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'संचार साथी' विवाद: ज्योतिरादित्य सिंधिया की सफाई- ऐप अनिवार्य नहीं, डिलीट कर सकते हैं; प्रियंका गांधी बोलीं- जासूसी ऐप है

रवि चौहान दिसम्बर 2, 2025 0
'संचार साथी' विवाद
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📱 'संचार साथी' विवाद: साइबर सिक्योरिटी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश पर केंद्र सरकार की सफाई और विपक्षी दलों का 'जासूसी' का आरोप 

भारत के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा सभी नए मोबाइल फोन में सरकारी साइबर सिक्योरिटी एप्लिकेशन 'संचार साथी' को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश ने देश में एक बड़ा निजता और निगरानी विवाद खड़ा कर दिया है। 1 दिसंबर को स्मार्टफोन कंपनियों को भेजे गए इस आदेश पर, विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस ने, इसे "जासूसी ऐप" और नागरिकों की "प्राइवेसी पर सीधा हमला" करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंगलवार को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करना कंपलसरी (अनिवार्य) नहीं है और यूजर चाहें तो इसे डिलीट या डिसेबल कर सकते हैं। यह सफाई DoT के उस प्रारंभिक आदेश के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि यूजर्स इस ऐप को डिलीट या डिसेबल नहीं कर पाएंगे।

विपक्षी नेताओं ने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए इसे 2017 के पुट्टास्वामी फैसले के खिलाफ करार दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "जासूसी एप" करार दिया और कहा कि सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। वहीं, CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास ने इस बात पर जोर दिया कि अगर ऐप को हटाया नहीं जा सकता, तो यह 120 करोड़ मोबाइल फोनों में अनिवार्य हो जाएगा।

यह विस्तृत आलेख DoT के 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सफाई के निहितार्थ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, शशि थरूर, केसी वेणुगोपाल, रेणुका चौधरी) द्वारा लगाए गए 'जासूसी' और 'निजता उल्लंघन' के गंभीर आरोपों का विश्लेषण, भारत में बढ़ते डुप्लिकेट IMEI नंबर और साइबर क्राइम की चुनौती, एप्पल जैसी कंपनियों की इंटरनल पॉलिसी में आने वाली मुश्किलों, और निजता के मौलिक अधिकार पर इस फैसले के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को केंद्र में रखते हुए 5000 शब्दों में गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।


1. 📜 'संचार साथी' प्री-इंस्टॉल आदेश और सरकार की सफाई

1 दिसंबर को दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक आदेश जारी किया, जिसने तुरंत राजनीतिक और तकनीकी जगत में हलचल मचा दी।

1.1. DoT का प्रारंभिक आदेश

  • आदेश: केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर को स्मार्टफोन कंपनियों (जैसे एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो, शाओमी) को आदेश दिया कि वे सरकारी साइबर सेफ्टी ऐप 'संचार साथी' को पहले से इंस्टॉल करके बेचें।

  • समय सीमा: कंपनियों को इस आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया।

  • विवादित क्लॉज: प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया था कि इस एप को यूजर्स डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे, जिससे प्राइवेसी का मुद्दा गरमाया। पुराने फोन पर भी इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इंस्टॉल किया जाना था।

  • मकसद: सरकार का मकसद साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और फोन की चोरी को रोकना था।

1.2. केंद्रीय मंत्री की सफाई और विरोधाभास

विवाद बढ़ने के बाद, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को सफाई दी:

  • गैर-अनिवार्य: सिंधिया ने कहा कि यह ऐप 'कंपलसरी' (अनिवार्य) नहीं है।

  • डिलीट करने की सुविधा: उन्होंने आश्वासन दिया कि "यूजर चाहें तो इसे डिलीट कर सकते हैं।"

  • विरोधाभास: मंत्री का यह बयान DoT के कथित प्रारंभिक आदेश के विपरीत था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने जनता और विपक्ष के विरोध के कारण अपने रुख में नरमी लाई है या प्रारंभिक आदेश में स्पष्टता का अभाव था।


2. 🗣️ विपक्ष का प्रहार: 'जासूसी ऐप' और निजता का उल्लंघन

विपक्षी दलों ने इस आदेश को नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की।

