भारत के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा सभी नए मोबाइल फोन में सरकारी साइबर सिक्योरिटी एप्लिकेशन 'संचार साथी' को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश ने देश में एक बड़ा निजता और निगरानी विवाद खड़ा कर दिया है। 1 दिसंबर को स्मार्टफोन कंपनियों को भेजे गए इस आदेश पर, विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस ने, इसे "जासूसी ऐप" और नागरिकों की "प्राइवेसी पर सीधा हमला" करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंगलवार को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करना कंपलसरी (अनिवार्य) नहीं है और यूजर चाहें तो इसे डिलीट या डिसेबल कर सकते हैं। यह सफाई DoT के उस प्रारंभिक आदेश के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि यूजर्स इस ऐप को डिलीट या डिसेबल नहीं कर पाएंगे।
विपक्षी नेताओं ने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए इसे 2017 के पुट्टास्वामी फैसले के खिलाफ करार दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "जासूसी एप" करार दिया और कहा कि सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। वहीं, CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास ने इस बात पर जोर दिया कि अगर ऐप को हटाया नहीं जा सकता, तो यह 120 करोड़ मोबाइल फोनों में अनिवार्य हो जाएगा।
यह विस्तृत आलेख DoT के 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सफाई के निहितार्थ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, शशि थरूर, केसी वेणुगोपाल, रेणुका चौधरी) द्वारा लगाए गए 'जासूसी' और 'निजता उल्लंघन' के गंभीर आरोपों का विश्लेषण, भारत में बढ़ते डुप्लिकेट IMEI नंबर और साइबर क्राइम की चुनौती, एप्पल जैसी कंपनियों की इंटरनल पॉलिसी में आने वाली मुश्किलों, और निजता के मौलिक अधिकार पर इस फैसले के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को केंद्र में रखते हुए 5000 शब्दों में गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
1 दिसंबर को दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक आदेश जारी किया, जिसने तुरंत राजनीतिक और तकनीकी जगत में हलचल मचा दी।
आदेश: केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर को स्मार्टफोन कंपनियों (जैसे एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो, शाओमी) को आदेश दिया कि वे सरकारी साइबर सेफ्टी ऐप 'संचार साथी' को पहले से इंस्टॉल करके बेचें।
समय सीमा: कंपनियों को इस आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया।
विवादित क्लॉज: प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया था कि इस एप को यूजर्स डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे, जिससे प्राइवेसी का मुद्दा गरमाया। पुराने फोन पर भी इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इंस्टॉल किया जाना था।
मकसद: सरकार का मकसद साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और फोन की चोरी को रोकना था।
विवाद बढ़ने के बाद, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को सफाई दी:
गैर-अनिवार्य: सिंधिया ने कहा कि यह ऐप 'कंपलसरी' (अनिवार्य) नहीं है।
डिलीट करने की सुविधा: उन्होंने आश्वासन दिया कि "यूजर चाहें तो इसे डिलीट कर सकते हैं।"
विरोधाभास: मंत्री का यह बयान DoT के कथित प्रारंभिक आदेश के विपरीत था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने जनता और विपक्ष के विरोध के कारण अपने रुख में नरमी लाई है या प्रारंभिक आदेश में स्पष्टता का अभाव था।
विपक्षी दलों ने इस आदेश को नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी आलोचना की।
सीधा हमला: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे "लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला" बताया।
निगरानी: उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक "जासूसी एप" है और "सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है।"
अनावश्यक दखल: उन्होंने माना कि साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए सिस्टम जरूरी है, लेकिन सरकार का ताजा आदेश "लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल" जैसा है।
अन्य विपक्षी नेताओं ने कानूनी और संवैधानिक आधार पर विरोध दर्ज कराया:
रेणुका चौधरी (कांग्रेस): उन्होंने इस मुद्दे पर सदन स्थगन नोटिस दिया और तर्क दिया कि "प्राइवेसी का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।" उनके अनुसार, यह एप लोगों की आजादी और प्राइवेसी पर सीधा हमला है।
