का दरवाजा भारतीयों के लिए खोलेगी। 500 अरब डॉलर का वादा: भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 45 लाख करोड़ रुपये (500bn USD) के उत्पाद खरीदेगा। जीरो टैरिफ: जेनेरिक दवाओं, रत्न-आभूषण और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर अब अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेगा। 📊 किसे कितना फायदा? लाभार्थी मिलने वाले लाभ किसान और मछुआरे अमेरिकी बाजार में कृषि उत्पादों की आसान और सस्ती पहुंच। MSME उद्योग टेक्सटाइल, चमड़ा, प्लास्टिक और हस्तशिल्प के लिए निर्यात अवसर। फार्मा सेक्टर भारतीय जेनेरिक दवाओं को अमेरिकी रेगुलेटरी नियमों में ढील और जीरो टैरिफ। युवा और महिलाएं निर्यात बढ़ने से लाखों नए रोजगार के सृजन की उम्मीद।