2.1. प्रियंका गांधी का 'जासूसी' का आरोप

  • सीधा हमला: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला" बताया।

  • निगरानी: उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक "जासूसी एप" है और "सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है।"

  • अनावश्यक दखल: उन्होंने माना कि साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए सिस्टम जरूरी है, लेकिन सरकार का ताजा आदेश "लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल" जैसा है।

2.2. संवैधानिक और कानूनी तर्क

अन्य विपक्षी नेताओं ने कानूनी और संवैधानिक आधार पर विरोध दर्ज कराया:

  • रेणुका चौधरी (कांग्रेस): उन्होंने इस मुद्दे पर सदन स्थगन नोटिस दिया और तर्क दिया कि "प्राइवेसी का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।" उनके अनुसार, यह एप लोगों की आजादी और प्राइवेसी पर सीधा हमला है।

  • जॉन ब्रिटास (CPI-M): उन्होंने इस आदेश को "सुप्रीम कोर्ट के 2017 के पुट्टास्वामी फैसले" के खिलाफ बताया, जिसने निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया था। उन्होंने कहा कि अगर यह ऐप हटाया नहीं जा सकता, तो यह "120 करोड़ मोबाइल फोनों में अनिवार्य किया जा रहा है।"

  • केसी वेणुगोपाल (कांग्रेस): उन्होंने पेगासस जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि यह आम लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है और "मदद के नाम पर BJP लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाना चाहती है।"

2.3. स्वैच्छिक बनाम जबरन

  • शशि थरूर (कांग्रेस): उन्होंने माना कि 'संचार साथी' एप उपयोगी हो सकता है, लेकिन "इसे स्वैच्छिक होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि "किसी भी चीज़ को लोकतंत्र में जबरन लागू करना चिंता की बात है।"


3. 🎯 सरकार का उद्देश्य: साइबर क्राइम और IMEI फ्रॉड से लड़ना

सरकार ने 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के पीछे के तर्कों को साइबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण से जोड़ा है।

3.1. डुप्लिकेट IMEI की चुनौती

  • बढ़ता अपराध: भारत 1.2 अरब से अधिक मोबाइल यूजर्स वाला दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है, लेकिन फर्जी या डुप्लिकेट IMEI नंबर की वजह से साइबर क्राइम बढ़ रहा है।

  • IMEI और ट्रैकिंग: IMEI एक 15 डिजिट का यूनीक कोड होता है, जो फोन की पहचान करता है। अपराधी इसे क्लोन करके चोरी के फोन को ट्रैक से बचाते हैं, स्कैम करते हैं या ब्लैक मार्केट में बेचते हैं।

  • सफलता: DoT ने सितंबर में बताया था कि इस सिस्टम के जरिए 22.76 लाख डिवाइस ट्रेस हो चुके हैं। इस एप से अब तक 7 लाख से ज्यादा गुम या चोरी हुए मोबाइल वापस मिल चुके हैं।

3.2. 'संचार साथी' ऐप की उपयोगिता

  • साइबर सिक्योरिटी टूल: यह ऐप सरकार का बनाया साइबर सिक्योरिटी टूल है, जो 17 जनवरी 2025 को लॉन्च हुआ था।

  • फायदे:

    • चोरी या खोए फोन को IMEI नंबर चेक करके ब्लॉक करेगा।

    • यूजर्स को फ्रॉड कॉल, मैसेज या वॉट्सएप चैट रिपोर्ट करने में मदद करेगा।

    • यह फर्जी IMEI से होने वाले स्कैम और नेटवर्क मिसयूज को रोकने के लिए जरूरी है।

  • भविष्य की योजनाएं: DoT का कहना है कि यह टेलिकॉम सिक्योरिटी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा, और इसमें भविष्य में बेहतर ट्रैकिंग या AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन जैसे और फीचर्स जुड़ सकते हैं।


4. 🍎 एप्पल और इंडस्ट्री की चिंताएँ

यह आदेश स्मार्टफोन कंपनियों, विशेषकर एप्पल जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है।

4.1. एप्पल की सख्त पॉलिसी

  • नीति में टकराव: इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि एप्पल की इंटरनल पॉलिसी किसी भी सरकारी या थर्ड-पार्टी एप को फोन की बिक्री से पहले प्री-इंस्टॉल करने की अनुमति नहीं देती है।