जॉन ब्रिटास (CPI-M): उन्होंने इस आदेश को "सुप्रीम कोर्ट के 2017 के पुट्टास्वामी फैसले" के खिलाफ बताया, जिसने निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया था। उन्होंने कहा कि अगर यह ऐप हटाया नहीं जा सकता, तो यह "120 करोड़ मोबाइल फोनों में अनिवार्य किया जा रहा है।"
केसी वेणुगोपाल (कांग्रेस): उन्होंने पेगासस जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि यह आम लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है और "मदद के नाम पर BJP लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाना चाहती है।"
शशि थरूर (कांग्रेस): उन्होंने माना कि 'संचार साथी' एप उपयोगी हो सकता है, लेकिन "इसे स्वैच्छिक होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि "किसी भी चीज़ को लोकतंत्र में जबरन लागू करना चिंता की बात है।"
सरकार ने 'संचार साथी' ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के पीछे के तर्कों को साइबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण से जोड़ा है।
बढ़ता अपराध: भारत 1.2 अरब से अधिक मोबाइल यूजर्स वाला दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है, लेकिन फर्जी या डुप्लिकेट IMEI नंबर की वजह से साइबर क्राइम बढ़ रहा है।
IMEI और ट्रैकिंग: IMEI एक 15 डिजिट का यूनीक कोड होता है, जो फोन की पहचान करता है। अपराधी इसे क्लोन करके चोरी के फोन को ट्रैक से बचाते हैं, स्कैम करते हैं या ब्लैक मार्केट में बेचते हैं।
सफलता: DoT ने सितंबर में बताया था कि इस सिस्टम के जरिए 22.76 लाख डिवाइस ट्रेस हो चुके हैं। इस एप से अब तक 7 लाख से ज्यादा गुम या चोरी हुए मोबाइल वापस मिल चुके हैं।
साइबर सिक्योरिटी टूल: यह ऐप सरकार का बनाया साइबर सिक्योरिटी टूल है, जो 17 जनवरी 2025 को लॉन्च हुआ था।
फायदे:
चोरी या खोए फोन को IMEI नंबर चेक करके ब्लॉक करेगा।
यूजर्स को फ्रॉड कॉल, मैसेज या वॉट्सएप चैट रिपोर्ट करने में मदद करेगा।
यह फर्जी IMEI से होने वाले स्कैम और नेटवर्क मिसयूज को रोकने के लिए जरूरी है।
भविष्य की योजनाएं: DoT का कहना है कि यह टेलिकॉम सिक्योरिटी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा, और इसमें भविष्य में बेहतर ट्रैकिंग या AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन जैसे और फीचर्स जुड़ सकते हैं।
यह आदेश स्मार्टफोन कंपनियों, विशेषकर एप्पल जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है।
नीति में टकराव: इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि एप्पल की इंटरनल पॉलिसी किसी भी सरकारी या थर्ड-पार्टी एप को फोन की बिक्री से पहले प्री-इंस्टॉल करने की अनुमति नहीं देती है।
पुराना टकराव: इससे पहले भी एप्पल का एंटी-स्पैम एप को लेकर टेलीकॉम रेगुलेटर से टकराव हो चुका है।
नेगोशिएशन की संभावना: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि एप्पल सरकार से नेगोशिएशन कर सकती है या यूजर्स को वॉलंटरी प्रॉम्प्ट (स्वैच्छिक रूप से डाउनलोड करने का सुझाव) देने का सुझाव दे सकती है।
बातचीत का अभाव: इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि पहले से बातचीत न होने से कंपनियां परेशान हैं, क्योंकि उन्हें 90 दिन की समय सीमा में अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग प्रोटोकॉल में बदलाव करना होगा।
यह पूरा विवाद नागरिकों की निजता के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा साइबर क्राइम नियंत्रण की सरकार की आवश्यकता के बीच संतुलन खोजने की चुनौती को दर्शाता है।
प्राइवेसी ग्रुप्स के सवाल: भले ही मंत्री ने डिलीट करने की सुविधा देने की बात कही हो, लेकिन अगर यह ऐप अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल होता है, तो प्राइवेसी ग्रुप्स यह सवाल उठाएंगे कि यूजर कंट्रोल कम क्यों किया जा रहा है और क्या यह भविष्य में चुपके से अन्य फीचर्स (जैसे बेहतर ट्रैकिंग) को सक्षम कर सकता है।
डेटा की सुरक्षा: निगरानी का डर इसलिए है क्योंकि सरकार के पास पहले से इंस्टॉल ऐप के जरिए लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाने की क्षमता हो सकती है, जैसा कि पेगासस जैसे मामलों में देखा गया है।
त्वरित लाभ: दूसरी तरफ, यूजर्स को सीधा फायदा मिलेगा। चोरी का फोन होने पर IMEI चेक करके तुरंत ब्लॉक कर सकेंगे, और फ्रॉड कॉल रिपोर्ट करने से स्कैम कम होंगे।
'संचार साथी' विवाद यह दिखाता है कि लोकतंत्र में कोई भी सरकारी पहल, खासकर जो तकनीक और निजता से जुड़ी हो, उसे पारदर्शिता और स्पष्टता के साथ जनता के सामने लाना कितना महत्वपूर्ण है।
विपक्षी मांग: विपक्षी नेताओं की मांग सही है कि सरकार को मीडिया के जरिए आदेश जारी करने के बजाय, इस फैसले के पीछे का तर्क जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कदम निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन न करे।