  • पुराना टकराव: इससे पहले भी एप्पल का एंटी-स्पैम एप को लेकर टेलीकॉम रेगुलेटर से टकराव हो चुका है।

  • नेगोशिएशन की संभावना: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि एप्पल सरकार से नेगोशिएशन कर सकती है या यूजर्स को वॉलंटरी प्रॉम्प्ट (स्वैच्छिक रूप से डाउनलोड करने का सुझाव) देने का सुझाव दे सकती है।

4.2. इंडस्ट्री की परेशानी

  • बातचीत का अभाव: इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि पहले से बातचीत न होने से कंपनियां परेशान हैं, क्योंकि उन्हें 90 दिन की समय सीमा में अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग प्रोटोकॉल में बदलाव करना होगा।


5. ⚖️ निजता, निगरानी और संतुलन का प्रश्न

यह पूरा विवाद नागरिकों की निजता के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा साइबर क्राइम नियंत्रण की सरकार की आवश्यकता के बीच संतुलन खोजने की चुनौती को दर्शाता है।

5.1. यूजर कंट्रोल में कमी

  • प्राइवेसी ग्रुप्स के सवाल: भले ही मंत्री ने डिलीट करने की सुविधा देने की बात कही हो, लेकिन अगर यह ऐप अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल होता है, तो प्राइवेसी ग्रुप्स यह सवाल उठाएंगे कि यूजर कंट्रोल कम क्यों किया जा रहा है और क्या यह भविष्य में चुपके से अन्य फीचर्स (जैसे बेहतर ट्रैकिंग) को सक्षम कर सकता है।

  • डेटा की सुरक्षा: निगरानी का डर इसलिए है क्योंकि सरकार के पास पहले से इंस्टॉल ऐप के जरिए लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाने की क्षमता हो सकती है, जैसा कि पेगासस जैसे मामलों में देखा गया है।

5.2. यूजर्स को सीधा लाभ

  • त्वरित लाभ: दूसरी तरफ, यूजर्स को सीधा फायदा मिलेगा। चोरी का फोन होने पर IMEI चेक करके तुरंत ब्लॉक कर सकेंगे, और फ्रॉड कॉल रिपोर्ट करने से स्कैम कम होंगे।


6. 🌐 निष्कर्ष: लोकतंत्र में पारदर्शिता का महत्व

'संचार साथी' विवाद यह दिखाता है कि लोकतंत्र में कोई भी सरकारी पहल, खासकर जो तकनीक और निजता से जुड़ी हो, उसे पारदर्शिता और स्पष्टता के साथ जनता के सामने लाना कितना महत्वपूर्ण है।

  • विपक्षी मांग: विपक्षी नेताओं की मांग सही है कि सरकार को मीडिया के जरिए आदेश जारी करने के बजाय, इस फैसले के पीछे का तर्क जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कदम निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन न करे।

  • सिंधिया की सफाई: केंद्रीय मंत्री सिंधिया की सफाई ने तात्कालिक विवाद को शांत किया है, लेकिन DoT को चाहिए कि वह आधिकारिक तौर पर नियमों को संशोधित करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह ऐप वास्तव में स्वैच्छिक हो और यूजर्स को इसे डिलीट या डिसेबल करने की पूर्ण स्वतंत्रता हो।

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

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मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

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फरीदाबाद जेल में आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या
राम मंदिर उड़ाने की साजिश रचने वाले आतंकी की हत्या; कैदी अब्बू जट ने नीमका जेल में मार डाला।