सिंधिया की सफाई: केंद्रीय मंत्री सिंधिया की सफाई ने तात्कालिक विवाद को शांत किया है, लेकिन DoT को चाहिए कि वह आधिकारिक तौर पर नियमों को संशोधित करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह ऐप वास्तव में स्वैच्छिक हो और यूजर्स को इसे डिलीट या डिसेबल करने की पूर्ण स्वतंत्रता हो।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
संसद में पीएम मोदी का 'रणघोष': पश्चिम एशिया युद्ध को बताया देश की 'सबसे बड़ी परीक्षा'; टीम इंडिया की तरह एकजुट होने की अपील नई दिल्ली | 24 मार्च 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में 21 मिनट का ओजस्वी भाषण दिया, जिसमें उन्होंने मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। पीएम ने देश को आगाह किया कि यह जंग केवल दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक दुष्परिणाम भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर 'सबसे बड़ी परीक्षा' की तरह आने वाले हैं। यहाँ प्रधानमंत्री के संबोधन, सरकार की रणनीति और राज्यों के लिए जारी दिशा-निर्देशों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. "सबसे बड़ी परीक्षा" और टीम इंडिया का आह्वान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाला समय भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है और इससे निपटने का एकमात्र तरीका 'एकजुटता' है: कोविड मॉडल का जिक्र: पीएम ने याद दिलाया कि कैसे कोरोना संकट के समय केंद्र और राज्यों ने 'टीम इंडिया' की भावना से काम किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट भी वैसा ही गंभीर है, जिसके लिए राज्यों का सहयोग अनिवार्य है। विकास की रफ़्तार: उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के बावजूद भारत की 'फास्टेस्ट ग्रोथ' को बनाए रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। 2. होर्मुज स्ट्रेट का संकट: भारतीय क्रू और सप्लाई चेन प्रधानमंत्री ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीयों और जहाजों पर बयान दिया: भारतीयों की सुरक्षा: होर्मुज जलमार्ग में कई व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं जिनमें भारतीय क्रू (चालक दल) सदस्य मौजूद हैं। सरकार उनके संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सप्लाई चैन पर चोट: युद्ध के कारण भारत की ओर आने वाले गैस, तेल और विशेषकर फर्टिलाइजर (खाद) के जहाज प्रभावित हुए हैं, जिसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। 3. पीएम मोदी के भाषण की 8 बड़ी बातें बिंदु विवरण ऊर्जा संकट पश्चिम एशिया की जंग से भारत में पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की सप्लाई चेन पर सीधा दबाव है। होर्मुज में फँसे भारतीय फंसे हुए भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा सरकार के लिए चिंता का सबसे बड़ा विषय है। शांति और संवाद भारत का स्टैंड साफ है—समाधान युद्ध से नहीं, बातचीत से निकले। कमर्शियल जहाजों पर हमला नामंजूर है। वैश्विक संपर्क भारत लगातार गल्फ देशों, अमेरिका, इजराइल और अन्य पश्चिमी देशों के संपर्क में है। एनर्जी डायवर्सिफिकेशन भारत ने अब 41 देशों से तेल और गैस का आयात शुरू कर दिया है (पहले केवल 27 देश थे)। सक्रिय सरकार सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और विदेश मंत्रालय 24x7 काम कर रहे हैं। भारतीयों की घर वापसी जंग शुरू होने से अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों और छात्रों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित लाया गया है। दीर्घकालिक असर पीएम ने आगाह किया कि अगर संकट लंबा चला, तो इसके आर्थिक परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। 4. राज्यों को सख्त निर्देश: कालाबाजारी और जमाखोरी पर एक्शन प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से प्रो-एक्टिव होने का आग्रह किया है: गरीब कल्याण: पीएम ने कहा कि युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों का सबसे बुरा असर गरीबों और श्रमिकों पर पड़ता है। 'पीएम गरीब अन्न कल्याण योजना' का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचे, यह सुनिश्चित करना राज्यों का काम है। बाजार पर नजर: राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि संकट का फायदा उठाकर कोई कालाबाजारी या जमाखोरी न करे। आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। 5. भविष्य की रणनीति: "धीरज और संयम" पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि इस युद्ध के हालात हर पल बदल रहे हैं: "यह संकट अलग प्रकार का है, इसलिए इसके समाधान भी अलग प्रकार के होंगे। हमें धीरज, संयम और शांत मन से इस चुनौती का मुकाबला करना होगा। हर देशवासी को हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए।"