राम मंदिर उड़ाने की साजिश रचने वाले आतंकी का जेल में मर्डर: फरीदाबाद की नीमका जेल में खूंखार कैदी 'अब्बू जट' ने नुकीली चीज से उतारा मौत के घाट फरीदाबाद | 9 फरवरी 2026 हरियाणा की हाई-सिक्योरिटी वाली फरीदाबाद (नीमका) जेल से सनसनीखेज खबर सामने आई है। अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश रचने के आरोपी अलकायदा (AQIS) के आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई है। इस वारदात को मर्डर केस में बंद खूंखार कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने अंजाम दिया। यहाँ इस हाई-प्रोफाइल मर्डर से जुड़ी पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हाई-सिक्योरिटी सेल में खूनी संघर्ष घटना रविवार देर रात की है, जब नीमका जेल की अति विशेष सुरक्षा सेल (High Security Cell) में बंद दोनों कैदियों के बीच विवाद हुआ। नुकीली चीज से हमला: अरुण चौधरी ने किसी नुकीली चीज से अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ वार किए। आतंकी अब्दुल लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मर्डर का समय: जेल प्रशासन को देर रात वारदात का पता चला, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल भिजवाया गया। 2. कौन था आतंकी अब्दुल रहमान? यूपी के मिल्कीपुर का रहने वाला 20 वर्षीय अब्दुल रहमान कोई साधारण अपराधी नहीं था: राम मंदिर की साजिश: उसे 2 मार्च 2025 को फरीदाबाद के पाली इलाके से गुजरात ATS और हरियाणा STF ने पकड़ा था। उसके पास से 2 जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे। आतंकी कनेक्शन: वह अलकायदा (AQIS) के हैंडलर अबू सूफियान के संपर्क में था और उसे 4 अप्रैल को अयोध्या में धमाका करने का निर्देश मिला था। सोशल मीडिया से भर्ती: पेशे से ई-रिक्शा चलाने वाला अब्दुल भड़काऊ वीडियो के जरिए आतंकियों के रडार पर आया था। जांच एजेंसियां हैरान थीं कि एक गरीब रिक्शा चालक के पास महंगा मोबाइल और हथियार कहाँ से आए। 3. कातिल अरुण चौधरी: जम्मू का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल की हत्या करने वाला अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट भी अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है: अक्षय शर्मा हत्याकांड: अरुण जम्मू के सांबा में हुए चर्चित अक्षय शर्मा मर्डर केस का मुख्य आरोपी है। कठुआ जेल से ट्रांसफर: 2024 में उसने इंस्टाग्राम लाइव आकर कठुआ जेल प्रशासन पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे फरीदाबाद की नीमका जेल शिफ्ट किया गया था। 📊 जेल सुरक्षा पर सवाल: एक साथ क्यों थे दोनों? कैदी का नाम श्रेणी केस / आरोप अब्दुल रहमान आतंकी (AQIS) राम मंदिर उड़ाने की साजिश, विस्फोटक अधिनियम अरुण चौधरी गैंगस्टर हत्या, रंगदारी और जेल प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप विवाद का विषय: सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक कट्टरपंथी आतंकी और एक खूंखार गैंगस्टर को एक ही हाई-सिक्योरिटी सेल में क्यों रखा गया था? 4. जांच और सुरक्षा ऑडिट जेल सूत्रों के मुताबिक, अरुण चौधरी को सुरक्षा कारणों से 'अति विशेष सेल' में रखा गया था, जहाँ अब्दुल रहमान भी बंद था। हत्या में इस्तेमाल की गई 'नुकीली चीज' जेल के भीतर कैसे पहुंची, इसकी जांच के लिए DC और जेल महानिदेशक ने सख्त आदेश दिए हैं। डबुआ थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

रवि चौहान फ़रवरी 9, 2026 0
राहुल बोले- स्पीकर ने कमिट किया, क्या आप बोलने देंगे

Lok Sabha Adjourned: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी; राहुल गांधी बोले- सरकार बहस से डर रही है।

पंजाब में लॉ छात्रा की हत्या कर सुसाइड किया

Tarn Taran Law College Shootout: तरनतारन लॉ कॉलेज में मर्डर और सुसाइड; एकतरफा प्यार में संदीप कौर की हत्या; क्लासरूम का CCTV आया सामने।

फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में झूला गिरा

सूरजकुंड मेला दुर्घटना 2026: सूरजकुंड मेला में झूला गिरा; पुलिस इंस्पेक्टर की मौत, 13 घायल; डीसी ने दिया विस्तृत जांच आदेश।

मणिपुर- डिप्टी सीएम की हत्या पर ₹20 लाख का इनाम
चुराचांदपुर में डिप्टी सीएम नेम्चा किप्गेन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन; विधायकों पर इनाम का ऐलान; मणिपुर बंद।

मणिपुर फिर अशांत: डिप्टी सीएम नेम्चा किप्गेन के खिलाफ चुराचांदपुर में हिंसक प्रदर्शन; विधायकों को मारने पर 'इनाम' का ऐलान चुराचांदपुर | 6 फरवरी 2026 मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में गुरुवार शाम से शुरू हुई हिंसा शुक्रवार को और भयावह हो गई है। राज्य की नई सरकार में नेम्चा किप्गेन को उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाए जाने के विरोध में कुकी समुदाय के बीच गहरी दरार पैदा हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सुरक्षाबलों पर पथराव किया, बल्कि विधायकों के खिलाफ 'डेथ वारंट' जैसी विवादित घोषणाएं भी की हैं। यहाँ मणिपुर के मौजूदा तनाव की पूरी रिपोर्ट दी गई है: 1. हिंसक झड़पें और सुरक्षाबलों का पीछे हटना चुराचांदपुर के तुइबोंग मेन मार्केट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है: सुरक्षाबलों पर हमला: सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को बैरकों में धकेलने की कोशिश की और भारी पत्थरबाजी की। असम राइफल्स की तैनाती: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए असम राइफल्स को लगाया गया, लेकिन भीड़ के हिंसक रुख को देखते हुए उन्हें अस्थाई रूप से पीछे हटना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए हैं। चक्का जाम: प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया है। 2. विधायकों को जान से मारने की धमकी और 'इनाम' हिंसा के बीच कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने चौंकाने वाले ऐलान किए हैं: नेम्चा किप्गेन: डिप्टी सीएम को मारने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की बात कही गई है। विधायक एलएम खाउते और एन सेनाते: इन विधायकों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। विश्वासघात का आरोप: कुकी संगठनों का आरोप है कि इन विधायकों ने मैतेई-बहुल सरकार का साथ देकर अपने समुदाय के साथ 'गद्दारी' की है। 📊 मणिपुर विधानसभा में कुकी विधायकों की स्थिति कुल कुकी विधायक भाजपा के विधायक हमार जनजाति प्रतिनिधि ताजा विवाद की वजह 10 07 एन सेनाते (NDA हिस्सा) नई सरकार में डिप्टी सीएम पद स्वीकार करना 3. कुकी समुदाय में दो फाड़ सरकार गठन को लेकर कुकी समाज अब दो गुटों में बंट गया है: विरोध करने वाला धड़ा: इनका मानना है कि इंफाल में हुई हत्याओं और संपत्तियों के नुकसान के बाद मैतेई नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होना शहीदों का अपमान है। आदिवासी संगठन 'जॉइंट फोरम ऑफ सेवन' ने आज 12 घंटे का बंद बुलाया है। समर्थन करने वाला धड़ा: विधायकों का कहना है कि वे समुदाय की सुरक्षा, विकास और बातचीत के रास्ते खोलने के लिए सरकार का हिस्सा बने हैं। 4. पहली महिला डिप्टी सीएम पर संकट नेम्चा किप्गेन मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच चुकी हैं, लेकिन उनके अपने ही गृह जिले चुराचांदपुर में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। कुकी वीमेंस ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने उनके पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया है।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
नारेबाजी के बाद लोकसभा सोमवार तक स्थगित

लोकसभा सोमवार तक स्थगित; राहुल गांधी बनाम रवनीत बिट्टू; निशिकांत दुबे बनाएंगे नेहरू-गांधी परिवार पर 'रिसर्च सेंटर'।

एक्टर राजपाल यादव ने किया सरेंडर

राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर किया सरेंडर; चेक बाउंस मामले में 9 करोड़ का बकाया; 25 लाख का चेक भी नहीं आया काम।

स्पीकर बोले-कल पीएम के साथ कुछ भी हो सकता था

पीएम मोदी पर हमले की साजिश की धमकी; स्पीकर ओम बिरला ने तौला संबोधित; कांग्रेस पर गंभीर आरोप।

राहुल ने नरवणे की किताब दिखाई, बोले- पीएम को दूंगा
Parliament Ruckus 2026: नरवणे की किताब लेकर संसद पहुंचे राहुल गांधी; रवनीत बिट्टू को कहा 'गद्दार'; क्या है 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' विवाद?