संसद में तकरार: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर तीखा हमला— "राहुल को देखकर महिलाएं अनकम्फर्टेबल होती हैं"; विपक्ष का पलटवार नई दिल्ली | 18 मार्च 2026 संसद के बजट सत्र के बीच राजनीतिक सरगर्मी अब व्यक्तिगत आरोपों के नए स्तर पर पहुँच गई है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर एक विवादित बयान दिया है, जिससे संसद से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा खड़ा हो गया है। कंगना ने राहुल गांधी की तुलना 'टपोरी' से करते हुए कहा कि उनके आचरण से महिलाओं को असहजता महसूस होती है। यह विवाद 12 मार्च को संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और वहां चाय-नाश्ता करने की घटना से जुड़ा है। यहाँ इस पूरे राजनीतिक घमासान की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. कंगना रनौत का बयान: "राहुल का व्यवहार टपोरी जैसा" बुधवार को संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा: असहजता का आरोप: "राहुल गांधी को देखकर हम महिलाओं को काफी अनकम्फर्टेबल (असहज) महसूस होता है। वे संसद में जिस तरह से आते हैं, वह किसी नेता जैसा नहीं लगता।" भाषा और आचरण: "वह टपोरी की तरह व्यवहार करते हैं, तू-तड़ाक करते हैं। इंटरव्यू दे रहे लोगों के बीच में आकर उन्हें परेशान करते हैं और 'आजा... आजा' जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन्हें अपनी बहन (प्रियंका गांधी) से सीखना चाहिए, जिनका व्यवहार बहुत शालीन है।" 2. विवाद की जड़: 12 मार्च का 'चाय-बिस्कुट' प्रदर्शन यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 12 मार्च को राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ LPG संकट को लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। संसदीय मर्यादा: प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने वहां बैठकर चाय और बिस्कुट खाया था। ओपन लेटर: इस घटना की आलोचना करते हुए 84 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, 116 पूर्व सैनिक और 4 वकीलों ने एक खुला पत्र लिखकर राहुल गांधी से माफी की मांग की है। उनका तर्क है कि संसद की सीढ़ियों पर पिकनिक जैसा माहौल बनाना लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा के खिलाफ है। 3. पूर्व PM देवगौड़ा की सोनिया गांधी को चिट्ठी जनता दल (एस) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। 16 मार्च को उन्होंने सोनिया गांधी को दो पन्नों का पत्र लिखा: नसीहत: 92 वर्षीय देवगौड़ा ने लिखा, "विपक्ष की वरिष्ठ नेता होने के नाते आपको अपने सांसदों, विशेषकर राहुल गांधी को संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए समझाना चाहिए।" गरिमा का हनन: उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान नारेबाजी, पोस्टर दिखाना और संसद परिसर में बैठकर नाश्ता करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को कम करता है। 4. विपक्ष का पलटवार: "कंगना को संसद स्टूडियो लगता है" कंगना के बयान के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है: नेता दल मुख्य बात ज्योतिमणि कांग्रेस (सांसद) "कंगना की बातें उनके चरित्र को दर्शाती हैं। अच्छे कपड़े पहनने से कोई अच्छा इंसान नहीं बनता।" अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष "कंगना को लगता है संसद कोई फिल्म स्टूडियो है। राहुल गांधी वहां एक्टिंग करने नहीं जाते।" प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना (UBT) "मैंने 10 साल राहुल के साथ काम किया है, वे महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। यह आरोप अजीब है।" 📊 विवाद का टाइमलाइन: मार्च 2026 12 मार्च: राहुल गांधी का संसद की सीढ़ियों पर चाय-नाश्ता करते हुए LPG कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन। 14-15 मार्च: पूर्व अधिकारियों और सैनिकों द्वारा माफी की मांग वाला ओपन लेटर जारी। 16 मार्च: पूर्व PM एचडी देवगौड़ा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर राहुल के आचरण पर चिंता जताई। 18 मार्च: कंगना रनौत का 'टपोरी' और 'असहजता' वाला बयान, जिस पर सियासी बवाल शुरू हुआ। 5. राहुल गांधी का बचाव और तर्क कांग्रेस समर्थकों और सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी एक 'जन-नेता' (People's Leader) हैं और उनका व्यवहार अनौपचारिक (Informal) है, जिसे भाजपा 'अभद्रता' के रूप में पेश कर रही है। प्रियंका चतुर्वेदी ने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले स्वयं प्रधानमंत्री ने विपक्षी महिला सांसदों के बारे में 'असहज' होने की बात कही थी, तो अब भाजपा सांसद उसी भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं।