संसद में 'किताब' पर रार: नरवणे की बुक लेकर पहुंचे राहुल गांधी; बिट्टू को कहा 'गद्दार दोस्त', मिला करारा जवाब नई दिल्ली | 4 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का छठा दिन भी भारी हंगामे और व्यक्तिगत छींटाकशी की भेंट चढ़ गया। पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की 'अनपब्लिश्ड बुक' (अप्रकाशित किताब) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी बनाम केंद्र सरकार की सीधी लड़ाई में बदल गया है। वहीं, संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। यहाँ आज की कार्यवाही और विवादों की बड़ी रिपोर्ट दी गई है: 1. "ये रही किताब": राहुल गांधी की पीएम को चुनौती राहुल गांधी बुधवार को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की उस किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे, जिसके अस्तित्व से सरकार इनकार कर रही है। विवादित पेज: राहुल ने मीडिया को किताब का वह हिस्सा दिखाया जिसमें कथित तौर पर लिखा है कि प्रधानमंत्री ने लद्दाख गतिरोध के दौरान आर्मी चीफ से कहा था— "जो उचित समझो वह करो!" पीएम को ऑफर: राहुल ने कहा, "रक्षा मंत्री कह रहे हैं कि ऐसी कोई किताब नहीं है। मैं आज यह किताब लेकर आया हूँ। अगर प्रधानमंत्री में हिम्मत है और वे सदन में आते हैं, तो मैं खुद उन्हें यह किताब भेंट करूँगा ताकि वे इसे पढ़ें।" सदन में अड़ंगा: राहुल इस किताब के अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी है। 2. राहुल vs बिट्टू: "गद्दार दोस्त" और "नंबर वन टेररिस्ट" संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई बहस ने सबका ध्यान खींचा: राहुल का तंज: बिट्टू को देखकर राहुल ने हंसते हुए कहा, "देखो एक गद्दार आ रहा है... हैलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त! चिंता मत करो, तुम वापस कांग्रेस में ही आओगे।" बिट्टू का पलटवार: केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने राहुल से हाथ नहीं मिलाया और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मेरा देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है।" इतिहास की कड़वाहट: गौरतलब है कि बिट्टू पहले कांग्रेस में ही थे और राहुल के करीबी माने जाते थे। 2024 चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए। बिट्टू ने पूर्व में राहुल गांधी को "देश का नंबर वन टेररिस्ट" भी कहा था। 📊 रवनीत सिंह बिट्टू: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर विवरण जानकारी कांग्रेस कार्यकाल 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस सांसद रहे। बीजेपी एंट्री 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले। 2024 चुनाव परिणाम लुधियाना से चुनाव हारे (कांग्रेस के राजा वारिंग से)। वर्तमान पद राज्यसभा सांसद और रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री। 3. नरवणे की किताब का क्या है विवाद? पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की संस्मरण (Memoirs) 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के प्रकाशन पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा रखी है। आरोप: विपक्ष का दावा है कि इस किताब में अग्निपथ योजना और लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव को लेकर ऐसी बातें हैं जो सरकार की छवि बिगाड़ सकती हैं। सरकार का पक्ष: रक्षा मंत्रालय और बीजेपी सांसदों का कहना है कि यह किताब अभी आधिकारिक तौर पर आई ही नहीं है, इसलिए इसके किसी भी आर्टिकल या अंश को सदन के रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा सकता।

रवि चौहान फ़रवरी 4, 2026 0
मस्क $850 बिलियन संपत्ति वाले दुनिया के पहले इंसान बने

Elon Musk Net Worth 2026: इलॉन मस्क बने दुनिया के पहले $850 बिलियन वाले शख्स; स्पेसएक्स-xAI मर्जर ने बनाया इतिहास।

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Parliament Session 2026: लोकसभा में राहुल गांधी की स्पीच पर भारी हंगामा; 8 विपक्षी सांसद सस्पेंड; जानें क्या है नियम 374।

अमेरिकी ट्रेड डील पर राहुल बोले- मोदी ने देश बेचा

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India vs Pakistan U-19 World Cup Live: वेदांत त्रिवेदी की फिफ्टी से संभला भारत; पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-6 में रोमांचक जंग।

रवि चौहान फ़रवरी 1, 2026 0