ऊर्जा संकट पर सरकार का 'महा-मंथन': 60% LPG आयात पर युद्ध की मार; होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से सप्लाई चेन ध्वस्त, कालाबाजारी पर सख्त एक्शन की तैयारी नई दिल्ली | 12 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। देश में गहराते LPG और कच्चे तेल के संकट को लेकर गुरुवार को भारत सरकार के चार प्रमुख मंत्रालयों— विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम और सूचना प्रसारण ने एक ऐतिहासिक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत की 90% गैस सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है, जो युद्ध के कारण फिलहाल 'डेड ज़ोन' बन चुका है। यहाँ इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातों और मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. पेट्रोलियम मंत्रालय: डिमांड-सप्लाई मैनेजमेंट और पैनिक बुकिंग पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश को भरोसा दिलाने की कोशिश की: घरेलू उत्पादन में वृद्धि: सरकार ने सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG उत्पादन को अपनी अधिकतम क्षमता तक ले जाएं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन 25% से बढ़कर 28% हो गया है। केरोसिन का अतिरिक्त कोटा: ग्रामीण और जरूरतमंद इलाकों के लिए राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी किया गया है। पैनिक बुकिंग पर रोक: देश में रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर होते हैं, लेकिन युद्ध के डर से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पैनिक बुकिंग ही किल्लत की असली वजह बन रही है। कमर्शियल सिलेंडर: दिल्ली जैसे महानगरों में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिले। 2. शिपिंग मंत्रालय: समुद्र में फंसे भारतीय और दुखद खबरें शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने पर्शियन गल्फ में फंसे नाविकों का डेटा साझा किया: नाविकों की सुरक्षा: वर्तमान में 28 भारतीय जहाज गल्फ क्षेत्र में हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार सैटेलाइट के जरिए हर मिनट उनकी लोकेशन ट्रैक कर रही है। दुखद हादसे: युद्ध क्षेत्र में विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हुए हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक अब भी लापता है। 'स्कायलाइट' और 'एमकेडी व्योम' नाम के जहाजों को निशाना बनाया गया था। 3. विदेश मंत्रालय: सुरक्षित निकासी का 'आर्मेनिया-अजरबैजान' रूट MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान में फंसे 9,000 भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की: वैकल्पिक एग्जिट: क्योंकि ईरान का हवाई क्षेत्र असुरक्षित है, इसलिए भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान की जमीनी सीमा पार करने में दूतावास मदद कर रहा है। वहां से वे कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए भारत आ सकते हैं। दूतावास की मदद: तेहरान में भारतीय दूतावास 24/7 वीजा और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहा है। 📊 सप्लाई संकट के 2 सबसे बड़े कारण कारण प्रभाव वर्तमान स्थिति होर्मुज स्ट्रैट (167 किमी) 54% LNG इसी रास्ते से आती है। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद। कतर का प्लांट शटडाउन भारत 40% LNG कतर से लेता है। ईरानी ड्रोन हमलों के डर से कतर ने प्रोडक्शन रोका। 4. कालाबाजारी: ₹900 का सिलेंडर ₹1800 में युद्ध की आड़ में घरेलू स्तर पर जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू हो गई है। दोगुनी कीमतें: कुछ राज्यों में ₹900 का सिलेंडर ₹1800 तक बिकने की खबरें हैं। सरकार का एक्शन: केंद्र ने राज्यों को Essential Commodities Act (अनिवार्य वस्तु अधिनियम) के तहत कार्रवाई करने और जिला कलेक्टरों को गैस एजेंसियों के औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। 5. कब तक सुधरेंगे हालात? (भविष्य की रणनीति) इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक के.एम. ठाकुर के अनुसार, सरकार 'प्लान-बी' पर काम कर रही है: वैकल्पिक कार्गो: अमेरिका, अल्जीरिया और रूस से अतिरिक्त तेल और गैस मंगाने के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। G7 देशों की मदद: विकसित देश अपने 'इमरजेंसी ऑयल रिजर्व' से तेल छोड़ने पर विचार कर रहे हैं ताकि वैश्विक कीमतें स्थिर हो सकें। स्ट्रीमलाइनिंग डिलीवरी: राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे लाभार्थियों की सूची तैयार करें ताकि सिलेंडर की 'राशनिंग' की जा सके और जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले।